क्या आपको आईटीसी पर दांव लगाना चाहिए?

20 May, 2021

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क्या आपको आईटीसी पर दांव लगाना चाहिए? - स्मार्ट मनी
शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी कंपनी के प्रदर्शन, बुनियादी तत्वों और बाजार की अन्य मौजूदा स्थितियों के आधार पर चतुराई से फैसला कर अपनी संपत्ति में अधिक से अधिक बढ़ोतरी करें।

हालांकि, कुछ कंपनियों के मामले में, नियम इतने आसान नहीं हैं। यहाँ बहस के केंद्र में आईटीसी है, जो एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी है। इस कंपनी की तंबाकू, एफएमसीजी, होटल और इन्फोटेक क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति है। कंपनी का नाम 1974 इंडिया टोबैको कंपनी से आईटीसी कर दिया गया था, लेकिन आज भी यह अपनी सिगरेट विक्रेता की छवि के बोझ से दबी है। 

तंबाकू कंपनी होने के खतरे और संघर्षरत हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र

आईटीसी में निवेश करने का फैसला मुश्किल है क्योंकि कंपनी कुछ क्षेत्रों में अच्छा कर रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में कुछ हद तक दबाव में है। निवेशक न केवल इसकी सिगरेट के कारोबार की छवि के कारण इसमें निवेश करने से कतराते हैं, बल्कि भारी-भरकम कर की भी इसमें भूमिका है जिससे सिगरेट की कीमत बढ़ती है। इसके अलावा, आईटीसी के लक्जरी होटल व्यवसाय को कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन से पैदा स्थितियों से भी झटका लगा है। 

सिगरेट कंपनी

निवेशकों को लगता है कि एक व्यावसायिक निर्माण तंबाकू सामान को हानिकारक मानते हैं। आईटीसी की कुल बिक्री में सिगरेट का 45 प्रतिशत योगदान है, इसलिए यह कई व्यापारियों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, सिगरेट पर लगाए जाने वाले दंडात्मक कर - जो प्रायः हर वार्षिक बजट के साथ बढ़ते हैं - निवेश को हतोत्साहित कर सकते हैं क्योंकि इस तरह की बढ़त से सिगरेट के खुदरा मूल्य में बढ़ोतरी होती है। 

जनवरी 2021 में प्रकाशित नए सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2020 का मसौदे ने आईटीसी स्टॉक की कीमत को एक और झटका दिया है। प्रस्तावित कानून धूम्रपान की न्यूनतम आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रयास करता है, सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करने और ढीली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। 

 हालांकि इस घोषणा का प्रभाव आईटीसी के शेयर की कीमत पर कुछ समय के लिए महसूस किया गया, लेकिन लम्बे समय तक इसका असर नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए है कि इस तरह के महत्वाकांक्षी कानून को लागू करना बेहद मुश्किल होगा। 

ईएसजी नॉर्म्स

पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (ईएसजी) ने हाल के वर्षों में दुनिया भर में तंबाकू विनिर्माण से जुड़े शेयरों की कीमत को बेहद प्रभावित किया है, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान निवेश के लिए ऐसी फर्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो ऐसे गवर्नेंस का अधिक पालन करते हैं। स्वाभाविक रूप से, ईएसजी अनुपालन आईटीसी शेयरों की कीमत को भी प्रभावित करता है। 

वैश्विक इन्वेस्टमेंट बैंकर मॉर्गन स्टेनली ने आईटीसी को एए ईएसजी रेटिंग दी है, जो अंतरराष्ट्रीय तंबाकू कंपनियों में सबसे अधिक है। जून 2017 में, आईटीसी की एफआईआई होल्डिंग 20 प्रतिशत थी, और दिसंबर 2019 में घटकर यह 15 प्रतिशत रह गई। आईटीसी की ज़बर्दस्त रेटिंग के बावजूद, ठोस कचरे की रीसाइक्लिंग और पानी तथा कार्बन से जुड़ी सस्टेनेबल नीतियों से जुड़ी कई तरह की नीतियों के अनुपालन के बावजूद, यह निवेशकों पर छाप छोड़ने में विफल रहा है। 

दीर्घकालिक अंडरपरफॉर्मेंस

आईटीसी अपने मूल्यांकन की तुलना अपनी प्रतिस्पर्धी एफएमसीजी कंपनियों से नहीं करती है, बावजूद इसके कि कंपनी की 60 प्रतिशत आय गैर-सिगरेट उत्पादों की बिक्री से होती है। दरअसल, इस बिक्री का कंपनी के मुनाफे में केवल 15 प्रतिशत योगदान है। एफएमसीजी कारोबार में लगभग 20 साल से अधिक समय तक रहने के बावजूद, आईटीसी के एफएमसीजी कारोबार का प्रदर्शन इसके तम्बाकू कारोबार की तरह नहीं रहा है। 

होटल

कोविड-19 महामारी के कारण हॉस्पिटैलिटी उद्योग पर असर हुआ है। नतीजतन, आईटीसी के होटलों को भी लॉकडाउन और कोविड-19 की दूसरी लहर का खामियाज़ा भुगतना पड़ा। इसके अलावा, निवेशकों की यह चिंता बरकरार है कि कंपनी अपने नकदी प्रवाह का काफी बड़ा हिस्सा होटल जैसे नियोजित पूंजी पर कम मुनाफे (आरओसीई) वाले कारोबार पर खर्च करती है। हालांकि, अपने ब्रांड मूल्य, मैनेजमेंट की रणनीति और गुणों के कारण आईटीसी होटलों में काफी संभावनाएं हैं। 

