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वार्षिक रिपोर्ट: यह किसी कंपनी के मूल्यांकन को कैसे प्रभावित करती है

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कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट कंपनी से जुड़े आंतरिक कारकों की जानकारी देती है। लेकिन सिर्फ यही कारक कंपनी के मूल्य को प्रभावित नहीं करते। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट और आंतरिक पहलुओं के बाहर भी एक दुनिया है, या यूँ कहें, कि इनके अलावा भी कई अहम कारक हैं। और इस अध्याय में हम उन्ही के बारे में पढ़ेंगे। हम बहुत से बाहरी कारकों के बारे में ध्यान से पढ़ेंगे और ये समझने की कोशिश करेंगे कि वे कंपनी के मूल्यांकन को कैसे प्रभावित करते हैं। तो चलिए, शुरू करते हैं।

बाज़ार की मौजूदा परिस्थियाँ

कंपनी जिस उद्योग के अंतर्गत काम करती है, उस उद्योग की बाज़ार परिस्थितियों का कंपनी के मूल्यांकन पर गहरा असर पड़ता है। बाज़ार की मौजूदा परिस्थितियों या करेंट मार्केट सिनारियो, में बहुत सारे कारक शामिल होते हैं, जैसे उद्योग की मांग ,बाज़ार का साइज़, उद्योग को नियंत्रित करने वाली नीतियाँ, और व्यापक ग्लोबल परिस्थितियाँ। चलिए एक-एक कर, इन कारकों के बारे में जानते हैं।

  • उद्योग की मांग

अगर एक कंपनी किसी ऐसे उद्योग के अंतर्गत काम करती है जो अभी ट्रेंड में चल रहा है या आमतौर पर बाज़ार में जिसकी डिमांड बनी रहती है, तो उसका मूल्यांकन, किसी दूसरे उद्योग के अंतर्गत काम कर रही, उसी साइज़ की, बाकी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उस कंपनी को उद्योग के प्रोडक्ट की बढ़ती डिमांड और उस उद्योग में बढ़ते निवेश का फायदा मिलता है।  

  • बाज़ार का आकार

इंडस्ट्री की मांग की तरह ही, किसी उद्योग के लिए बाज़ार जितना बड़ा होगा, उस इंडस्ट्री में काम करने वाली कंपनी का मूल्यांकन उतना ही ज्यादा होगा। उदाहरण के लिए, अगर कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स के बाज़ार का आकार बड़ा है, तो उस उद्योग में काम करने वाली कंपनियों का मूल्यांकन ज्यादा हो सकता है।

  • उद्योग को नियंत्रित करने वाली नीतियाँ

सरकार द्वारा बनाई गयी नीतियाँ, कंपनी के मूल्यांकन पर बहुत ज्यादा प्रभाव डाल सकती हैं। अगर उन नीतियों में बहुत ज्यादा प्रतिबंध लगाए गए हैं और नियामक प्राधिकरणों का नियंत्रण बहुत ज़्यादा है, तो कंपनियों का मूल्यांकन कम हो सकता है। 

  • व्यापक ग्लोबल परिस्थितियाँ

मौजूदा ग्लोबल इकॉनोमी, स्वास्थ्य, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों का कंपनी के मूल्यांकन में बहुत बड़ा हाथ होता हैं। अगर इनमें से कोई भी एक कारक गड़बड़ा जाता है, तो आप यह मानकर चलिए कि कंपनी के मूल्यांकन पर उसकी मार ज़रूर पड़ेगी।

तो अब आप समझ गए है कि बाज़ार की मौजूदा परिस्थियों का मूल्यांकन पर क्या असर पड़ता है। चलिए, इन कारकों को उदाहरण के माध्यम से टेस्ट करते हैं। एक मोटर गाड़ी उद्योग को लेते है, विशेष रूप से, कार बनाने वाले उद्योग को। यहाँ उद्योग की मांग और भारत में कार का बाज़ार, दोनों ही बहुत बड़े और सकारात्मक हैं, लेकिन फिर भी 2020 में कार बनाने वाली कंपनियों के मूल्यांकन को एक झटका लगा। 

