सॉफ्टवेयर इंजिनियर से वैल्यू इन्वेस्टर का सफ़र: मोहनीश पबराय ने कैसे हासिल की इतनी बड़ी उपलब्धि

23 मार्च,2021

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एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से वैल्यू इन्वेस्टर: कैसे मोहनीश पबराई इतने सफल हुए - स्मार्ट मनी
अपने समय के सबसे सफल वैल्यू इन्वेस्टर, मोहनीश पबराय, वॉरेन बफे को अपना इन्वेस्टमेंट गुरु मानते हैं। बफे के वैल्यू इन्वेस्टमेंट के तरीके का अनुसरण करते हुए उन्होंने शेयर बाज़ार में सफलतापूर्वक निवेश किया।

उनके अनिवार्य तौर पर लम्बी अवधि के इक्विटी पोर्टफोलियो ने 517 प्रतिशत का मुनाफा कमाया जबकि एसएंडपी का मुनाफा 2000 में अपनी स्थापना से लेकर अब तक 43 प्रतिशत रहा। वॉरेन बफे से चाहे कितनी भी तुलना होती हो लेकिन मोहनीश इस क्षेत्र में काफी बाद में आये। 30 साल की उम्र तक उन्होंने बफे का नाम भी नहीं सुना था। लेकिन जब उन्होंने सुना तो वह खुद सफल निवेशक बनने के लिए बफे के निवेश के सिद्धांतों का पालन करने लगे। 

पबराय भारतीय मूल के अमेरिकी निवेशक हैं

पबराय मुंबई में पले-बढ़े। वह कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने अमेरिका गए। स्नातक करने के बाद उन्होंने टेललैब्स के अनुसंधान एवं विकास विभाग में काम करना शुरू किया। 

पबराय की उद्यमशीलता का सफ़र 1991 में शुरू हुआ जब उन्होंने एक सफल आईटी कंसल्टिंग एवं सिस्टम इंटीग्रेशन कंपनी ट्रांसटेक इंक की स्थापना की। उन्होंने अपनी कंपनी 1999 में बेच दी और इसी साल पबराय इन्वेस्टमेंट फंड की शुरुआत की। शुरुआत में फंड के पास प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एसेट अंडर मैनेजमेंट-एयूएम) के तौर पर 10 लाख डॉलर थे जो 2019 में बढ़कर 57 करोड़ डॉलर हो गया। फंड ने भारत और अन्य विकासशील देशों में निवेश कर 2013 तक एसएंडपी 500 को 1103 प्रतिशत पीछे छोड़ दिया क्योंकि पबराय का मानना है कि अमेरिकी बाज़ार में गलत मूल्य वाले या अपनी उचित कीमत से कम मूल्य वाले बहुत शेयर नहीं हैं। 

इन्वेस्टर के तौर पर पबराय, वॉरेन बफे की वैल्यू इन्वेस्टिंग के मुरीद हैं। उन्होंने एक बार बफे के साथ खाना खाने के लिए 6,50,000 डॉलर खर्च किये थे। 

पबराय की सफलता के मुक़ाम

  • पबराय सबसे सफल वैल्यू इन्वेस्टर में से एक हैं और वह वैल्यू इन्वेस्टिंग के वॉरेन बफे के सिद्धांतों का पालन करते हैं।  
  • पबराय इन्वेस्टमेंट फिलहाल निवेशकों के आधे अरब डॉलर का प्रबंधन का रही है। पबराय ने बेंचमार्क को लगातार पीछे छोड़ा है और अपने तथा निवेशकों दोनों के लिए मुनाफा कमाया है। 
  • अपने 10 करोड़ डॉलर से अधिक के मौजूदा नेटवर्थ के साथ वह समाज में दक्षिणा फाउंडेशन के ज़रिये योगदान कर रहे हैं जिसकी स्थापना उन्होंने भारत के गरीबों की मदद के लिए की है।  

निवेश के सिद्धांत

'कम जोखिम, उच्च अनिश्चितता' निवेश की समझ  

उन्होंने एक किताब लिखी है धंधो इन्वेस्टर, जिसमें उन्होंने कहा है कि कम जोखिम, अत्यधिक अनिश्चितता का मेल बहुत असामान्य है क्योंकि दोनों पैमाने एक-दूसरे से अलग दिशा में चलते हैं। ज़्यादा जोखिम का मतलब है नुकसान की ज़्यादा गुंजाइश जबकि अनिश्चितता का मतलब है विभिन्न किस्म के संभावित परिणाम। उनका कहना है कि जब बाज़ार जोखिम और अनिश्चितता के बीच में उलझा हो तो वह मौका होता है मुनाफे का।  

पबराय का सुझाव है कि निवेशकों को उद्यमियों की तरह सोचना चाहिए जो ज़्यादा मुनाफे के लिए कम जोखिम के कारोबार के मौके की तलाश में होते हैं। 

ऐसी कंपनियों में निवेश करें जो स्थापित हों और जिनमें बदलाव की गति धीमी हो

उनके मुताबिक, ऐसे कंपनियों में निवेश करें जो स्थापित हों और जिनका कारोबार मॉडल स्पष्ट हो और दीर्घकालिक मुनाफा सुनिश्चित करती हों। ऐसी कंपनियों में स्टार्टअप के मुकाबले कम जोखिम होता है, लेकिन वे अपने कारोबार की रणनीति में बदलाव कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उनहोंने कहा, "ऐसे मामूली उत्पादों की तलाश करें जिनकी सबको ज़रुरत होती है। इस अनिवार्यता का पालन करने भर से 99 प्रतिशत संभावित निवेश विकल्प दूर हो जाते हैं।" 

