पेटीएम के फाउंडर और सीईओ विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी

09 सितम्बर,2021

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यह भारत के दूसरे सबसे कम उम्र के अरबपति - विजय शेखर शर्मा, और उनके ब्रेन चाइल्ड, पेटीएम के सफ़र की कहानी है, जिसने भारत में डिजिटल पेमेंट्स और फिनांशियल सर्विसेज़ में क्रांति ला दी।

पिछले दशक में, भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों (एमएनसी) और इंट्रेप्रेन्योर की तादाद बढ़ी, ग्रोथ और नेटवर्क दोनों के लिहाज़ से।   यदि आपने पिछले आधे दशक में भारतीय स्टार्टअप्स पर गौर किया हो, तो पेटीएम और उसके सक्सेसफुल सीईओ - विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी ऐसी नहीं है, जो आपकी नज़र से चूक जाए। पेटीएम को भारत में ई-वॉलेट इको-सिस्टम का अग्रणी माना जाता है, और पेटीएम के बाद उभरे अन्य ई-वॉलेट से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद यह अभी भी फल-फूल रहा है।

विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी - पेटीएम के सीईओ, पेटीएम की सक्सेस स्टोरी के साथ करीब से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं वह फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीयों की 2020 की लिस्ट के मुताबिक 2.35 बिलियन अमरीकी डालर के नेट-वर्थ के साथ आज भारत की दूसरे सबसे कम उम्र के अरबपति हैं। आइए विजय शेखर शर्मा के शुरुआती जीवन, शिक्षा और उनेक पेटीएम के सपने को साकार करने से जुड़े संघर्ष पर नज़र डालते हैं।

विजय शेखर शर्मा का शुरूआती जीवन और एजुकेशन

भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर अलीगढ़ में आर्थिक रूप से पिछड़े समाज से ताल्लुक रखने वाले विजय शेखर शर्मा का जन्म एक मामूली मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था जो एजुकेशनल वैल्यू पर बहुत जोर देते थे। साथ ही, उनके पिता स्कूल में टीचर थे इसका मिस्टर शर्मा होनहार छात्र होने में बहुत योगदान था। उनकी पूरी स्कूली शिक्षा हिंदी मीडियम में हुई, और उन्होंने कॉलेज में एडमिशन के लिए बेसिक इंग्लिश लैंग्वेज स्किल की कमी की बाधा को जल्दी और कॉन्फिडेंस से पार कर लिया। अपनी पॉलिश्ड इंग्लिश स्किल के साथ, मिस्टर शर्मा ने दिल्ली के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया।

पेटीएम के सीईओ के जीवन ने अजूबा मोड़ लिया। वह होनहार स्टूडेंट से मामूली ग्रेड वाले स्टूडेंट बन गए। इसी दौरान उनके अन्दर इंट्रेप्रेन्योरशिप ख्याल उभरने लगे।

सक्सेसफुल इंट्रेप्रेन्योरशिप की स्टोरीज़ से प्रेरित

1990 के दशक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान, विजय शेखर शर्मा की इंट्रेप्रेन्योरशिप में रूचि एपल, एचपी, इंटेल जैसे मेगा-ब्रांडों की सक्सेस स्टोरीज़ से शुरू हुई, जो स्टार्टअप इकोसिस्टम में सबसे बड़े नाम बन गए।  उन्होंने महसूस किया कि इन सभी फर्मों की सक्सेस स्टोरीज़ सिलिकॉन वैली से शुरू हुई जो उस समय की स्टार्टअप फैक्ट्री थी। मिस्टर शर्मा ने सिलिकॉन वैली से जुड़ने का सपना देखा था, लेकिन रिसोर्सेज़ की किल्लत के कारण, उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि भारत में ही एक ऐसा ईको सिस्टम बनाना चाहिए।

