भारत में कर छूट: सरल व्याख्या

18 जून,2021

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भारत में कर छूट क्या है? - स्मार्ट मनी
आयकर अधिनियम, 1961 में धारा 80C से 80यू तक करदाताओं के लिए कई छूट के प्रावधान है।

इन छूटों का लाभ उठाने के लिए अपने फिनांस और इन्वेस्टमेंट की योजना बनाना ज़रूरी है। विभिन्न किस्म की कर छूट और समय-समय पर उनमें किए जाने वाले संशोधन और बदलाव के बारे में खुद को शिक्षित करना भी महत्वपूर्ण है। करदाताओं के लिए कौन सी छूट उपलब्ध है और वे कैसे काम करते हैं, इसका यहाँ एक सरल गाइड दिया गया है।

विभिन्न आयवर्ग के लिए आयकर स्लैब

आयकर अधिनियम के तहत, विभिन्न आयवर्गों पर अलग-अलग कर लगाया जाता है। कम आयवर्ग वाले लोगों को या तो कर में पूरी तरह छूट दी गई है या उच्च आयवर्ग की तुलना में कम भुगतान करना होता है।

नीचे दिए गए टेबल में आपकी आय पर लागू कर की दर का ब्योरा दिया गया है। टेबल में आपकी कुल कर योग्य आय पर लागू आयकर की दर को दिखाया गया है। व्यक्तिगत करदाता के लिए कुल कर योग्य आय का आकलन करदाता की साल भर की आय में से कर छूट को घटाकर किया जाता है।

आयकर स्लैब

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आयकर स्लैब दर के नये नियम

(सभी व्यक्तिगत और एचयूएफ पर लागू)

0.0 - 2.5 लाख रूपये

निल

2.5 - 3.00 लाख रूपये

5 प्रतिशत (धारा 87 ए के तहत उपलब्ध कर छूट )

3.00 - 5.00 लाख रूपये

5.00 - 7.5 लाख रूपये

10 प्रतिशत

7.5 - 10.00 लाख रूपये

15 प्रतिशत

10.00 - 12.50 लाख रूपये

20 प्रतिशत

12.5 - 15.00 लाख रूपये

25 प्रतिशत

> 15 लाख रूपये

30 प्रतिशत

आइए एक नजर डालते हैं कि ये छूटें हैं क्या:

होम लोन और एचआरए

घर के किराए और होम लोन पर टैक्स बेनिफिट सरकार के सभी के लिए किफायती आवास प्रदान करने व्यापक लक्ष्य पर आधारित है। ऐसे खर्च पर टैक्स बेनिफिट प्रदान करने का लक्ष्य है उन व्यक्तियों और परिवारों पर कर का बोझ कम करना जिन्हें अपना घर खरीदने या घर के किराये पर कर देना पड़ता है।

होम लोन

यदि आपने घर की खरीद या निर्माण के लिए होम लोन लिया है, जिसका भुगतान आपकी सालाना आय से किया जा रहा है तो आप धारा 80सी के तहत उधार ली गई मूल राशि पर 1.5 लाख रुपये तक की कर छूट का दावा कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अधिनियम की धारा 24 के तहत होम लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं।

यदि घर बनाने के लिए होम लोन लिया गया है, तो यह होना चाहिए -

(i) जिस वित्त वर्ष में यह लिया गया, उसके अंत से पांच साल के भीतर पूरा किया गया

(ii) छूट का दावा घर बनकर तैयार होने के साल तक ही किया जा सकता है

1.5 लाख रुपये तक के स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर कर छूट प्रदान की गई है। यदि कोई नया खरीदा हुआ घर किराए पर लगाया जाता है, तो होम लोन पर दिया जाने वाला ब्याज आपकी कर योग्य आय से पूरी तरह से माफ किया जा सकता है।

धारा 80 ईईए के तहत पहली बार घर खरीदने वालों को अतिरिक्त कर छूट प्रदान की गई है।

हाउस रेंट अलाउंस

नौकरीपेशा लोगों की वार्षिक आय में हाउस रेंट अलाउंस का प्रावधान होता है। आयकर अधिनियम की धारा 10 के तहत इस अलाउंस के तहत कर छूट दी जाती है। छूट की राशि का आकलन इस तरह किया जा सकता है:

एचआरए से छूट प्राप्त राशि की गणना इस तरह की जा सकती है:

  • मूल वेतन का 50 प्रतिशत या  
  • मूल वेतन के 10% से कम के बराबर भुगतान किये गए किराये

दोनों में जो भी कम राशि होगी उसे आपके वेतन के वार्षिक एचआरए में से छूट दी जाएगी। बाकी राशि एचआरए का कर योग्य हिस्सा होगा।

हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी

1. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी

मेडिक्लेम पॉलिसी के लिए किए गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम आपकी वार्षिक आय से कटौती योग्य खर्च होते हैं। मेडिकल कॉस्ट बढ़ रहे हैं और करदाताओं को इस तरह के मेडिकल इंश्योरेंस का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने धारा 80 डी के तहत बीमा प्रीमियम की कटौती के रूप में प्रोत्साहन प्रदान किया है। बीमाकर्ता की उम्र के आधार पर, इस सेक्शन में अलग-अलग कर छूट प्रावधान प्रदान करता है। 

5,000 रूपये तक के प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप पर टैक्स बेनिफिट मिलता है।

