कंपनियां क्यों चुन रही हैं आईपीओ का रास्ता

22 सितम्बर,2021

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आपने बहुत से अपकमिंग आईपीओ के बारे में सुना होगा। उन ब्रांडों के आईपीओ के बारे में, जिन्हें आप जानते हैं और शायद उनका इस्तेमाल भी करते हों - ज़ोमैटो, जहां आप अपना खाना ऑर्डर करते हैं; पेटीएम जिससे आप पेमेंट करते हैं; इक्सिगो जिसका आपने ट्रेवल बुकिंग के लिए इस्तेमाल किया होगा… आपने शायद पिछले साल बर्गर किंग आईपीओ के बारे में भी सुना होगा।

दरअसल, जो नाम आप याद कर सकते हैं या पहचान सकते हैं, उनके अलावा साल भर में बहुत सारे आईपीओ आते हैं। लेकिन आईपीओ क्या है और कंपनियां उन्हें लाने का विकल्प क्यों चुनती हैं? 

इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग - जिसका संक्षिप्त रूप है आईपीओ- लोगों के लिए कंपनी का शेयरहोल्डर बनने का प्रस्ताव है। कंपनियों के आईपीओ लाने की दो बड़ी वजहें हैं और इनके 4 संभावित लक्ष्य हैं; आइए आगे पढ़ते हैं:

1. कंपनियां जब पूंजी जुटाने के लिए आईपीओ लाती हैं  

यही मुख्य वजह है कि कंपनियां आईपीओ लाती हैं। इस दायरे में, अलग-अलग तरह के लक्ष्यों और उद्देश्यों के लिए पूंजी की ज़रुरत हो सकती है। इनमें से तीन सबसे आम वजह हैं डेट सेटलमेंट, एक्सपेंशन व एक्वीज़ीशन और कॉर्पोरेट एक्सपेंडिचर का मैनेजमेंट। बैंक और नॉन-बैंकिंग फिनांस कॉर्पोरेशंस अपने कैपिटल बेस के विस्तार के लिए आईपीओ लाते हैं। 

इसे समझने का सबसे अच्छा तरीका है कुछ हालिया और अपकमिंग आपीओ के उदाहरणों पर नज़र डालना। 

लक्ष्य #1 अपने कैपिटल बेस का एक्सपेंशन करना

आइए बैंकों से शुरू करें - जो भविष्य की पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अक्सर अपना कैपिटल बेस बढ़ाना चाहते हैं:

  • फिनकेयर स्मॉल फाइनांस बैंक 2021 के दौरान एक आईपीओ लाने वाला है। अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में, बैंक ने कहा है कि आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग अपने टियर 1 कैपिटल बेस का एक्सपेंशन के लिए किया जाएगा ताकि भविष्य में पैदा होने वाली कैपिटल की ज़रुरत पूरी की जा सके।
  • यह आईपीओ "स्मॉल बैंक्स ओनली" के लक्ष्य से नहीं लाया जा रहा है। दूसरा उदाहरण है एसबीआई कार्ड्स का, जिसने पिछले साल आईपीओ लाया, जो 2020 में है, जिसने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में आईपीओ के ज़रिये जुटाई गई राशि के लिए इसी तरह के प्लान का ज़िक्र किया था। यह प्लान था अपने कैपिटल बेस का एक्सपेंशन ताकि भविष्य की पूंजी की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।

लक्ष्य # 2: डेट सेटलमेंट

कंपनियां पब्लिक को कैपिटल के बदले शेयरहोल्डर बनने की मंजूरी भी दे सकती हैं जो उन्हें मुश्किल से बाहर निकालने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, संभावित इन्वेस्टर का बड़ा हिस्सा किसी ऐसी कंपनी में इन्वेस्ट करने के प्रति थोड़ा सतर्क हो सकता है जिसे बेल आउट करने की जरूरत हो। वे चाहते हैं कि उनकी पूंजी बढ़े - वे किसी कॉर्पोरेशन को उबारने में भूमिका अदा नहीं निभाना चाहते। कंपनियां आमतौर पर अपने आईपीओ को अधिक आकर्षक इन्वेस्टमेंट बनाने के लिए आईपीओ की आय से एक्सपेंशन करने का प्लान पेश करती हैं। हालांकि कुछ कंपनियों की ब्रांड रेकोग्निशन (कभी-कभी बस मानी हुई, कभी-कभी सचमुच) और क्षमता होती है कि वे खुले तौर पर कहते हैं कि आईपीओ की आय का उपयोग डेट सेटलमेंट के लिए किया जाएगा।

इन उदाहरणों पर एक नज़र डालें:

  • पिज्जा हट, कोस्टा कॉफी और केएफसी की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी कंपनी है देवयानी इंटरनेशनल। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कॉरपोरेट खर्चों के लिए और डेट सेटलमेंट के लिए भी किया जाएगा। 
  • गो एयरलाइंस जो काफी जानी-मानी कंपनी है,  इसने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में खुले तौर पर कहा गया है कि आईपीओ की राशि डेट सेटलमेंट में जायेगी। आम आदमी को पता है कि एयरलाइंस को बहुत पैसे चाहिए होते हैं और वे भारी कर्ज लेती हैं। 
  • सुप्रिया लाइफसाइंसेज नाम की एक फार्मा कंपनी है, जिसने हाल ही में एक आईपीओ के लिए आवेदन किया है। देवयानी इंटरनेशनल की तरह, उसके रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में भी कहा गया है कि आईपीओ से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल डेट सेटलमेंट और कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए किया जायेगा।

