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इक्विटी ट्रेडिंग: भारत में इक्विटी में व्यापार कैसे करें

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जीवन में, आप डर की वजह से और आगे क्या होगा ये सोचकर तो हर निर्णय नहीं ले सकते हैं। और यकीन मानिए ट्रेडिंग की दुनिया में भी चीज़ें कुछ ऐसे ही हैं। इक्विटी बाज़ार में खरीदारी और बिक्री करना उन लोगों के लिए बहुत मुश्किल काम है जिन्होंने शेयर मार्केट में अभी-अभी ट्रेडिंग करना शुरू ही किया हो और यह उन लोगों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण है जो अच्छी तरह से सोची-समझी रणनीति को फॉलो नहीं करते है और ना ही उन्हें वित्तीय बाज़ारों की ज्यादा जानकारी है।

एक तो ऑनलाइन ट्रेडिंग ने ट्रेडिंग तक पहुंचने के रास्ते को इतना आसान बना दिया है कि हर साल, लाखों लोगों ने इसके लिए रजिस्टर करना शुरू कर दिया है। हालांकि, नुकसान होने की वजह से उनमें से काफी लोग ट्रेडिंग को जल्दी ही छोड़ भी देते है। क्यों ? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने सही फैसला लेने के लिए जो मूलभूत कौशल चाहिए होता है उसे अभी तक अच्छे से नहीं सीखा होता है। हालांकि, अगर आप इसे सीखने के लिए शुरू से ही पर्याप्त समय देते हैं, तो शुरुआत में ही इससे अच्छा मुनाफा कमाना संभव है।  

एक बार जब आप मन बना लेते हैं तो, आप ट्रेडिंग सीखना शुरू कर सकते हैं और यह कुछ प्राथमिक कदम हैं जो इस काम में आपकी मदद करेंगे - 

1 - ट्रेडिंग और डीमैट खाता खोलें

शेयर बाजार में इक्विटी शेयर खरीदने या बेचने के लिए एक ट्रेडिंग अकाउंट का उपयोग होता है। पहले, व्यापारी अपने खरीद/बिक्री के फैसलों को बताने के लिए हाथ के सिग्नल और मुँह से बोलकर मैनुअल रूप से ट्रेडिंग करते थे। हालांकि, स्टॉक मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के विस्तार के बाद, ऑनलाइन ट्रेडिंग बड़े पैमाने पर होने लगी है। अब आप एक रजिस्टर्ड स्टॉक मार्केट ब्रोकर के साथ एक ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकते है, जो आपकी तरफ से ट्रेडिंग करता है। हर खाते की एक अलग आईडी होती है जिसकी मदद से सारा लेन देन किया जाता है।

इससे पहले कि आप अपना ट्रेडिंग अकाउंट खोलें, ब्रोकिंग फर्म की विश्वसनीयता की भी अच्छे से जांच करना जरूरी है। इसके अलावा, आपको यह भी सुनिश्चित करना चाहिए की ट्रेडिंग खाते से आप म्यूचुअल फंड, इक्विटी शेयर, आईपीओ और फ्यूचर्स- ऑप्शंस में भी ऑनलाइन निवेश कर पाएं। और अंत में, इसमें सुरक्षित इंटरफ़ेस और प्रोटोकॉल होना चाहिए जिससे कि आपके सभी लेनदेन हर समय सुरक्षित रहें।

डिमैट अकाउंट का एक बैंक की तरह उपयोग किया जाता है, जहां खरीदे हुए शेयरों को जमा किया जाता है, और जहां से शेयरों को बेचा जाता है। उदाहरण के लिए, आपकी जेब में ₹1000 हैं, आप एक कैफे में जाते है और वेटर से कहते है कि आपको एक कप कॉफी चाहिए, आप कॉफी की कीमत देखते हैं और ऑर्डर दे देते हैं। फिर आप अपनी जेब से पैसे निकालते है और वेटर को दे देते हैं। यहाँ पर आपकी जेब डीमैट अकाउंट की तरह काम करती है, और आप एक ट्रेडिंग अकाउंट की तरह काम करते हैं।

