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पोर्टफोलियो प्रबंधन

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इन 7 पोर्टफोलियो प्रबंधन की गलतियों से बचें

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क्या आपने कभी ऐसे बच्चे को देखा है जो अभी लिखना सीख ही रहा हो? क्या वो पहली बार में ही लिखना सीख जाता हैं? हम पूरे यकीन के साथ कह सकते है की ऐसा नहीं हो सकता। इससे पहले की वो लिखना सीखे, उसे इसके लिए बहुत प्रैक्टिस करनी पड़ेगी, और ज़ाहिर से बात है की इस प्रकिया में उससे गलतियाँ भी बहुत होंगी। देखा जाए तो यह प्रकिया हमारी ज़िंदगी की हर कौशलता के सफर में आती ही है, चाहे वह ड्राइविंग या मैथ्स सीखना हो या बास्केटबाल कोर्ट में एक गोल करना हो, यह वह प्रकिया है जिससे हमें गुजरना ही पड़ता है।

इसी तरह, पोर्टफोलियो-मैनेजमेंट को भी थोड़े समय में सीखा जा सकता है। और यकीन मानिए, जब आप इसे सीखने की कोशिश करेंगे, तब आप आपकी सोच से भी कहीं ज्यादा ग़लतियाँ करेंगे। लेकिन इस बात की ज्यादा चिंता ना करें, यहाँ हम इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट की कुछ आम गलतियों के बारे में बताएँगे जो लगभग हर निवेशक उसके शुरुआती दौर में करता है।

इन सभी को अच्छी तरह से जान और समझ लें ताकि आप इन गलतियों को करने से बच सकें।

  • पोर्टफोलियो के निवेशकों को अपने लक्ष्यों से ना जोड़ना 

एक शुरुआती निवेशक के रूप में, आपको सिर्फ अपने वित्तीय लक्ष्य बनाने तक ही सीमित नहीं हो जाना चाहिए। शुरुआती निवेशकों को अक्सर लगता है कि किसी भी तरह का निवेश करने से वे अपने वित्तीय लक्ष्य पूरे कर लेंगे। लेकिन ये बिल्कुल भी सच नहीं है। आप अपने लक्ष्यों को तभी पा सकते हैं जब आप उन्हें सही निवेश विकल्पों के साथ जोड़ें। उदाहरण के लिए, अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के लिए बचत करना है, तो आपको व्यक्तिगत स्टॉक और टी-बिल की बजाय, लॉन्ग-टर्म इनवेस्टमेंट जैसे म्यूचुअल फंड और पीपीएफ में निवेश करना चाहिए। 

  • पोर्टफोलियो बनाते समय खुद की रिस्क झेलने की क्षमता पर ध्यान ना देना 

अपने पोर्टफोलियो में अपनी पूँजी का आवंटन करते समय आपकी रिस्क झेलने की क्षमता एक बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। ज़्यादातर शुरुआती निवेशक, पोर्टफोलियो बनाते समय अपनी रिस्क झेलने की क्षमता को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यकीन मानिए, यह एक बहुत ही बेकार फैसला हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी कंज़रवेटिव निवेशक के लिए स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर जैसे जोखिम वाले विकल्प में निवेश करना समझदारी भरा कदम बिल्कुल नहीं है। 

इसीलिए एक अच्छी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सलाह पर ध्यान दें और अपनी रिस्क झेलने की क्षमता का पता लगाने के लिए एक बार रिस्क-एनलाइसिस ज़रूर करें। और जब आप ऐसा कर लेते हैं, तो आप अपनी रिस्क झेलने की क्षमता के आधार पर पोर्टफोलियो बना सकते हैं।

  • अधूरी रिसर्च के साथ एक इनवेस्टमेंट-पोर्टफोलियो बनाना

फंडामेंटल और टेक्निकल ऐनालिसिस एक बहुत शक्तिशाली साधन है। दुर्भाग्य से, कई शुरुआती निवेशक बिना रिसर्च किए सीधे ही इनवेस्टमेंट करने लगते हैं, खासकर तब जब वे कंपनियों के शेयरों का पोर्टफोलियो बनाते हैं। आपका यह एक गलत कदम भविष्य में बहुत महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि कमज़ोर वित्तीय नींव वाली कंपनी शॉर्ट-टर्म में तो अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं, लेकिन वह मार्केट में लंबे समय तक शायद ना टिक पाएँ।

