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पुट ऑप्शन में भुगतान की गणना कैसे करें

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पुट ऑप्शन में भुगतान की गणना

अब आप यह सोच रहे होंगे कि पुट ऑप्शन से जुड़े भुगतान की गणना कैसे की जाए? वैसे देखा जाए तो पुट ऑप्शन पेआउट की गणना, कॉल ऑप्शन में पेऑफ की गणना जैसी ही है। इसे सीखने के लिए, हम इन्फोसिस लिमिटेड के काल्पनिक पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को लेंगे। मुख्य रूप से, हम INFY JUL 700 PE (यहां, PE का मतलब पुट ऑप्शन से है) कॉन्ट्रैक्ट का एनालिसिस करेंगे और देखेंगे कि हम कैसे उस कॉन्ट्रैक्ट से मुनाफ़ा कैसे कमा सकते हैं।

पहले हम शेयर और कॉन्ट्रैक्ट के बारे में प्राथमिक जानकारी देख लेते हैं:

  • मानिए कि अभी, इन्फोसिस लिमिटेड का शेयर ₹750 प्रति शेयर पर कैश मार्केट में कारोबार कर रहा है।
  • एक खरीदार है, आदित्य, जिसके हिसाब से 30 जुलाई 2020 (एक्सपायरी डेट) तक इन्फोसिस के शेयर की कीमत गिर जाएगी।
  • इसलिए, आदित्य भविष्य में अधिक कीमत पर शेयरों को बेचने की सोचता है।
  • ऐसा ही एक और व्यापारी है निखिल, जिसके हिसाब से एक्सपायरी तक शेयर की कीमत बढ़ जाएगी।
  • इसलिए, निखिल भविष्य में कम कीमत पर इन्फोसिस लिमिटेड के शेयर खरीदना चाहते हैं।
  • इसलिए, वे दोनों ही 1 जुलाई, 2020 को INFY JUL 700 PE कॉन्ट्रैक्ट करते हैं।
  • यहां पुट ऑप्शन का खरीदार आदित्य है और पुट ऑप्शन का विक्रेता निखिल है।
  • पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, निखिल, आदित्य को 30 जुलाई 2020 को इन्फोसिस लिमिटेड के 100 शेयर बेचने का अधिकार देता है जिसकी मौजूदा कीमत ₹750 प्रति शेयर है।
  • आदित्य को बेचने का अधिकार देने के बदले में, निखिल उससे ₹10 प्रति शेयर का प्रीमियम लेता है, जो ₹1000 होता है। (₹10 x 100 शेयर)

 अब जब हमने कॉन्ट्रैक्ट की सारी बारीकियों को समझ लिया है, तो चलिए, हम चार अलग-अलग परिस्थितियों और इनके पुट ऑप्शन पेआउट की गणना पर एक नज़र डालते है।

परिस्थिति 1: एक्सपायरी डेट पर, इन्फोसिस लिमिटेड के शेयर ₹600 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे हैं 

आदित्य का नज़रिया

  • जैसा कि आदित्य ने सोचा था, शेयर की कीमत कम हो गई है, इसलिए वह अपने पुट ऑप्शन का उपयोग करने की सोचता है।
  • दूसरे शब्दों में, वह इन्फोसिस के ₹600 की मौजूदा कीमत वाले 100 शेयरों को ₹750 प्रति शेयर पर बेचने के अपने अधिकार का प्रयोग करता है।
  • इसलिए, इस पूरे पुट ऑप्शन ट्रेड से, आदित्य ₹15000 का एक अनुमानित मुनाफ़ा कमाता है [(₹750 – ₹600) X 100 शेयर]।
  • अगर पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, अदित्य कैश मार्केट से शेयर खरीदता है और निखिल को बेचता है, तो उसे ₹14000 का नेट मुनाफ़ा होगा( ₹15,000 - ₹1,000)। ये ₹1000 वो प्रीमियम है जो आदित्य ने निखिल को पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदने के लिए भुगतान किया है।

निखिल का नज़रिया

  • क्योंकि आदित्य ने अपने अधिकार को इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है, इसलिए निखिल उससे इन्फ़ोसिस लिमिटेड के 100 शेयर को ₹750 प्रति शेयर पर खरीदने के लिए बाध्य है। जबकि बाज़ार में इन शेयर की मौजूदा कीमत ₹600 प्रति शेयर है।
  • इसलिए, पूरे पुट ऑप्शन ट्रेड से, निखिल ने ₹15,000 का अनुमानित घाटा उठाया [(₹750 - ₹600) X 100 शेयर]।
  • निखिल को ₹14,000 (₹15,000 - ₹1,000) का कुल नेट घाटा उठाना पड़ता है जब वह आदित्य द्वारा बेचे गए शेयरों को मौजूदा कीमत के बजाय ₹750 प्रति शेयर पर खरीदता है। यहाँ, ₹1,000 आदित्य को पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचने पर मिला प्रीमियम है।

