मामूली क़र्ज़दाता से एशिया के सबसे अमीर बैंकर का सफ़र: उदय कोटक ने कैसे बदली अपनी किस्मत

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13 मार्च,2021

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उदय कोटक की सफलता की कहानी:एक छोटा सा ऋणदाता से एशिया के सबसे अमीर बैंक - स्मार्ट मनी
छोटी कंपनियों को सस्ती दर पर क़र्ज़ देने वाले छोटे से फर्म से शुरुआत कर उदय कोटक ने अपने कारोबार को सफल बैंक में बदल दिया, जो फिलहाल बाज़ार पूंजीकरण के लिहाज़ से भारत का दूसरा सबसे बड़ा निजी बैंक है।

उनकी संपत्ति पिछले 10 साल में चार गुना बढ़ी है। फिलहाल लगभग 15.3 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ वह भारत के सबसे अमीर बैंकर हैं।  गैर-बैंकिंग पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति के लिए यह शानदार उपलब्धि है। 

उन्होंने शुरुआत कैसे की

वह कपास का कारोबार करने वाले एक उच्च-मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार से हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ से एमबीए किया। हालाँकि उन्हें एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी मिल गई थी लेकिन उनके पिता ने अपना कुछ शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शुरुआत क़र्ज़ देने के छोटे से कारोबार से की जिसके ज़रिये कंपनियों को सस्ती दर पर क़र्ज़ दिया जाता था। 

साल 1985 में जब भारत की अर्थव्यवस्था बंद ही थी, उन्होंने एक वन-मैन फाइनेंसिंग कंपनी शुरू की। उस समय, क़र्ज़ मंहगा था लेकिन वहीं दूसरी ओर जमाकर्ता को सिर्फ एक हिस्सा ही मिलता था क्योंकि जमा दर कम थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "मुझे यह जानकर झटका लगा कि ट्रिपल-ए-रेटेड ऋण लेने वालों को 17 प्रतिशत की दर पर क़र्ज़ में मिलता था जबकि जिन परिवारों को मैं जानता था उन्हें अपने पैसे पर सिर्फ छह प्रतिशत ही ब्याज मिलता था।" 

यह एक किस्म की क्रांति की शुरुआत थी जो बाद में पहली एनबीएफसी बनी जिसे आरबीआई से पूर्ण-बैंकिंग का लाइसेंस मिला।  

एक साठ-साल के बुज़ुर्ग बैंकर ने कोटक महिन्द्रा बैंक को अकेले दम पर सफल बना दिया। यह उनका ही नेतृत्व और प्रबंधन कौशल था जिसने उन्हें अपने समकालीनों के बीच अलग स्थान प्रदान किया।  

साल 2019 में जारी हुरन की अमीर व्यक्तियों की सूची के लिहाज़ से उदय कोटक एशिया के सबसे अमीर बैंकर हैं और भारत के छठे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। साल 2019 में उनकी निवल संपत्ति 3 अरब अमेरिकी डॉलर से 268 प्रतिशत बढ़कर 11.8 अरब अमरीकी डॉलर हो गई और ऐसा मुख्य तौर पर बाजार में बैंक के शेयर की बढ़ती कीमत के कारण हुआ। 

उनका संपत्ति में ज़्यादातर योगदान कोटक महिंद्रा बैंक में उनकी 30 प्रतिशत हिस्सेदारी का है

उदय कोटक बैंक के प्रमोटर होने के नाते उनके पास बैंक की 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। आरबीआई ने उनसे कहा कि वित्त वर्ष 2020 के अंत तक अपनी हिस्सेदारी घटाकर 15 प्रतिशत कर लें- वह पिछले दस साल से इस फैसले के साथ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बाजार पूंजीकरण के लिहाज़ से कोटक महिंद्रा को भारत के दूसरे सबसे अधिक मूल्य वाले बैंक में बदल दिया।  

वह अपनी सफलता का श्रेय मध्यवर्गीय मूल्यों को देते हैं

उन्होंने दावा किया कि उनके व्यावसायिक मूल्य उन्हें मिले मध्यवर्गीय मूल्यों और सहज बुद्धि से पैदा हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि आने वाले दिनों में बैंकों को तीन मूल्यों - विवेक, सरलता और विनम्रता पर ध्यान देना चाहिये। 

विवेक: उनका भरोसा इस विचार में है कि 'पूंजी की वापसी पूंजी पर मुनाफे की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है।' उनके विवेक का लाभ मिला जब 2003 में कोटक जब पूर्ण सुविधाएँ मुहैया कराने वाला पहला एनबीएफसी बन गया। साल 2009 और 2019 के बीच, कोटक महिंद्रा बैंक ने 35 प्रतिशत के सीएजीआर की दर से वृद्धि दर्ज़ की और एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स से आगे निकल गया जिसने उसी अवधि में 16 प्रतिशत का मुनाफ़ा दर्ज़ किया। 

फिलहाल, बैंक का बाज़ार पूंजीकरण 48 अरब डॉलर है और प्राइस-टू-बुक वैल्यू 6.2 है जो ज़्यादातर बैंकों से अधिक है।  

सरलता: कोटक के मुताबिक, बैंकों को ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जो ग्राहकों को आसानी से समझ में आ जाएँ। ग्राहकों में भरोसा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। 