 2 - अपने आप को शिक्षित करें

हर दिन अपने खाली समय में मार्केट को फॉलो करना शुरू करें। जल्दी उठें और विदेशी बाजारों में रातभर में जो भी प्राइस एक्शन हुआ है उसके बारे में पढ़ें। यह जरूरी है कि आप शेयर बाजार में अपना पहला ऑर्डर देने से पहले ट्रेडिंग से जुड़े शब्दों को अच्छे से जानते हों जैसे खरीदे, बिक्री, आईपीओ, पोर्टफोलियो, कोट, स्प्रेड, वॉल्यूम, यील्ड, सूचकांक, क्षेत्र, अस्थिरता आदि। शेयर बाजार की शब्दावली और इससे संबंधित न्यूज़ को बेहतर ढंग से समझने के लिए आप किसी फाइनेंशल वेबसाइट को पढ़ना शुरू कर सकते हैं और इसके साथ ही कोई इनवेस्टमेंट कोर्स भी जॉइन कर सकते है।

शेयर बाजार में हमेशा ही उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है। इसमें शुरुआती लोग यह एक बड़ी गलती करते हैं कि वह ज्यादा जोखिम से ज्यादा मुनाफा के कॉनसेप्ट को फॉलो करते हैं और अपने शेयर ट्रेडिंग अकाउंट को ज्यादा नुकसान पहुंचाते है। और क्योंकि ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग में जोखिम बहुत ज्यादा है, तो कम रिस्क और ज्यादा मुनाफे जैसे ट्रेडिंग के तरीके यह सुनिश्चित करते हैं कि मुनाफा भी कमाया जाए और रिस्क भी नियंत्रण में रहे।

जैसी कि पुरानी कहावत है, योजना बनाने में विफल होना मतलब विफल होने की योजना बनाना। मतलब अगर आप अपने काम की योजना नहीं बना पाते हैं तो यह तय है कि आपने असफल होने की योजना तो बना ही ली है। ट्रेडर्स समेत जो लोग सफल होना चाहते हैं, उन्हें शेयर बाज़ार में निवेश और ट्रेडिंग करने के लिए प्लान बनाने की बहुत जरूरत होती है। अपनी ट्रेडिंग रणनीतियों के जरिए सही निवेश निर्णय बेहद अहम है। वह राशि निर्धारित करें जिसे आप निवेश करना चाहते हैं और वह समय अवधि तय करें जिसके लिए आप निवेश करना चाहते हैं। और इसी हिसाब से, आप अपनी नियोजित रणनीति के अनुसार शेयरों को खरीद और बेच सकते हैं। 

3 - विश्लेषण करना सीखें

फाइनेंशल एनालिसिस को कंपनी की रिपोर्ट और नॉन-फाइनेंशल जानकारी, जैसे इंडस्ट्री की तुलना, कंपनी के विकास का अनुमान आदि का उपयोग करके भविष्य में शेयरों की कीमतों और कंपनी के ओवरऑल हेल्थ का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। यह प्रश्न पूछना बहुत जरूरी है कि “इस कंपनी में निवेश करने से ऐसा क्या लाभ मिलेगा जो किसी दूसरी कंपनी से नहीं मिलेगा” या “क्या इसकी मार्केट में एक बड़ी हिस्सेदारी है ?”

