ट्रेडिंग के टाइप: फंडामेंटल ट्रेडर्स

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29 नवम्बर,2021

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फंडामेंटल ट्रेडिंग एक स्ट्रेटेजी है जिसके तहत कंपनी से जुड़े इवेंट्स को ध्यान में रखकर यह तय किया जाता है कि कौन से स्टॉक्स कब खरीदने हैं। फंडामेंटल ट्रेडिंग बाय एंड होल्ड की स्ट्रेटेजी के ज़्यादा करीब है। यहां विभिन्न किस्म की ट्रेडिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

परिचय

स्टॉक मार्केट में कारोबार करना बेगिनर्स और नए लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। यहां तक कि जिन ट्रेडर्स के पास अनुभव है, वे भी कभी-कभी लड़खड़ा सकते हैं क्योंकि बाज़ार में उतार-चढ़ाव होता रहता है और अप्रत्याशित चीज़ें हो सकती हैं। इस आर्टिकल में फंडामेंटल ट्रेडिंग के बारे में बात की गई है और ऐसे ट्रेडर्स इन महत्वपूर्ण जानकारी का लाभ उठा सकते हैं।

संक्षिप्त विवरण

फंडामेंटल ट्रेडिंग में ट्रेडर्स से उम्मीद की जाती है कि वह कंपनी से जुड़ी घटनाओं पर ध्यान दें ताकि पता लगाया जा सके कि कौन सा स्टॉक खरीदा जाना चाहिए और किस समय। फंडामेंटल्स के मामले में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के उलट, बाय-एंड-होल्ड स्ट्रेटेजी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कुछ हालात में फंडामेंटल्स की मदद से कम समय में उल्लेखनीय मुनाफा हासिल करने में मदद मिलती है।

बड़ी तस्वीर देखने की कोशिश - ट्रेडर्स  के फॉर्म

फंडामेंटल ट्रेडर्स इक्विटी ट्रेडर्स के फॉर्म हैं। इक्विटी ट्रेडिंग के मुख्य रूप निम्नलिखित हैं।

फंडामेंटल ट्रेडिंग - फंडामेंटल ट्रेडिंगी विभिन्न कंपनियों के फंडामेंटल विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए ट्रेडिंग में भाग लेते हैं। इसमें कॉर्पोरेट से जुड़े वास्तविक इवेंट्स और अर्निंग रिपोर्ट, अधिग्रहण, पुनर्गठन और / या स्टॉक विभाजन की उम्मीद से जुड़ी ख़बरें भी शामिल हैं।

स्विंग ट्रेडिंग - ये ट्रेडर एक तरह के फंडामेंटल ट्रेडर होते हैं जो सिंगल डे से अधिक की अवधि तक अपनी पोजीशन पर कायम रहते हैं। बड़ी संख्या में फंडामेंटल ट्रेडर्स दरअसल स्विंग ट्रेडिंग करते हैं। ऐसा इसलिए है कि कॉरपोरेट फंडामेंटल में बदलाव में आमतौर पर यदि कई सप्ताह नहीं तो कुछ दिन तो लगते ही है ताकि कीमत में उतार-चढ़ाव हो और ट्रेडर्स अच्छा मुनाफा कमा सकें।

स्कैल्पिंग - स्कैल्पर्स जो स्कैल्पिंग में हिस्सा लेते हैं, जो हर रोज़ सैकड़ों नहीं तो दर्ज़नों ट्रेड करते हैं ताकि बिड-अस्किंग स्प्रेड का लाभ उठाकर अच्छा मुनाफा "स्कैल्प" कर सकें।

मोमेंटम ट्रेडिंग - इस तरह की ट्रेडिंग से जुड़े ट्रेडर्स, ऐसे स्टॉक पर निगाह डालते हैं जो बड़ी तादाद में एक ही दिशा में चलते हैं। ऐसे ट्रेडर्स का मकसद होता है मोमेंटम का लाभ उठाकर अपने मनमाफिक मुनाफा कमाना।

टेक्निकल ट्रेडिंग - ट्रेडिंग इस फॉर्म में चार्ट और ग्राफ़ का उपयोग किया जाता है। स्टॉक और इंडेक्स ग्राफ़ का विश्लेषण कन्वर्जिंग या डायवर्जिंग की स्थिति समझने के लिए किया जाता है जो खरीदने या बेचने की सही स्संथिति के संकेत हो सकते हैं।

जबकि ट्रेडिंग से जुड़ने वाले नए लोग इनमें से हर तकनीक अपनाने की कोशिश कर सकते हैं जबकि उन्हें आदर्श रूप से किसी एक तकनीक से जुड़े रहने की कोशिश करनी चाहिए। यह चुनिन्दा तकनीक उनकी जानकारी और अनुभव सहित उनकी इन्वेस्टमेंट की क्षमता से भी मेल खानी चाहिए और साथ ही उन्हें इसमें अधिक समय लगाने, रिसर्च तथा अभ्यास करने और अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने के लिए भी तैयार होना चाहिए।

