म्यूचुअल फंड - शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म? कौन सा सबसे अच्छा है?

03 जून,2022

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म्यूचुअल फंड निवेश को शॉर्ट या लॉन्ग टर्म निवेश के रूप में वर्गीकृत करने के लिए आवश्यक समय सीमा और उनसे संबंधित जटिलता को समझें।

म्यूचुअल फंड चुनने के लिए विविध विकल्प मौजूद हैं, जिनमें से कुछ लॉन्ग टर्म के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जबकि अन्य शॉर्ट टर्म के लिए हैं। जब शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड्स की बात आती है, तो डेट फंड्स को अच्छा माना जाता है, जबकि लॉन्ग टर्म म्यूचुअल फंड्स का आकलन करते समय इक्विटीज़ को बेहतर माना जाता है। शॉर्ट और लॉन्ग टर्म के फंड्स पर कौन सी समय सीमा लागू होती है यह समझने के लिए पढ़ना जारी रखें|  

निवेश की समय सीमा को ध्यान में रखना 

जहां तक ​​टैक्स उद्देश्यों का संबंध है, लॉन्ग टर्म यानि लम्बी अवधि निवेश से तात्पर्य उन निवेशों से है जो एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए रखे जाते हैं। हालांकि म्यूचुअल फंड निवेश के नज़रिए से इस समय सीमा को लॉन्ग टर्म नहीं कहा जा सकता| इसे लॉन्ग टर्म तब कहा जा सकता है जब बाज़ार में तेज़ी से बदलाव आ रहा हो, लेकिन धीमे बाज़ार में इस समय सीमा को लॉन्ग टर्म नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए वर्ष 2014 को लें, जिसमें म्यूचुअल फंड ने दोहरे अंकों में रिटर्न दिया था। इस समय के दौरान, अच्छा रिटर्न उत्पन्न करने के लिए एक वर्ष के लिए एक म्यूचुअल फंड निवेश रखना पर्याप्त था जबकि वर्ष 2018 में, म्यूचुअल फंड रिटर्न पर्याप्त नहीं था, जिसके कारण एक या दो साल के लिए म्यूचुअल फंड निवेश करना सही था।  

कुछ थेओरीज़ मानती हैं कि म्यूचुअल फंड निवेश के लिए एक या दो साल पर्याप्त लॉन्ग टर्म नहीं है, और निवेश जितने लंबे समय के लिए होगा, रीटर्न उतना ही अधिक होगा। हालांकि बाज़ार की अलग-अलग हलचल के अनुसार किसी स्थिति में म्यूच्यूअल फंड निवश कई वर्षों के लिए रखना आदर्श हो सकता है, जबकि कभी इसे एक निश्चित समय सीमा के बाद रखना सही नहीं हो सकता। इसकी कई वजह हो सकती हैं जैसे फंड बदलने की रणनीति, फंड का आपके निवेश लक्ष्यों से अलग हो जाना या फिर हो सकता है कि फंड 15 साल के बाद बाज़ार में मौजूद ही न हो। इसलिए, अपने जोखिम को कम करने के लिए ये ज़रूरी है कि आप अपने पोर्टफोलियो पर करीब से नज़र बनाये रखें।

कैसे तय करें कि कब निवेश करना है और कब म्युचुअल फंड होल्डिंग से बाहर निकलना है

सभी इन्वेस्टर के लिए एक निश्चित समय सीमा को लॉन्ग टर्म नहीं कहा जा सकता| ऐसा इसलिए क्यूंकि निवेशकों के प्रोफाइल अलग-अलग होते हैं और निवेश के उनके लक्ष्य भी एक दूसरे से अलग हो सकते हैं। निश्चित समय सीमा के बजाय, आपको दो बातों पर ध्यान देना चाहिए पहला ये कि निवेश कब किया जाये और दूसरा कब इससे बाहर आना सही है।

अगर हम ‘निवेश कब किया जाये’ की बात करें, तो इसके लिए सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी अच्छा विकल्प है। एसआईपी के ज़रिये आप म्यूचुअल फंड में निवेश करके अपने निवेश की लागत कम कर सकते हैं और कम्पाउंडिंग की मदद से अधिक रिटर्न अर्जित कर सकते हैं।

