क्या गूगल में इन्वेस्टमेंट करना अच्छा है?

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26 Nov, 2021

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कुछ एनालिस्ट का मानना है कि क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव दोनों तरह से खरीदने के लिए यह सुरक्षित स्टॉक है। गूगल की बैलेंस शीट की सुदृढ़ता इसकी सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस कहानी में कुछ बारीकियां हैं जिन्हें समझने की जरूरत है।

परिचय - गूगल क्या है?

गूगल इंक. (GOOGL), अल्फाबेट इंक. का पुराना नाम है। यह टेक्नोलॉजी समूह है जो विभिन्न किस्म के कारोबार संभालता है। इनमें दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट ब्राउज़र और विज्ञापन की ऑफरिंग, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब, एंड्रॉइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, कई ग्रोथ से जुड़े वेंचर्स के अलावा क्लाउड स्टोरेज की ऑफरिंग शामिल हैं।

कैलिफ़ोर्निया स्थित यह कंपनी सर्च रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने का काम करती है जो रोज़ाना अरबों से अधिक होते हैं और वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक जानी-पहचानी कंपनियों में से एक है। सोशल मीडिया और रोबोटिक्स से लेकर ईमेल और वीडियो एनालिटिक्स तक के विभिन्न इंटरनेट-केंद्रित क्षेत्रों में इसकी रुचि है लेकिन इसकी बिक्री और आय का सबसे बड़ा स्रोत इंटरनेट सर्च है।

इसके शेयर को सदी के सबसे सफल शेयरों में शामिल किया गया है जिसकी कीमत अगस्त 2004 में 50 डॉलर थी और अब 2019 के मूल्यांकन के मुताबिक बढ़ कर 1,125 (क्लास ए) हो गई। कंपनी लाभांश नहीं देती है लेकिन इसने सभी तरह के इन्वेस्टर्स को आकर्षित किया है और इन्होंने कंपनी को 660 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँचा दिया है।

गूगल में इन्वेस्ट करने का निर्णय लेने से पहले विचार करने लायक बातें

गूगल में इन्वेस्ट करने के इच्छुक लोगों को निम्न फैक्टर्स पर विचार करना चाहिए।

शेयर के टाइप में अंतर 

गूगल के नैज़डैक लिस्टिंग में दो टिकर सिम्बल हैं। ये हैं, ए शेयर्स के मामले में GOOGL (जीओओजीएल) हैं और इसके सी शेयर्स के मामले में GOOG (जीओओजी)। इसके बी शेयएस कंपनी के सह-संस्थापक, कंपनी के चेयरमैन के साथ-साथ मुट्ठी भर निदेशकों के पास हैं। इन शेयर्स की ट्रेडिंग पब्लिक रूट से नहीं होती है।

अप्रैल 2014 में कंपनी ने अपने स्टॉक को विभाजित किया जिससे ए और सी शेयर्स का निर्माण हुआ। इससे कंपनी को अपने शेयरों को दोगुना करने और प्रत्येक शेयर की कीमत कम करने में मदद मिली। इन दो तरह के शेयरों के बीच का अंतर यह है कि क्लास ए शेयरों में प्रति शेयर एक वोट होता है, क्लास सी शेयरों में वोट का अधिकार नहीं होता है। दूसरी ओर क्लास बी के शेयरों में प्रति शेयर 10 वोट होते हैं, जिससे उनके शेयरधारकों के पास सबसे ज्यादा वोटिंग पावर होती है।

गूगल इन्वेस्टर्स को बगैर बहुत अधिक नियंत्रण सौंपे अपनी इक्विटी के बड़े शेयर खरीदने की अनुमति देता है। जो लोग गूगल में इन्वेस्ट करना चाहते हैं और इसके शेयरधारकों की बैठकों में मतदान करना चाहते हैं, उन्हें ए टाइप शेयर हासिल करना चाहिए।

अल्फाबेट के बारे में ज़रूरी जानकारी

अल्फाबेट नाम की होल्डिंग कंपनी को गूगल ने 2015 में लॉन्च किया था और अपनी व्यवसायिक नीति "डोंट बी ईवल" से बदलकर "डू द राईट थिंग" कर ली। यह पुनर्गठन कई बदलाव में से एक था और उनके प्रभाव को अभी तक इस संदर्भ में नहीं देखा जा सका है कि गूगल का बदलाव कितना अच्छा है।

