कोविड की दूसरी लहर के बीच मेटल स्टॉक में तेज़ी

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05 जून,2021

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कोविड -19 के दौरान मेटल स्टॉक क्यों बढ़ रहे हैं? -स्मार्ट मनी
पिछले कुछ महीनों में उनमें काफी बदलाव हुए हैं। सबसे पहले दुनिया भर के विभिन्न शेयर बाजारों में कई मेटल शेयर की कीमत में लगातार वृद्धि हुई है।

भूमिका

उनकी कीमत में तेज़ी कई कारणों से हुई। भारत में, कीमत में यह तेज़ी शेयर बाजारों पर दिखाई देती है। यह केवल पश्चिमी बाजारों तक ही सीमित नहीं रही है। कोरोनो वायरस महामारी की दूसरी लहर से देश में जो हालात पैदा हुए हैं उन पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण है। इस हालात में मेटल शेयरों की कीमत में तेज़ी दिलचस्प है।

किन मेटल स्टॉक में तेज़ी आई है?

कई मेटल शेयरों में पिछले कुछ महीनों में उछाल आई है और यह पिछले कुछ साल पिछले उच्चतम स्तर को पार कर गया है। इनमें बड़ी संख्या इंडस्ट्रियल मेटल की है जिनमें तांबा और आयरन ओर से लेकर पैलेडियम और एल्यूमीनियम तक शामिल हैं।

कॉपर - कॉपर महत्वपूर्ण धातु है जिसका उपयोग विभिन्न किस्म के इलेक्ट्रिकल वायरिंग वाली इकाइयाँ, कनेक्टर्स और कई किस्म मोटर वाहनों में किया जाता है। इसका उपयोग भवन निर्माण, बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन में किया जाता है। कोरोना वायरस का असर दुनिया के अन्य भागों में कम पड़ा है, इसलिए स्टॉक मार्केट में कॉपर के मूल्य में उछाल आई और मांग बढ़ी है। अमेरिकी प्रोत्साहन पैकेज से भी इसकी खरीद को प्रोत्साहन मिला है। शेयर बाजार में कॉपर में तेज़ी जारी है, बावजूद इसके कि चीन में महत्वपूर्ण खदान से उत्पादन में तेज़ी आई है और इनकी इन्वेंटरी बढ़ी है। पिछले सप्ताह यह 10,000 डॉलर प्रति टन से अधिक के स्तर पर कारोबार कर रहा था। गैर-अमेरिकी खरीदारों ने इस वजह से तांबे की खरीद पर ज़ोर दिया कि डॉलर के मूल्य में गिरावट को देखते हुए यह अब उनके लिए सस्ता है।

आयरन ओर - आयरन ओर ने भी शेयर बाजार में तेज़ी दर्ज़ की है।
ऐसा इसलिए है कि चीन की स्टील फैक्ट्रियों में मांग अधिक है। चीन में इसकी कम इन्वेंटरी से शेयर बाजार में आयरन ओर स्टॉक में तेज़ी आई है। यदि भारतीय बाजार पर नजर डालें तो अप्रैल से अब तक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के स्टॉक में 50 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी आई है। स्टॉक नाटकीय रूप से 28 प्रतिशत बढ़त के साथ 100 रूपये से 128 रूपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुँच गया। इस सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम के स्टॉक में कई वजह से तेज़ी आई। एक्विरस के एनालिस्ट के मुताबिक इन कारणों में सिर्फ क्षमता विस्तार शामिल नहीं हैं बल्कि केप्टिव आयरन ओर स्रोत तक पहुंच ने भी कीमत में तेज़ी की गुंजाईश पैदा की।

पैलेडियम - पैलेडियम की कीमत साल की शुरुआत से शेयर की में तेज़ी जारी है और यह पिछले 10 दिन में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच जो फिलहाल 2,918.50 डॉलर पर चल रहा है। यह तेज़ी दुनिया भर में मेटल की घटती आपूर्ति मद्देनज़र बढ़ी है। हालांकि इस मेटल की आपूर्ति हमेशा कम रही है, लेकिन विशेष रूप से दुर्लभ होने की अफवाह ने इसके स्टॉक की कीमत बढ़ा दी। पैलेडियम सबसे कीमती धातुओं में से एक है जो वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बनाने वालों के बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारों द्वारा कम्बशन इंजन वाली कारों की संख्या सीमित करने से जुड़े सख्त उपायों के कारण इसकी मांग बढ़ गई है।

एल्युमीनियम - आज की दुनिया में एल्युमीनियम के महत्व को कम कर नहीं आंका जा सकता। यह परिवहन और पैकेजिंग से लेकर कंस्ट्रक्शन तक कई उद्योगों के लिए प्रमुख धातु है। एल्युमीनियम के स्टॉक से संबंधित चिंता के बीच इस मेटल का स्टॉक तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। एल्यूमीनियम में चीन की पहले अधिक रुचि की वजह यह है कि वह स्मेल्टिंग में इसका उपयोग अधिक करना चाहता है । ऐसा इसलिए है चीन की सरकार ने अत्यधिक प्रदूषण पैदा करने वाली इंडस्ट्री पर शिकंजा कसा है। चीन फिलहाल बिजली पैदा करने के लिए कोयले पर बहुत अधिक निर्भर है। कोयले की जगह एल्यूमीनियम का उपयोग कर चीन प्रदूषण उत्सर्जन में कमी ला सकता है। उपयोग में तेज़ी से बढ़ोतरी और उतनी ही तेज़ी से इन्वेंटरी में गिरावट के मद्देनज़र एल्युमीनियम के स्टॉक की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।

इन मेटल स्टॉक में तेज़ी मुख्यतः किस वजह से आई?

पहली वजह जिससे मेटल के शेयरों की कीमत बढ़ी, वह यह है कि कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कोरोना की गिरफ्त से उबरने लगी हैं। यह रिकवरी विभिन्न किस्म की वस्तुओं और सेवाओं की मांग में वृद्धि के साथ आई है। इन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने जलवायु के प्रति सचेत होने की भूमिका निभाई है, इसलिए माँग की किस्म भी बदल गई। अब इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और सौर ऊर्जा से चलने वाले एनर्जी स्रोत की मांग बढ़ी है जिनमें से हर खंड में इन मेटल का उपयोग होता है। इसलिए, कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि मेटल शेयरों की कीमत में तेज़ी आ रही है। इसके अलावा, लैटिन अमेरिकी देश जहां बहुत सी मेटल-माइन्स हैं, वहां कोविड संक्रमण में बढ़ोतरी हुई है जिससे आपूर्ति संबंधी चिंता बढ़ गई है। पश्चिम में बढ़ी मांग के साथ आपूर्ति से जुड़े इन मुद्दों ने मेटल की कीमत में इज़ाफा किया है।

निष्कर्ष -

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बहुत भयानक रही है और इसने लोगों के जीवन, अर्थव्यवस्था और समाज के अनगिनत दूसरे वर्गों पर प्रतिकूल असर डाला है। इसके असर को रोकने के लिए फिलहाल लगाया गया कर्फ्यू 2020 में लगाए गए सख्त लॉकडाउन के मुकाबले उदार है। लेकिन यदि सरकार को महामारी पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने पड़े तो भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकवरी नहीं आ सकती, जब तक कि वायरस नियंत्रण में न आ जाये।

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