एलिजिबिलिटी की कसौटी

धारा 80डी . के तहत कटौती

खुद के लिए और परिवार के लिए (60 साल से कम उम्र के सभी सदस्य)

        25,000 रूपये

खुद के लिए+ परिवार + माता-पिता के लिए (60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी सदस्य)

25,000 रूपये+ 25,000 रूपये = ₹50,000 रूपये

खुद के लिए + परिवार के लिए (60 साल से कम उम्र के सभी सदस्य) + वरिष्ठ नागरिक माता-पिता

25,000 रूपये + 50,000 रूपये = 75,000 रूपये

खुद के लिए + परिवार के लिए (60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठतम सदस्य) + वरिष्ठ नागरिक माता-पिता

50,000 रूपये + 50,000 रूपये = 1,00,000 रूपये

2. लाइफ इंश्योरेंस पॉलीसी

जिस तरह से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां वार्षिक प्रीमियम के आधार पर बेहतरीन मेडिकल सुविधा प्रदान करती है, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी इंश्योर किये गए परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के खर्चों की देखभाल करती है। लेकिन बात इतनी ही नहीं है। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जीवन बीमा प्रदान करने के अलावा निवेश के तौर पर दोगुनी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में, पॉलिसीधारक को पूर्व निर्धारित परिपक्वता अवधि के अंत में इंश्योर्ड राशि का भुगतान होता है, यदि पॉलिसी की राशि का भुगतान असामयिक मृत्यु के कारण पहले नहीं कर दिया गया होता है। 

  • यदि पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 के बाद ली गई हो तो वार्षिक प्रीमियम पर दिए गए 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा धारा 80सी के तहत किया जा सकता है, बशर्ते यह कुल बीमा राशि के 10 प्रतिशत से कम हो। 
  • यदि पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 से पहले ली गई थी, तो धारा 80C के तहत छूट दी जा सकती है यदि वार्षिक प्रीमियम भुगतान बीमित राशि के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं है। 
  • आयकर अधिनियम की धारा 10 (10डी) के तहत परिपक्वता पर प्राप्त बीमा राशि भी आयकर से मुक्त है। 
  • वेतनभोगी लोगों के लिए एलआईसी या किसी अन्य बीमाकर्ता के साथ एन्युटी योजनाओं की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट है। 

निवेश

आयकर अधिनियम पसंदीदा योजनाओं और उपकरणों में इन्वेस्ट करने के लिए छूट प्रदान करता है जो आपकी मेहनत की कमाई के लिए सुरक्षित उपाय हैं। इन उपायों में शामिल हैं:

1. टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट

5- साल के टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट 1.5 लाख रुपये तक के इन्वेस्टमेंट कर योग्य आय से मुक्त हैं। इन फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज से होने वाली आय पूरी तरह से उस आय वर्ग के अनुसार कर योग्य है जिसके अंतर्गत आप आते हैं। टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट निश्चित रिटर्न की गारंटी देते हैं और ये बाजार के उतार-चढ़ाव से बंधे नहीं होते हैं। इनका इस्तेमाल लोन के लिए कोलैटरल के तौर पर भी किया जा सकता है। 

2. इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) एकमात्र म्यूचुअल फंड लिंक्ड टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट हैं। यह इंस्ट्रूमेंट कई अन्य कर-बचत इन्वेस्टमेंट स्कीम की तुलना में अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं और इनकी लॉक-इन अवधि कम होती है - केवल 3 साल। ईएलएसएस में 1.5 लाख रुपये तक का योगदान धारा 80सी के तहत आपकी कर योग्य आय से मुक्त है। ईएलएसएस इन्वेस्टमेंट पर ब्याज से होने वाली आय पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। यदि ब्याज से होने वाली आय 1 लाख रूपये से कम है तो आय पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट रहेगी। 

3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में योगदान आपकी आय से सालाना 1.5 लाख रुपये तक कटौती योग्य है। धारा 80 सी के तहत किसी भी साल में पीपीएफ में कुल योगदान 1.5 लाख रूपये से अधिक नहीं हो सकता। पीपीएफ सालाना चक्रवृद्धि ब्याज के साथ इन्वेस्टमेंट पर तय रिटर्न प्रदान करता है। पीपीएफ से अर्जित ब्याज लिक्विडेशन के समय पूरी तरह से कर मुक्त होता है। हालांकि, कुछ आपात स्थिति के मामले में समय से पहले निकासी के प्रावधानों के साथ पीपीएफ निवेश में 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है।

अन्य छूट

कई अन्य हेडर हैं जिनके तहत विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों के लिए कर छूट प्रदान की जाती है। 

  • सरकार द्वारा अधिसूचित विशिष्ट बीमारियों के इलाज़ के बिल पर आपकी कर योग्य राशि में 40,000 रुपये तक की छूट मिल सकती है। 
  • स्थायी रूप से विकलांग व्यक्ति की देखभाल और आजीविका पर खर्च पर भी केयर प्रोवाइडर की आय पर कर छूट मिलती है। 
  • विकलांग व्यक्ति को धारा 80 यू के तहत कर लाभ मिलता है। 
  • वरिष्ठ नागरिक (60-80 वर्ष) और अति वरिष्ठ नागरिक (80 वर्ष और अधिक) जिनकी आय का एकमात्र स्रोत पेंशन और सेविंग स्कीम होते हैं, उन्हें भी सरकार से कर छूट मिलती है।

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