मुकेश अंबानी: भारत के सबसे अमीर आदमी का उदय

18 अक्टूबर,2020

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मुकेश अंबानी की सफलता की कहानी - स्मार्ट मनी
सन 1981 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में एमबीए में पढ़ाई के दौरान युवा मुकेश को अपने पिता से का एक बुलावा आया। उन्होंने तुरंत ही विश्वविद्यालय छोड़ दिया और रिलायंस के पुनर्निर्माण में अपने पिता का हाथ बटाने भारत वापस आ गए।

सन 1980 में, जब इंदिरा गांधी सरकार ने पीएफ़वाई (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न) परियोजना शुरू की, तब रिलायंस ने एक निविदा प्रस्तुत की और कई अन्य दिग्गजों के खिलाफ बोली में जीत हासिल की। इसलिए, जब उनके पिता ने उन्हें कारखाने का निर्माण शुरू करने के लिए वापस बुलाया तो मुकेश ने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय चलाने में मदद करने में कोई संकोच नहीं किया।

मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बन चुके है। उनकी वृद्धि भी कम प्रभावशाली नहीं है, और हम यहाँ रिलायंस सुप्रीमो की सफलता की कहानी के बारे में बात करेंगे।

हम मुकेश अंबानी को एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक के रूप में जानते हैं। वह वर्तमान में विश्व के सबसे अमीर आदमी की सूची में वॉरेन बुफे से आगे पांचवें स्थान पर हैं। लेकिन भारत में एक प्रभावशाली व्यावसायिक परिवार में पैदा होने के बावजूद, मुकेश अंबानी की वृद्धि आसान नहीं थी। उन्हें अपने पिता से पारिवारिक व्यवसाय विरासत में मिला, लेकिन यह उनका प्रभावशाली नेतृत्व ही है जिसने रिलायंस को आज के दौर में परिवर्तित कर दिया है। मुकेश की व्यावसायिक शैली और रणनीति ने उन्हें एक महत्वपूर्ण छाप छोड़ने में मदद की और भारत के शीर्ष व्यापारिक परिवारों के बीच अपनी जगह सुरक्षित करने में मदद की है। उनके पास नेतृत्व करने का कौशल, दुर्दृष्टि, प्रबंधन क्षमताएं और क्रांतिकारी रवैया है जिसने उन्हें रिलायंस को एक व्यावसायिक साम्राज्य में बदलने में मदद की।

मुकेश का जन्म 19 अप्रैल, 1957 को धीरुभाई और कोकिलाबेन अंबानी के घर में यमन में हुआ था। वह उनके माता पिता के चार बच्चों में से सबसे बड़े थे। उनके भाई अनिल अंबानी कॉर्पोरेट जगत के एक और प्रख्यात आदमी है और वह अपने ही व्यवसाय का प्रबंधन करते है। मुकेश ने मुंबई में केमिकल टेक्नोलॉजी संस्थान से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में एमबीए के लिए दाखिला लिया। लेकिन वह स्टैनफोर्ड में अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके।

मुकेश कम उम्र में ही अपने पारिवारिक व्यवसाय में शामिल हो गए थे। उन्होंने न केवल अपने पिता की पॉलिएस्टर संयंत्र स्थापित करने में मदद की बल्कि रिलायंस को एक विविध व्यावसायिक समूह के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी स्तर वाली रिफाइनरी की स्थापना की, जो वर्तमान में प्रति दिन 660,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है।

उन्होंने अपने पिता के पद चिन्हों और उनकी विचारधारा “डेयर टू ड्रीम एंड लर्न टू एक्सेल” का अनुसरण किया । जब उन्होंने रिलायंस समूह की कमान संभाली तो उन्होंने इसे एक वैश्विक इकाई में बदल दिया। मुकेश सबसे प्रभावशाली कारोबारी नेता की सूची में शीर्ष में आते हैं और 'धन निर्माता' के रूप में उनका स्वागत किया जाता हैं। उन्होंने लगातार 13 सालों तक भारत के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में अपना स्थान बनाए रखा। उनके अच्छे मार्गदर्शन के तहत, रिलायंस जियो चार साल की छोटी अवधि के भीतर सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई। हाल ही में उन्होंने अपनी कंपनी आरआईएल का नेतृत्व उसे कर मुक्त बनाने के लिए किया।

मुकेश अंबानी एक आधुनिक भारतीय व्यापारियों का एक मुख्य चेहरा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई उपलब्धियां हासिल की- पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और एप्लाइड साइंस से डीन मेडल, संयुक्त राष्ट्र- भारत बिजनेस काउंसिल लीडरशिप अवार्ड, टोटल टेलीकॉम  द्वारा वर्ल्ड कम्युनिकेशन अवार्ड, और गुजरात सरकार द्वारा चित्रलेखा अवार्ड उनमें से कुछ है।

मुकेश अंबानी एक शूटिंग स्टार की तरह भारतीय कॉर्पोरेट के आसमान की बुलंदियों पर है। उनकी अनूठी व्यावसायिक समझ, प्रभावशाली नेतृत्व, अटूट दृढ़ संकल्प, और भारतीय दर्शनशास्त्र  में विश्वास, उन्हें उनके समकालीन दिग्गजों से अलग बनाता है। 62 साल के पुराने बिजेनस टाइकून का जीवन हर युवा उद्यमी के लिए प्रेरणा बना रहेगा जो प्रतिस्पर्धा की इस व्यापारिक दुनिया में खुद का एक नाम बनाना चाहते है।

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