SEBI ने म्यूचुअल फंड के लिए रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में संशोधन किया है।

20 दिसम्बर,2021

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SEBI ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (उर्फ म्यूचुअल फंड हाउस) को क्या बदलाव करने के लिए कहा था और निवेशकों को इन बदलावों से क्या फर्क पड़ेगा।

म्यूचुअल फंड हाउस उनके कार्यक्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले कभी भी उनके निवेशकों में इतने खुदरा निवेशक नहीं थे। इसके अलावा, खुदरा निवेशकों को वित्त और शेयर बाजार की पेचीदगियों के बारे में सीमित ज्ञान हो सकता है और शायद नहीं भी हो सकता, इसलिए, वे नियमों को तोड़ने वाले म्यूचुअल फंड को पकड़ने में सक्षम है। खुदरा निवेशक सम्यक् तत्‍परता का अमल कर सकते हैं और सूचित विकल्प चुनने के लिए प्रशिक्षित हो सकते हैं, लेकिन उनके पास फंड हाउस द्वारा किए गए प्रत्येक निवेश का पता लगाने के लिए समझ नहीं हो सकती है और उनके पास यह निर्णय लेने की विशेषज्ञता नहीं हो सकती है कि कोई एसेट मैनेजमेंट कंपनी उनके लिए सर्वोत्तम कार्य नहीं कर रही है। हो सकता है कि वे यह निर्णय करने की स्थिति में न हों कि कब कोई फंड हाउस उच्च संभावित लाभप्रदता के लिए रिस्क मैनेजमेंट को छोड़ रहा हो, जिस से निवेशकों के लिए रिस्क प्रोफ़ाइल उम्मीद से परे बढ़ जाती है।

चिंता न करें। कुछ भी अप्रिय या चिंताजनक नहीं हुआ है। कम से कम अभी तक नहीं हुआ है, और अगर सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो म्यूचुअल फंड हाउस को आगे चलकर बहुत सख्त विनियमों का पालन करना होगा।

SEBI, मार्किट विनियामक, निवेशकों के हितों और निष्पक्ष खेल के प्रहरी और रक्षक, ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है कि म्यूचुअल फंड हाउस विनियमों का पालन करें। यदि आप स्टॉक, बॉन्ड, F&O या म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि सिक्योरिटीज एक्सचेंज ब्यूरो ऑफ इंडिया (SEBI) कैपिटल मार्किट के लिए वही है जो BCCI भारतीय क्रिकेट के लिए है।

SEBI निवेशकों के हितों की रक्षा कैसे कर रहा है, इसे पूरी तरह से समझने के लिए, आपको रिस्क मैनेजमेंट की पूरी समझ होनी चाहिए। आइए म्यूचुअल फंड में रिस्क को समझने से शुरुआत करें।

म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़ा रिस्क क्या है।

असल में बहुत सारे निवेशक, "निवेश करने से पहले ऑफर के दस्तावेज़ को ध्यान से पढ़ें" को नहीं पढ़ते और परिणामस्वरूप, कुछ निवेशक जो अपना पैसा SIP में लगाते हैं, वे यह भी नहीं समझ पाते हैं कि वे म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं और इसलिए स्टॉक मार्किट में शामिल हो जाते हैं, और परिणामस्वरूप, शेयर मार्किट के रिस्क को भी सहन करते हैं।

जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपका कैपिटल अन्य निवेशकों और प्रॉडक्ट विवरण पुस्तिका में नामित फंड मैनेजर के साथ संयोजित हो जाता है - उसकी टीम के साथ - जो आपके कैपिटल को बढ़ाने के लिए शेयर मार्किट में निवेश चुनती है। वे स्टॉक और बांड चुन सकते हैं या वायदा और विकल्प ट्रेडिंग का उपयोग करके हेजिंग का जरिया अपना सकते हैं।

म्यूचुअल फंड आमतौर पर खुद को बहुत उच्च रिस्क, उच्च रिस्क, मध्यम से उच्च रिस्क, मध्यम रिस्क, मध्यम से कम रिस्क, कम रिस्क या बहुत कम रिस्क के रूप में प्रस्तुत करता है। उन्हें रिस्क प्रोफ़ाइल के आधार पर निवेश का चयन करना चाहिए, जिसका वे दावा करते हैं।

स्टॉक उच्च रिस्क वाले होते हैं और बॉन्ड तुलना में कम रिस्क वाले होते हैं। वायदा और विकल्प एक जटिल खेल है और रिस्क इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सी कार्यनीति अपनाते हैं। इस बीच, स्टॉक के भीतर, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक की तुलना में लार्ज कैप स्टॉक अपेक्षाकृत कम रिस्क वाले होते हैं। सरकारी बॉन्ड को कॉरपोरेट बॉन्ड की तुलना में कम रिस्क वाला माना जाता है। लेकिन रिस्क संभावित रिटर्न के समानुपाती भी होता है। और कोई फंड हाउस जितनी रिटर्न देता है उसे उतने अधिक निवेशकों का कैपिटल मिलता है (हालांकि एक निवेशक के रूप में यह म्यूचुअल फंड चुनने का सबसे बढ़िया तरीका नहीं है, इसकी चर्चा अलग से करेंगे)।

आप इसे ध्यान से समझें: प्रतिस्पर्धी रिटर्न देने और एक-दूसरे से आगे निकलने के दबाव में, म्यूचुअल फंड हाउस अपने प्रकाशित रिस्क प्रोफाइल का अनुसरण न करते हुए किसी भारी रिस्क भरे निवेश को भी चुन सकते हैं।

SEBI ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए क्या किया है?

