सेंसेक्स के इतिहास में सबसे बड़े उतार-चढ़ाव की कहानी

5.0

06 Jun, 2021

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सेंसेक्स के इतिहास में सबसे बड़े उतार-चढ़ाव की कहानी - स्मार्ट मनी
अनगिनत कहावतें हैं, शेयर बाजार के इन्वेस्टर को सावधान करने और सुकून देने के लिए। इसमें "जो ऊपर जाता है वह नीचे भी आता है" जैसी कहावत शामिल है। यह दरअसल न्यूटन के फिजिक्स के नियम से उधार ली हुई सी कहावत है।

एक है, "यह भी गुज़र जाएगा"। इसके अलावा द मोटली फूल के सह-संस्थापक डेविड गार्डनर भी कथन है, स्टॉक ऊपर जाने के मुकाबले लुढ़कते ज़्यादा तेज़ी से हैं, लेकिन ऊपर ज़्यादा जाते हैं गिरने के बजाय। 

ज़रूरी बात सबसे पहले - शेयर बाजार की गिरावट और तेज़ी को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार की अस्थिरता ही इन्वेस्टर के लिए कमाई का ज़रिया बनाती है। 

हालांकि जब सेंसेक्स लुढ़कता है तो इसका आम तौर पर मतलब होता है परेशानी क्योंकि सेंसेक्स पूरे शेयर बाजार और पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेतक होता है और जनता के नज़रिए का संकेतक तो होता ही है। ऐसा इसलिए है कि सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 सबसे बड़े और ट्रेडिंग के लिहाज़ से सबसे लोकप्रिय शेयरों का समूह है।  ये स्थापित कंपनियां हैं जिनकी वित्तीय स्थिति अच्छी है और उनके स्टॉक की आम तौर पर बहुत मांग होती है।  इन स्टॉक के लुढ़कने की वजह मांग और आपूर्ति के अलावा कुछ नहीं होती है। सेंसेक्स का लुढ़कना स्पष्ट रूप से इन्वेस्टर के नकारात्मक रुझान को ज़ाहिर करता है। यह आमतौर पर किसी तरह के अनचाही आर्थिक ख़बरों या घटनाओं से पैदा होती है।  जब सेंसेक्स टूटता है तो इन्वेस्टर और भी घबराने लगते हैं। वे औनी-पौनी कीमत पर स्टॉक बेचना शुरू कर सकते हैं और फिर उन शेयरों की कीमत भी गिरने लगती हैं। आपको कहानी का अंदाज़ा हो रहा है? 

यहां पंद्रह उदाहरण हैं - ठीक से कहें तो14 साल के आंकड़े, क्योंकि कुछेक साल की कई मिसालें हैं - जिनमें शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव  हुए। कुछ मामलों में हम गिरावट या तेज़ी के ख़ास कारण की ओर भी इशारा कर सकते हैं।  तो आइये चलते हैं यादों के गलियारों में:

जब बाज़ार में तेज़ी आई

हम इतिहास के सबसे सुखद हिस्से से शुरुआत कर रहे हैं। बाद में खून-खराबे की भी जांच करेंगे। 

  1. 1990

सेंसेक्स ने जुलाई 1990 में नया मुकाम हासिल किया जब यह अपने इतिहास में पहली बार चार अंक के आंकड़े को पार कर 1001 पर बंद हुआ।

  1. 1992 x 4

ये साल बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसमें न केवल चार ज़ोरदार तेज़ी दर्ज़ हुई, बल्कि गिरावट भी आई, जिसका ब्योरा आप शेयर बाजार में गिरावट वाले खंड में देखेंगे। जनवरी में बाजार ने 2000 अंक का स्तर पार किया, फिर फरवरी में 3000, मार्च में 4000 अंक का और इसी साल अक्तूबर में इसने आश्चर्यजनक रूप से 5,000 अंक के स्तर को पार कर लिया।

  1. 2005

इसी साल भारतीय व्यापार जगत की ताक़तवर जोड़ी, अंबानी बंधु एक समझौते पर पहुंचे। अधिकांश विशेषज्ञों के अनुसार बाजार ने इस पर खुशी जताई और यह 7000 अंक को पार कर गया।

  1. 2010

बाजार ने इस साल पहली बार 21,000 अंक के पार छलांग लगाई।

  1. 2014 x 2

2010 में सेंसेक्स की लंबी छलांग के बाद, अगले कुछ साल तक हालात स्थिर रहे। फिर 2014 में बाजार एक बार फिर चढ़कर पहले 25,000 अंक और फिर 26,000 अंक पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग बजट को अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिए बड़ा बूस्टर मान रहे थे।