 आइए, आदित्य और निखिल दोनों के कैश फ्लो पर इस पुट ऑप्शन ट्रेड के परिणाम को देखते है

विवरण

अदित्या का कैश फ्लो 

 

विवरण

निखिल का कैश फ्लो

01 जुलाई, 2020 को प्रीमियम का भुगतान (ए)

₹1000

 

01 जुलाई, 2020 को प्राप्त किया गया प्रीमियम (ए)

₹1000 

पुट ऑप्शन ट्रेड से मुनाफ़ा

(बी)

₹15,000 

 

पुट ऑप्शन ट्रेड से घाटा(बी)

₹15000 

नेट मुनाफ़ा (ए + बी)

₹14000 

 

नेट घाटा (ए + बी)

₹14000

परिस्थिति 2: एक्सपायरी डेट पर, इन्फोसिस लिमिटेड का शेयर ₹900 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा है।

 आदित्य का नज़रिया

  • आदित्य ने जो सोचा था उसका बिलकुल उल्टा हुआ है क्योंकि शेयरों की कीमत बढ़ गयी है। अब वह शेयरों को अपने पास ही रखना चाहता है और अपने पुट ऑप्शन को उपयोग में नहीं लेता है।
  • आसान शब्दों में कहे तो, आदित्य इंफ़ोसिस लिमिटेड के 100 शेयरों को ₹750 प्रति शेयर में निखिल को बेचने के अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करता है। इसकी वजह यह है कि आदित्य अगर निखिल को ₹750 पर शेयर बेचेगा तो उसे नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि अभी मौजूदा बाज़ार मूल्य ₹900 प्रति शेयर चल रहा है।
  • इसलिए, इस पूरे पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट से, आदित्य का कुल नुकसान केवल कॉन्ट्रैक्ट करते समय निखिल को दिए गया प्रीमियम ही है, जो ₹1,000 था।

निखिल का नज़रिया

  • चूँकि आदित्य ने अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करने का फैसला किया, इसलिए निखिल उसे इन्फोसिस लिमिटेड के शेयर को ₹750 प्रति शेयर में बेचने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
  • इसलिए, एक्सपायरी तिथि पर, कोई व्यापार नहीं होता है।
  • हालांकि, निखिल को वह ₹1,000 का प्रीमियम रखने को मिलता है जो आदित्य ने उसे कॉन्ट्रैक्ट करते समय चुकाया था। बस यही प्रीमियम राशि पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट से उसका मुनाफ़ा है।

 आइए, इस पुट ऑप्शन ट्रेड के लिए आदित्य और निखिल दोनों के कैश फ्लो को देखते हैं

विवरण

आदित्य का कैश फ्लो

 

विवरण

निखिल का कैश फ्लो

01 जुलाई, 2020 को भुगतान किया गया प्रीमियम (ए)

₹1000 

 

01 जुलाई, 2020 को प्राप्त किया गया प्रीमियम (ए)

₹1000 

एक्सपायरी की तारीख (बी)

0

 

एक्सपायरी की तारीख (बी)

0

नेट घाटा (ए+ बी)

₹1000 

 

नेट मुनाफ़ा (ए + बी)

₹1000 

 

परिस्थिति 3: एक्स्पायरी डेट से पहले, मानिए कि 20 जुलाई, 2020 को इन्फोसिस के शेयर ₹600 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं।

आदित्य का नज़रिया

  • इस मामले में, आदित्य की इन्फोसिस के शेयरों की कीमत में गिरावट की उम्मीदें सच हो गई हैं।
  • लेकिन वह मुनाफ़ा कमाने के लिए एक्स्पायरी तक इंतजार नहीं करना चाहता है। वह इस डाउन ट्रेंड से हाथों-हाथ मुनाफ़ा कमाना चाहता है।
  • और इसलिए, वह स्टॉक एक्सचेंज के ज़रिये पंकज नाम के एक दूसरे व्यापारी को अपना पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचता है। कॉन्ट्रैक्ट को चुक्ता करने की इस प्रकिया को पोज़ीशन स्केवयरिंग ऑफ करना कहा जाता है। 
  • अब, इस मामले में, आदित्य पुट ऑप्शन विक्रेता बन जाता है और पंकज पुट ऑप्शन खरीदार है। 
  • चूंकि पंकज खरीदार है, इसलिए वह आदित्य को एक प्रीमियम का भुगतान करता है। यह देखते हुए कि प्राइस मूवमेंट आदित्य के पक्ष में है, वह उसे उच्च प्रीमियम वसूलने देता है जो ₹3,000 है (₹30 प्रति शेयर x 100 शेयर)।
  • एक बार जब यह ट्रेड पूरा हो जाता है, तो आदित्य को ₹2000 का मुनाफ़ा होता है (₹3,000 जो उसे पंकज से मिले -₹ 1,000 जो उसने निखिल को दिए)।