इंट्रेप्रेन्योरशिप सफ़र - संघर्ष और मौके

अपने कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ, उन्होंने एक्सएस कॉर्पोरेशन नाम की अपनी कंटेंट मैनेजमेंट कंपनी शुरू की। यह एक वेब पोर्टल और एक सर्च इंजन था जो इंटरनेट-बेस्ड सर्विसेज़ देता था जिनमें वेब डिक्शनरी भी शामिल थी। कंपनी द इंडियन एक्सप्रेस जैसे भारत के कुछ मशहूर अखबारों से जुड़ी हुई थी। कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी और फरवरी-मई 1999 के बीच 50 लाख रुपये का कारोबार करने में सफल रही।  बाद में उन्होंने अपनी कंपनी को पांच लाख डॉलर में बेच दिया और इसे अपने चार पार्टनर्स के बीच बराबर-बराबर बांटा।

इसी दौरान उनकी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई और उन्होंने एमएनसी की अपनी पहली की, बस छह महीने बाद नौकरी छोड़ भी दी। उन्होंने थोड़ा मुश्किल काम करने की ठानी।

वन 97 और पेटीएम का आगमन

अपनी पहली नौकरी छोड़ने के बाद, विजय शेखर शर्मा ने 2001 में वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड की सह-स्थापना की जो एक मोबाइल वैल्यू एडेड सर्विसेज़ कंपनी थी और पेटीएम की मूल कंपनी भी। इसे वन97 कहा जाता था, क्योंकि यह उस समय बीएसएनएल की डायरेक्टरी एन्क्वायरी सर्विस नंबर था। बदकिस्मती से, 9/11 हमला हुआ और उनके सारे साथी छोड़ गए और वह अकेले रह गए। उनके पास पैसे नहीं थे, और परिवार की ओर से ठीक सी नौकरी ढूँढ कर महज 25 साल की उम्र में शादी करके घर बसाने का दबाव था।

पारिवारिक दबाव में उन्होंने केवल गुज़ारा करने के लिए कंसलटैंट के तौर पर नौकरी कर ली। किल्लत के दिनों में भी दिमाग टेलिकॉम सेक्टर में इनोवेशन पर लगा रहा जब स्मार्टफोन बेहद लोकप्रिय हो गए थे। वन97 के ज़रिये उन्होंने प्लास्टिक कार्ड का उपयोग कम करने और पेटीएम से लोगों का जीवन आसान का फैसला किया। पेटीएम मोबाइल वॉलेट है जो स्मार्टफोन या इसके वेब पोर्टल से जुड़ सकता है।

पेटीएम के साथ, वन97 ने इंटरनेट के तीन प्रमुख क्षेत्रों - कंटेंट, एडवरटाइजिंग और कॉमर्स में पहुंच बनाई और बाहरी फंडिंग के अपने दम पर 20 लाख अमेरिकी डालर जुटाए। आज, पेटीएम की सक्सेस स्टोरी भारत में ई-वॉलेट स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का पर्याय है, जिसका सपना मिस्टर शर्मा ने देखा था। पेटीएम पेमेंट्स बैंक पहला प्लेटफॉर्म है जो यूपीआई पेमेंट्स और ऑनलाइन शॉपिंग के अलावा जीरो-बैलेंस अकाउंट फैसिलिटी देने वाला पहला प्लेटफॉर्म है।

मिस्टर शर्मा मिसाल बन गए

विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी उन्हें पेटीएम के ऑपरेशन को बढ़ाकर फिनांशियल सर्विसेज़ के दायरे में प्रवेश करने के लिए प्रेरित करती है ताकि एक अरब भारतीयों के जीवन तक पहुँच बनाई जा सके । इन सर्विसेज़ में छोटे और मंझोले इंटरप्राइजेज़ (एसएमई) को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद करने के लिए डिजिटल फिनांशियल टेक्नोलॉजी प्रदान करना शामिल है।  नए लक्ष्यों के साथ, वह एक न्यू-आगे फिनांशियल सर्विसेज़ कंपनी भी बनाना चाहते हैं जो लाखों छोटे कारोबारियों को बैंकिंग, बीमा, म्यूचुअल फंड, स्टॉक और पेमेंट्स प्लेटफॉर्म प्रदान करे। पेमेंट्स और फिनांशियल सर्विसेज़ के साथ, पेटीएम सबसे आकर्षक कंपनी बनी हुई है, जो हाल में जुड़े रेवेन्यु स्ट्रीम से सही साबित ही हो रहा है।