टेक्निकल एनालिसिस में द्विविमीय चार्ट का इस्तेमाल कर कीमत के पुराने उतार-चढ़ाव को मापा जाता है। यह भविष्य की कीमत का पूर्वानुमान लगाने के लिए शेयर की पिछली कीमतों और वोल्यूम चार्ट का उपयोग करता है।

दोनों तरह के एनालिसिस को उपयोग करके ही आप एक अच्छा निर्णय ले पाएंगे। 

4 - ट्रेडिंग का अभ्यास करें

बिना किसी रिस्क के ट्रेडिंग का अभ्यास करने के लिए आपको एक ऑनलाइन स्टॉक सिम्युलेटर का उपयोग करना चाहिए। वर्चुअल स्टॉक मार्केट गेम खेलकर, आप निवेश रणनीति का अपना ज्ञान और समझ बढ़ा सकते हैं। ज़्यादातर ऑनलाइन वर्चुअल स्टॉक मार्केट खेलों को मार्केट इंडेक्स और स्टॉक वैल्यू के साथ जोड़ा जाता है, जिससे आप वर्चुअल राशि का उपयोग करके स्टॉक में ट्रेडिंग का असल अनुभव पा सकते हैं। यह आपको स्टॉक मार्केट के कामकाज को समझने में मदद करता है, और वह भी बिना किसी स्टॉक को खोए।

 

5 - जोखिम प्रबंधन

रिस्क मैनेजमेंट शेयर मार्केट से जुड़ी एक और अहम प्रक्रिया है। क्योंकि इक्विटी बाजार में निवेश करने में रिस्क होता है, इसीलिए रिस्क मैनेजमेंट की यह व्यापक प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि कंपनी के तरफ से किसी भी तरह की धोखाधड़ी या धांधली रोकने के दौरान भी निवेशकों का मुनाफा और उनका निवेश सुरक्षित रहे।

सिस्टम  शेयर बाजार को किसी भी बदलते व्यापारिक तंत्र के बारे में अपडेट रहने और किसी भी तरह की असफलातओं से सुरक्षित रहने में सक्षम बनाता है।

6 - शेयर बाजार की मूल बातें जानें

शेयर ट्रेडिंग उतनी भी आसान नहीं हैं, जितना आप फिल्मों में देखते है। हालांकि इसे आप आपके घर में आराम से बैठकर भी शुरू कर सकते हैं। पर इस रास्ते पर चलने से पहले आपको यह अच्छे से पता होना चाहिए कि आप क्या करने जा रहे है। यहाँ उन मूल शब्दों की एक लिस्ट दी गयी है, जो आपके बहुत काम आएंगे -

व्यापार के प्रकार:

 इंट्राडे ट्रेडिंग: इंट्राडे ट्रेडिंग या डे ट्रेडिंग में, बाजार बंद होने से पहले आपको सभी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ यानी क्लियर कर देना होता है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए, आप उस मार्जिन को भी काम में ले सकते हैं, जो कि ब्रोकर द्वारा स्टॉक मार्केट में आपके एक्सपोजर को बढ़ाने के लिए दी गई फंडिंग है। यह आपको अतिरिक्त संख्या में स्टॉक खरीदने/बेचने की अनुमति देता है,  नहीं तो आपको और ज्यादा राशि का निवेश करना होगा।

डिलिवरी ट्रेडिंग: इसमें स्टॉक खरीदना और उन्हें एक दिन से अधिक समय तक होल्ड करना शामिल है, इस प्रकार उनकी डिलीवरी होती है। इसमें मार्जिन का उपयोग शामिल नहीं है, और इसलिए आपके पास शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए अपना खुद का धन होना चाहिए। यह भारतीय शेयर बाजार में निवेश का एक अधिक सुरक्षित तरीका है।

बुल मार्केट

यहाँ पर बुल मार्केट से मतलब बाजार की उस स्थिति से है जहां पूरे बाजार में बढ़ोतरी का एक सामान्य ट्रेंड चल रहा होता है। इसमें निवेशकों के बीच काफी आशावाद और एक विश्वास होता है कि स्टॉक की कीमतें बढ़ती ही रहेंगी।  

बुल मार्केट के दौरान शेयर की कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी जाती है। इस अवधि से पहले और बाद में शेयर की कीमतों में भारी गिरावट (आमतौर पर 20%) भी देखी गई है।

