गूगल के सीईओ सुंदर पिचई की सक्सेस स्टोरी

01 अप्रैल,2022

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इस आर्टिकल में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के करियर और शुरुआती जीवन का वर्णन है।

यदि आपने कभी कुछ देखने के लिए इंटरनेट का उपयोग किया हो, तो संभव है कि आपने गूगल के सर्च इंजन का उपयोग ज़रूर किया होगा। आज, गूगल को एक मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में जाना जाता है जो सर्च इंजन से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग तक इंटरनेट से जुड़ी कई तरह की सर्विसेज़ और प्रोडक्ट की पेशकश करती है और साथ ही इनके बीच की कई चीज़ें इनमें शामिल होती हैं। सुंदर पिचई ने 2015 (और 2019) से गूगल इंक के साथ-साथ इसकी मूल कंपनी, अल्फाबेट इंक. के सीईओ के रूप में भी काम किया है। इस आर्टिकल में आपको उन स्टेप के बारे में बताने की कोशिश की गई है जिनके कारण उन्हें यह भूमिका मिली।

सुंदर पिचई की लाइफ स्टोरी - शुरुआती जीवन और शिक्षा

भारत के तमिलनाडु राज्य में 1972 में जन्मे सुंदर पिचई ने बाद में जीवन में बहुत कुछ हासिल किया है। वह एक मामूली पृष्ठभूमि में पले-बढ़े, लेकिनउनके माता-पिता ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें और उनके भाई-बहनों को अच्छी शिक्षा मिले। टेक्नोलॉजी में उनकी रुचि थी इसलिए उन्होंने 1993 में आईआईटी खड़गपुर से मेटलर्जी में डिग्री हासिल की। फिर उन्हें स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने का मौका मिला क्योंकि उन्हें इंजीनियरिंग पर केंद्रित मास्टर ऑफ साइंस प्रोग्राम में स्कॉलरशिप मिली थी जो मटीरियल साइंस पर केन्द्रित थी। वह 1995 में डिग्री पूरी होने के बाद अमेरिका में ही रह गए और फिर उन्होंने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया।

गूगल में कॉर्पोरेट लैडर चढ़ना

हालाँकि पिचई ने मैकिनज़ी एंड कंपनी में कुछ समय के लिए काम किया, लेकिन 2004 में वह गूगल चले गए, जहाँ वह प्रोडक्ट मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट के प्रमुख रहे। उनके पहले प्रोजेक्ट्स में एक गूगल टूलबार पर केंद्रित थाजो माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर और मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स वेब ब्राउज़र का उपयोग करने वालों के काम का था और जिसने गूगल सर्च इंजन को आसानी से एक्सेस करना संभव बना दिया।

इसके तुरंत बाद, पिचई ने क्रोम नामक गूगल के इन-हाउस ब्राउज़र को विकसित करने पर काम किया, जिसे 2008 में रिलीज़ किया गया था। इस वर्ष पिचई प्रोडक्ट डेवलपमेंट के वाईस प्रेसिडेंट बने, जिसका मतलब था कि वे पब्लिक रोल में ज़्यादा निभाने लगे। चार साल बाद वह सीनियर वाईस प्रेसिडेंट बन गए। 2014 तक उन्हें गूगल के साथ-साथ एंड्रॉइड स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए प्रोडक्ट चीफ की भूमिका सौंपी गई।

समझा जाता है कि सुंदर पिचई ने गूगल को 3.2 बिलियन अमरीकी डालर के सौदे पर बातचीत करने में मदद की, जिसके कारण कंपनी ने 2014 में नेस्ट लैब्स का अधिग्रहण किया। इस वजह से जब लैरी पेज और गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन ने अगस्त 2014 में अल्फाबेट इंक बनाने का फैसला किया। पिचई को गूगल के सीईओ की भूमिका सौंपी गई थी जो अब अल्फाबेट इंक की सहायक कंपनी के रूप में कार्य करता है। जब पेज ने 2019 में अल्फाबेट के सीईओ का पद छोड़ दिया, तो पिचई ने भी उनकी भूमिका संभाली।

