क्यों सोने की कीमत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है?

14 मई,2022

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सोने की बढ़ती कीमत में कई फैक्टर्स की भूमिका है। इस लेख में इस विषय पर रोशनी डालने का प्रयास किया गया है।

सोने और चांदी की कीमतों में उछाल

यूक्रेन-रूस युद्ध का यह सातवां सप्ताह है, ऐसे में बेशकीमती धातुओं की कीमतों में उछाल देखा गया है। विशेष रूप से, सोने और चांदी- जिन्हें सुरक्षित इन्वेस्टमेंट माना जाता है- की कीमत में काफी तेज़ी दर्ज़ हुई है

मल्टी कमॉडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (या एमसीएक्स) में सोने के फ्यूचर्स में 1.5 प्रतिशत की तेज़ी दर्ज़ हुई, जो 800 रूपये की बढ़ोतरी है, क्योंकि 10 ग्राम सोने की कीमत अब 51,020 रुपये हो गई है। चांदी के फ्यूचर में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो लगभग 1,217 रुपये के बराबर है और इस तरह अब एक किलोग्राम चांदी की कीमत 66,120 रुपये है।

बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक, व्यापक युद्ध की आशंका के बीच दुनिया भर में इन्फ्लेशन की चिंता को देखते हुए इक्विटी बाज़ार से होने वाले आउटफ्लो के कारण बुलियन होल्ड को आकर्षक बना दिया है जिससे सोने की कीमत को और बढ़ गई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने पहले से ही दशकों पुरानी इन्फ्लेशन से जुड़ी चिंता है और रूस के यूक्रेन पर आक्रमण ने यह समस्या और गहरा गई है क्योंकि कमोडिटी बास्केट पर बेहद असर हुआ है।

इक्विटी बाज़ारों के स्टैगनेशन ने ट्रेडर्स को सोने की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। यदि सोने की स्पॉट प्राइस देखें, तो इसने 52,500 रुपये तक की नई ऊंचाई हासिल की और यह इस साल फरवरी के आखिरी दिन नौ महीने का उच्चतम स्तर रहा। इसी महीने सोने की कीमत 4,750 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेज़ी देखी गई।

इसी तरह, चांदी की स्पॉट प्राइस फरवरी के आखिरी दिन 68,150 रुपये के स्तर पर पहुंच गई और बाद में 65,174 रुपये के स्तर पर बंद हुई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चांदी 7,250 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ी है।

अप्रैल के महीने में ही सोना छह प्रतिशत से ज़्यादा चढ़ा और सितंबर 2020 में दर्ज़ उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया। बाज़ार एनालिस्ट का मानना है कि निकट भविष्य में भी यह रुझान बना रहेगा और उन्हें लगता है कि सोने में उछाल आना तय है।

कुछ एनालिस्ट का मानना है कि तेल इन्फ्लेशन के आंकड़ों में मुख्य भूमिका निभाता है। यदि पर्सनल कन्ज़म्प्शन प्राइस इंडेक्स को देखें, तो पता चलता है कि इसमें पिछले साल के मुकाबले 6.1 प्रतिशत की तेज़ी आई है। यह 1982 के बाद से अब तक की सबसे अधिक बढ़ोतरी है। कमॉडिटी प्राइस की ऊँचे स्तर पर बने रहने की संभावना की वजह है, सप्लाय से जुड़ा जोखिम।

फिलहाल सोने की कीमत बढ़ने की वजह यह है कि अक्सर इन्फ्लेशन से बचने और राजनीतिक एवं वित्तीय अनिश्चितता की स्थिति में धन के बचाव के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

शॉर्ट सेलर्स को कदम उठाने से मौके का इंतज़ार करना चाहिए और तब तक इंतज़ार करना चाहिए जब तक भूराजनीतिक चिंताएं समाप्त न हो जाएं। एनालिस्ट मानते हैं कि सोना और चांदी जमा करते रहना चाहिए और कीमत घटने पर खरीदा जाना चाहिए। इन्वेस्टर्स को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने और चांदी के बाज़ार मूल्य के समय का कोई विशेष तरीका मौजूद नहीं है।

बड़ी संख्या में मार्किट एनालिस्ट की राय है कि सोना फिलहाल खरीद के दायरे में है और इसी दायरे में बना रहेगा, जब तक अनिश्चितता का माहौल है और इक्विटी बाज़ार की स्थिति अच्छी नहीं है।

निष्कर्ष

ट्रेडर्स को दोनों मौके मिल सकते हैं, तेज़ी का रुख ज़्यादा रह सकता है, इसलिए शॉर्ट पोजीशन केवल इंट्राडे के लिए बनाए रखा जाना चाहिए। अब जब आपको पता है कि सोने की कीमत क्यों बढ़ रही है, तो आप अपने पैसे को गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में इन्वेस्ट करने पर विचार कर सकते हैं। गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ भारतीय बाज़ार में लगभग एक दशक से अधिक समय से हैं, अब तक बड़े पैमाने पर देश का ध्यान इस पर नहीं गया है, क्योंकि भारतीय गोल्ड ईटीएफ का एयूएम एक अरब अमेरिकी डॉलर से कम है। यह स्पाइडर गोल्ड ईटीएफ के विपरीत है जो दुनिया का सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ है और जिसका एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 35 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। "क्या सोने की कीमत बढ़ेगी" जैसे सवालों के जवाब पाने के लिए, आज ही एंजेल वन वेबसाइट पर जाएं।

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है, महज जानकारी प्रदान करना न कि इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई सलाह/सुझाव प्रदान करना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने -बेचने की सिफारिश करना।

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