फंडामेंटल डाटा और ट्रेडिंग की जानकारी

इक्विटी इन्वेस्टर आम तौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के तहत अक्सर उपयोग किए जाने वाले सबसे फिनांशियल डाटा से परिचित हैं। इसमें अर्निंग प्रति शेयर, कैश फ्लो और रेवेन्यू आदि शामिल हैं। 

क्वांटिटेटिव एलिमेंट के तौर पर इनमें वे आंकड़े शामिल हैं जो किसी कंपनी की अर्निंग रिपोर्ट, बैलेंस शीट और / या कैश फ्लो स्टेटमेंट से ज़ाहिर होते हैं। फिनांशियल रेशियो के रिजल्ट भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें इक्विटी पर ऋण और इक्विटी पर रिटर्न शामिल है।

फंडामेंटल ट्रेडर्स इस क्वांटिटेटिव जानकारी का उपयोग इस तरह करते हैं कि वे ट्रेडिंग के मौकों का पता लगा सकें। ये मौके अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन एक अच्छा उदहारण यह हो सकता है कि जब कोई कंपनी बाजार की उम्मीद से परे अर्निंग रिजल्ट करे।

फंडामेंटल फैक्टर्स जो ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के लिए सबसे अधिक ज़रूरी हैं, वे हैं एनालिस्ट अपग्रेड और डाउनग्रेड के साथ-साथ अर्निंग अनाउंसमेंट। हालांकि, दूसरों से पहले इस जानकारी को हासिल कर पाना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि लाखों ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स इसी तरह के मुनाफे की तलाश में होते हैं।

अर्निंग अनाउंसमेंट पर विचार

इन अनाउंसमेंट के मामले में प्री-अनाउंसमेंट का चरण बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि कंपनी अपनी अर्निंग की उम्मीद पूरी करने, उससे अधिक हासिल करने में कामयाब या नाकाम होगी या नहीं।

ट्रेडर्स ठीक इसके बाद हरकत में आते हैं क्योंकि इससे शॉर्ट टर्म मोमेंटम पैदा होने की संभावना रहती है।

एनालिस्ट अपग्रेड और डाउनग्रेड का आकलन

शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग की यहाँ संभावना बनती है, खासकर स्टॉक के डाउनग्रेड होने की स्थिति में। ट्रेडर्स को तेज़ी से शॉर्ट सेलिंग करनी चाहिए क्योंकि कीमत में तेज़ गिरावट हो सकती है।

मोमेंटम ट्रेडिंग के मामले में ऐसे अप्रत्याशित इवेंट्स की तलाश की जाती है, जो स्टॉक की कीमत में अचानक उतार-चढ़ाव की वजह बन सकते हैं।

स्पेक्यूलेटिव इवेंट्स जिनमें हो सकता है मार्केट में ज़्यादातर लोगों की रूचि नहीं हो लेकिन वे फंडामेंटल ट्रेडर्स के लिए बहुत दिलचस्प हो सकते हैं।

निष्कर्ष

कई ट्रेडिंग स्ट्रेटेजिस्ट ट्रेड के लिए फैंसी मॉडल शामिल करते हैं जो पहले की घटनाओं से जुड़े होते हैं और जो एनालिस्ट अपग्रेड और डाउनग्रेड, अधिग्रहण, स्टॉक विभाजन और पुनर्गठन और अर्निंग अनाउंसमेंट पर आधारित होते हैं।

फंडामेंटल ट्रेडर्स स्टॉक की मौजूदा स्थिति और प्राइस मूवमेंट को ठीक से तय करने की स्थिति में हों, तभी मुनाफे वाला ट्रेड कर पाना संभव है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न1. कुछ लोकप्रिय ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी के नाम बताएँ।
उत्तर1. लोकप्रिय ट्रेडिंग स्मेंट्रेटेजी में शामिल हैं, फंडामेंटल ट्रेडिंग, मोमेंटम ट्रेडिंग, स्कैल्पिंग, स्विंग ट्रेडिंग और टेक्निकल ट्रेडिंग।

प्रश्न2. फंडामेंटल ट्रेडिंग के दो सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर क्या हैं?
उत्तर2. फंडामेंटल ट्रेडिंग के लिए जिन दो सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर पर विचार किया जाता है, उनमें एनालिस्ट अपग्रेड और डाउनग्रेड के साथ-साथ कंपनी की अर्निंग की घोषणा शामिल हैं।

प्रश्न3. फंडामेंटल ट्रेडिंग क्या है?
उत्तर3. फंडामेंटल ट्रेडिंग के तहत विभिन्न कंपनियों के फंडामेंटल्स का विश्लेषण किया जाता है। कॉर्पोरेट इवेंट्स का आकलन इसकामहत्वपूर्ण अंग है जिसमें वास्तविक अर्निंग और जितनी उम्मीद थी उतनी अर्निंग की रिपोर्ट, अधिग्रहण, पुनर्गठन और / या स्टॉक विभाजन की जानकारी शामिल है।

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