वित्तीय क्षेत्र पर कोविड 2.0 के असर को समझने की कोशिश

19 मई,2021

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वित्तीय क्षेत्र पर कोविड 2.0 का प्रभाव - स्मार्ट मनी
पिछले साल जब भारत कोविड महामारी की चपेट में आया था तो सेंसेक्स पांच हफ्तों के भीतर 45,000 से ऊपर के स्तर से घटकर 30,000 से नीचे आ गया था।

ज़ाहिर था कि कारोबार बंद करने पर मज़बूर होना पड़ा, लोग घर की चारदीवारी में बंद हो गए और आर्थिक गतिविधि चरमराती हुई थम गई। इस प्रक्रिया में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों पर भारी असर पड़ा - और बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र अलग नहीं रहे। अब यह 2021 का साल है और महामारी ने एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है। क्या इस बार कुछ अलग है, और इस बार बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र इसका असर कैसा होगा?

पिछले साल क्या हुआ था?

महामारी की शुरु होते ही बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र ने तेज़ी से आती मंदी पर सबसे पहले प्रतिक्रिया जताई - और बैंकनिफ्टी महीने भर में 43 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया। और तब से, सूचकांक को अपने 30,000 से ऊपर के स्तर पर पहुंचने में एक साल से अधिक वक़्त लग गया। सुधार सुस्त रहा। जब महामारी शुरू हो रही थी तो प्रमुख बैंकों के सीईओ और सीटीओ को सलाह दी गई थी कि वे लॉकडाउन और सामाजिक दूरी की पहलों के बावजूद बैंकिंग सेवायें फिर से शुरू करें। हालांकि इस तरह के उपायों को लागू करने में लंबा समय लगता है, और भारत जैसा देश जहां फिजिकल शाखाओं और व्यक्तिगत लेन-देन उनलोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा है जिनमें डिजिटल साक्षरता कम है और विश्वास निर्माण के लिए डिजिटलीकरण ने सुधार में बहुत छोटे मामूली योगदान किया। 

अभी क्या हो रहा है?

पिछले साल भारत में महामारी का जो असर रहा था उसकी तुलना में ये साल कुछ अलग दीखता है। मामले कई गुना तेज़ी से बढ़े हैं और अब तक इनमें कमी के संकेत नहीं हैं। इसके अलावा 80 मामले ऐसे क्षेत्रों में सामने आए हैं जिनका बैंकिंग सेक्टर द्वारा अब तक दिए गए वाले ऋण में कुल 45 प्रतिशत का योगदान है। इधर शहरी क्षेत्रों में स्थिति काफी खराब दिख रही है, जहां आर्थिक गतिविधि और मांग में तेजी अब तक लीक पर आ ही रही थी। और जीडीपी के लक्ष्य जिसके बारे में 12.8 प्रतिशत रहने का अनुमान ज़ाहिर किया गया है, इसमें इन फैक्टर को जोड़ दें तो दूसरी तिमाही में मंदी को शामिल करें तो बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में आने वाले हफ्तों में गिरावट आ सकती है। लेकिन अब तक बैंकनिफ्टी ने अपनी पिछली तेज़ी को बरकरार रखा है और इस आर्टिकल को लिखते समय तक यह 33,000 के स्तर से ऊपर बना हुआ है। तो देश में चिंताजनक स्थिति के बावजूद बाजार शांत और उम्मीद से भरा क्यों बना हुआ है?

कोविड 2.0 पर बीएफएसआई का नज़रिया

एनेलिस्ट का मानना है कि बीएफएसआई क्षेत्र पर कोविड 2.0 के असर पर बाजारों में अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं है। अधिकांश बैंकिंग और वित्तीय सेवा स्टॉक रिकवरी के बाद के स्तर पर बने हुए हैं, बाजार मज़े से सुस्त रिकवरी की स्थिति में जो स्थिति ज़्यादातर क्षेत्रों में 2021 के लॉकडाउन से पहले दिख रही थी। कुछ थॉट लीडर ने यह भी कहा है कोविड 2.0 में महामारी और लॉकडाउन का बाज़ार पर असर 2020 के मुकाबले काफी कम रहेगा। इसकी प्रमुख वजह यह है कि महामारी के साथ एक साल के संघर्ष ने अनिश्चितता का नयापन ख़त्म कर दिया है जो 2020 में बाजारों में नुकसान पहुंचा रहा था - इसके अलावा, लॉकडाउन 1.0 कंपनियों की सीमा का भी स्ट्रेस टेस्ट हुआ - डिजिटलीकरण और सामजिक दूरी का पालन करते हुए कारोबार करने के मद्देनज़र आर्थिक गतिविधियाँ महामारी के बावजूद जारी हैं। यह स्थिति खुदरा और एंटरप्राइज़ उधारकर्ताओं के मद्देनज़र और महामारी पर काबू पाने के बाद जिस तेज़ी से बाज़ार में सामान्य स्थिति लौटेगी उस बारे में अपेक्षाकृत सकारात्मक उम्मीद देती है।

नॉन परफॉर्मिंग एसेट: चिंता की वजह?

बाजार से उम्मीद और अपेक्षाओं के बावजूद, नॉन परफॉर्मिंग एसेट की जो स्थिति है वह चिंता का कारण है। इस साल की शुरुआत में जारी 12 वें बैंकर सर्वे के मुताबिक, 2020 की पहली दो तिमाहियों में एनपीए बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाने की आशंका है। आरबीआई की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 12.5 प्रतिशत हो सकता है। इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि एनपीए में सबसे अधिक योगदान टूरिज्म, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी, रेस्तरां और डाइनिंग क्षेत्रों का है। 80 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने इन क्षेत्रों से एनपीए में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। साथ ही फार्मास्युटिकल, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र लॉन्ग टर्म क्रेडिट की मांग में बढ़ोतरी का संकेत देते हैं। ये दो अलग-अलग स्थितियां बीएफएसआई संस्थानों के पोर्टफोलियो पर क्या असर डालेंगी, यह समय ही बताएगा। 

आगे क्या होगा?

मैकिन्ज़ी एंड कंपनी, ईवाई और बीसीजी जैसे प्रमुख संस्थानों सूचना टीम का कहना है कि भारत के लिए आर्थिक सुधार के रुझान की भविष्यवाणी इस आधार पर की जा सकती कि दूसरे देशों में दूसरी लहर का कैसा असर हुआ है जो अपने-अपने कोविड 2.0 के दौर से उबर चुके हैं। यदि सुधार ऊपर-नीचे हो रहा है तो कॉर्पोरेट और एमएसएमई खंड से ऋण की मांग 2021 की अंतिम तिमाही तक बढ़ सकती है। हालांकि बीएफएसआई क्षेत्र की वित्तीय और ऑपरेशन टीमों की चुस्ती उन चुनौतियों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण होगी जो कोविड 2.0 उनके सामने रखेगा। 

जो लोग बीएफएसआई क्षेत्र में निवेश करना चाह रहे हैं, उन्हें ठीक से फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस करना चाहिए और उन रुझानों पर विस्तार से सोचना चाहिए जो 2020 ने बाजार में पेश किये। हालांकि इस बार गिरावट उतनी गहरी नहीं होगी जितनी पिछले साल थी लेकिन लम्बी अवधि सही समय पर की गई एंट्री से बड़ा बदलाव आ सकता है। 

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