रतन टाटा के सबसे छोटे सहायक: शांतनु नायडू स्टोरी

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16 मई,2022

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शांतनु नायडू के बारे में जानें और कैसे उनके स्टार्ट-अप ने रतन टाटा का ध्यान आकर्षित किया।

शांतनु नायडू के बारे में जानकारी, रतन टाटा के साथ संबंध

यदि आप भारतीय हैं, तो आपको पहले से ही पता होगा कि रतन नवल टाटा कौन हैं और एक उद्योगपति के रूप में उनकी सफलता के बारे में पता होगा। अमीर परिवार से होने के बावजूद टाटा की विनम्रता और अपने पैसे को कभी हल्के में न लेने की सोच ने उन्होंने दूसरों से अलग किया। उनकी जीवन शैली सीधी-सादी है और वह अपने से कम पैसे वाले के सामने अपनी अमीरी का प्रदर्शन नहीं करते। इसकी एक मिसाल उनका जन्मदिन समारोह है जिसमें सिर्फ एक कप केक और मोमबत्ती दिखी जो उनके नौजवान बिज़नेस असिस्टेंट शांतनु नायडू लेकर आये थे।

शांतनु नायडू की स्टोरी

शांतनु नायडू ने महज 28 साल की उम्र में भी बिज़नेस में बड़ी सफलता हासिल की है। ख़बरों के मुताबिक उन्होंने रतन टाटा को सलाह दिया कि स्टार्ट-अप में उचित तरीके से कैसे इन्वेस्ट किया जाये।

1993 में जन्मे, शांतनु नायडू के पास कई तरह की योग्यता है। वह इंजीनियर, बिज़नेसमैन, एंट्रेप्रेन्योर, राइटर और सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर सभी कुछ हैं। इतना ही नहीं - वह टाटा ट्रस्ट के डिप्टी जनरल मैनेजर भी हैं।

नायडू ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और 2018 में एमबीए किया। वह टाटा समूह के तहत काम करने वाले अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी के सदस्य हैं। उन्होंने पहले टाटा एलेक्सी में डिज़ाइन इंजीनियर के रूप में काम किया था और 2017 के मध्य से टाटा ट्रस्ट में काम कर रहे हैं।

अर्ली एंटरप्रेन्योरियल मूव्स

रतन टाटा के साथ शांतनु नायडू का रिश्ता उस फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुआ। इसमें उन्होंने आवारा कुत्तों के लिए बनाए गए डॉग कॉलर के बारे में लिखा था, जिसमें रिफ्लेक्टर लगे थे, इसे बाद में टाटा के न्यूजलेटर में दिखाया गया था।

यह पहल छात्र संगठन के तहत की गई थी इसलिए इन कॉलर को बनाने के लिए जितने पैसे की ज़रुरत थी वह उनके पास नहीं था। हालांकि नायडू और उनकी टीम ने कई घरों से डेनिम पैंट इकट्ठा किये, ताकि 500 रिफ्लेक्टिव कॉलर बनाए जा सकें और पुणे में कुत्तों को पहनाया जा सके। ये कॉलर इसलिए महत्वपूर्ण थे किउनमें रिफ्लेक्टर सिल दिए गए थे, ताकि सड़क पर ड्राइव करने वाले स्ट्रीटलाइट के दायरे बाहर होने पर भी आसानी से उन्हें देख सकें। यह जीवन रक्षक कदम रहा है और उनके फेसबुक पोस्ट को कई लोगों ने सराहा।

यह स्टोरी एनिमल एक्टिविस्ट रतन टाटा को पसंद आई और उन्होंने नायडू मिलने के लिए बुलाया।

स्टार्ट-अप, शांतनु और "ऑन योर स्पार्क्स"

जैसा कि ऊपर बताया गया है, शांतनु नायडू रतन टाटा को निजी इन्वेस्टमेंट स्टार्ट-अप शुरू करने के बारे में सलाह देते रहे हैं। रतन टाटा की खुद भी भारत के स्टार्ट-अप्स में दिलचस्पी है। उनके समर्उथन से बहुत से लोगों ने वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज़ की।

नायडू "ऑन योर स्पार्क्स" यूजरनेम नाम से एक इंस्टाग्राम अकाउंट भी चलाते हैं, जिसे देश भर के युवाओं को अपनी इंट्रेप्रेन्योरशिप का सफ़र शुरू करने और इससे जुड़े डर छोड़ने के लिए प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कोरोना की महामारी के बीच, शांतनु नायडू ने अपना वेंचर शुरू करने के इच्छुक लोगों को प्रेरित करने के लिए ऑनलाइन डिस्कशन की मेजबानी करना शुरू कर दी। उनके डिस्कशन अक्सर उनके अपने अनुभवों के इर्द-गिर्द होते है ताकि दूसरों के लिए समझना आसान हो। हर रविवार को वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लाइव सेशन करते हैं जिसमें भाग लेने वाले से 500 रुपये का शुल्क लिया जाता है। इस पैसे को मोटोपॉज़ नामक उनकी डॉग कॉलर से जुड़ी पहल में लगाया जाता है जो चार देशों के 20 से अधिक शहरों में चल रही है।

निष्कर्ष

मोटोपॉज के संस्थापक, शांतनु नायडू बेहद कम उम्र के हैं, इसलिए अभी उनकी जीवनी शुरू ही हुई है। जो रतन टाटा के साथ उनके संबंध के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, वे "आई केम अपॉन ए लाइटहाउस" नामक उनकी किताब पढ़ सकते हैं। उनका अब तक का जीवन देश भर के नौजवानों को वह करने के लिए प्रेरित कर रहा है जिसके प्रति उनमें लगन है।  

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है, महज जानकारी प्रदान करना न कि इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई सलाह/सुझाव प्रदान करना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने -बेचने की सिफारिश करना।

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