पीवीआर- क्या वापसी की राह पर है?

10 Mar, 2021

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पीवीआर - कार्ड पर वापसी? - स्मार्ट मनी
फिल्में देखना किसे पसंद नहीं। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में जब कोविड महामारी का प्रकोप हुआ तो निवेशक अपना निवेश निकालने लगे- और इसमें कुछ भी नया नहीं है, है ना? एक ही तरह की प्रतिक्रिया दर्ज़ होने के बावजूद बाज़ार की चाल वैसी ही रही। बाज़ार में हर तरह की गिरावट से डर पैदा होता है, और इक्विटी में संदेह एक बार फिर से घटता है - बस थोड़े समय के लिए। इस लिहाज़ से, महामारी के कारण हुई गिरावट सही मायने में गिरावट थी भी नहीं।

हालांकि, कई कंपनियों ने महामारी के चरम पर भी तेज़ी का रुख बरकरार रखा लेकिन मनोरंजन और एफ एंड बी शेयरों में भारी गिरावट रही, और ऐसा बेवजह नहीं हुआ- आप खुदरा निवेशक के तौर पर ऐसी किसी कंपनी में निवेश बनाए नहीं रख सकते है, जो सार्वजनिक रूप से फिल्में दिखाती है जबकि सरकार अगला निर्देश जारी होने तक घर पर रहने और अपने दोस्तों से दूर रहने को कह रही हो। पीवीआर लिमिटेड को भारत की सबसे बड़ी फिल्म मनोरंजन कंपनियों में से एक होने के नाते, निस्संदेह इस परिस्थिति का सामना करना पड़ा। इसके शेयर की कीमत जो 2000 रूपये से ऊपर चल रही थी वह फरवरी 2020 के आखिर में आधी रह गई, और अगले कुछ महीनों में आधे से भी कम रह गई।


 सो इसकी परवाह क्यों हैं? वजह यह है: पीवीआर भारत की सबसे पुरानी मनोरंजन कंपनियों में से एक है। इसकी शुरुआत नई दिल्ली स्थित वसंत कुंज की प्रिया एक्सिबिटर्स प्राइवेट लिमिटेड और विलेज रोडशो लिमिटेड से हुई थी। 2006 आईपीओ लाने के बाद से पीवीआर ने मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड दिखाया है। 2008 और 2012 के वित्तीय संकट के बीच, पीवीआर के शेयर की कीमत तीन गुना से अधिक हो गई।
 लेकिन यदि हम 2008 के संकट से उबरने के बाद कीमत के स्तरों को देखें, तो पीवीआर के शेयरधारकों ने अपने निवेश को 11 साल की अवधि में 23 गुना से अधिक कर लिया है। सुनने में अच्छा लगता है। और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय अपनी फिल्मों को गंभीरता से लेते हैं - इसलिए शेयरधारकों को पीवीआर पर गंभीरता से नहीं लेना चाहिए?
2020 की महामारी के बाद, पीवीआर आराम से सुधार हुआ। मई 2020 में जो 732 रूपये के स्तर पर था 2021 की शुरुआत में थोड़े-बहुत फेर-बदल के साथ 1500 रूपये के स्तर पर था। लेकिन महामारी के कुछ स्थायी प्रभाव भी रहे - उदाहरण के लिए, बहुत से लोग दूर से काम कर रहे हैं, और इसी तरह, कई लोग अपने दोस्तों के साथ ऑनलाइन फिल्में देख रहे हैं - जिसे दोस्तों के साथ ऑनलाइन वॉच पार्टी कहा जाता है। और हाँ, वे भी मजेदार हैं! क्या पीवीआर के पास भारतीय शेयर बाजार में अपना गौरवशाली इतिहास वापस हासिल करने का गुंजाइश है? हमारा मानना है कि यह संभव है। 

हालांकि लॉकडाउन ने हमारी मनोरंजन की आदतों को अस्थायी तौर पर बदल दिया है, भारत की 1.3 अरब आबादी लगभग क्रिकेट की तरह ही बॉलीवुड की दीवानी है - और फिनटेक क्षेत्र में क्रेड जैसे सफल स्टार्टअप ने अभियानों के माध्यम से यह ज़ाहिर किया कि अपने पसंदीदा बॉलीवुड सितारों और क्रिकेट के मशहूर खिलाड़ियों के ज़रिये जनता से सफलता से जुड़ना आसान है। महामारी के दौरान भले ही हमने फिल्में अपने नरम बिस्तर में घुसकर देखा हो लेकिन बॉलीवुड का इतिहास बताता है कि महामारी के बाद इसमें तेज़ी आएगी क्योंकि हमारा संक्रमण का डर ख़त्म हो जायेगा। भारत में टीके बनाने की शुरुआत हो रही है सो जल्दी ही लोगों की ज़िन्दगी सामान्य होगी, और फिर से सिनेमाघरों में फिल्में लगेंगी और दोस्तों के साथ मस्ती एक बार फिर हमारे योजना का हिस्सा होगा।
 

