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इक्विटी पोर्टफोलियो बनाते समय याद रखने वाली बातें

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वित्तीय बाजार में कई तरह के उपकरण होते हैं जिनमें आप निवेश कर सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनी से लेकर कृषि उत्पाद और तेल या गोल्ड तक, एक निवेशक अपने पैसे को बहुत बड़ी फाइनेंशल लिस्ट में से किसी पर भी लगा सकता है। इक्विटी वह सबसे लोकप्रिय एसेट है जिसमें अभी सबसे ज्यादा ट्रेडिंग हो रही है। इक्विटी पोर्टफोलियो शेयर मार्केट में किए गए आपके निवेश का एक संग्रह है।  

आज के तेजी भरे शेयर मार्केट में, एक अच्छी तरह से बना हुआ इक्विटी पोर्टफोलियो पैसा और वेल्थ बनाने के लिए बहुत जरूरी है। भारत में इक्विटी मार्केट डबल-डिजिट रिटर्न दे रहा है। इक्विटी रिटर्न के सामने बाकी किसी भी एसेट वर्ग के जरिये मिलने वाले रिटर्न काफी कम लगते हैं। इस परिस्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपको इक्विटी पोर्टफोलियो बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

1 - निवेश के लक्ष्य :

“आप क्यों निवेश कर रहे हैं?”, “आपके निवेश का उद्देश्य क्या है ?” निवेश करने का आपका उद्देश्य कुछ भी हो सकता है, जैसे शादी, शिक्षा, परिवार की योजना बनाना, बच्चों की शिक्षा, कार खरीदना, घर खरीदना, टैक्स बचाने के लिए या सिर्फ सेविंग करना।

निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले, शांति से बैठकर अपनी पूरी वित्तीय स्थिति पर एक ईमानदारी भरी नजर डालनी चाहिए, खासकर अगर आपने पहले कभी भी फाइनेंशल प्लानिंग नहीं की है। सफल निवेश का सबसे पहला कदम यह है कि आपको अपने लक्ष्य और रिस्क को झेलने की क्षमता का पता लगाना है, यह या तो आपको खुद करना होता है या फिर किसी फाइनेंशल एड्वाइसर की मदद ली जा सकती है। जब एक बार आपको क्या और क्यों सवालों का जवाब अच्छे से समझ आ जाता है तो अगला कदम होता है इन लक्ष्यों के लिए समय क्षितिज सेट करना।   

2 - बाजार की बुनियादी समझ

पूंजी बाजार में सफल होने के लिए, आपको इसकी मूल बातों का पता होना चाहिए। मार्केट के बारे में थोड़ा सा ज्ञान आपके पोर्टफोलियो के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद कर सकता है।  

3 - जोखिम झेलने की क्षमता:

सभी इक्विटी निवेश में कुछ हद तक रिस्क तो होता ही है। रिस्क लेने का इनाम हमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होता है। अगर आपके पास लंबे अवधि का वित्तीय लक्ष्य है, तो आप ज्यादा रिस्क वाले एसेट वर्ग जैसे शेयर या बॉन्ड में निवेश कर ज्यादा पैसे कमा सकते हैं बजाय के कम जोखिम वाले एसेट जैसे नकद समकक्षों में निवेश करने के।

इसे हम अजय के उदाहरण की मदद से समझते हैं, जिनकी आय और रिस्क झेलने की क्षमता कम है।

अजय का वेतन: ₹60,000 

निवेश योग्य राशि: ₹10,000 

शेष राशि: ₹50,000

जोखिम लेने की क्षमता: कम

मानिए कि अजय ने अपना पैसा सेंसेक्स के एक्विटी इंडेक्स फंड मे लगा दिया है। 16 अप्रैल को सेंसेक्स कम से कम 25% गिरावट पर है। इसका मतलब यह है कि अगर अजय आज अपने निवेश को बेचने की सोचता है तो वह कम से कम अपने ₹2500 खो देगा। 

इस स्थिति में, कम जोखिम झेलने की क्षमता के साथ सिर्फ इक्विटी में निवेश करना अजय के लिए नुकसानदायक है।

उसके पास उसकी निवेश राशि में से अब सिर्फ  ₹7500 बचे हैं। मानिए कि वह किसी आपातकालीन स्थिति में था और उसके निवेश के छह महीने के बाद उसे कम से कम ₹11,000 की जरूरत थी।

चलिए यहाँ इस निवेश में कम से कम दो गलतियों को पहचानें:

कोई विविधता नहीं: यहां, उसने अपना सारा पैसा सेंसेक्स में निवेश किया और इंडेक्स उसके आवश्यक कार्यकाल के दौरान ही गिर गया। अब वह किसी और निवेश का फायदा नहीं उठा सकता है जो उसी अवधि के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर सकता था।

कम जोखिम: उसने अपने निवेश पर नुकसान झेला तो उसे अपने खर्चों पर रोक लगानी होगी और अपने पास बची हुई राशि, जो ₹50000 है, में से कुछ पैसे को काम में लेना होगा, जो आपातकाल में उसके काम आएगा। 

4 - अपने जोखिम और लक्ष्यों का संतुलन मैनेज करें

एक पोर्टफोलियो में अलग- अलग बाजार स्थिति में उतार-चढ़ाव वाले रिटर्न देने वाले विभिन्न एसेट वर्गों को शामिल करने से  एक निवेशक बड़े नुकसान से बच सकता है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप अपनी बेटी की शादी के लिए 20 साल में एक फंड बनाना चाहते हैं। अगर आप हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड इक्विटी में निवेश करते हैं तो, आप महीने में कम पैसों का निवेश करके जरूरी धन कमा कर सकते है क्योंकि इस निवेश से आपको ऊंचे रिटर्न की उम्मीद है।

