शिव नादर: सफलता की कहानी

13 अगस्त,2022

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जानें कि अरबों डॉलर के एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ साम्राज्य के मालिक शिव नादर कौन हैं।

शिव नादर - प्रारंभिक वर्ष

आप शायद यह बात नहीं मानेंगे कि इस भारतीय अरबपति उद्योगपति का जन्म किसी अमीर परिवार में नहीं हुआ था| उनका जन्म 14 जुलाई, 1945 को दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्थित एक गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता वामा सुंदरी देवी और शिव सुब्रमण्यम नादर ने उन्हें तमिलनाडु के कई अलग-अलग स्कूलों में भेजा था। बाद में, नादर ने मदुरई के अमेरिकन कॉलेज से पूर्व-विश्वविद्यालय की डिग्री और कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।

करियर बनाया

एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक ने 1967 में वालचंद ग्रुप के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे से अपना करियर शुरू किया। इसके बाद, उन्होंने कूपर इंजीनियरिंग कंपनी में काम किया और फिर दिल्ली क्लॉथ मिल्स के डिजिटल प्रोडक्ट यूनिट में नौकरी शुरू की| उस समय, यह कंपनी देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी थी।

इस दौरान, नादर ने दफ्तर में लंबे घंटों तक काम किया जिससे उन्हें एहसास हुआ कि यह वह कार्य नहीं है जो वह करना चाहते थे। उन्होंने डीसीएम के कैलकुलेटर डिवीज़न से अपने कुछ सहयोगियों को जुटाया और उन्होंने मिलकर अपनी कंपनी शुरू की।

माइक्रोकॉम्प - सही दिशा में एक कदम

वर्ष 1975 में नादर ने माइक्रोकॉम्प लिमिटेड नामक अपनी कंपनी शुरू की जिसमें उन्होंने अपने कई मित्रों और सहयोगियों को पार्टनर बनाया। इन पार्टनर्स में सुभाष अरोड़ा, महेंद्र प्रताप, योगेश वैद्य, डीएस पुरी, एस. रमन, अर्जुन मल्होत्रा ​​और अजय चौधरी शामिल थे। शिव नादर की भागेदारी सबसे ज़्यादा थी क्योंकि वे कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर थे। माइक्रोकॉम्प घरेलू बाज़ार में टेलीडिजिटल कैलकुलेटर की बिक्री करता था| 

एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ की नींव

1976 में, शिव नादर ने देखा कि देश में कंप्यूटर की मौजूदगी का अभाव है। आईबीएम इस समय राजनीतिक मुद्दों के कारण भारत में काम बंद कर रहा था जिससे स्थिति और भी खराब हो सकती थी। इस स्थिति ने शिव नादर के लिए एक ऐसा रास्ता खोला जिसकी उन्हें ज़रूरत थी। वास्तव में, उन्हें देश में एक तकनीकी क्रांति को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है।

नादर ने 18,700 रुपये के निवेश के साथ एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ की शुरुआत की। उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार शिव नादर की तकनीकी आकांक्षाओं से प्रभावित हुई और उन्हें 20 लाख रुपये दिए। ये पैसे एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ में 26 फीसदी हिस्सेदारी के बदले दिए गए थे। क्योंकि यह कंपनी देश की पहली सार्वजनिक-निजी पार्टनरशिप में से एक थी, इसलिए यह सुझाव दिया गया कि एचसीएल का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कंप्यूटर लिमिटेड कर दिया जाए। लेकिन नादर इससे असहमत थे क्योंकि उन्हें लगा कि हिंदुस्तान कंप्यूटर लिमिटेड व्यापक रूप से देश के साथ जुड़ा हुआ लगता है| 

