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आईपीओ, दिवाला, विलय और विभाजन

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20 प्रमुख शब्द और उनकी परिभाषा

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20 प्रमुख शब्द और उनकी परिभाषा

1. एंजेल इन्वेस्टर

एंजेल इन्वेस्टर ऐसे हाई नेट वर्थ या वार्षिक आय वाले व्यक्ति हैं जो स्टार्टअप में निवेश करने और नए व रोमांचक निवेश के अवसरों की तलाश में रहते हैं। अपने निवेश के बदले में वे कंपनी के इक्विटी शेयरों का एक हिस्सा प्राप्त करते हैं। 

2. वेंचर कैपिटलिस्ट 

वेंचर कैपिटलिस्ट वो फर्म और कॉरपोरेशन हैं जो विभिन्न पार्टनरों से पैसा लेते हैं और कंपनियों में निवेश करते हैं। वे व्यवसायों में बड़ी रकम निवेश करने में सक्षम होते हैं और आसानी से एंजेल इन्वेस्टर्स को इस मामले में पीछे छोड़ सकते हैं।

3. निजी इक्विटी फर्म

वेंचर कैपिटलिस्ट की तरह ही निजी इक्विटी फर्म कई निवेशकों से धन लेते हैं और एक निजी इक्विटी फंड बनाते हैं। यह आमतौर पर एक वेंचर कैपिटलिस्ट की तुलना में बहुत बड़ा होता है। ये निजी इक्विटी फर्म, इक्विटी में हिस्सेदारी के बदले इन फंड्स को व्यवसायों में निवेश करती हैं।

4. इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO)

इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक निजी कंपनी पहली बार अपने शेयर जनता को बेचती है। जनता को कंपनी के शेयरों के लिए आवेदन करने और सदस्यता लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। 

5. लीड मैनेजर

लीड मैनेजर वो वित्तीय संस्थान होते हैं जो पूरी IPO प्रक्रिया में कंपनी की मदद करते हैं। वे IPO प्रक्रिया की संरचना को तैयार करने, कंपनी की फंड आवश्यकताओं का आकलन करने, सुझाव देने, नियामक कागज़ी कार्रवाई तैयार करने, उन्हें सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों से अप्रूव कराने और विभिन्न अन्य पक्षों के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।

6. रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस एक सूचनात्मक पुस्तिका है जिसे जनता में प्रसारित किया जाता है। इसमें प्रस्तावित IPO और जारी करने वाली कंपनी से जुड़ी सभी अहम जानकारी मौजूद होती हैं।

7. बुक बिल्डिंग प्रक्रिया

IPO  प्रक्रिया में प्राइस बैंड तय कर लेने के बाद कंपनी समय सीमा तय करती है जिसमें जनता शेयरों के लिए आवेदन दे सके। कंपनी के शेयरों के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को उनकी पसंद के अनुसार निर्धारित प्राइस बैंड के भीतर किसी भी कीमत का चयन करने की छूट होती है। मूल्य निर्धारित करने की इस प्रक्रिया को बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। 

8. डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स वाले इक्विटी शेयर (DVR)

ये सामान्य इक्विटी शेयरों की तरह ही हैं लेकिन इनके वोटिंग राइट कम होते हैं। उदाहरण के लिए, साधारण इक्विटी शेयरों में 1: 1 वोटिंग रेशियो होता है। लेकिन  (DVR)  इक्विटी शेयरों में 10:1 की वोटिंग रेशियो होती है। 

9. प्रेफरेंस शेयर

प्रेफरेंस शेयर वे शेयर होते हैं जो साधारण इक्विटी की तुलना में डिविडेंड भुगतान और रेसिडुअल क्लेम के मामले में उच्च प्राथमिकता रखते हैं। हालांकि इक्विटी शेयरों के विपरीत, प्रेफरेंस शेयरों के धारक किसी भी मतदान अधिकार के हकदार नहीं होते हैं। 

10. ASBA के ज़रिए आवेदन

एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट (ASBA) सेबी द्वारा विकसित एक प्रक्रिया है जो नियमित निवेशकों को बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का उपयोग करके IPO के माध्यम से शेयर खरीदने में सक्षम बनाती है। ASBA प्रक्रिया में ट्रेडिंग खाते के माध्यम से आवेदन करने के उलट, आपके द्वारा आवेदन किए गए शेयरों की कुल राशि आपके खाते से तब तक डेबिट नहीं होती जब तक बैंक द्वारा शेयर आवंटन की पुष्टि नहीं हो जाती। 