पिचई के टेक्नोलॉजी संबंधीी योगदान का आकलन

पिचई की इच्छा थी कि गूगल का अपना वेब ब्राउज़र हो लेकिन कंपनी के प्रमुख निवेशकों में से एक ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन अंततः वह कंपनी के संस्थापकों को इसे बनाने के लिए मनाने में सक्षम थे, और बाद में 2006 में यह बना। उस साल माइक्रोसॉफ्ट ने गूगल सर्च इंजन को इंटरनेट एक्सप्लोरर वेब ब्राउज़र से हटा दिया और इसकी जगह बिंग को जगह दी। गूगल को बड़ा झटका लगा क्योंकि उसे इंटरनेट एक्सप्लोरर के ज़रिए से रोज़ बहुत ट्रैफ़िक मिलता था, जिसका मतलब था कि वह पहले हर दिन लाखों डॉलर की कमाई कर पाता था।

पिचई, हालांकि, अपनी टीम के साथ इस बाधा पर काबू पा सके। इसके 24 घंटे के भीतर उन्होंने एक लूप-होल सर्च बनाया जिसके ज़रिये गूगल सर्च इंजन बिंग का उपयोग करने वालों के लिए एक पॉप-अप विंडो पर फिर से दिख सकता था। इसका मतलब यह हुआ कि कंपनी अपने 60 प्रतिशत यूजर्स को फिर से हासिल करने में कामयाब रही, जिन्होंने अब एक बार फिर से गूगल का उपयोग किया है।

एक कंपनी के रूप में गूगल ने भविष्य में होने वाले इस तरह के आश्चर्यजनक हमले को रोकने के उद्देश्य से कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। कंपनी ने यह सुनिश्चित करने के लिए एचपी के साथ-साथ अन्य कंप्यूटर डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी अपना सर्च इंजन दिया ताकि गूगल टूलबार उनके प्रोडक्ट के डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन के रूप में काम करे।

विज़नरी के रूप में, सुंदर पिचई पुरानी टेक्नोलॉजीों के साथ नई टेक्नोलॉजी को जोड़ने में  भरोसा करते हैं। उनकी रुचि फिलहाल आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में है, और वह वॉयस रिकोग्निशन ऑफरिंग और क्षमताओं का विस्तार करना चाहते हैं। उन्हें विज़ुअल रिकग्निशन सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने वाले स्मार्टफ़ोन का श्रेय जाता है।

गूगल के मौजूदा सीईओ के बारे कुछ बातें

पिचई कीअपनी पत्नी अंजलि से आईआईटी खड़गपुर में मुलाकात हुई और ग्रेजुएट होने के तुरंत बाद उससे शादी कर ली। उनके दो बच्चे हैं और वह कैलिफोर्निया में रहते हैं।

वह गूगल के तीसरे सीईओ हैं और कंपनी के पहला नॉन-व्हाईट सीईओ हैं।

व्हार्टन में, पिचई को सीबेल स्कॉलर के साथ-साथ पामर स्कॉलर सम्मान दिया गया - हर प्रतिष्ठित सम्मान पिचई को उनकी शैक्षणिक प्रतिभा के कारण मिला।

पिचई ने 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ की भूमिका के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में काम किया, हालांकि, यह पद सत्य नडेला को मिला।

निष्कर्ष

सुंदर पिचई की स्टोरी धैर्य, दृढ़ संकल्प और दृढ़ता की है। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें अपने आइडिया और क्रिएशन का लाभ मिलता रहा है। कंपनी के रूप में गूगल को उनके योगदान से बेहद फायदा हुआ है।

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है जानकारी देना, न कि इन्वेस्टमेंट के लिए कोई सलाह/टिप्स देना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने या बेचने की सिफारिश करना।

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