शुरुआती के लिए मॉड्यूल

शेयर बाजार का परिचय

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* टी एंड सी लागू

भारतीय स्टॉक में ट्रेडिंग के समय क्या करें और क्या न करें

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तो जैसा कि आपने देखा अभी तक हम निवेश करने के कारण, शेयर बाज़ार के मुख्य खिलाड़ी और शेयर मार्केट की पूरी प्रकिया के बारे में जानने के साथ,  हम अपनी इस यात्रा में काफी आगे निकल आए है, पर अभी ये सफर अपने अंत से काफी दूर है; अभी बहुत कुछ है जिसके बारे में हमें अभी जानना और सीखना है। अभी तो हमने सिर्फ इसकी सतह को ही छुआ है। इस मॉड्यूल का उद्देश्य आपको सिर्फ स्टॉक मार्केट और ट्रेडिंग का एक क्लियर आइडिया देना ही नहीं है बल्कि आगे आने वाले अध्यायों में आनी वाली चीज़ों के लिए तैयार करना भी है।

अब क्योंकि आप अभी तक ट्रेडिंग और स्टॉक मार्केट के बारे में बहुत कुछ सीख चुके हैं, अब हम आपको शेयर बाज़ार के डूज़ और डोंट्स के कुछ पॉइंट्स बताते है, यानी शेयर बाज़ार में क्या करें और क्या ना करें। ये लिस्ट नए व्यापारियों और निवेशकों के लिए खास मददगार है।

 शेयर बाज़ार में व्यापार करते समय आपको क्या करना चाहिए -

शेयर बाज़ार खुले समुद्र की तरह है, यहाँ पानी हमेशा शांत नहीं रहता हैं। आपको हर हाल में, आने वाले तूफान से निपटने के लिए तैयार रहना होता है। अरे! चिंता की कोई बात नहीं है, आपके साथ हम है ना। यहां कुछ चीज़ें दी गई हैं, जो ट्रेडिंग करते समय एक स्थिर वातावरण में आपको शांत रखने में आपकी मदद करेगी।

हमेशा अपने दिमाग में एक स्पष्ट लक्ष्य रखें

एक स्पष्ट लक्ष्य के बिना शेयर बाज़ार में व्यापार बिना किसी उद्देश्य के भटकने जैसा है। और यकीन मानिए ऐसा करने से कोई फायदा नहीं होगा। इसीलिए हमेशा कुछ लक्ष्य निर्धारित करके चलें जिसे आप ट्रेडिंग करके हासिल करना चाहते हैं। ट्रेडिंग के लिए शुरुआती पूँजी जुटाने से लेकर हर ट्रेड के लिए मुनाफ़े का लक्ष्य तय करने तक, कोई ना कोई लक्ष्य हमारे दिमाग में निश्चित होना चाहिए। ज़रूरी नहीं है कि यह लक्ष्य हमेशा सटीक ही रहे, लेकिन उन्हें तय करना बहुत ज़रूरी है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक बार आप उन्हें सेट करने के बाद उन्हें बार-बार बदल नहीं सकते है।

हमेशा लंबी अवधि के लिए सोचें

यकीन मानिए, बाज़ार में शेयर को सही समय पर खरीदना और बेचना काफी मुश्किल काम हैं। शेयर को जल्दी से बेचकर प्रॉफ़िट कमाने की बजाय उसे अपने पास रख कर होने वाले लॉन्ग-टर्म फायदे या नुकसान के बारे में अनुमान लगाना हमेशा एक बेहतर आइडिया होता है। हालांकि ट्रेडिंग से एक-दम से प्रॉफ़िट कमाना असंभव काम नहीं है पर इसके साथ भी एक रिस्क रहता ही है। ट्रेड के गलत होने की संभावना भी बहुत अधिक रहती है। हालांकि आप लॉन्ग-टर्म के लिए शेयर बाज़ार में अपना पैसा लगाकर, ज्यादा अच्छे और लगातार रिटर्न का आनंद ले सकते हैं।

