निवेशक के लिए मॉड्यूल

निवेश के मामले - 2

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प्रभाव पूर्वाग्रह:अर्थ, इसे काबू कैसे करे?

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यह समझना कि मार्केट किस तरफ जा रहा है, यह वित्त और निवेश के सबसे जरूरी कौशल में से एक है। इस इंडस्ट्री में, ज़्यादातर बाजार विश्लेषक, खुद के विश्लेषणात्मक कौशल को औसत से ऊपर मानते हैं। हालांकि, यह सांख्यिकीय तौर पर असंभव है कि हर विश्लेषक एक आम विश्लेषक से बेहतर हो।

निवेशक, ज्ञान और कौशल में खुद को सबसे बेस्ट मानते हुए अपने बारे में एक तर्कहिन धारणा बना लेते हैं और ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे उन्हें सभी चीज़ों का ज्ञान है और ऐसा करते हुए वह अति विश्वास  का प्रदर्शन करते हैं। इसे डाटा भ्रम पूर्वाग्रह भी कहा जाता है। स्व-प्रत्याक्षेप पूर्वाग्रह को आप, अतिविश्वास  पूर्वाग्रह का ही एक भाग मान सकते हैं, जहां अगर वह सफल होते हैं तो उसका सारा श्रेय खुद ले लेते हैं और अगर वह असफल होते हैं तो उसका दोष दूसरों पर डाल देते हैं।

आपको यह जानकर सच में आश्चर्य होगा कि फंड मैनेजरों से यह बात सुनना कितना आम है कि “मुझे पता है कि हर कोई सोचता है कि वे औसत से ऊपर हैं, लेकिन मैं वास्तव में हूं।"

अति विश्वास पूर्वाग्रह का सबसे बढ़ा खतरा यह है कि यह आपको निवेश में गलतियां करने के प्रति इतना अतिसंवेदनशील बना देता है कि आप दूसरी चीज़ों को अनदेखा करने लग जाते हैं। वैसे तो अति विश्वास हमें ऊपर उठाने के लिए होता है लेकिन यहां यह हमारे निवेश निर्णयों को हानि पहुंचाता है और उन्हें गलतियों की तरफ ले जाता है। उन गलतियों में से कई, गलत डाटा या डाटा पर गलत धारणा या भ्रम की वजह से होती हैं।

चलिए, हम डाटा और नियंत्रण के भ्रम के बारे में जानें और देखें कि हम अति विश्वास पूर्वाग्रह से कैसे बच सकते हैं।

गलत होने का डर निवेश में उपयोगी होता है

आमतौर पर, विश्वास को कई स्थितियों में एक ताकत के रूप में माना जाता है, लेकिन निवेश के मामले में, यह हमें सबसे ज्यादा कमजोर बना सकता है। एक सफल निवेश के लिए एक अच्छा रिस्क मैनेजमेंट करना बहुत जरूरी है। पर हमारे निवेश निर्णय लेते समय अति विश्वास से भरा होना, रिस्क मैनेजमेंट करने की हमारी क्षमता पर उल्टा या गलत प्रभाव डालता है। अति विश्वास पूर्वाग्रह की वजह से अक्सर हमें अपने निवेश निर्णय उतने ज्यादा जोखिम भरे नहीं लगते हैं, जितने जोखिम भरे वो सच में होते हैं।   

अति विश्वास पूर्वाग्रह के प्रकार

अति विश्वास पूर्वाग्रह को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि हम इसके कुछ प्रकारों को देखें जो हमें आमतौर पर देखने को मिल जाते हैं। यह उन प्रकारों की एक लिस्ट है –

1 - ओवर रैंकिंग

ओवर रैंकिंग तब होती है जब कोई अपने खुद के व्यक्तिगत प्रदर्शन को रेट करता है, जैसा कि ऊपर भी बताया गया है।  सच्चाई यह है कि ज़्यादातर लोग खुद को सामान्य से बेहतर मानते हैं। यही चीज़ व्यापार और निवेश में सबसे बड़ी समस्याएं पैदा करती हैं क्योंकि आमतौर पर इसी वजह से लोग बहुत भारी मात्र में रिस्क ले लेते है।