दूसरी ओर, निवेश से बाहर निकलने की बात करें, तो यह निर्णय थोड़ा मुश्किल हो सकता है| इसके लिए आपको अपने निवेश लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आप एक टारगेट राशि सोच सकते हैं और इसे कितनी अवधि में अर्जित करना है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इस अवधि के दौरान, बाज़ार में बड़ी हलचल आपके लक्ष्य के अनुसार होगी जो बदले में आपके पोर्टफोलियो रिटर्न को प्रभावित करेगी। इसी कारण से, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की परिभाषा को समझना ज़रूरी है। यहां लंबी अवधि के निवेश का मतलब 7 साल है।

लॉन्ग टर्म में निवेश करते समय किन बातों पर विचार करना चाहिए

लॉन्ग टर्म के निवेश को आदर्श माना जाता है, हालांकि आपको निवेश से पहले निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

पर्याप्त रिसर्च करें - यह आपको एक ऐसा फंड खोजने में मदद कर सकता है जो आपके वित्तीय लक्ष्य के साथ अच्छी तरह मेल खाता हो। किसी फंड को शॉर्टलिस्ट करने से पहले उसका पिछला प्रदर्शन, उद्देश्य, निवेश रणनीतियों और फंड मैनेजर की साख और ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखें।

अपनी होल्डिंग में विविधता लाएं - अपने जोखिम को कम करने के लिए आप जो सबसे अच्छे तरीके अपना सकते हैं, उनमें से एक है अपने निवेश में विविधता लाना। ऐसा इसलिए क्योंकि  म्यूचुअल फंड अलग-अलग प्रकार की सिक्योरिटीज़ में निवेश करते हैं। अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए ऐसे फंड में निवेश करें जो अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश करे|

एक रणनीति अपनाएं - यदि आप लंबी अवधि के लिए किसी निवेश को बनाए रखना चाहते हैं, तो अपनी रणनीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और उसका पालन करना महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से बचत करके आप अपने लिए एक समृद्ध कोष बना सकते हैं।

शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट की परिभाषा

लॉन्ग टर्म के म्यूचुअल फंड निवेश के विपरीत, जो 7 साल की अवधि तक चलता है, शॉर्ट टर्म यानी अल्पकालिक निवेश कुछ दिनों से लेकर 3 साल तक की अवधि तक होता है। इस संबंध में लिक्विड फंड और अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म डेट फंड ध्यान देने योग्य हैं।

पारंपरिक बचत खातों के मुकाबले, शॉर्ट टर्म फंड अधिक रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन ये फंड बाज़ार के जोखिमों के अधीन हैं, जिस कारण रिटर्न की गारंटी नहीं है। माना जाता है कि, ब्याज दर में बदलाव आने का शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड पर प्रभाव बहुत कम होता है।

लॉन्ग और शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड की तुलना

शॉर्ट और लॉन्ग टर्म के म्यूचुअल फंड में अंतर करने के तरीकों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका की जांच करें।

विचार का क्षेत्र

शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड निवेश

लॉन्ग टर्म म्यूचुअल फंड निवेश

निर्धारित समय - सीमा

कुछ दिनों से लेकर तीन साल तक की सीमा

पांच से सात साल और कुछ परिदृश्यों में अतिरिक्त समय

ब्याज दर में कमी के प्रति संवेदनशीलता

कम संवेदनशील

अत्यधिक संवेदनशील

रिटर्न

पारंपरिक बचत योजनाओं की तुलना में अधिक रिटर्न

कंपाउंडिंग ब्याज के कारण शानदार रिटर्न

जोखिम

लॉन्ग टर्म निवेश की तुलना में कम जोखिम

शॉर्ट टर्म निवेश की तुलना में उच्च जोखिम

लक्ष्य

शॉर्ट टर्म लक्ष्यों के लिए बेहतर जिसमें वाहन खरीदना या छुट्टी पर जाना शामिल है

लॉन्ग टर्म लक्ष्यों के लिए बेहतर जिसमें आपकी रिटायरमेंट या आपके बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए बचत शामिल है

 समापन 

अंततः, यह निर्धारित करते हुए कि क्या एक शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म म्यूचुअल फंड आपके लिए सही होगा, आपको अपनी प्रोफ़ाइल, जोखिम की सीमा, निवेश लक्ष्यों और उस समय सीमा पर ध्यान देना चाहिए जिसे आप अपने म्यूचुअल फंड निवेश के लिए चाहते हैं।

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है, महज जानकारी प्रदान करना न कि इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई सलाह/सुझाव प्रदान करना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने -बेचने की सिफारिश करना।

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