ट्रेडिंग का भविष्य

5.0

20 Jun, 2021

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ट्रेडिंग का भविष्य - स्मार्ट मनी
वॉल स्ट्रीट या दलाल स्ट्रीट में जो पागलपन वाली भीड़ होती थी वह निश्चित रूप से ख़त्म हो रही है क्योंकि इन्वेस्टर, ब्रोकर और एडवाइजर सबके सब डिजिटल स्पेस का रुख कर रहे हैं।

ओवरव्यू

लगता है भीड़ का ख़त्म होना क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी की शुरूआत और इसके इनोवेटिव उपयोग से शुरू हुआ है। कुछ बदलाव जो दिखने लगे हैं वे अपनी पूरी संभावना के साथ डेवलप होंगे जैसे ऑटोमेटेड फिनांशियल एडवाइजरी ऑनलाइन और ब्लॉकचेन का उपयोग। उचित रेगुलेटरी हस्तक्षेप के साथ ट्रेडिंग का भविष्य अधिक समतावादी और समावेशी हो सकता है। 

हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग

हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग आधुनिक फिनांशियल बाजारों, विशेष रूप से शेयर बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह बाजार की मौजूदा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाजार का मूल्यांकन करने और ऑर्डर देने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करता है। इससे न केवल ऑर्डर का तेज़ एग्ज़ेक्यूशन संभव होता है बल्कि टर्नओवर दर भी काफी ऊंची होती है। हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग ने वैश्विक स्तर पर प्रतिभागियों की फिनांशियल मार्केट तक पहुंच बढ़ा दी है, जिससे मौके, वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी हुई है। 

हालांकि फिलहाल हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग इक्विटी बाजारों में लोकप्रिय है इसका उपयोग बांड, फॉरेन एक्सचेंज, फ्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए भी किया जाने लगेगा। इसकी वजह से ट्रेडर स्ट्रैडल, स्ट्रैंगल और बटरफ्लाई स्प्रेड जैसी रणनीतियों को भी अपनाने लगे हैं। हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रेडिंग उन बहुत सी जटिल रणनीतियों में से एक है जिन पर बाज़ार की स्थिरता और विश्वसनीयता पर उनके असर के लिहाज़ से रेगुलेटर की निगाह है। 

हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग बाज़ारों की क्वालिटी बेहतर होगी, एफिशिएंसी बढ़ेगी और साथ ही इससे अधिक लिक्विडिटी और नैरो स्प्रेड पैदा होंगे। मशीन लर्निंग के डेवलपमेंट से प्रेरित हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग ने प्राइस फॉर्मेशन, लिंकेज में सुधार और ट्रेडिंग की लागत को कम कर बाजारों को अधिक एफिशियेंट बनाने में मदद की है। 

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस

फिनांशियल बाजारों में ट्रेडिंग का भविष्य काफी हद तक आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के डेवलपमेंट पर निर्भर करेगा। कई फिनांशियल कंपनियों में फिनांशियल सलाह के लिए इंसानी सलाहकारों के बजाय एल्गोरिदम पर भरोसा करने से यह पहले से ही स्पष्ट है। इसके अलावा मशीनें लोगों के बीच आदान-प्रदान से सीखती हैं, और ऐसा बगैर प्रोग्राम किए होता है। वे धोखाधड़ी और गड़बड़ियों को आसानी से पकड़ सकती हैं, नए पैटर्न को पहचान सकती हैं, और समय पर फैसला लेने की प्रक्रिया को ऑटोमेट और तेज़ करते हैं। 

जैसे-जैसे इन्वेस्टर और ट्रेडर के लिए अधिक से अधिक फिनांशियल जानकारी उपलब्ध होंगी इंसान के लिए इन सब पर नज़र रखना मुश्किल हो जाएगा। सूचना के इस तरह के विस्फोट को केवल ऑटोमेशन और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के ज़रिये ही इकट्ठा किया जा सकता है और पढ़ा या समझा जा सकता है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) बड़ी तादाद में उपलब्ध डाटा को एनेलाइज़ करने, इकट्ठा करने और इनकी व्याख्या करने और उनसे सीखने में सक्षम होगा। इससे हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और फंड मैनेजर्स को मदद मिलेगी। 

इसका मतलब यह नहीं है कि एआई ट्रेडिंग के दायरे में इंसानों की जगह ले लेगा। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम फैसले का अधिकार तब भी इन्वेस्टमेंट सलाहकारों या अन्य इंसानी प्रोफेशनल के पास होगा जिनके पास इमोशनल इंटेलिजेंस है। 

रोबो एडवाइजर

पर्सनल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो बनाने के लिए जोखिम प्रोफाइल, फिनांशियल लक्ष्य और अन्य इन्वेस्टमेंट विवरण के आकलन के मामले में एल्गोरिदम का उपयोग पहले से ही किया जा रहा। इससे अपनी ज़रुरत के मुताबिक ढाले गए रोबो-एडवाइजरमें बढ़ोतरी हो सकती है जो आपके वेब या स्मार्टफोन पर बस क्लिक करते ही आपकी सेवा में हाज़िर होंगे। वे खुद हालात समझ पायेंगे और मुनाफा बुक करने या पैसे लगाने में कामयाब होंगे। 

