बैक स्टॉप क्या है?

15 अगस्त,2022

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बैकस्टॉप का तात्पर्य लास्ट टाइप के सपोर्ट से है जो कि अनसब्सक्राइब किए गए शेयरों या स्टॉक और निवेश क्षेत्र में अनसब्सक्राइब किए गए शेयरों की बिक्री में दी जाने वाली सिक्योरिटीज़ को दिया जाता है। अधिक जानने के लिए पढ़े!

स्टॉक और निवेश की दुनिया में कई अलग-अलग प्रकार के शेयर हैं, इनमें इशूड, ऑथोराइज़्ड और सब्सक्राइब किए गए शेयर शामिल हैं| इससे पहले कि हम अनसब्सक्राइब्ड शेयरों और बैकस्टॉप के बारे में जानें, आइए पहले अलग-अलग तरह के शेयरों के बारे में जानें जो उपलब्ध हैं।

  • इशूज़ शेयर कैपिटल - आम जनता को बेचे गए ऑथोराइज़्ड शेयर को इशूड शेयर कहते हैं। ईशू करना, अलॉट करना, या एलोकेशन ईशू किए गए शेयरों को जारी करना दर्शाता है।
  • ऑथोराइज़्ड शेयर कैपिटल- यह कारपोरेशन की कुल पूंजी है जिसे शेयरों की बिक्री के माध्यम से निवेशकों से प्राप्त किया गया है। इसे कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों में सूचीबद्ध किया जाता है। एक कंपनी का एमओए ऑथोराइज़्ड शेयरों की संख्या बताता है।
  • सब्स्क्राइब्ड शेयर कैपिटल - सब्सक्राइब्ड कैपिटल इशूड शेयर कैपिटल का एक सबसेट है जो आम जनता द्वारा खरीदे गए शेयरों की संख्या बताता है। यह ज़रूरी नहीं है कि सभी इशूड शेयर आम जनता द्वारा ही खरीदे जाएं।

बैकस्टॉप क्या है?

एक व्यवसाय के लिए आवश्यक धन जुटाने के विभिन्न तरीके होते हैं। सार्वजनिक होना उनमें से एक है। जब कोई कारपोरेशन पूंजी जुटाने के लिए बाज़ार में ओपन मार्किट शेयर जारी करती है, तो इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि शेयर पूरी तरह से सब्सक्राइब किए जाएंगे। अगर कारपोरेशन पर्याप्त धन नहीं जुटा पाती, तो ऐसी स्थिति में बैकस्टॉप वित्तीय मदद करता है। एक "बैकस्टॉप" को किसी ऐसी चीज़ के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी चीज़ को समर्थन या मज़बूती देती है। शेयर बाजार में, बैकस्टॉप एक वित्तीय व्यवस्था है जिसमें वित्त के सेकेंडरी सोर्स की स्थापना की जाती है यदि धन का ओरिजिनल सोर्स वर्तमान ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त न हो। यह फाइनेंस जुटाने वालों के लिए रक्षा का अंतिम विकल्प जैसा है।

बैकस्टॉप प्रोवाइडर रिस्क की ज़िम्मेदारी लेता है जिससे फाइनेंशियल आवश्यकताओं की अनिश्चितता को कम किया जाता है। इसे एक बीमा पॉलिसी की तरह भी समझा जा सकता है, जिससे धन के सीमित सोर्स की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। इसे एप्लीकेशन के आधार पर कई सेटिंग्स में देखा जा सकता है। कंपनी के दिन-प्रतिदिन के फाइनेंशियल मैनेजमेंट में बैकस्टॉप एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल  सुविधा है जिससे उधारकर्ता एक निश्चित अवधि के लिए राशि उधार ले सकता है और इसका इस्तेमाल कर उसे चुका सकता है। उदाहरण के लिए, 2021-22 में एबीसी कंपनी 10 लाख रुपये की कमी का सामना करती है। ऐसी स्थिति में कंपनी बैकस्टॉप सुविधा की मदद से 10 लाख रुपये उधार ले सकती है और साल भर में अपने दायित्वों का भुगतान कर सकती है। इसके बाद, कारपोरेशन को एक फिक्स्ड समय सीमा के भीतर इस राशि को वापिस चुकाना होगा।