सही रिसर्च आपको ऐसे मुद्दों को आसानी से पहचानने में मदद कर सकती है। इसलिए, इससे पहले कि आप अपने पोर्टफोलियो के लिए किसी कंपनी (या कोई अन्य निवेश विकल्प) का स्टॉक चुनें, हमेशा पूरी रिसर्च करने के बाद ही चुनें। इस तरह, आप काफी हद तक अपने निवेश विकल्प के वर्तमान प्रदर्शन के साथ-साथ उसके भविष्य के बारे में भी अंदाज़ा लगा सकते हैं।

  • पोर्टफोलियो में विविधता ना होना

आपने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट से जुड़ी इस सलाह के बारे में काफी सुना होगा। विविधीकरण एक बहुत ही अहम रणनीति है जो आपके इनवेस्टमेंट से जुड़े रिस्क को कम करने में मदद करती है। फिर भी, कुछ निवेशक, खासकर वो, जो अभी इस खेल में नए है, वह सिर्फ कुछ निवेश विकल्पों पर केंद्रित होकर अपना पोर्टफोलियो बना लेते हैं।

चलिए 23 वर्षीय अजय का उदाहरण देखते हैं। वह एक स्टॉकब्रोकिंग फर्म में काम करता है और इसलिए, वह शेयरों में एक बड़ा निवेश करना चाहता है। अजय का यह करना सही हो सकता है पर तब, जब वह कुछ कम रिस्क वाले निवेश विकल्पों के साथ अपने पूरे पोर्टफोलियो को बैलेंस करे। हालांकि, अजय ने अपना पूरा पैसा ही शेयर मार्केट में लगा दिया है, इसलिए, उसका निवेश जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 

और वहीं दूसरी तरफ, 30 वर्षीय राहुल है। वह एक बहुत ही कंज़रवेटिव निवेशक है और अपने माता-पिता की तरह, वह भी फ़िक्स्ड डिपोसिट में विश्वास रखता है। उसने अपनी बचत और पूँजी का 100% ही फ़िक्स्ड डिपोसिट में लगा दिया। इसमे कोई दोराय नहीं कि इससे उसका पैसा तो सुरक्षित रहा पर इससे राहुल ज्यादा रिटर्न नहीं कमा पाएगा और उसे कम रिटर्न से ही संतोष करना पड़ेगा।

अगर अजय और राहुल, दोनों ही अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में थोड़ी विविधता लाते, मतलब दोनों अपने पैसे को सोच-समझ कर अलग-अलग जगह लगाते, तो दोनों को ही अच्छा मुनाफा हो सकता है।

 
  • बहुत ज्यादा विविधीकरण कर देना 

विविधीकरण के सिक्के के दो पहलू हैं, एक आपने इसके पहले वाले पॉइंट में पढ़ा, और दूसरा आप यहाँ देखेंगे। इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट में एक बहुत ही आम ग़लती है जो बहुत से शुरुआती निवेशक करते हैं और वह है बहुत ही ज्यादा विविधिकरण कर देना। पोर्टफोलियो में सिर्फ कुछ ही निवेश शामिल करने के डर से वह कुछ ज़्यादा ही विविधिकरण कर देते हैं और कई सारे निवेश विकल्पों में निवेश कर देते हैं।

 उदाहरण के लिए, दीपक के निवेश पोर्टफोलियो पर एक नज़र डालते हैं

  • लार्ज-कैप शेयर: 10%
  • मिड-कैप शेयर: 10%
  • स्मॉल-कैप शेयर: 10%
  • डेट फंड: 10%
  • रियल एस्टेट : 10%
  • सोना: 10%
  • फिक्स्ड डिपॉजिट: 20%
  • पीपीएफ: 10%
  • टी-बिल: 10%

आप देखें कि कैसे उसने विविधिकरण के लिए अपनी पूँजी को बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में कई सारे निवेश विकल्पों में बाँट दिया। इससे उसका पोर्टफोलियो कमज़ोर हो गया है, जिससे उसके निवेश बढ़ने और अच्छे रिटर्न मिलने की संभावना भी कम हो गई है।

