टाटा मोटर्स में उथल-पुथल की कहानी

07 अप्रैल,2021

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टाटा मोटर्स में उथल-पुथल की कहानी - स्मार्ट मनी
वाहन उद्योग चर्चित रूप से ज़्यादातर देशों में विस्तृत अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से जुड़ा है। भारत में, हालांकि प्रमुख कार कंपनी जो 2010 के दशक तक करोड़ों लोगों की पसंद थी, वह इसे एक ऐसे ब्रांड के रूप में बदलने के लिए बदनाम हो गई जो सिर्फ कमर्शियल वाहन बनाती हो और ऐसे कार बनाती हो जो टैक्सी ड्राईवर को ही पसंद हो।

हाँ, हम टाटा मोटर्स के बारे में बात कर रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ और कैसे यह बदला? आगे पढ़ें, यह जानने के लिए कि कैसे दूरदर्शी नेतृत्व और कारोबार करने के कुछ बुनियादी सिद्धांत ने मशहूर लेकिन ध्वस्त हो रहे वाहन विनिर्माता को बचा लिया और कुछ सालों में इसे वापस नेतृत्व की स्थिति में ला दिया। 

टाटा मोटर्स ऐसे वाहन के उत्पादन के लिए जाना जाता था जो सबसे कठिन माहौल में भी कारगर थे। इसके साथ कुछ ऐसे उत्पाद आये जिन्होंने भारतीय कार बाज़ार में हमेशा के लिए क्रांति ला दी- जैसे टाटा सफारी जिसने स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल खंड में भारत की पसंद को निर्धारित किया और इसे भारतीय वाहन बाज़ार में नेतृत्व की स्थिति प्रदान की। इसके अलावा टाटा ने जैगुआर और लैंड रोवर जैसी अपनी सामानांतर कंपनियों से कुछ महत्पूर्ण सिद्धांत लाया जन साधारण के लिए कार बनाने वाली कंपनियों के लिए। हालाँकि, कोई उद्योग दशक भर के लिए एक ही जैसा नहीं रह पाटा- तेज़ी से डिजिटल होती दुनिया में नए उत्पाद और मूल्य कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से उद्योगों में व्यवधान पैदा कर रहा है। 

जब भारत का नौजवान वर्ग कमाने लगा और कार की तलाश करने लगा तो पिछली पीढ़ी की तरह नहीं था - ब्रांड नाम और घरेलू बाज़ार में ब्रांड नाम कितना स्थापित है इस सबसे परे उनकी पसंद था फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी, फ्यूचरिस्टिक लुक और डिजिटल फीचर। होंडा, ह्यूंदै, निसान और टोयोटा जैसे बाज़ार में उतरी नई कंपनियों के लिए यह इतना आसान नहीं था। इसके अलावा मारुती और महिंद्रा जैसे अन्य विरासती ब्रांड ने अपने नए सफल लॉन्च के साथ मूल्य के लिहाज़ से आकर्षक पेशकश की। अपने कारोबार के कायाकल्प के लिए टाटा को नए दौर के कार निर्माता के डीएनए की ज़रुरत थी जो नए दौर के ग्राहकों की ज़रुरत से वाकिफ हों। यही टाटा मोटर की कहानी में उथल-पुथल शुरू हुई जबकि इसके मैनेजिंग डायरेक्टर कार्ल स्लिम की जगह ग्वेंटर बटशेक ने ली। 

यह दर्ज़ करना महत्वपूर्ण होगा कि कैसे इस फैसले ने टाटा मोटर्स को एकदम से नई दिशा दे दी। ग्वेंटर बटशेक इससे पहले एयरबस के प्रमुख थे और वह विनिर्माण और वाहन उद्योग में जाने-माने ट्रांसफॉर्मेशनल विशेषज्ञ थे। उनके नेतृत्व में ही टाटा मोटर्स का नया लक्ष्य पैदा हुआ और सबसे बड़ी बात लक्ष्य हासिल हुआ। सो यह नया लक्ष्य क्या था?