एडवाइजर की ऐसी नस्ल इंसानी प्रोफेशनल की तुलना में सस्ती होगी और सालाना शुल्क पर उपलब्ध होगी। भविष्य में ऐसे एडवाइजर को भी डिजिटल अवतार में तब्दील किया जा सकता है जो आज उपलब्ध वर्चुअल असिस्टेंट से अलग नहीं होंगे। 

ईटीएफ

पैसिव इन्वेस्टमेंट बढ़ रहे हैं और भविष्य में भी इसके और बढ़ने का अनुमान है। वे दुनिया भर में मौकों और रुझान की सटीक पहचान करने में मदद करते हैं जो भविष्य में और अधिक जटिल हो सकते हैं। 

पैसिव इन्वेस्टमेंट एक अच्छा उदाहरण है एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) है, जो बॉन्ड, शेयर और डेरिवेटिव जैसे एसेट खरीदने के लिए कई निवेशकों से पूल फिनांस जुटाता है। इस तरह की पैसिव इन्वेस्टमेंट रणनीतियां लंबी अवधि के लिए खरीद-और-होल्ड की रणनीति का उपयोग कर कम से कम खरीद और बिक्री के साथ अधिकतम मुनाफा कमाने पर केंद्रित होती हैं। यह इन्वेस्टर के लिए आकर्षक होता है क्योंकि यह सस्ता, सरल और अधिक टैक्स-इफेक्टिव होता है। 

डेरिवेटिव का उपयोग करने वाले ईटीएफ का इतिहास रहा है कि यह कुल बाजार के लिए खतरनाक रहा है।  अब ईटीएफ का इक्विटी को छोड़कर अन्य एसेट वर्गों में विस्तार हो रहा है और इस पर नज़र रखना समझदारी होगी कि जिस गति से वे ट्रेड को होने देने में मदद कर रहे उसका क्या असर हो रहा है या किसी वाह्य घटना का उनकी क्या प्रतिक्रिया है। रेगुलेटर को इन पैसिव इन्वेस्टमेंट वाले उत्पादों पर नजर रखनी चाहिए और बाजार पर उनके प्रभाव का आकलन करना चाहिए। 

ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी

ब्लॉकचेन वह टेक्नोलॉजी है जिन पर बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी आधारित हैं। यह लेजर ट्रांजैक्शन है जिसमें क्रोनोलॉजिकल तरीके से इन्फॉर्मेशन इकट्ठा की जाती है। चेक या स्टॉक मार्केट के ट्रेड जैसे लेनदेन पर जहां सेंट्रल अथॉरिटी का नियंत्रित होता है और इसको प्रोसेस होने में समय लगता है वहीं ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन मिनटों में हो जाता है और इससे पैसे बचाने में मदद मिलती है। इसके अलावा इनके साथ छेड़छाड़ की संभावना कम है। भविष्य में शायद पहले कुछ संस्थानों में शामिल होंगे जो ब्लॉकचेन को अपनाएंगे। 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2013 में बिटकॉइन के बारे में आगाह किया था। तब से इसने अपनी पोजीशन बदल दी है और अब यह मानता है कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन और करेंसी की जालसाजी को रोकने में मदद कर सकती है। इसके अलावा ब्लॉकचैन सॉल्यूशन और डिजाइन पर रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए 30 बड़े बैंकों का एक कंसोर्टियम बनाया गया है। 

डीसेंट्रलाइज्ड फिनांस (डीफी) जो ब्लॉकचेन पर आधारित है, इसमें ऐसे इनोवेशन हो रहे हैं जिससे फिनांशियल उत्पादों में क्रांति आएगी। भविष्य में यह अधिक लोकप्रिय हो सकता है और ज़्यादा स्मार्ट ट्रांजैक्शन और कॉन्ट्रैक्ट के लिए गुंजाईश तैयार कर सकता है। किसी सेंट्रल बॉडी पर निर्भरता न होने से नए दौर के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट और प्रेडिक्शन मार्केट की जगह बनेगी। 

डाटा

फिनांशियल बाजारों में हर क्षण बड़ी मात्रा में डाटा पैदा होता है, जिसका रियल-टाइम में स्टोरेज और मूल्यांकन महत्वपूर्ण है। क्लाउड कंप्यूटिंग इस बड़ी मात्रा में पैदा डाटा के स्टोरेज के साथ-साथ तत्काल रीयल-टाइम तक पहुंच प्रदान कर सकता है। इसके अलावा, एनेलिटिक्स इस डाटा को इंसान के मुकाबले जल्दी और कुशलता से समझने में मदद कर सकता है। 

एनेलिटिक्स के इस इस्तेमाल को लेकर आरबीआई ने चिंता जताई है। हालांकि, इस तरह के एनेलिसिस के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग बाजार और इन्वेस्टर की भावना की भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है। ऐसा शायद किसी कंपनी के बारे में सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया जा सकता है और इससे इन्वेस्टर के ट्रेड करने का तरीका बदल सकता है। 

निष्कर्ष

साफ़ है कि ट्रेडिंग का भविष्य काफी हद तक क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी पर निर्भर करेगा और इस पर निर्भर करेगा कि विभिन्न रूपों में इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। ब्लॉकचेन जैसी टेक्नोलॉजी के बारे में आशंकाएं हैं लेकिन भावी इनोवेशन से उन्हें मुख्यधारा में लाने और इनमें इन्वेस्टर का भरोसा जगाने में मदद मिलेगी।

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