इसका मुख्य कारण था भारत सरकार के, सभी गाड़ियों के लिए BS6 प्रदूषण नियंत्रण के कड़े नियम और दूसरा, कोविड-19 महामारी। इन दोनों की वजहों से, मौजूदा बाज़ार परिस्थितियाँ खराब हुई और BS4 गाड़ियों की बहुत बड़ी इन्वेंट्री बिक नहीं पाई। इसकी वजह से उद्योग को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। इसके साथ ही कोरोना महामारी की वजह से लगाए हुए लॉकडाउन और लोगों की छूटती नौकरियों की वजह ने भी नयी गाड़ियों की डिमांड को पूरी तरह से खत्म कर दिया। इस तरह आपको समझ आ गया होगा कि कैसे बाज़ार की परिस्थितियों का असर कंपनी के मूल्यांकन पर पड़ा। 

 

उद्योग में होने वाली अप्रत्याशित घटनाएँ 

आमतौर पर, निवेशक अनिश्चित और अप्रत्याशित घटनाओं को पसंद नहीं करते है। इस तरह की घटनाएँ व्यवसाय को पटरी से उतार देती हैं और इससे बिज़नेस को नुकसान पहुँचता है, और इसी वजह से कंपनी का मूल्यांकन कम होता है। लेकिन यह भी सही नहीं है कि सभी अकस्मात घटनाओं से मूल्यांकन में हमेशा कमी ही आती है। एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, जिस घटना से किसी इंडस्ट्री को नुकसान होता है वही घटना किसी दूसरी इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद हो सकती है।  

उदाहरण के लिए हम एयरलाइन इंडस्ट्री और मेडिकल इंडस्ट्री को लेते है। कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन में, सभी एयरलाइनों की सभी उड़ानों पर अनिवार्य रूप से पहले हफ्तों और फिर महीनों के लिए रोक लगा दी गयी। इससे सभी एयरलाइंस को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उन्हें तो अभी भी कर्मचारियों को सैलरी , हवाई जहाज़ों की लीज़, और हैंगर किराए जैसी स्थायी खर्च का भुगतान तो करना ही पड़ रहा है। ज़्यादातर एयरलाइंस ने अपने कई कर्मचरियों को कंपनी से निकाला है ताकि उनके खर्चों में कमी आ सके। इस अकेली अकस्मात घटना की वजह से एयरलाइन कंपनी के मूल्यांकन में बहुत ज्यादा गिरावट आई है।

दूसरी ओर, मेडिकल इंडस्ट्री इस परिस्थिति में ना केवल सुरक्षित तरह से चलते रहने में सफल रही है, बल्कि यह तो और ज्यादा फलती-फूलती रही। फार्मा कंपनियों ने इस दौरान श्वासयंत्र, ब्लड ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर, और वेंटिलेटर जैसे मेडिकल प्रोडक्टस की बिक्री में बहुत बड़ा इज़ाफा देखा। इस अचानक हुई घटना ने दोनों ही तरह के निवेशक, चाहे वह घरेलू हों या विदेशी, को फार्म इंडस्ट्री में निवेश करने के लिए बहुत प्रेरित किया, जिससे इस इंडस्ट्री का मूल्यांकन बहुत तेज़ी से बड़ा है।

नए प्रतियोगियों का मार्केट में आना

एक और कारक जो किसी कंपनी की वैल्यूशन को प्रभावित करता है, वह है नए प्रतियोगियों का बाज़ार में आना। आमतौर पर, नए प्रतियोगियों के पास कुछ अहम फायदे तो होते ही है। उनके पास इंडस्ट्री और उपभोक्ताओं का अच्छे से विश्लेषण करने का समय होता है। इसीलिए जब वह अपना बिज़नेस शुरू करते हैं तो वह सभी कारकों को ध्यान में रखकर बिलकुल सही तरीके से शुरुआत करते हैं। और जब भी कोई नया प्रतियोगी बाज़ार में कदम रखता है तो उसके पास लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का फायदा भी होता है जो उन्हें मौजूदा खिलाड़ियों की तुलना में ज्यादा अच्छे तरीके से काम करने में मदद करता है।