पेटीएम का ट्रांजैक्शन वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 40-45 करोड़ प्रति माह हो गया जो वित्त वर्ष 2014-2015 में 4 करोड़ प्रति माह था। साथ ही, करीब1.7 करोड़ मर्चेंट इसकी पेमेंट्स और फिनांशियल सर्विसेज़ का उपयोग कर रहे हैं। इधर पेटीएम का रेवेन्यु भी वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 4,217 करोड़ रूपये हो गया जो वित्त वर्ष 2016-17 में 780 करोड़ रूपये था। अलग-अलग तरह के रेवेन्यु स्ट्रीम के साथ, पेटीएम अपनी फिनांशियल और डिजिटल पेमेंट्स सर्विसेज़ के विस्तार के साथ सिर्फ और ऊंचे लक्ष्य को प्राप्त करने की ही सोच सकती है।

बॉटम लाइन

विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी धैर्य, दृढ़ संकल्प, कठिनाई और स्मार्ट तरीके से काम करने से तैयार हुई। इन सब ने पेटीएम की सक्सेस स्टोरी का रास्ता साफ़ किया।  लेंडिंग और फिनांशियल सर्विसेज़ की पेशकश के अलावा, पेमेंट्स प्लेटफॉर्म होने के नाते, पेटीएम ट्रेन टिकट से लेकर एयर प्यूरीफायर बेचने में मदद करता है। और तो और एक ऑनलाइन गेमिंग की भी सुविधा प्रदान करता है। कंपनी ने, निश्चित तौर पर, टॉप पर पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पेटीएम की सक्सेस स्टोरी हर मोड़ पर चुनौतियों से भरी रही है और विजय शेखर शर्मा की सक्सेस स्टोरी का एक महत्वपूर्ण सबक यह है कि कभी हार न मानें और मुश्किलों के बावजूद काम करते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. पेटीएम क्या है?

पेटीएम का फुल फॉर्म है 'पे थ्रू मोबाइल'। यह ई-कॉमर्स वेबसाइट के साथ-साथ ऐप है जो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के ज़रिये ऑनलाइन पेमेंट और शॉपिंग की सुविधा प्रदान करता है।

2. पेटीएम की स्थापना कब हुई थी?

पेटीएम को विजय शेखर शर्मा ने 2010 में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज सुविधा के रूप में लॉन्च किया था, और बाद में 2014 में पेटीएम वॉलेट लॉन्च किया गया था। पेटीएम का लक्ष्य कैशलेस और डिजिटल इकॉनमी में मदद करना था और इसे सही मायने में सक्सेस 2016 में डीमोनेटाइज़ेशन के बाद मिली, जब 500 रूपये और 1000 रुपये के नोट बंद कर दिए गए।

3. पेटीएम में प्रमुख इन्वेस्टर्स कौन हैं?

रतन टाटा ने 2015 में अपनी निजी संपत्ति पेटीएम में इन्वेस्ट की थी। चीन के अलीबाबा ग्रुप और ऐन्ट फिनांशियल सर्विसेज़ ग्रुप और अन्य पेटीएम के प्रमुख इन्वेस्टर्स हैं।

4. पेटीएम की प्रमुख सर्विसेज़ क्या हैं?

पेटीएम ऑनलाइन शॉपिंग, मूवी, होटल और यात्रा टिकट रिजर्वेशन और पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज, पानी और बिजली जैसे कंज़्यूमर बिल के भुगतान आदि जैसी प्रमुख सर्विसेज़ प्रदान करता है।

5. पेटीएम पेमेंट्स बैंक क्या है?

पेटीएम भुगतान बैंक आरबीआई द्वारा लाइसेंस प्राप्त भारत का पहला पेमेंट बैंक है, और यह ऑनलाइन बैंकिंग जैसी बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ नए और पहले से मौजूद पेटीएम ग्राहकों को मनी ट्रान्सफर, सेविंग अकाउंट, डेबिट कार्ड और अन्य फिनांशियल सर्विसेज़ प्रदान करता है।

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