 लगातार निवेश करें

हालांकि शेयरों में एक बार में ही ज़्यादा पैसा लगाने से आपको अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं, पर आमतौर पर अधिकतर कंज़रवेटिव नज़रिया अपनाने की सलाह ही दी जाती है। आप लंबे समय तक लगातार इन्वेस्ट करें, ताकि आपको ज़्यादा रिटर्न का मज़ा मिल सके। व्यवस्थित और नियमित निवेश के दो अहम फायदे हैं: एक तो यह कि वो आपको ‘रुपी कॉस्ट एवरेज़िंग’ का फायदा तो देते ही हैं, साथ ही वे आपके ट्रेडिंग पैटर्न को अनुशासित भी रखते हैं। 

‘रुपी कॉस्ट एवरेज़िंग’ को आप ऐसे समझ सकते हैं, जब आप किसी शेयर में नियमित रूप से निवेश करते हैं तो आपके इनवेस्टमेंट की औसत लागत कम हो जाती है। और चूंकि यह आपकी लागत में कमी लाती है, इसलिए जब आप अपने निवेश को बेचते हैं तो आपको ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिलता है।

अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएँ

अपने निवेश पोर्टफोलियों के विविधीकरण पर जितना ज़ोर दिया जाए, उतना कम है। आपने ‘कब और कैसे निवेश करें’ अध्याय में पहले से ही इसके बारे में पढ़ चुके हैं। विविधीकरण का सिद्धांत इस तर्क पर आधारित है कि एक ही समय में कई अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों में एक साथ नुकसान होने या उनके शेयर की कीमत घटने की संभावना बहुत ही कम होती है। जब आप अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में विविधता लाते हैं, तो आपके इनवेस्टमेंट का परफ़ोर्मेंस किसी एक शेयर या किसी विशेष क्षेत्र पर ही निर्भर नहीं होता है। यह खराब प्रदर्शन के रिस्क को काफी अच्छी तरह कम कर देता है। 

 

शेयर बाज़ार में व्यापार करते समय आपको क्या नहीं करना चाहिए

अब जब आप जानते हैं कि आपको ट्रेडिंग के समय क्या करना चाहिए, तो उन कुछ बातों पर भी एक नज़र डालते है, जिन्हें आपको ट्रेडिंग करते समय नहीं करना चाहिए।आप चाहे अपनी निवेश-यात्रा के किसी भी पड़ाव पर हों, सफलता सुनिश्चित करने के लिए, हमेशा निम्नलिखित चीजों को करने से बचना चाहिए -

अपनी भावनाओं के आधार पर फैसला ना लें

हम इंसान भावनात्मक होते हैं। हम अपनी भावनाओं के आधार पर कई फैसले ले लेते हैं। हालांकि, जब शेयर बाज़ारों की बात आती है, तो अपने दिल की सुनते हुए अपनी ट्रेडिंग के फैसले लेना निश्चित रूप से कोई अच्छा विचार नहीं है। आपकी भावनाएँ अक्सर आपके व्यापार और निवेश के फ़ैसलों को गलत साबित कर सकती हैं।

हम अपने बनाए कई पक्षपातों और झुकावों से भी प्रभावित हो जाते हैं। ये झुकाव अंत में आपको ऐसी स्थिति मे फंसा सकते है जहां से निकलना शायद संभव ना हो। इसीलिए हमेशा अपनी भावनाओं और झुकावों के बजाय अपने ट्रेडिंग के सभी फैसले सिर्फ लॉजिक और बाज़ार की वास्तविक स्थिति को देखते हुए लेने चाहिए।