दरअसल, पीवीआर के सीईओ कमल ज्ञानचंदानी ने कहा भी है कि उन्हें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2021-22 के अंत तक मात्रा के लिहाज़ से सुधार पूर्व-महामारी के स्तर पर आ जाएगा। इसके अलावा, देश में कई राज्यों ने सिनेमाघरों को अपनी पूर्ण क्षमता के आधार पर काम करने की अनुमति देनी शुरू कर दी है। साथ ही महामारी के दौरान फिल्म तैयार होने में देरी के कारण कई बड़े-बजट वाली संभावित ब्लॉकबस्टर की रिलीज रुक गई। साल 2021 में, कंटेंट पाइप लाइन पहले से ही सूर्यवंशी और 83 जैसे कुछ बड़े नामों से लैस है, और हॉलीवुड से कई फ्रेंचाइजी भी एक साल से अधिक स्नूज़ मोड पर रहने के बाद, इस साल वापसी करेंगे। 

पीवीआर महामारी की मंदी से बेपरवाह है, और इसने 800 करोड़ रूपये जुटाने के लिए 1494 रूपये प्रति शेयर के आधार पर एक क्यूआईपी जारी किया है 


 जो 27 जनवरी के बंद के स्तर से बस एक ही प्रतिशत अधिक है। पीवीआर लिमिटेड के निदेशक मंडल ने दिसंबर के अंत में एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से इस पहल को मंजूरी दी। पीवीआर के सीईओ श्री ज्ञानचंदानी ने यह भी कहा कि मनोरंजन की मांग दबी-दबी बढ़ रही है जो लम्बे समय बाद सामाजिक अलगाव और दूरी ख़त्म होने की प्रतीक्षा में है। और श्री ज्ञानचंदानी के अनुसार यही सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर वापसी में मदद करेगा। 

साथ ही कुछ विश्लेषकों ने पीवीआर के लिए एक स्थिर और धीमी गति से वापसी की भी भविष्यवाणी की है। इसकी वजह कि आमेज़न प्राइम और नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफार्मों पर तेजी से कम हो रही प्रवेश बाधा है, जिन्होंने पिछले साल कुछ बड़ी फिल्में रिलीज़ की हैं। हालांकि, पीवीआर के सीईओ को इस बदलाव से कोई फर्क नहीं पड़ता - उनका मानना है कि ओटीटी और मूवी थिएटर साथ-साथ रहेंगे, और मांग का फीडबैक लूपपैदा करेंगे। क्यूआईपी जारी होने के बाद, कुछ विश्लेषकों ने सुझाव दिया कि करीब 1620 रूपये के लक्ष्य तक निगाह रखें, जबकि अन्य ने पीवीआर लिमिटेड पर तटस्थ रुझान बनाए हुए हैं। 
अच्छा तो अब यहाँ से हमारा क्या रुख हो? जबकि भारी-भरकम कंटेंट लाइनअप का तर्क ठीक है लेकिन बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करता है कि वैक्सीन की आपूर्ति श्रृंखला कितनी प्रभावशाली है, और कितनी जल्दी लोग सिनेमाघरों में बैठने में सहज महसूस करते हैं, फिल्म के बीच में छींक या खांसी से घबराए बगैर। अधिकांश अपने घर से निकलने का फैसला धीमे-धीमे ले रहे हैं और उलझन और सावधानी से गुज़रे हैं, और ऐसे में सिनेमाघरों में फिल्मों की मांग तेजी से पकड़ सकती है को वित्त वर्ष 2019-20 की कीमत और वृद्धि के स्तर पर पहुँचने में समय लग सकता है यहां तक कि मनोरंजन क्षेत्र की पीवीआर जैसी विशाल को भी। भारतीय बाज़ार में और अधिक फायदेमंद शेयर की तलाश है? तो लॉग इन करें www.angelbroking.com पर और सीखते रहें और आगे बढ़ते रहें!

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