उदाहरण के लिए रिलायंस जियो लिमिटेड को लेते हैं, टेलिकॉम सेक्टर में उन्होंने बहुत देरी से एंट्री ली थी। पर फिर भी, अगर हम एक्टिव यूज़र-बेस को आधार रखकर देखें, तो वह पिछले कुछ ही वर्षो में नंबर एक पर पहुँच गई है। अच्छी खासी पूंजी वाले जियो ने, टेलीकॉम सेक्टर में काफी कम लागत वाली स्कीमों साथ-साथ, अत्याधुनिक 4जी टेक्नोलॉजी को लॉन्च किया जिससे उनका कस्टमर बेस और मज़बूत हो गया। 

टेलीकॉम इंडस्ट्री में रिलायंस जियो की एंट्री, उन दूसरी टेलीकॉम कंपनियों के मूल्यांकन में नुकसान के लिए जिम्मेदार थी, जो अभी तक मजबूत मूल्यांकन और शानदार रिटर्न कमाती थी। टेलीकॉम इंडस्ट्री के समीकरण बदलने के साथ ही जियो ने दूरसंचार कंपनियों के मूल्य को भी गिरा दिया, जिससे वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर के बीच विलय हो गया।

निष्कर्ष

ये तीनों ही, कंपनियों के मूल्यांकन को प्रभावित करने वाले एकमात्र कारक नहीं हैं। हालांकि, यह सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कारक ज़रूर हैं। अब तक, हम केवल मूल्यांकन के मात्रात्मक पक्ष को ही देख रहे थे। लेकिन इस अध्याय के साथ, हमने अब मूल्यांकन के गुणात्मक पक्ष को भी अच्छे से समझ लिया है। अगले अध्याय में, हम इस बारे में बात करेंगे कि आप अपने खुद का मूल्यांकन मॉडल कैसे बना सकते हैं और उन महत्वपूर्ण मूल्यांकन रेशियो के बारे में भी बात करेंगे, जो निवेशक नियमित रूप से उपयोग करते हैं। 

अब तक आपने पढ़ा

  • कंपनी जिस उद्योग के अंतर्गत काम करती है, उस उद्योग की बाज़ार परिस्थितियों का कंपनी के मूल्यांकन पर गहरा असर पड़ता है।
  • बाज़ार की मौजूदा परिस्थितियों में बहुत से कारक शामिल होते हैं, जैसे इंडस्ट्री कि मांग, मार्केट का साइज़, इंडस्ट्री का नियंत्रण करने वाली नीतियाँ और व्यापक ग्लोबल परिस्थितियाँ
  • अगर एक कंपनी किसी ऐसे उद्योग के अंतर्गत काम करती है जो अभी ट्रेंड में चल रही है या आमतौर पर बाज़ार में जिसकी डिमांड बनी रहती है, तो उसका मूल्यांकन, किसी दूसरे उद्योग के अंतर्गत काम कर रही, उसी साइज़ की, बाकी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होगा।  
  • इंडस्ट्री का मार्केट साइज़ जितना बड़ा होगा, उसमें काम कर रही कंपनी का मूल्यांकन भी उतना ज्यादा हो सकता है। 
  • सरकार की नीतियों ग्लोबल इकॉनमी, स्वास्थ्य, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का भी कंपनी के मूल्यांकन पर अहम असर पड़ता है।
  • अनिश्चित और अप्रत्याशित घटनाएँ व्यवसाय को पटरी से उतार देती हैं और इससे बिज़नेस को नुकसान पहुँचता है, और इसी वजह से कंपनी का मूल्यांकन कम होता है।
  • इन घटनाओं से कुछ इंडस्ट्रीज़ को नुकसान होता है तो कुछ को फायदा।   
  • बाज़ार में नए प्रतियोगियों की एंट्री भी कंपनी के मूल्यांकन पर असर डालने वाला एक अहम कारक है।
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