ट्रेडिंग से अवास्तविक अपेक्षाएँ ना रखे

हां, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां निवेशकों ने अपने निवेश पर लगभग 300% या उससे भी अधिक का रिटर्न हासिल किया है। ऐसे शानदार रिटर्न की सफलता की कहानियां और न्यूज़ आपको विश्वास दिला सकते हैं कि ऐसा होता ही रहता है। हालांकि, आपको यह समझने की बहुत ज़रूरत है कि ऐसा रिटर्न बहुत ही कम देखने को मिलता है और यह ऐसी घटना नहीं है जो रोज़ हो। यही कारण है कि आप सभी ट्रेड और निवेशों से ऐसी ही उम्मीद रखें जो वास्तविक हों और जिसके होने की उम्मीद बहुत ज्यादा हो। इससे आप वेग में आकर फैसला लेने और अवास्तविक उम्मीदों से बचने में कामयाब होंगे।

रिस्क वाले ट्रेड की आदत ना डालें

शेयर बाज़ारों के बारे में, अगर कोई ऐसी चीज़ है जिसे आपको अच्छे से समझना ही चाहिए, तो यह है कि मुनाफा कमाने के लिए हर तरह के ट्रेड पर हाथ आज़माना ज़रूरी नहीं है। होता यह है कि ज़्यादातर निवेशकों मे संयम की कमी होती है और वह बिना किसी रिस्क को देखते हुए और ना ही बिना किसी रिस्क-एनलाइसिस करे ही किसी भी शेयर मे ट्रेडिंग करने लग जाते है। ध्यान रहे कि बहुत ज्यादा पैसे कमाने की उम्मीद में, जोखिम भरे ट्रेड में निवेश करने से आपकी पूरी निवेश पूँजी डूब सकती है। आपके शेयर लंबे समय में बेहतर रिटर्न और परफ़ोर्मेंस दे सकते है बशर्ते आप निवेश करने से पहले अच्छे से सोच-समझ कर और समय लेकर निवेश करें और किसी भी ट्रेड व शेयर को सिर्फ खरीदने की बजाय अच्छे अवसरों का इंतज़ार करें। 

ओवरट्रेडिंग में ना फंसे

पिछले पॉइंट से आगे बढ़ते हुए, ज़्यादातर सफल व्यापारी पूरे दिन या हर दिन व्यापार नहीं करते हैं। बेहतर ये होता है कि कुछ बड़े शेयरों व ट्रेड में निवेश किया जाए बजाय बिना सोचे समझे कई सारे छोटे ट्रेड में निवेश करने के। ज़्यादातर निवेशक हर संभव शेयर व ट्रेड को खरीदने पर अपना ध्यान लगाए रहते हैं। ऐसा करने से आपकी मानसिकता पर तो असर पड़ ही सकता है साथ ही, यह आपके ट्रेडिंग एक्शन-प्लान पर भी बुरा असर डाल सकता है। इसलिए,  हमेशा लगातार छोटे-छोटे ब्रेक लेना ना भूलें। अगर आप एक बार सफल ट्रेडिंग करने में कामयाब रहे हैं, तो अपने आप को थोड़ा शांत व स्थिर होने के लिए एक या दो दिन दें और फिर से शुरू करें।

निष्कर्ष

यह शेयर बाज़ार के डूज़ और डोंट्स के बारे में कुछ बहुत ही प्रैक्टिकल –पॉइंट्स  हैं। शेयर बाज़ारों के परिचय के हमारे इस मॉड्यूल के बाद हमारा अगला मॉड्यूल  निवेश विश्लेषण के बारे में बताता है। आप अपने निवेश विकल्पों का बेसिक-एनलाइसिस कैसे कर सकते हैं, यह जानने के लिए पढ़ते रहें।

 अब तक आपने पढ़ा

  • मन में एक स्पष्ट व्यापारिक लक्ष्य रखें।
  • अपने निवेश निर्णय लंबी अवधि को नज़र में रखकर लें।
  • लगातार निवेश करें, भले ही आप केवल छोटी मात्रा में निवेश करें।
  • अपने जोखिम को कम करने के लिए अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में विविधता लाएँ।
  • भावनात्मक या वेग में आकर निवेश निर्णय ना लें।
  • अवास्तविक अपेक्षाएँ न रखें।
  • जोखिम भरे ट्रेड ना करें।
  • ओवरट्रेड ना करें।
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