लक्ष्य # 3: एक्सपेंशन और एक्वीज़ीशन के लिए

कंपनियों का प्रदर्शन भले ही अच्छा हो, लेकिन उससे भी बेहतर करने के लिए उन्हें एक बड़े इन्वेस्टमेंट की ज़रुरत हो सकती है। कंपनी मौजूदा मुनाफे को कारोबार में डालकर एक्सपेंशन के लिए इन्वेस्टर कैपिटल का प्रयास कर सकती है।

इसका एक अच्छा उदाहरण जोमैटो है। फूड डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर ने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कहा है कि आईपीओ की तीन चौथाई रकम कारोबार के एक्सपेंशन में जाएगी।

2. जब कंपनियां इनिशियल इन्वेस्टर्सऔर प्रमोटर्स को बाहर निकलने के लिए आईपीओ लाती हैं

इसमें लक्ष्य संख्या 4 भी जुड़ जाता है। 

लक्ष्य # 4: मौजूदा इन्वेस्टर्सों के लिए ओएफएस

कुछ आईपीओ में ऑफर फॉर सेल शामिल होता है और कुछ अन्य पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होते हैं। इन्वेस्टर क्यों पीछे हटना चाहेंगे? क्या यह कोई बुरा अंदेशा है? 

जरूरी नहीं: इन्वेस्टर्स की अन्य प्राथमिकताएं हो सकती हैं, हो सकता है कि उन्होंने अपने लक्ष्य पूरे कर लिए हों, वे डायवर्सिफाय करना चाहते हों ... कुछ भी हो सकता है। ये प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर होते हैं - हो सकता है कि उन्हें इन्वेस्ट करने का कोई दूसरा विशेष, रोमांचक मौक़ा मिल गया हो।

उदाहरण के लिए: 

अपकमिंग पेटीएम आईपीओ के बारे में चर्चा है कि यह 3 अरब डॉलर का हो सकता है, जिसमें से 1.6 अरब डॉलर की पेशकश मौजूदा प्रमोटर्स और शेयरहोल्डर्स के ओएफएस के जरिये होगी जो बाहर निकलने के लिए तैयार हैं।

जिस स्मॉल फाइनांस बैंक - फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक - की बात हमें पहले की है वह काफी हद तक ओएफएस है। 1330 करोड़ रुपये के आईपीओ राशि में से 1000 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल होगा।

सीएएमएस ने 2020 में एक आईपीओ लाया जो पूरी तरह से ओएफएस था। सीएएमएस के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कहा गया था कि आईपीओ की पूरी आय शेयरहोल्डर एनएसई इन्वेस्टमेंट को बेचने में लगेगी, ताकि उन्हें बाहर निकलने का मौका मिले।

यदि आप आईपीओ में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो आपको: 

  1. कंपनी का फिनांशियल ट्रैक रिकॉर्ड देखना चाहिए
  2. कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को ठीक से पढ़ें और लंबित कानूनी मामलों जैसे खतरों पर ध्यान देना चाहिए 
  3. कंपनी के बारे में खबर और आम रुझान को ऑनलाइन ट्रैक करना चाहिए

हमेशा याद रखें कि पर्याप्त रिसर्च करें और इन्वेस्ट करते समय उचित सावधानी बरतें। शेयर मार्केट के बारे में अपनी समझ बढ़ाने के लिए हमारे अन्य ब्लॉग पढ़ें।

इसका मतलब है कि शेयर मार्केट में हर तरह के इन्वेस्टमेंट में जोखिम होता है - इनमें आईपीओ भी शामिल है। शेयर मार्केट में कंपनी के लिस्ट होने के बाद शेयर की कीमत किस दिशा में जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि किस दर से प्राइस बढ़ेगी - यदि बढ़ेगी तो - स्टॉक की क्या स्थिति रहेगी। इन्वेस्ट करने से पहले हमेशा अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और इन्वेस्टिंग की अवधि पर विचार करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आईपीओ प्रॉफिटेबल इन्वेस्टमेंट है? 

शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट प्रॉफिटेबल होगा या नहीं, इसकी गारंटी देने का कोई तरीका नहीं है। इन्वेस्टर्स को हर आईपीओ लाने वाली कंपनी के बारे में खुद रिसर्च करना चाहिए ताकि यह तय किया जा सके कि कंपनी में ग्रोथ ही संभावना दिखती है या नहीं।

क्या आईपीओ ओपन मार्केट में स्टॉक खरीदने से ज्यादा जोखिम भरा या इसमें कम जोखिम है? 

इस तरह की तुलना करने का कोई तरीका नहीं है क्योंकि जोखिम कंपनी और इन्वेस्टर की उस जोखिम को झेलने की क्षमता इन्वेस्टर पर निर्भर करता है। हालांकि, पहले से लिस्टेड कंपनियों का हिस्टोरिकल स्टॉक प्राइस उपलब्ध होता हैं जिनका उपयोग कंपनी के आकलन के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, ओपन मार्केट में स्टॉक खरीदते समय, इन्वेस्टर के पास स्टॉप लॉस सेट करने का विकल्प होता था, जो पहले से सेट स्टॉप लॉस नीचे आने पर अपने स्टॉक बेच देता है। यह विकल्प आईपीओ में नहीं है।

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