  1. 2015

सकारात्मक रिफॉर्म का शेयर बाजार पर हमेशा बेहतरीन असर होता है - आम तौर पर ऐसी घोषणा के बाद स्टॉक की कीमतें बढ़ती हैं जिसे जनता सकारात्मक मानती है। जब आरबीआई ने रेपो दरों में कटौती की तो सेंसेक्स 30,000 अंक पर पहुंच गया।

  1. 2019

बमुश्किल चार साल बाद शेयर बाजार 40,000 अंक के स्तर को पार कर गया।  उसके बाद... खैर, एक वायरस आ गया! और यह हमें यादों के गलियारों के दूसरे चरण में ले जाता है। 

जब बाजार लुढ़का

चेतावनी: यह खंड में आपको संभवत: उसके विपरीत महसूस हो जो आपको पिछले खंड में महसूस हुआ। 

लेकिन चिंता न करें क्योंकि हमने शुरुआत में ही कहा था, बाजार सिक्लिकल है। गिरावट आई और चली भी गई। 

  1. 1992

हमने 1992 में बाज़ार में चार उछाल के बारे में बात की थी। और आपको पता ही है कि उन चीज़ों के बारे में क्या कहते हैं जो ज़रुरत से ज़्यादा अच्छी लगती हैं। यह साल हर्षद मेहता के स्टॉक हेरा-फेरी वाले घोटाले के लिए भी मशहूर है। इससे बाजार 72 प्रतिशत टूटा। इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट! 

  1. 2004

इस साल भी, एक तरह के घोटाले के कारण बाजार में 842 अंक की गिरावट आई - पाया गया कि यूबीएस नाम का विदेशी इंस्टीच्यूशनल इन्वेस्टर अनजान ग्राहकों को सेल ऑर्डर दे रहा था । 

  1. 2007

सेंसेक्स में यह गिरावट 2009 तक चलती है। वैश्विक मंदी 2008 में आई और इसने सेंसेक्स को वापस ऊपर चढ़ने से रोक दिया। पूरे 2007 के दौरान मंदी के आधिकारिक होने से पहले, सेंसेक्स नियमित रूप से लुढ़का ... और हमेशा 600 अंक से अधिक। 

  1. 2015

जनवरी में सेंसेक्स में 854 अंक की गिरावट आई। ऐसा लग रहा था कि सबसे बुरा समय बीत चुका लेकिन अगस्त में बाजार में 1,624 अंक की भारी गिरावट आई थी। यानी एक साल में 2500 अंक टूटा! इस गिरावट के लिए कुछ विशेषज्ञों ने चीन के बाज़ार की मंदी को जिम्मेदार ठहराया था। 

  1. 2016

इस साल सेंसेक्स लगभग 1600 अंक टूटा - हालांकि चार सत्रों में हुआ, एक ही दिन नहीं हुआ। हालांकि, यह शायद उतना बुरा नहीं था जितनी आशंका थी क्योंकि बहुत कुछ हो रहा था देश के बैंकिंग परिदृश्य में; एनपीए बढ़ रहा था और डीमॉनेटाईज़ेशन (जिसका मतलब है था भारी बिकवाली हुई क्योंकि लोगों की 'हार्ड मनी' या 'ब्लैक मनी' या लिक्विड कैश जो भी नाम इसे देना चाहें,  इनका दायरा सीमित हो गया जिसका मतलब था कि उन्होंने स्टॉक बेचने शुरू कर दिए )।

  1. 2020

दुनिया एक और वैश्विक आर्थिक मंदी से डर गई थी क्योंकि इस पीढ़ी ने पहली बार महामारी का अनुभव किया था।  बेशक, सेंसेक्स टूटा।  बुरी तरह! लगभग 2000 अंक। और हमारे पास इस रिकॉर्ड गिरावट का श्रेय देने के लिए सिर्फ कोविड -19 है। 

  1. 2021

इस महीने की शुरुआत में, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा था - हमें इसकी वजह बताने की ज़रूरत नहीं है, खासकर तब जबकि फार्मा को छोड़कर सभी स्टॉक इसकी चपेट में थे। फिर से कोविड -19 की कृपा। 

यदि आप शेयर बाजार में अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लिए अपना इन्वेस्टमेंट सफ़र शुरू करना चाहते हैं तो आप यह सफ़र एंजेल ब्रोकिंग के साथ शुरू कर सकते हैं। याद रखें कि कोई भी व्यक्ति बगैर उम्र, जेंडर या प्रोफेशन की बंदिश के इन्वेस्ट कर सकता है। लेकिन आपको अपने लिए उपलब्ध हर तरह के इन्वेस्टर एजुकेशन चैनल (जैसे कि यह ब्लॉग पेज) के ज़रिये अपनी रिसर्च करनी चाहिए। कभी भी जोखिम ने नज़र न हटायें और हमेशा सिर्फ अतिरिक्त पूंजी ही इन्वेस्ट करें।

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