SEBI ने निर्देश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि सभी म्यूचुअल फंड हाउस को रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क बनाना होगा। फंड हाउस द्वारा बनाए गए RMF का उद्देश्य फंड हाउस में कार्यनीति और दैनिक संचालन में प्रक्रियाओं और मैनेजमेंट का मार्गदर्शन करना है।

फंड हाउस के पास RMF लागू करने के लिए अगले साल जनवरी तक का समय है। 2022 में 1 जनवरी तक, भारत की सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को दो काम करने होंगे । 

  1. उनके चालू रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क या कार्यों या नीतियों या प्रक्रियाओं या जो कुछ भी वे कर रहे हैं, उसका स्व-मूल्यांकन पूरा करना। वे इसकी तुलना आंतरिक ऑडिट से कर सकते हैं। 
  2. एसेट मैनेजमेंट कंपनी के रिस्क मैनेजमेंट उपायों के प्रत्येक आधार स्तंभ के लिए विशिष्ट CXO स्तर के मैनेजमेंट अफसरों की नियुक्ति करके जवाबदेही सुनिश्चित करना। जैसे कि, मुख्य निवेश रिस्क मैनेजमेंट अफसर, मुख्य कॉम्पलायन्स रिस्क मैनेजमेंट अफसर, मुख्य IT सिक्योरिटी रिस्क मैनेजमेंट अफसर, मुख्य ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट अफसर आदि होने चाहिए। 
  3. निर्विवाद रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क के लिए रोडमैप तैयार करना, जिसे SEBI को सुधारने की जरूरत न हो।

हाल ही में दो फंड हाउस पकड़े गए हैं और उन पर कार्रवाई की गई है। मिली-जुली कंपनियों में दूसरी एसेट मैनजमेंट कंपनियों के लिए यह पर्याप्त चेतावनी और प्रोत्साहन हो सकती है ताकि वे अपनी कार्यनीतियों को बेहतर बना सकें और अपनी रिस्क मैनेजमेंट प्रतिबद्धता, उपायों, अनुपालन और पालन को बफर कर सकें।

SEBI ने म्यूचुअल फंड के लिए रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में संशोधन क्यों किया?

दो कारणों से: SEBI ने Kotak Mahindra Asset Management और Franklin Templeton, जो कि व्यवसाय में दो बड़े नाम हैं, उन्हें नियमों को तोड़ते हुए पकड़ा है। Kotak Mahindra Asset Management को किसी भी निश्चित आय योजनाओं को घोषित करने से रोक दिया गया था और Franklin Templeton को किसी भी ऋण योजना को लॉन्च करने से रोक दिया गया था (जो बॉन्ड से जुड़ी हुई हैं और इसलिए निश्चित आय की ओर भी विचलित हो सकती हैं)।

म्यूचुअल फंड सलाहकार समिति ने सेक्टर स्तर की सिफारिशों और बदलाव के आह्वान के आधार पर यथास्थिति की समीक्षा की।

निवेशकों को इससे क्या फर्क पड़ेगा।

हालांकि हम यह सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं कि SEBI के उपाय म्यूचुअल फंड हाउस और उनके हाथ में पहले से ही मौजूद निवेशक कैपिटल और भविष्य के निवेश को कैसे प्रभावित करेंगे, निम्नलिखित चीज़ों की उम्मीद की जा सकती है

  • उच्च खर्च का अनुपात।  

उन सभी CXO स्तर के अफसरों की नियुक्ति और ऐसे पदों पर दिए जाने वाले वेतन और भत्तों के कारण, आप उम्मीद कर सकते हैं कि फंड हाउस अपनी ऑपरेशनल लागत में प्रभावशाली वृद्धि देखेंगे। आपको क्या लगता है कि पैसा कहाँ से आएगा?  उम्मीद है कि जो कुछ भी होगा सब के लिए उपयुक्त होगा लेकिन उच्च खर्च के अनुपात (जो वह शुल्क है जो आप अपने कैपिटल को मैनेज करने के लिए फंड हाउस को देते हैं) के माध्यम से संभावित रूप से अधिक शुल्क देने के लिए तैयार रहें।

  • म्यूचुअल फंड से तर्कसंगत रिटर्न मिलना जिन्हें कार्यनीति को सही करने की जरूरत है ।

ऐसे म्यूचुअल फंड जो रिस्क मैनेजमेंट प्रतिबद्धताओं को ठीक से नहीं बताते हैं, नियमों के विरुद्ध जाते हैं या नियमों को स्पष्ट रूप से तोड़ते हैं, मजबूरी में विनियमों का पालन करते हुए कम समय में तर्कसंगत रिटर्न दे सकते हैं, क्योंकि नई कार्यनीतियों का खाका अभी भी तैयार किया जा रहा है।

  • आने वाले समय में सुरक्षा । 

निवेशक प्रकाशित रिस्क प्रोफ़ाइल के उच्च स्तर के पालन की उम्मीद कर सकते हैं जो उनके पास होने का दावा म्यूचुअल फंड करते हैं। ताकि निवेशकों को बिना जाने-समझे उतने से ज्यादा रिस्क न उठाना पड़े, जितना कि उन्हें बताया गया था।

निष्कर्ष:

SEBI ने हमेशा निवेशकों की सुरक्षा के लिए काम किया है और अब रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में कई बदलावों से म्यूचुअल फंड के निवेशकों को और राहत मिलेगी।

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