इससे बचने एक अच्छा तरीका है कि आप विभिन्न निवेशों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अवसरों के आधार पर विविधिकरण करें। यह विविधीकरण के लक्ष्यों को तो पूरा करेगा ही, बल्कि पूँजी को सही जगहों पर भी निवेश करने में काफी मदद करेगा।

  • समय-समय पर पोर्टफोलियो को संतुलित ना करना

पोर्टफोलियो प्रबंधन ऐसी चीज़ नहीं है कि एक बार करा और फिर भूल गए। यह एक लगातार चलने वाली प्रकिया है। कई नए निवेशक यह सोचते हैं कि उन्होंने तो एक बार सफलतापूर्वक एक पोर्टफोलियो बना लिया और अब इस पर ध्यान देने की ही ज़रूरत नहीं है, जबकि असल में ऐसा बिलकुल नहीं है। 

आपको नियमित रूप से अपने पोर्टफोलियो के प्रदर्शन को देखना होगा और यहां तक ​​कि आपको अपनी निवेश रणनीति को सही ढंग से लागू करने के लिए पोर्टफोलियो की संरचना में बदलाव भी करना पड़ सकता है। अगर आपके पोर्टफोलियो में एक या उससे ज़्यादा निवेश कमज़ोर हैं, तो उन्हें पोर्टफोलियो में रखना कोई समझदारी वाली बात नहीं है। आपको अपने पोर्टफोलियो को अपने लक्ष्यों की दिशा में चलाने के लिए, समय-समय पर इसके तत्वों को बैलेंस करते रहना होगा।

  • ज़रूरत पड़ने पर पेशेवर मदद ना लेना

शुरुआती निवेशकों के तौर पर, पोर्टफोलियो बनाना और मैनेज करना आसान काम नहीं है। कभी-कभी, आपको पेशेवर सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है। दुर्भाग्य से, कई निवेशक जो निवेश की दुनिया में नए हैं, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की बात आने पर मदद मांगने से कतराते हैं।

लेकिन, जैसा कि आप जानते हैं, शेयर बाज़ार का यह खेल बहुत अस्थिर होता है। आपको बहुत बार मुश्किलों से गुज़रना पड़ सकता है। और जब आप किसी पोर्टफोलियो मैनेजर से मदद लेते हैं तो वह आपके पोर्टफोलियो को सुरक्षित बनाने में बहुत अच्छे से मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

तो, यहाँ यह मॉड्यूल खत्म होता है। हमारे आगामी मॉड्यूल ‘फंडामेंटल विश्लेषण के मूल सिद्धांत’, मेंं हम कंपनी के फंडामेंटल एनालिसिस के बारे में गहराई से जानेंगे। इसमें आपको फाइनेंशल स्टेटमेंट्स को पढ़ना और उनका विश्लेषण करना भी सिखाएंगे, तो पढ़ते रहिए।

अब तक आपने पढ़ा

  • अपने लक्ष्यों के साथ पोर्टफोलियो के निवेश को जोड़ना महत्वपूर्ण है।
  • अपनी रिस्क झेलने की क्षमता को निर्धारित करने के लिए पहले रिस्क एनालिसिस करें। ऐसा करने के बाद अपनी रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर पोर्टफोलियो बनाएँ। 
  • फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस शक्तिशाली साधन हैं। दुर्भाग्य से, कई शुरुआती निवेशक ऐनालिसिस को छोड़, सीधे निवेश करने में लग जाते हैं, खासकर जब वे कंपनियों के शेयरों का पोर्टफोलियो बनाते हैं।
  • विविधीकरण एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीति है जो आपके निवेश से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
  • पोर्टफोलियो में बहुत ज़्यादा विविधिकरण भी एक गलत फैसला हो सकता है। 
  • आपको अपने पोर्टफोलियो की प्रगति की नियमित निगरानी करने की भी ज़रूरत होती है। आपको निवेश रणनीति को सही ढंग से लागू करने के लिए पोर्टफोलियो की संरचना में बदलाव भी करना पड़ सकता है।
  • पेशेवर पोर्टफोलियो मैनेजर से व्यावसायिक सहायता शुरुआती लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।
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