विनम्रता: उनका मानना है कि बंकरों को विनम्र होना चाहिए क्योंकि वे लोगों के पैसे का प्रबंधन करते हैं।  

कोविड-19 फैलने के बीच कोटक को डिजिटल-फर्स्ट के दृष्टिकोण से लाभ हुआ

कोटक ने साबित किया कि समय से आगे की सोच; अपने प्रतिस्पर्धियों से पहले भविष्य की कल्पना आवश्यक है। महामारी के दौरान जब डिजिटल बैंकिंग आम हो गई, इससे काफी पहले कोटक महिंद्रा बैंक ने बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए नवोन्मेषी डिजिटल माध्यमों को अपनाया था। मसलन, मई 2020 में यह नए ग्राहकों के लिए वीडियो केवायसी लागू करने वाला पहला बैंक बन गया। इसने भावी ग्राहक को अपने स्मार्टफोन से खाता खोलने की प्रक्रिया को केवल दस मिनट में पूरा करने की सुविधा प्रदान की। 

बैंक ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों) को क़र्ज़ देने  के लिए पूरी तरह से एक पेपरलेस डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया शुरू की है, जिसे ई-साइन कहते हैं।     

ये बैंक के डिजिटल-फर्स्ट नज़रिए के कुछ उदाहरण हैं। 

उन्होंने आईएनजी वैश्य बैंक के अधिग्रहण के साथ कोटक बैंक को मज़बूती प्रदान की

जब भी आपके सामने अवसर आये आपको इसका ज़रूर लाभ उठाना चाहिए। 

आरबीआई ने 2014 में कोटक को आरबीआई संचालन नियम के अनुसार कहा था कि वह बैंक में अपनी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर लें। लेकिन बजाय इसके कोटक ने 2.4 बिलियन अमेरीकी डालर में आईएनजी वैश्य का अधिग्रहण कर अपने कारोबार को और मज़बूत करने का फैसला किया जिसने बैंक की संपत्ति दोगुनी हो गई और शेयर की कीमत में उछाल आया। 

वह विवेकपूर्ण नेतृत्व हैं

उदय कोटक के बारे में महिंद्रा के सुप्रीमो आनंद महिंद्रा ने कहा, "जहां तक मेरा मानना है, विश्व का सबसे अमीर बनकर बनना बस प्रॉक्सी भर है क्योंकि उदय दुनिया के सबसे स्मार्ट बैंकरों में से एक है।"

यह सच है क्योंकि कोटक बैंक के शेयरों ने बाजार में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अपनी समकक्ष कंपनियों के शेयरों को पीछे छोड़ दिया। महामारी के बाजार को प्रभावित करने से पहले ही, कोटक ने अपनी परिसंपत्ति की गुणवत्ता का प्रबंधन दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से कर लिया था। उन्होंने जोखिम वाले क्षेत्रों और लघु क्षेत्र में वित्तपोषण कम कर दिया था। कोटक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बाजार से पूंजी जुटाई थी जबकि महामारी के कारण उधारकर्ताओं की पुनर्भुगतान की क्षमता ख़त्म होने लगी थी। उन्होंने अपने साथियों से पहले ही संकट की गहराई को समझा, जिससे बैंक को ग्राहकों और निवेशकों का विश्वास हासिल करने और सतत विकास के रास्ते पर बने रहने मदद मिली। उनकी रणनीति का लाभ मिला क्योंकि कोटक बैंक के शेयर की कीमत में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो अपने समकक्षों के मुकाबले सबसे अधिक रही।

जब 2015 में भारतीय अर्थव्यवस्था में शैडो-बैंकिंग संकट पैदा हुआ तो कोटक मजबूत बैलेंस शीट और कम बैड-लोन अनुपात के साथ स्तर से ऊपर रहने में कामयाब रहा। हालाँकि 2020 में बैंक की बैड-लोन राशि बढ़ी, लेकिन यह अब भी अपने प्रतिद्वंद्वियों के बीच दूसरे स्थान पर है। 

मजबूत इरादे, अनुकूलन की क्षमता, बाजार की गहरी समझ और अभेद्य कॉरपोरेट गवर्नेंस ऐसे कारक हैं जिन्होंने उदय कोटक को एक मामूली ऋणदाता से भारत में सबसे सफल निजी बैंकर बनने की सफलता की कहानी लिखने में मदद की।  

आनंद महिंद्रा ने उनके बारे में फिर कहा, "इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने समझ लिया कि बैंक वहनीय और टिकाऊ सिर्फ स्मार्ट रणनीति से नहीं बल्कि अभेद्य गवर्नेंस से भी बनता है।"

उदय कोटक शुरुआत से ही कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमुख रहे हैं। वह हमेशा पायदान-दर-पायदान आगे बढ़ते रहे और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर लगाम कसे रखा जिसे बैंक की सफलता में मदद मिली। अपने दौर में उन्होंने संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में कम ऋण देने की सख्त अंडरराइटिंग की नीति का पालन किया और मॉर्गेज वाले ऋण पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जिससे बैंक को साफ-सुथरा बैलेंस शीट बनाए रखने में मदद मिली। अब सवाल यह है कि जब ये साठ वर्षीय बैंकर सेवानिवृत्त होंगे तो क्या होगा। 

हाल ही में, आरबीआई ने उन्हें कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ के रूप में और तीन साल के लिए उन्हें पुनर्निनियुक्त किया है।

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