 बेयर मार्केट

यहाँ पर बेयर मार्केट से मतलब बाजार की उस स्थिति से है जहां पूरे बाजार में गिरावट का सामान्य ट्रेंड चल रहा होता है। इसमें बाजार में व्यापक निराशावाद और बढ़ती बिक्री देखी जा सकती है और निवेशकों को यह डर और आशंका रहती है कि शेयर की कीमतों में गिरावट जारी रहेगी।

बेयर मार्केट के दौरान शेयर की कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट देखने को मिलती है। आमतौर पर, अगर कई महीनों तक टॉप से लगभग 20% की गिरावट देखी जाती है, तो यह कहा जाता है कि मार्केट ने बियरिश अवधि में एंट्री कर ली है।

लॉन्ग और शॉर्ट पोज़ीशन

अगर एक निवेशक शेयरों को खरीदता है और उनका मालिक बनता है तो इसे लॉन्ग पोजीशन लेना कहते हैं। दूसरी ओर, अगर कोई निवेशक शेयरों को किसी और संस्था से लेता है लेकिन उसपर मालिकाना हक नहीं रखता तो उसे शॉर्ट पोजीशन लेना कहा जाता है।   

उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक ने कंपनी ए से 500 शेयर खरीदे हैं, तो इसे 500 शेयर लॉन्ग कहा जाता है। यह ध्यान में रखा जाए कि यहाँ निवेशक ने इन शेयरों के लिए पूरी राशि का भुगतान किया है। हालांकि, अगर निवेशक कंपनी ए के 500 शेयर बिना उनके मालिकाना हक से उन्हें साझा करता है तो उसे 500 शेयर शॉर्ट कहा जाता है। ऐसा अक्सर तब होता है जब एक निवेशक शेयरों को ब्रोकरेज फर्म से उधार पर लेकर अपने मार्जिन खाते में डालता है ताकि वह डिलीवरी पूरी कर सके।  इस निवेशक पर अब 500 शेयर बकाया हैं और डिलीवरी सेटलमेंट से पहले उसे बाजार से ये शेयर खरीदना जरूरी है।

7 - अपने अधिकारों को जानें

ब्रोकर के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि वह सेबी के साथ रजिस्टर्ड है और इसके दावे प्रमाणित हों। और यह जरूर सुनिश्चित करें कि आपको हर तिमाही में निपटाए गए फंड और सिक्योरिटीज़ के लिए ‘स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट्स’ मिला हो और आपके द्वारा किए गए सभी डिपोजिट के सही दस्तावेज़ हों।

निष्कर्ष

अब जब आप इक्विटी और डीमैट में ट्रेडिंग की बुनियादी समझ रखते हैं, तो चलिए अगले अध्याय की ओर बढ़ते हैं।

अब तक आपने पढ़ा

  1. एक पंजीकृत स्टॉक मार्केट ब्रोकर के साथ एक ट्रेडिंग खाता खोलें, जो आपकी ओर से ट्रेडिंग करता है। प्रत्येक खाते की एक खास और अलग आईडी होती है जिसका उपयोग लेन-देन करने के लिए किया जाता है।
  2. डीमैट खाते का उपयोग बैंक के रूप में किया जाता है, जहां खरीदे गए शेयरों को जमा किया जाता है, और जहां से बेचे गए शेयरों को लिया जाता है।
  3. हर एक दिन बाजार और उसके उतार-चढ़ाव के बारे में खुद को शिक्षित करें। जल्दी उठें और विदेशी बाजारों में रातभर में आए कीमत में बदलाव के बारे में पढ़ें और आपको अपना पहला ऑर्डर देने से पहले ट्रेडिंग की शब्दावली जैसे खरीदना, बेचना, आईपीओ, पोर्टफोलियो, स्प्रेड, वॉल्यूम, यील्ड, सूचकांक, क्षेत्र, अस्थिरता आदि पता होना चाहिए। 
  4. हमेशा जरूरत पड़ने पर वित्तीय विश्लेषण और तकनीकी विश्लेषण करें ताकि आप सही फैसला ले सकें ।
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