 

11. फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO)

IPO के बाद जनता को शेयर जारी करने के किसी भी अन्य इश्यू को फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के रूप में जाना जाता है। FPO, स्टॉक एक्सचेंज पर पहले से ही सूचीबद्ध कंपनी द्वारा शेयरों का एक ताज़ा इश्यू है । यह इश्यू  अतिरिक्त पूँजी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। 

12. ऑफर फॉर सेल (OFS)

ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा कंपनी के प्रोमोटर अपने शेयर जनता को बेच सकते हैं। यहां कंपनी के प्रोमोटर या शुरुआती निवेशक अपने शेयरों को बेच रहे हैं न कि कंपनी। इसलिए ऐसे शेयरों की बिक्री से होने वाली आय कंपनी के पास नहीं जाती है, बल्कि बिक्री कर रही संस्थाओं को दी जाती है।

13. राइट्स इश्यू 

राइट्स इश्यू एक और तरीका है जिसके ज़रिए कंपनी फंड जुटा सकती है। यहां कंपनी पूँजी जुटाने के लिए जनता के बजाय अपने मौजूदा शेयरधारकों से संपर्क करती है। राइट्स इश्यू मौजूदा शेयरधारकों को डिस्काउंट पर कंपनी के अतिरिक्त शेयर खरीदने का अधिकार देता है। 

14. गोइंग कंसर्न

गोइंग कंसर्न सिद्धांत एक अकाउंटिंग सिद्धांत है जो मानता है कि कंपनी भविष्य में व्यवसाय करती रहेगी। सिद्धांत यह भी मानता है कि कंपनी का व्यवसाय स्थिर है और अपने ऋण और अन्य वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त राजस्व उत्पन्न करती है। 

15. शोधाक्षमता/ इनसॉल्वेंसी

इन्सॉल्वेंसी वह शब्द है, जिसका उपयोग ऐसी स्थिति के लिए किया जाता है, जहां कोई इकाई समय पर अपने वित्तीय दायित्वों को संतोषजनक ढंग से पूरा करने में असमर्थ होती है। 

16. दिवालियापन

दिवालियापन एक कानूनी प्रक्रिया है जो किसी इकाई के दिवालिया होने की पुष्टि करती है और इसका उद्देश्य दिवालिया इकाई को उसके ऋण का भुगतान करने में मदद करना है, जिससे उसके लेनदारों को कुछ राहत मिल सके। जहाँ इन्सॉल्वेंसी एक अस्थायी चरण है, दिवालियापन स्थायी है। दिवालियापन के दो प्राथमिक रूप हैं - रिऑगनाइज़ेशन और लिक्विडेशन।

17. डीलिस्टिंग

डीलिस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयरों को स्टॉक एक्सचेंजों से हटा दिया जाता है। एक कंपनी या तो स्वेच्छा से हटा दी जा सकती है या अनिवार्य रूप से एक्सचेंजों से हटा दी जा सकती है। 

18. रीलिस्टिंग

रीलिस्टिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक डीलिस्ट की गई कंपनी फिर से ट्रेडिंग के लिए स्टॉक एक्सचेंज में अपने शेयरों को सूचीबद्ध करती है।

19. अलगाव 

इसे डिमर्जर के रूप में भी जाना जाता है, यह वह प्रक्रिया या घटना जिसके माध्यम से एक एकल कंपनी दो या अधिक स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित होती है, जिसे आमतौर पर कंपनी विभाजन के रूप में जाना जाता है। 

20. विलय

विलय एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से दो या अधिक स्वतंत्र और अलग-अलग इकाइयाँ एक एकल इकाई में एकजुट (विलय) होती हैं। विलय दो तरीकों में से एक में हो सकता है:

  • जहाँ दो या दो से अधिक कंपनियाँ एक साथ मिलकर एक नई इकाई बनाती हैं और पुरानी इकाइयाँ विलय के बाद अस्तित्व में नहीं रहती।
  • या, जहां एक कंपनी का पूरी तरह दूसरी कंपनी में विलय हो जाता है। 

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