क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स

05 अप्रैल,2022

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इस आर्टिकल में क्रिप्टोकरेंसी पर लागू टैक्स के बारे में बताया गया है।

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी, 2022 को आम बजट पेश किया। बजट एक प्रमुख विशेषता रही क्रिप्टोकरेंसी जैसी डिजिटल एसेट सम्बन्धी टैक्सेशन का प्रस्ताव। इससे पहले, वर्चुअल या डिजिटल एसेट पर लागू होने वाले कोई स्पष्ट टैक्सेशन पॉलिसी नहीं थी, जिससे उनसे होने वाली इन्कम पर टैक्स तय करना मुश्किल था। इस आर्टिकल में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स से संबंधित भारत के नए नियमों पर रोशनी डाली गई है।

वर्चुअल डिजिटल एसेट की परिभाषा

क्रिप्टोकरेंसी पर लागू टैक्स की बात करने से पहले, वर्चुअल डिजिटल एसेट की परिभाषा समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि वही इस टैक्सेशन पॉलिसी का आधार बनते हैं।

फिनांस एक्ट के अनुसार "वर्चुअल डिजिटल एसेट" शब्द का इस्तेमाल किसी भी कोड, टोकन, संख्या या जानकारी के लिए किया जा सकता है जो भारतीय या विदेशी मुद्रा से जुड़े नहीं है। यह क्रिप्टोग्राफिक या वैकल्पिक माध्यमों के ज़रिये उस मूल्य के लिए एक डिजिटल प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए पैदा किया गया है जिसकी अदला-बदली हुई हो। यह अंतर्निहित मूल्य वाले आंकड़े के वादे या प्रतिनिधित्व पर आधारित है जो हर हाल में सही होता है चाहे इसका उपयोग किसी वित्तीय लेनदेन के लिए या खाते की इकाई के रूप में या मूल्य के भंडार के रूप में, इन्वेस्टमेंट (किसी भी इन्वेस्टमेंट योजनाओं को छोड़कर) के रूप में किया गया हो। इस एसेट का इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रेड, स्टोरेज और ट्रान्सफर किया जा सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स

2022-2023 के बजट में किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट जैसे क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाला 30 प्रतिशत का टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया है।  अधिग्रहण की लागत के अलावा, उस पर कोई कटौती की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, ट्रांजैक्शन में किसी भी नुकसान को आगे ले जाने की अनुमति नहीं है।

क्रिप्टो पर इन टैक्स लगाया जाना निम्नलिखित कारणों से प्रासंगिक है।

  • यह पहल सरकार की क्रिप्टोकरेंसी को एक वैध एसेट क्लास के तौर पर मान्यता प्रदान और इसके व्यापार को एक वैध गतिविधि का स्वरूप प्रदान करती है। 
  • इसके बाद, इस टैक्स पर स्पष्ट स्थिति से लोगों को क्रिप्टोकरेंसी के बारे में अधिक शिक्षित करने में मदद मिलेगी और इससे उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह टैक्सेशन पॉलिसी पर्याप्त रूप से विनियमित क्रिप्टो ईको सिस्टम को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी जिसकी इनोवेशन में बड़ी भूमिका हो सकती है। 
  • इसके आलावा क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति से संबंधित नियमों, कानूनी पेचीदगियों और टैक्सेशन प्रोटोकॉल से संबंधित चिंताओं और अनिश्चितताओं को अब संबोधित किया गया है और इससे चीज़ें और स्पष्ट होंगी।

इस टैक्सेशन पॉलिसी की प्रासंगिकता

इस टैक्सेशन पॉलिसी का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट को पिछले एक दशक में विश्वसनीयता मिली है और इनका बड़े पैमाने पर कारोबार शुरू हुआ है। साथ ही ऐसे बाजार के उदय हुआ जिसमें ऐसे एसेट के ट्रांजैक्शन के लिए भुगतान उसी तरह के एसेट के माध्यम से किया जाता है।

इस एसेट वर्ग पर टैक्स की दर काफी अधिक है, इसलिए इन्वेस्टर्सों द्वारा प्राप्त शुद्ध लाभ कुछ हद तक वर्चुअल डिजिटल एसेट की अपील को कम कर सकता है। क्रिप्टोकरेंसी पर ऊँचा टैक्स लगाकर, सरकार वास्तव में उस तेज़ी को कम करने की उम्मीद कर रही है जिसके साथ इन वर्चुअल डिजिटल एसेट में इन्वेस्टमेंट किया जाता है। सरकार जो सतर्क माहौल बनाना चाहती है वह इस बात से प्रेरित हो सकता है कि ये क्रिप्टोकरेंसी का कारोबार अस्थिर है और इनके मामले में सावधानी बरती जानी चाहिए।

वर्चुअल डिजिटल एसेट टैक्सेशन रूल्स से जुड़ी पेचीदगियां

साल 2022-2023 के केंद्रीय बजट ने वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांजैक्शन से जुड़े भुगतानों पर टीडीएस लगाने को भी स्पष्ट किया, जिसमें एक निश्चित सीमा से अधिक के लेनदेन पर एक प्रतिशत की टैक्स लगेगा। इसने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसी एसेट गिफ्ट में दिए जाते हैं, तो उस पर टैक्सचुकाने की जिम्मेदारी प्राप्तकर्ताओं की होगी। एक अप्रैल, 2023 तक, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाली इन्कम पर 115 बीबीएच सेक्शन के तहत टैक्स लगने लगेगा। यह खंड वर्चुअल डिजिटल एसेट से प्राप्त इन्कम पर लागू टैक्सेशन पॉलिसी को अधिक स्पष्ट करेगा।

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और अल्टरनेटिव डिजिटल एसेट मार्केटप्लेस को अब एक प्रतिशत टीडीएस के नियम का पालन करना होगा और यह सुनिश्चित करने के लिए एक ट्रैकिंग तंत्र का उपयोग करना होगा कि भारत में भारत के नागरिक के रूप में लेनदेन में इसका पालन करते हैं।

निष्कर्ष

क्रिप्टो कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों को समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि आप कानून का पालन करें और अपने टैक्स का सही तरीके से भुगतान करें। बजट के प्रस्ताव में इस बात को स्पष्ट किया गया है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट से प्राप्त इन्कम पर कैसे टैक्सलगाया जाएगा। यह समय ही बताएगा कि यह उपाय कितना अच्छा है। किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट में कोई भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले उस पर पर्याप्त शोध करना महत्वपूर्ण है और केवल वही इन्वेस्टमेंट करें जिसमें नुकसान आपको बहुत नहीं खले। जोखिम के लिए अपनी सीमा और उस एसेट से जुड़े जोखिमों को हमेशा समझें, जिसमें आपकी इन्वेस्ट करने में रुचि है।

 

डिस्क्लेमर: एंजेल वन लिमिटेड क्रिप्टो करेंसीज़ में इन्वेस्टमेंट और कारोबार का समर्थन नहीं करता है। इस आर्टिकल का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। इस तरह के जोखिम भरे पहल करने से पहले अपने इन्वेस्टमेंट सलाहकार से बात करें।

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है जानकारी देना, न कि इन्वेस्टमेंट के लिए कोई सलाह/टिप्स देना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने या बेचने की सिफारिश करना।

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