गूगल का मजबूत मोट

ऐसे स्टॉक जो अपने प्रतिस्पर्धात्मक लाभ पर पकड़ बनाने में कामयाब हैं, उन्हें सुरक्षित दांव के रूप में देखा जाता है और उनमें मोट होते हैं। मोट को समझने के लिए, कोका कोला पर विचार करते हैं, जो कंज्यूमर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। उसी तरह, इंटरनेट के मामले में गूगल के पास मोट है। यह इंटरनेट पर निरंतर प्रतिस्पर्धा और तेज़ बदलाव को देखते हुए प्रासंगिक है जहां कोई भी प्रतिस्पर्धी ऑफर कर सकता है। हालाँकि, गूगल अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में तेज़ गति से बेहतर परिणाम प्रदान कर अपना दबदबा हासिल करने और बनाए रखने में कामयाब रहा है।

इसके क्रोम ब्राउजर और एंड्रॉइड नामक ऑपरेटिंग सिस्टम ने इसकी बाजार हिस्सेदारी को भी मजबूत किया है। इसके अलावा, यह ऐपल को इस तरह भुगतान करता है कि यह उसके मोबाइल पर डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन है।

अरबों सर्च

गूगल के ब्राउज़र पर रोज़ाना 3.5 बिलियन से अधिक सर्च होता है। इनमें से हर कंपनी के लिए थोड़ी आय होती है क्योंकि यह अपने यूजर्स को सर्च का रिजल्ट देने के एवज़ में विज्ञापन बेचती है। इंटरनेट सर्च के बाजार का 75 प्रतिशत गूगल के पास है जिसमें से 85 प्रतिशत योगदान मोबाइल सर्च का भी है।

ये सर्चों को कंपनी के लिए लाभ एक प्रमुख हैं, जिससे यह सुरक्षा के मामले में अच्छा इन्वेस्टमेंट हो सकता है। कंपनी को अपनी कमाई और आय का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी से मिलता है। ये फंड उन प्रोजेक्ट में लगाए जाते हैं जिनसे कंपनी को उम्मीद होती है कि भविष्य में भी इसी तरह मुनाफा होगा।

गूगल के पास विशाल रिज़र्व है और उसकी बॉरोइंग क्षमता बहुत अधिक है जिसे वह हर उस प्रतियोगी खरीद लेता है इससे पहले कि वह कंपनी के लिए खतरा बन जाए। ऐसी हर लाभ की स्थिति कंपनी को अपने छोटे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखती है। यह प्रतिस्पर्धी बने रहने और आर्थिक नरमी से पैदा दबाव को झेलने में मदद करता है।

कठिन परिस्थितियाँ 0 - गूगल 1

गूगल 2007-2008 की मंदी से पैदा दबाव को झेलने में कामयाब रहा जिस दौरान कई कंपनियों ने दम तोड़ दिया था। इसके स्टॉक को ज़बरदस्त झटका लगा था और लेकिन जब इकॉनमी में सुधार हुआ तो गूगल ने बस तीन साल में अपने नुकसान की भरपाई कर ली। कंपनी का बीटा 1.03 है जो उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बहुत कम है जिनका बीटा औसत 1.6 है।

बायर सावधान रहें

गूगल में बहुत सी खूबियाँ हैं लेकिन फिर भी इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकारों द्वारा यह नियम उनमें से एक है। दूसरी बात, यदि कंपनी का विकास जारी रहता है, तो उसे स्केल की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी पारंपरिक तरीके से ज़्यादा आय अर्जित करने में नाकाम रह सकती है जिसका मतलब है कि इन्वेस्टर्स को घटती आय से संतोष करना होगा।

इन्वेस्टमेंट के फैसले हमेशा सोच-समझकर ही लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. गूगल की पेरेंट कंपनी का क्या नाम है?
उत्तर1. ए1. अल्फाबेट गूगल की पैरेंट कंपनी है।

प्रश्न 2. गूगल की स्थापना किस साल हुई थी?
उत्तर2. गूगल की स्थापना 1998 में हुई थी।

प्रश्न3. गूगल जनता को किस तरह के शेयर देती है?
उत्तर3. गूगल के पास दो तरह के शेयर हैं जिनका नैज़डैक पर सार्वजनिक कारोबार होता है - क्लास ए शेयर्स (GOOGL) और क्लास सी शेयर्स (GOOG)। क्लास बी के शेयर निजी तौर पर रखे जाते हैं और इनका कारोबार नहीं होता है।

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