पर्सनल कंप्यूटर की लॉन्च - एचसीएल 8सी

IBM और Apple Inc से पहले, HCL ने 1978 में भारत में सबसे पहला PC, HCL 8C लॉन्च किया था। इस PC में Rockwell PP 8 माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया था और इसमें एक शक्तिशाली सॉर्ट/मर्ज पैकेज के साथ BASIC भाषा थी। मध्यम साइज़ की कंपनियां इस पीसी से अपनी आईटी ज़रूरतों को पूरा कर सकती थीं। इस पीसी के लॉन्च से पहले, देश में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश कंप्यूटर आईबीएम 1401 थे जिन्हें एयर कंडीशनिंग से लैस एक बड़े डेटा सेंटर की आवश्यकता थी। आईबीएम 1401 पीसी धीमा था और इसकी लीज़ में हर साल 500,000 रुपये खर्च होते थे| इसके विपरीत, HCL 8C को तुरंत खरीदा जा सकता था और इसकी कीमत INR 300,000 थी।

ग्लोबल मार्केट में जगह बनाना

शिव नादर आईटी क्षेत्र में तेज़ी से विकास देख रहे थे और इसलिए उन्होंने अपने व्यवसाय को विदेश में फ़ैलाने की रणनीति बनाई। उन्होंने सिंगापुर में आईटी सर्विसेज़ से शुरुआत की और फिर फार ईस्ट कंप्यूटर की स्थापना की। इस समय, HCL का वैल्यूएशन INR 3 करोड़ था| सिंगापुर में एक वर्ष के भीतर ही, कंपनी ने INR 10 लाख की बिक्री की। इसके कुछ साल बाद, एचसीएल ओवरसीज़ लिमिटेड को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सर्विस प्रोवाइडर के रूप में स्थापित किया गया और बाद में इसका नाम बदलकर एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड कर दिया गया।

युवाओं को आईटी करियर के लिए तैयार करना

इस समय के दौरान, अरबपति उद्योगपति ने आईटी क्षेत्र के जॉब मार्केट और नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले युवाओं के कौशल में एक अंतर देखा। इस अंतर को मिटाने के लिए, शिव नादर ने चेन्नई में एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग खोला और इसे शेयरों में लगभग मिलियन INR प्रदान किया।

अपने स्वर्गीय पिता की याद में खोले गए इस कॉलेज को लेकर नादर ने 2006 में घोषणा की कि यह कॉलेज रिसर्च को बढ़ावा देगा और इसके छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ टाई उप से लाभ मिलेगा। 2008 में, उनके एसएसएन ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश में दो विद्याज्ञान स्कूल स्थापित किए जो ग्रामीण छात्रों के लिए थे। यहां प्रदेश के 50 जिलों के 200 विद्यार्थियों को फ्री स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी|

एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ और इसका उपयोग

एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ ने 261 शहरों में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को स्वचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त, इसने बोइंग ड्रीमलाइनर के फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम्स में भी मदद की है। वर्तमान में, एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ देश के सबसे मूल्यवान आईटी प्लेयर्स में से एक है। इस कंपनी के कई डिलीवरी सेंटर और इनोवेशन लैब हैं। यह ऑटोमेशन, कैपिटल मार्किट, बैंकिंग, रक्षा, हॉस्पिटैलिटी, माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और कई अन्य क्षेत्रों में काम करती है।

अंतिम विचार

शिव नादर का उल्लेख उनकी नींव का उल्लेख किए बिना नहीं किया जा सकता है, जो है - शिव नादर फाउंडेशन - जिसे 1994 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य एक निष्पक्ष और योग्यता-आधारित समाज बनाना है जिसमें शिक्षा के माध्यम से व्यक्तियों को सशक्त बनाकर सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर किया जा सकता है। एक रचनात्मक परोपकार को महत्व देते हुए, इस फाउंडेशन को ऐसे संस्थान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अपने संस्थापकों को समर्पित हैं और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। एंजेल वन वेबसाइट पर आज ही अन्य प्रेरणादायक व्यक्तियों के बारे में जानें।

 

 

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है, महज़ जानकारी प्रदान करना न कि इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई सलाह/सुझाव प्रदान करना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने -बेचने की सिफारिश करना।

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