मैनेजमेंट ने पहले कहा भी था कि वे केवल होटल क्षेत्र में मौजूदा परियोजनाएँ पूरी करेंगे और कोई नई योजना शुरू नहीं करेंगे या आरओसीएल कारोबारों के लिए पूंजी का उपयोग नहीं करेंगे। हालांकि, तथ्य यह है कि कंपनी का कारोबार अब इसके एफएमसीजी क्षेत्र से प्रेरित है। 

एफएमसीजी में विस्तार और एक डीमर्जर की सुगबुगाहट

महामारी ने जहाँ होटल क्षेत्र को नुकसान पहुँचाया है, वहीं इससे इसके एफएमसीजी परिचालन में तेज़ी आई है। इस प्रदर्शन के मद्देनज़र डिमर्जर, या कम से कम आईटीसी के परिचालन कुछ बदलाव की उम्मीद ज़रूर नज़र आती है। इस तरह के फैसले से निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा और आईटीसी की इक्विटी में बढ़त होगी। 

एफएमसीजी

कुल मिलाकर एफएमसीजी क्षेत्र में स्टॉक वैल्यूएशन अधिक है। इस वजह से, आईटीसी के एफएमसीजी खंड में उल्लेखनीय वृद्धि की गुंजाइश है। एफएमसीजी क्षेत्र में हिंदुस्तान यूनिलीवर के निर्विवाद दबदबे के बावजूद आईटीसी के पास दरअसल उपभोक्ता उत्पाद खंड में बाज़ार पर हावी होने के लिए जबरदस्त संसाधन हैं। 

अपने एफएमसीजी खंड को और बढ़ावा देने के लिए आईटीसी ने एक ई-स्टोर लॉन्च किया है। कंपनी के सभी एफएमसीजी उत्पादों को वितरण चैनलों पर निर्भरता के यहाँ पेश किया जा सकता है। इसके अलावा, चूंकि संगठित खुदरा स्टोर एफएमसीजी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं इसलिए आईटीसी ने इस स्टोर के साथ संभावित रूप से एक अलग जगह बनाई है। कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से ऑनलाइन खरीदारी में वृद्धि हुई है। ई-स्टोर से कंपनी के विपणन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है, यदि बिक्री को फ़ौरन कोई प्रोत्साहन न भी मिले तो। थर्ड पार्टी प्लेटफार्मों के बजाय ई-स्टोर पर प्रोत्साहन और छूट दी जा सकती है, जिससे लागत में कमी आती है और मार्जिन अच्छा मिलता है। इसके अलावा, इसकी वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों से उपभोक्ता व्यवहार का भी पता चलेगा और इससे आईटीसी को अपने उपभोक्ताओं को उनकी ज़रुरत के मुताबिक़ पहल करने में मदद मिलेगी। 

 डीमर्जर

माना जाता है कि आईटीसी ने डीमर्जर की योजना बनाई है जिसके तहत उसके होटल, एफएमसीजी और इन्फोटेक खंड अलग-अलग इकाई बन जाएंगे, जिससे शेयरधारकों के लिए सतत मूल्य सृजन होगा। कंपनी ने हालांकि कहा है कि ये अटकलबाज़ी वाली खबरें हैं। इसके बावजूद, खबर बरकरार है और विशेषज्ञ मानते हैं कि डीमर्जर होने पर आईटीसी अपने लाभ वाले क्षेत्रों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएगी। 

कोरोनो वायरस महामारी के दौरान सिगरेट का उत्पादन और आपूर्ति का भारी नुकसान हुआ है। कंपनी को अधिकांश लाभ सिगरेट की बिक्री से होता है इसलिए अप्रैल से जून 2020 के बीच सिगरेट की बिक्री में साल-दर-साल के आधार पर 30 प्रतिशत की गिरावट आई। जैसे, महामारी के कारण पैदा जरूरतों को पूरा करने के लिए आईटीसी ने गैर-तंबाकू क्षेत्र में 100 नए एफएमसीजी उत्पाद पेश किए हैं। 

सितंबर 2020 में समाप्त तिमाही के दौरान एफएमसीजी का कर पूर्व (प्रीटैक्स) मुनाफा 66 प्रतिशत बढ़ा लेकिन सिगरेट के कारोबार में गिरावट बरकरार रही। इसकी शुद्ध आय (नेट रेवेन्यू) में सालाना स्तर पर 14.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ हुई। दूसरी ओर, हैंड सेनिटाइज़र और पर्सनल केयर उत्पादों पर दिसंबर 2020 में उपभोक्ता व्यय बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। 

डिमर्जर की बात ऐसे समय में हो रही है जबकि एफएमसीजी को बढ़त मिली है और सिगरेट तथा होटल कारोबार कमज़ोर पड़े हैं। यदि डीमर्जर होता है, तो शेयरधारक एफएमसीजी जैसे अच्छे प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में निवेश करना चुन सकते हैं क्योंकि इन्हें अनिवार्य रूप से बेहतर फंडिंग मिलेगी। इससे आईटीसी को अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले बेहतर प्रतियोगी बनने में मदद मिलेगी और एक ही खंड पर पूरी कंपनी का बोझ नहीं रहेगा।

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