विशेषज्ञों के मुताबिक आज के दौर की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक है कि कम्पनियाँ लचीलेपन, गति और चुस्ती से काम करें ताकि वे मुनाफे और प्रतिस्पर्धा में बनी रहें। लेकिन यह एक ऐसी कंपनी में कैसे प्राप्त होना था को मुख्य तौर पर अपने उत्पादों के असेम्बल करने के लिए मैन्युअल प्रक्रियाओं पर निर्भर करती थी? यहीं बटशेक की दूरदृष्टि काम आई। बटशेक ने सुझाव दिया कि कंपनी विनिर्माण के अपने मौजूदा सिद्धांतों को डिजिटल सहायता वाली प्रक्रियाओं में बदलेजो मोद्यूलारिटी के विचार पर केन्द्रित हैं। इसके लिए विस्तृत आपूर्ति श्रृंखला की ज़रुरत थी-जिसका अर्थ था जो भागीदार इसके वाहन कॉम्पोनेन्ट बनाते हैं, वे अपने विनिर्माण के तौर तरीकों को ऐसे व्यवस्थित करें कि कंपनी विभिन्न प्रोडक्ट लाइन के बीच से सामान कॉम्पोनेन्ट का लाभ उठा सके और अपने अपने अनुकूल बना सके और जोड़ सके ताकि नए उत्पाद बनाए जा सकें। 

हालांकि, बटशेक ने पहले अपने कमर्शियल वाहनों की विनिर्माण प्रक्रिया में मोड्यूलैरिटी लाने पर ध्यान केन्द्रित किया - इसके बाद व्यक्तिगत वाहन की असेम्बली लाइनों को नए अंदाज़ में लाया गया। इस दौरान कंपनी ब्रांड बनाने और खुद को टेक्नोलॉजी प्रेरित कार कंपनी के तौर पर स्थापित करने पर भी मेहनत करती रही जो अपने काम के बेहतरीन तरीके जानती हो। इसके बाद नए दौर के मॉडल जैसे टाटा टियागो, हैरियर और अब दूसरे जेनेरेशन की सफारी। बटशेक ने टाटा के ईवी खंड पर फोकस होने की भी बात कही है - यह कंपनी को जलवायु परिवर्तन में गति पकड़ने पर लाभ की स्थिति में रख सकता है। आखिरकार कंपनी ने अपने एसयूवी और सेडान प्रोडक्ट लाइन को कवर करने और बेहद कस्टमाइज्ड वाहन बनाने की योजना बनाई है जिनके बुनियादी तत्व और मुख्य कॉम्पोनेन्ट सामान होंगे। विनिर्माण की मुनाफेदारी के ऐसे आधुनिक सिद्धांत और प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कम लागत का लाभ उठाकर कंपनी स्पष्ट रूप से उद्योग में नया नाम और दबदबा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

इस बीच टाटा मोटर्स के शेयर की कीमत में ज़ोरदार हलचल होने लगी। 2015 की शुरुआत में जब नेतृत्व में भारी-भरकम बदलाव हो रहा था, टाटा मोटर्स में 47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ हुई और 2016 के आखिर में पूर्व स्तर पर वापसी तक यह उठा-पटक जारी रही। हालांकि, इसके बाद कंपनी समान मूल्य के स्तर पर बरकरार रहा। महामारी के दौरान कीमत घटकर 74 रूपये पर आ गया और इसमें सुधार 2020 के अंत तक ही शुरू हुआ। इस लेख के लिखे जाने के समय तक टाटा मोटर्स 319 पर कारोबार कर रहा था और विश्लेषक अब इस स्टॉक को हरी झंडी दे रहे हैं। 

टाटा मोटर्स में उठा-पटक - आंतरिक और शेयर बाज़ार दोनों के स्तर पर रही और यदि वजह है कि इसके सुधार से एक बार फिर दूरदर्शी नेतृत्व की ताक़त ज़ाहिर हुई और यह भी कि किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति और शेयर बाज़ार में इसके प्रदर्शन में प्रतिस्पर्धी लाभ के सिद्धांत कैसे हमेशा कारगर होते हैं। नेतृत्व जिसे लगभग अकेले एक विफल होते ब्रांड को सुधार की राह पर लाने का श्रेय जाता है, वह जर्मनी के वाहन उद्योग में प्रवेश कर रहे हैं और कंपनी के नज़रिए में काफी कुछ बदल गया है न सिर्फ नए उत्पादों की परिकल्पना के लिहाज़ से बल्कि अपने उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग और बिक्री के लिहाज़ से भी। यह देखना बाकी है कि क्या आज के कार खरीदार भी ऐसा ही सोचते हैं। 

बाज़ार में हमेशा बदलाव होता रहता है - इन बदलावों के लिए ज़िम्मेदार तत्वों को समझना ज़रूरी है ताकि अपने निवेश के लिए सही पहल की जा सके। www.angelbroking.com पर लॉग इन करेंऔर अधिक जानकारी के लिए हमारे मुफ्त उपलब्ध सामग्री पढ़ें।

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