2 - नियंत्रण का भ्रम

नियंत्रण भ्रम पूर्वाग्रह तब होता है जब लोग सोचते हैं कि उन्हें एक स्थिति पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है, परंतु वे वास्तव में ऐसा नहीं कर रहे होते हैं। ज़्यादातर लोगों का मानना ​​है कि वे जितना नियंत्रण करते हैं उन्हें उससे ज्यादा की जरूरत है। यह अक्सर व्यापार या निवेश के लिए ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि हमें लगता है कि स्थितियां वास्तविकता की तुलना कम जोखिम भरी हैं। जोखिम को ठीक तरह से मापने में असफलता का मतलब है कि जोखिम का सामना करने में असफल होना।

3 - समय आशावादिता

समय आशावाद, अति विश्वास का एक और पहलू है। इसका एक उदाहरण यह है कि लोग  अक्सर इस बात का अतिमूल्यांकन कर लेते हैं कि वे किसी काम को कितना जल्दी कर लेंगे, और इस बात को कम आंकते हैं कि किसी काम को करने और करवाने में कितना वक्त लगता है। विशेष रूप से जटिल कार्यों के लिए, व्यवसायी लोग लगातार इस बात को कम आंकते हैं कि कोई परियोजना कितने समय में पूरी होगी। इसी तरह, निवेशक अक्सर कम आंकते हैं कि निवेश कितने समय में रिटर्न देगा।

4 - इच्छा प्रभाव

इच्छा प्रभाव तब होता है जब लोग कुछ घटित होने की संभावना को बहुत ज्यादा आंकते हैं क्योंकि वो उस परिणाम की चाह रखते हैं। इसे कभी-कभी ‘विशफुल थिंकिंग (खयाली पुलाव)"  के नाम से भी जाना जाता है, और यह एक प्रकार का अति विश्वास हो सकता है। हम यह मानने की गलती करते हैं कि एक परिणाम केवल इसलिए अधिक संभावित है क्योंकि वह परिणाम हमें पसंद आएगा।

 

अति विश्वास के परिणाम निम्न हैं:

  • जोखिमों को कम आंकना
  • विरोधाभासी जानकारी को अनदेखा करना
  • अपेक्षित रिटर्न का अतिमू्ल्यांकन 
  • अत्याधिक व्यापार
  • बाजार से कम रिटर्न का अनुभव

यहाँ अन्य कुछ संकेत हैं जो बताते हैं कि आपके अति विश्वास की वजह से आपके निर्णय लेने की क्षमता और निर्णयों पर गलत प्रभाव पड़ रहा है -  

  • पिछली सफलताओं के कारण बाजारों की भविष्यवाणी करने की क्षमता के बारे में आश्वस्त होना और इस वजह से आवेग में निर्णय लेना।
  • नियंत्रण का भ्रम होना - विश्वास करना कि वे स्थिति के नियंत्रण में ,हैं जबकि ऐसा नहीं है और परिणाम के रूप में जोखिम का आंकलन और प्रबंधन करने में असमर्थ होना।
  • केवल उन शेयरों या प्रतिभूतियों के पक्ष में होना जिन्होंने अतीत में रिटर्न दिए हैं और पर्याप्त विविधता ना रखना।
  • स्टॉक से बाहर निकलने के संकेतों को अनदेखा करना और अपने निवेश के बारे में अत्यधिक आशावादी होना।

निष्कर्ष

अब जब आप अति विश्वास  पूर्वाग्रह  के बारे में जान चुकके हैं तो हम अगले बड़े मॉड्यूल पर चलते हैं - तकनीकी विश्लेषण का निष्पादन। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए अगले अध्याय पर जाएँ।

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