शेयर बाज़ार में बैकस्टॉप का उपयोग मुख्य रूप से शेयर जारी करने की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए किया जाता है। इस स्थिति में, अंडरराइटर एक बैकअप की भूमिका निभाते हुए अनसब्स्क्राइब्ड शेयर खरीदने की गारंटी देता है। ऐसी गारंटी देने के लिए, उसे संपूर्ण इशू साइज़ का कुछ हिस्सा फीस के रूप में देना पड़ता है। मान लें कि XYZ फर्म आम जनता से 5,00,000 रुपये जुटाना चाहती है। इसके लिए यह 100 रुपये के 5,000 शेयर जारी करती है। बैकअप के लिए, उसने एक निवेश बैंक ABC के साथ एक समझौता किया। इस समझौते में ABC शेयर के अनसब्स्क्राइब्ड हिस्से को खरीदने का वादा करती है। XYZ बाज़ार में 4,000 शेयर बेचकर 4,00,000 रुपये जुटा पाती है। ऐसे में, ABC बचे हुए 1,000 शेयर के बदले में शेष 1,00,000 रुपये देती है।

बैकस्टॉप का महत्व

बैकस्टॉप में, अंडरराइटर शेयरों का अनसब्स्क्राइब्ड हिस्सा खरीदकर इशू करने वाले की संपूर्ण सब्सक्रिप्शन की गारंटी देता है। एक फर्म-कमिटमेंट अंडरराइटिंग कॉन्ट्रैक्ट जारीकर्ता कारपोरेशन और बैकस्टॉप परचेसर के बीच समझौता है। इसमें जनता द्वारा नहीं खरीदे गए शेयरों को बैकस्टॉप परचेसर कैपिटल यानी पूंजी के बदले में खरीदता है।

रिस्क के अलावा, बैकस्टॉप प्रोवाइडर शेयरों को खरीदता है। यानी इशू करने वाले कारपोरेशन के पास अब इन शेयरों का अधिकार नहीं रह जाता| इसका मतलब है कि उसके पास अब शेयरों को आगे बेचने या उन पर कोई प्रतिबंध लगाने की शक्ति नहीं है। यदि सभी ऑफर बाज़ार में निवेशकों और अन्य द्वारा खरीदे जाते हैं, तो इशू करने वाले और बैकस्टॉप प्रोवाइडर के बीच कॉन्ट्रैक्ट शून्य और अप्रवर्तनीय हो जाता है क्योंकि अनसब्स्क्राइब्ड शेयर खरीदने की शर्त अब लागू ही नहीं होती।

समापन 

संक्षेप में, बैकस्टॉप समर्थन का एक मैकेनिज़म है जिससे फंड खोजकर्ता बिना किसी बाधा के पर्याप्त मात्रा में धन जुटा सकते हैं। जब इसे अंडरराइटिंग के लिए उपयोग किया जाता है, तो बाज़ार की गतिविधि की परवाह किए बिना एक फर्म को पूर्ण सब्सक्रिप्शन की गारंटी दी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)

बैकस्टॉप प्रतिबद्धता वास्तव में क्या है?

बैकस्टॉप कमिटमेंट इशू करने वाली फर्म और बैकस्टॉप प्रोवाइडर के बीच एक समझौता है जिसमें अनसब्स्क्राइब्ड शेयर यानी ऐसे शेयर जो जनता द्वारा नहीं खरीदे जाते हैं उन्हें खरीदने की गारंटी दी जाती है|

बैकस्टॉप अधिकार क्या प्रदान करता है?

बैकस्टॉप राइट्स ऑफरिंग तब होती है जब एक अंडरराइटर किसी भी शेयर या अधिकारों को खरीदने के लिए कमिट करता है, जो राइट्स ऑफरिंग के शुरू होने से पहले राइट्स सेल्स में प्रयोग नहीं किए जाते हैं।

बैकस्टॉप वैल्यू वास्तव में क्या है?

बैकस्टॉप वैल्यू उन शेयरों की वैल्यू है जो ऑफर में जनता द्वारा खरीदे नहीं जाते हैं, जिसे बाद में बैकस्टॉप प्रोवाइडर द्वारा शेयरों के बदले में दिया जाता है।

एक कॉन्ट्रैक्ट बैकस्टॉप क्या है?

एक कॉन्ट्रैक्ट बैकस्टॉप एक फाइनेंशियल व्यवस्था है जिसमें धन का एक सेकेंडरी सोर्स एंटीसिपेटेड अमाउंट की गारंटी देता है यदि पहला सोर्स वर्तमान ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

 

 

 

डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग का उद्देश्य है, महज़ जानकारी प्रदान करना न कि इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई सलाह/सुझाव प्रदान करना और न ही किसी स्टॉक को खरीदने -बेचने की सिफारिश करना।

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