 

5 - आपातकालीन निधि बनाए रखें

किसी भी आपातकालीन स्थिति को कवर करने के लिए सेविंग्स में पर्याप्त पैसा होना बहुत जरूरी है। वह आपातकालीन स्थिति किसी भी तरह से आ सकती है जैसे अचानक बेरोजगारी या कुछ और। कुछ लोग अपनी सेविंग्स को ऐसे लेकर चलते है कि उनके पास सेविंग्स में अपने वेतन के  6 महीने तक की कुल राशि होती है, और उन्हें यह पता होता है कि अगर कोई भी आपातकालीन स्थिति आती है तो उनके पास इसका सामना करने के लिए एक सेट फंड है।  

6 - विविधता

घाटे से बचने और अपने पोर्टफोलियो को स्वस्थ रखने के लिए सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक है, एक ही जगह पर अपने सभी पैसों को निवेश करने की जगह अलग-अलग तरह की सिक्योरिटीज़ में निवेश करना। विविधीकरण से रिस्क अलग-अलग सिक्योरिटीज़ में बंट जाता है, और अगर आपका कोई निवेश घाटे में चला भी जाता है तो भी आपके पोर्टफोलियो पर इसका नेगेटिव प्रभाव नहीं पड़ेगा।

7 - अनुशासित निवेश

एक स्वस्थ पोर्टफोलियो बनाने के लिए आपको निरंतर और अनुशासित तरीके से निवेश करना होगा। अगर आपके पास निरंतर आय आती है तो आपको पोर्टफोलियो में जितना हो सके उतना निरंतर निवेश करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आपकी नौकरी चली जाती है या आप रिटायर हो जाते हैं तो यह निवेश आपको तब भी वित्तीय आज़ादी देंगे जब आपके पास आय का कोई नियमित स्रोत ना हो।  

8 - निवेश की निगरानी करना

अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप मार्केट में अपने निवेश की स्थिति को लगातार ट्रैक करें। खराब निवेश आपके पोर्टफोलियो को कमजोर बनाते हैं, जिसकी वजह से आपको बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। निवेश की निगरानी करके आप अपना काफी नुकसान होने से बचा सकते हैं। इससे आपको यह पता चल जाता है कि कौन-से निवेश में बढ़ने की क्षमता है और किसे आपको अपने पोर्टफोलियो के प्रदर्शन को खराब होने से बचाने के लिए तुरंत बेचना चाहिए।

9 - वित्तीय सलाहकार 

अगर आपके पास एक से ज्यादा निवेश हैं तो पोर्टफोलियो मैनेजमेंट अब आपकी एक जरूरत बन गया है। एक अच्छा इक्विटी पोर्टफोलियो बनाने के लिए मार्केट में चल रहे ट्रेंडस और योगदान करने वाले कारकों की एक मूल समझ की जरूरत होती है। अगर आपको लगता है कि आपका इक्विटी पोर्टफोलियो खराब स्थिति में है तो आपको फाइनेंशल एड्वाइसर से परामर्श लेने में कभी देरी नहीं करनी चाहिए।

10 - कर दायित्व 

अच्छे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में टैक्स लाइब्लीटी को शामिल करना चाहिए। एक कर-आस्थगित खाते में निवेश का एक पोर्टफोलियो एक कर-देय खाते में निवेश के पोर्टफोलियो की तुलना में आपकी संपत्ति तेजी से बढ़ाएगा। चूंकि आपको अपने रिटायरमेंट फंड अकाउंट से निकाली गई राशि और अन्य कमाई पर टैक्स देना होगा, इसलिए आपको उन जगहों पर निवेश करना चाहिए, जहां आप टैक्स बचा सकते हैं और इस तरह, अपनी कर योग्य आय कम कर सकते हैं।

निष्कर्ष

ये कुछ बहुत ही सामान्य मगर अहम पॉइंट हैं जो आपको इक्विटी पोर्टफोलियो बनाते समय ध्यान में रखने चाहिए। दर्शक से शेयरधारक तक, इस मॉड्यूल में ये सफर तय करने के बाद अब अगले मॉड्यूल की ओर बढ़ने का समय आ गया है जो आपको टैक्स बचाने के बारे में विस्तार से बताएगा। निवेशक और व्यापारी कैसे टैक्स बचा सकते हैं, इसके बारे में जानने के लिए आगे पढ़ते रहें।

अब तक आपने पढ़ा

  • कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले, बैठकर अपनी पूरी वित्तीय स्थिति पर एक ईमानदार नज़र डालें - खासकर तब अगर आपने पहले कभी वित्तीय योजना नहीं बनाई हो।
  • सभी इक्विटी निवेशों में कुछ हद तक जोखिम होता है। जोखिम लेने का इनाम अधिक निवेश रिटर्न की संभावना है।
  • अपने पोर्टफोलियो को प्रबंधित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप बाजार में अपने निवेश की स्थिति को लगातार ट्रैक करें।
  • खराब निवेश पोर्टफोलियो प्रदर्शन को कमज़ोर करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर नुकसान होता है।
  • अच्छे पोर्टफोलियो प्रबंधन में कर देनदारियों पर विचार करना शामिल होता है।
  • अगर आपको लगता है कि आपका इक्विटी पोर्टफोलियो खराब स्थिति में है, तो वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने में कभी देर नहीं करनी चाहिए।
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