पबराय ने सात सवालों के साथ एक चेकलिस्ट तैयार किया जो निवेशकों के लिए किसी निवेश का महत्त्व ज़ाहिर कर सकता है और वे निम्नलिखित हैं। 

  • क्या मैं उस कंपनी को समझता हूँ और क्या यह प्रतिस्पर्धा के दायरे में है?
  • क्या मैं आज के कारोबार के अन्तर्निहित मूल्य को समझता हूँ? क्या मैं उस अन्तर्निहित मूल्य के प्रति आश्वस्त हूँ? भविष्य में मूल्य में बदलाव की क्या संभावना है?  
  • क्या शेयर की कीमत आम तौर पर उससे कम है जितनी होनी चाहिए और क्या यह स्थिति अगले 2-3 साल तक बनी रहे वाली है?
  • यदि मुझे इस कंपनी में निवेश करना ही है तो क्या मैं अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा लगाऊंगा?
  • गिरावट का जोखिम कितना है?
  • क्या कंपनी में मोट है, मतलब क्या कंपनी में प्रतिस्पर्धा झेलने और उल्लेखनीय मुनाफ़ा कमाने की क्षमता है?
  • क्या कंपनी का प्रबंधन ईमानदार और सक्षम है? 

उपरोक्त सवाल पूछने से निवेशकों को निवेश के बारे में फैसला करने में मदद मिलेगी। ये बुनियादी सवाल वैल्यू इन्वेस्टिंग की बुनियाद तय करते हैं जिसकी बात पबराय करते हैं। 

पबराय का मशहूर कथन है, "चित आया तो मैं जीता, पट हुई तो ज़्यादा नुकसान नहीं होगा। " इस कथन, एक निवेशक के तौर पर उनके सिद्धांत को बयां करता है।  इसका मतलब है कि कम जोखिम वाले शेयर लें लेकिन जिनमें मुनाफे की संभावना बहुत अधिक हो। पबराय का मानना है कि वैल्यू इन्वेटमेंट का को निम्न मानकों पर ध्यान देना चाहिए। 

  • बजाय जोखिम भरे स्टार्टअप के अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाली स्थापित कंपनी के शेयर ख़रीदना। पबराय अपने गुरु वॉरेन बफे का अनुसरण करते हैं और वह भी निवेशक के तौर पर स्टार्टअप में अभी निवेश नहीं करते। 
  • बहुत धीमे बदलाव वाले उद्योग की साधारण कंपनियों के शेयर खरीदें। आक्रामक निवेशक अक्सर इन शेयरों से बचते हैं लेकिन वैल्यू इन्वेस्टर ये शेयर खरीदते हैं और लम्बी अवधि में विशाल मात्रा में संपत्ति सृजन करते हैं।
  • तंगहाल उद्योग की तंगहाल कंपनी के शेयर खरीदना जहाँ सुरक्षा के मार्जिन से आकर्षक मूल्य के मौके पैदा होते हैं। 
  • प्रतिस्पर्धा के लिहाज़ से लम्बे समय तक लाभ की स्थिति में रहने वाली या मुनाफे के मोट वाली कंपनियों में निवेश में करें। ये वॉरेन बफे के पसंदीदा शेयर हैं।
  • जब बाज़ार की बेतरतीबी आपके पक्ष में हो तो जम कर निवेश करें और इंतज़ार करें बाज़ार से अपने निवेश पर आकर्षक मुनाफा मिलने का।
  • ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदें जिनकी कीमत उनके वास्तविक मूल्य से बेहद कम है और अगले 2-3 साल तक उनके इसी स्तर पर बने रहने की संभावना है। 
  • कम जोखिम वाले भारी अनिश्चितता वाली कंपनियों की तलाश करें क्योंकि अक्सर बाज़ार इन कंपनियों का वास्तविक मूल्य नहीं समझ पाता सो इनकी इनकी कीमत वास्तविक मूल्य से कम होती है।
  • आर्बिट्राज के मौके का इंतज़ार करें जब थोड़े समय के लिए ये कंपनियां बेहद-मुनाफा देने वाली बन जाती हैं।  

 पबराय का कहना है कि निवेशक अपनी नवोन्मेषी रणनीति तैयार करने के बजाय एक दूसरे की नक़ल करते हैं।  वह ज़ोर देते हैं कि बाज़ार को अपने हाल पर छोड़कर धैर्य रखना चाहिए। निवेशक के तौर पर वह कम पी/ई अनुपात वाले और ज़्यादा मुनाफा देने वाले, विशेष तौर पर प्रतिकूल शेयर चुनते हैं। जब वह ऐसे किसी शेयर की पहचान करते हैं, वह सुरक्षा का मार्जिन तैयार कर ऐसी बेतरतीबी को इकठ्ठा करते और फिर बड़ा दांव लगाते हैं। 

पबराय ने वैल्यू इन्वेस्टिंग पर कई किताबें लिखीं हैं। सबसे लोकप्रिय है धंधो इन्वेस्टर, जिसमें उन्होंने अपने वैल्यू इन्वेस्टिंग के फॉर्मूले का ब्योरा दिया है। वह अपने वेबसाइट चाय विद पबराय पर निवेश का अपना आईडिया साझा करते हैं। कई अन्य वैल्यू इन्वेस्टर की तरह वह भी वॉरेन बफे के निवेश के सिद्धांतों के मुरीद हैं और निवेश के लिए मज़बूत बुनियादी तत्वों वाली कंपनियों का चुनाव करने के मामले में उनका अनुसरण करते हैं। वह मज़बूत कारोबार और वित्तीय स्थति वाले सस्ते शेयरों की तलाश में रहते हैं और धंधो ढाँचे के तहत उनका संचालन करते हैं।

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