 अब इस पुट ऑप्शन ट्रेड के लिए आदित्य के कैश फ्लो पर एक नज़र डालते हैं।

विवरण

आदित्य का कैश फ्लो

01 जुलाई, 2020 को निखिल को दिया गया प्रीमियम (ए)

₹1,000 

20 जुलाई, 2020 को पंकज से प्राप्त प्रीमियम (बी)

₹3,000 

नेट मुनाफ़ा (ए + बी)

₹2,000 

परिस्थिति 4: एक्स्पायरी डेट से पहले, मानिए कि 20 जुलाई, 2020 को इन्फोसिस के शेयर ₹900 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं।

आदित्य का नज़रिया

  • इस स्थिति में, आदित्य ने जैसी उम्मीद की थी उसके बिलकुल विपरीत, शेयरों की कीमतें बढ़ती ही जा रही हैं।
  • वह इस बात से डरा हुआ है कि एक्स्पायरी डेट आते-आते शेयरों की कीमत और बढ़ सकती है। आदित्य अपने कॉन्ट्रैक्ट को तुरंत बेचना चाहता है, ताकि उसका कम से कम नुकसान हो।
  • और इसलिए, वह पंकज को अपना पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बेचता है और अपनी पोज़िशन स्केवेयर ऑफ कर लेता है। 
  • पिछली परिस्थिति की तरह, आदित्य पुट ऑप्शन विक्रेता बन जाता है और पंकज पुट ऑप्शन खरीदार बन जाता है।
  • इसलिए, पंकज आदित्य को एक प्रीमियम का भुगतान करता है।
  • लेकिन क्योंकि प्राइस मूवमेंट आदित्य के पक्ष में नहीं हैं, इसलिए वह उसे ज्यादा प्रीमियम नहीं देता है। वह पंकज को केवल ₹400 (₹4 प्रति शेयर x 100 शेयर) के प्रीमियम पर अपना पुट विकल्प कॉन्ट्रैक्ट बेचता है। 
  • एक बार जब यह ऑप्शन ऑप्शन ट्रेड हो जाता है, तो आदित्य को ₹600 का घाटा होता है (₹1,000 जो उन्होंने निखिल को दिए - ₹400 जो उसे पंकज से मिले )।
  • अगर वह एक्स्पायरी डेट खत्म होने तक इंतज़ार करता तो उसे ₹1000 का नुकसान होता, जो अभी के हुए नुकसान से ज्यादा है।

इस पुट ऑप्शन ट्रेड के लिए आदित्य का कैश फ्लो कुछ ऐसा दिखता है:

विवरण

आदित्य का कैश फ्लो

01 जुलाई, 2020 को निखिल को दिया गया प्रीमियम (ए)

₹1,000 

20 जुलाई, 2020 को पंकज से प्राप्त प्रीमियम (बी)

₹400 

नेट घाटा (ए +बी)

₹600 

निष्कर्ष

तो इस तरह से पुट ऑप्शन मे पेऑफ की गणना की जाती है। अब जब हमने ऑप्शन मार्केट के व्यावहारिक पक्ष को काफी हद तक देख लिया है तो अब कुछ महत्वपूर्ण सैद्धांतिक अवधारणाओं को जानने का समय आ गया है, जिससे आप इन उपकरणों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। यहाँ पर ऑप्शंस सिद्धांत महत्वपूर्ण हो जाता है। इन आवश्यक अवधारणा को आप अगले अध्याय मेें समझ सकते है।

अब तक आपने पढ़ा

  • पुट ऑप्शन पेऑफ की गणना करना कॉल ऑप्शन में पेआउट की प्रक्रिया के समान है।
  • पुट विकल्प के खरीदार के लिए, अधिकतम संभव घाटा प्रीमियम भुगतान तक सीमित है और अधिकतम संभव मुनाफ़ा असीमित है।
  • पुट विकल्प के विक्रेता के लिए, अधिकतम संभव मुनाफ़ा प्रीमियम भुगतान तक सीमित है और अधिकतम संभावित नुकसान असीमित है।
  • पुट के खरीदार एक्सपायरी तक इसे रखने के बजाय अपनी पोज़िशन को स्केवयर ऑफ करना चुन सकते हैं।
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