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ऑपशंस और फ्यूचर्स से परिचय

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हम ने मॉड्यूल 1 में विभिन्न प्रकार के वित्तीय बाज़ारों के बारे में पढ़ा था। आपको याद होगा कि उनमें से एक प्रकार वायदा बाज़ार भी था, जहां एसेट की डिलीवरी भुगतान के कुछ समय बाद की तारीख पर होती है। इसे डेरिवेटिव मार्केट के रूप में भी जाना जाता है, यह एक रोमांचक जगह है जहां बहुत होता है।

वायदा अनुबंध यानी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और विकल्प अनुबंध यानी ऑप्शनंस कॉन्ट्रैक्ट, जिन्हें आमतौर पर वायदा और विकल्प या फ्यूचर्स और ऑपशंस के रूप में जाना जाता है, वह दो प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट हैं जिनका कारोबार डेरिवेटीव मार्केट में किया जाता है। फ्यूचर्स और ऑपशंंस मूल रूप से डेरिवेटिव फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट या सिर्फ, डेरिवेटिव होते हैं। आइए देखें इसका क्या मतलब है।

डेरिवेटिव क्या हैं?

डेरिवेटिव एक कॉन्ट्रैक्ट है जिसका मूल्य उससे जुड़े एसेट के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इस एसेट को अंडरलाइंग एसेट भी कहा जाता है।  एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में एक अंडरलाइंग एसेट इक्विटी शेयर और बॉन्ड से लेकर वस्तु और मुद्रा तक कुछ भी हो सकता है।

दो सबसे लोकप्रिय प्रकार के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट हैं, वायदा और विकल्प हैं। विकल्प और वायदा क्या हैं? आइए एक-एक करके इन्हें समझते है।

ट्रेडिंग में फ्यूचर्स या वायदा क्या हैं?

इससे पहले कि हम फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की तकनीकी परिभाषा को समझें उससे पहले हम सुधीर और भीम के उदाहरण से इसे समझने की कोशिश करते हैं।

सुधीर एक फल स्टॉल का मालिक है, जहां पर वह सभी प्रकार के ताज़े, पके फल रखता है। उसके स्टॉल से कुछ फीट आगे, भीम है, जो जूस की दुकान चलाता है। एक दिन, चाय-ब्रेक के दौरान , सुधीर और भीम फलों की बदलती कीमतों के बारे में बात करते हैं।

फलों के स्टॉल के मालिक सुधीर का मानना ​​है कि आने वाले महीने में फलों की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। और वहीं जूस की दुकान चलाने वाले भीम को लगता है कि फलों की कीमत बढ़ने की संभावना ज़्यादा है।

अपनी दुकानों पर वापस जाने से पहले, दोनों एक अनानास के व्यापार की डील या सौदा करते हैं और ये उनके सौदे की शर्तें हैं:

  • वर्तमान में, एक अनानास की कीमत ₹50 है।
  • कीमतें गिरने का अनुमान लगाकर और उससे मुनाफा कमाने की उम्मीद में सुधीर, एक महीने बाद भीम को ₹60 में अनानास बेचने के लिए सहमत हो जाता हैं।
  • इस बीच, भीम, मानता है कि एक महीने बाद अनानास की कीमत कम से कम ₹80 तक बढ़ जाएगी, इसलिए वह ₹60 में अनानास खरीदने के लिए सहमत हो जाता है।

यहाँ जो सौदा हुआ है वह एक तरह का वायदा अनुबंध या फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट है।

इसलिए, वित्तीय बाज़ारों में, एक वायदा अनुबंध एक सौदा है जहां एक खरीदार और एक विक्रेता भविष्य में एक पूर्व निर्धारित तारीख पर, एक पूर्व निर्धारित कीमत पर, एक संपत्ति का व्यापार करने के लिए सहमत होते हैं। खरीदार और विक्रेता दोनों अनुबंध के अंत में अपने-अपने वादोें को पूरा करने के लिए बाध्य हैं।

इसे हम अपने अनानास वाले उदाहरण के हिसाब से देखें तो, इसका मतलब है कि सुधीर और भीम दोनों को एक महीने बाद इस सौदे को अंजाम देना होगा।

  • अब मानते है कि एक महीने बाद, एक अनानास ₹70 पर बिक रहा है।
  • लेकिन उनके कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, सुधीर को ये फल ₹60 में भीम को बेचना होगा।
  • इसलिए, विक्रेता, सुधीर को ₹10 का नुकसान झेलना पड़ेगा।
  • लेकिन भीम, जिसे बाज़ार से अनानास ₹70 रुपए में खरीदना पड़ता, अब वह उसे पर ₹60 में सुधीर से खरीद सकेगा और इसमें उसे ₹10 का फायदा होगा।

तो इस उदाहरण से आपको समझ आ गया होगा की फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की भूमिका क्या है? क्या आप मुनाफा कमाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट का व्यापार कर सकते हैं?  जी हाँ, आप ऐसा कर सकते हैं। वास्तव में, छोटी अवधि में शेयर की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाने वाले ट्रेडर्स नियमित रूप से स्टॉक एक्सचेंज पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का कारोबार करते हैं। 

फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का व्यापार

लेकिन आप फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का कारोबार करते हुए मुनाफा कैसे कमा सकते हैं?  यह हम सुधीर से सीख सकते है।

मान लें कि कॉन्ट्रैक्ट करने के तीन सप्ताह बाद, उसे तत्काल कुछ नक़दी की ज़रूरत पड़ी। इन तीन हफ्तों के बीच, एक अनानास की कीमत ₹50 से घटकर ₹40 हो जाती है। और अगर कीमतों में यही ट्रेंड जारी रहा तो सुधीर, जिसने फल को ₹60 में बेचने का सौदा किया था, वह एक सप्ताह बाद मुनाफा कमा सकता है।

लेकिन उसे तुरंत पैसों की ज़रूरत है। इसलिए, वह अपने कॉन्ट्रैक्ट से मुनाफ़ा कमाने के लिए एक स्मार्ट रणनीति तैयार करता है। वह एक दूसरे फल विक्रेता को  वो कॉन्ट्रैक्ट दिखाता है और उसे बेचने के बदले कुछ पैसे लेने का प्रस्ताव रखता है।

सुधीर दूसरे फल विक्रेता को बताता है कि “मेरे पास एक कॉन्ट्रैक्ट है जिससे आप अभी से एक सप्ताह बाद एक अनानास को ₹60 में बेच सकते हैं। और यह देखते हुए कि अनानास की कीमत कैसे तेज़ी से गिर रही है, आप इस कॉन्ट्रैक्ट की मदद से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, कम से कम ₹20 का तो मुनाफा आपको होगा ही।”

कॉन्ट्रैक्ट के बदले में, सुधीर दूसरे फल विक्रेता से ₹10 मांगता है जो उसे कुछ आपातकालीन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए चाहिए।

आप देखें, सुधीर के कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य बढ़ गया क्योंकि अंडरलाइंग एसेट यानी अनानास  की कीमत गिर गई। और चूंकि सुधीर के पास यह एक सौदा था जिससे वह अनानास को अधिक कीमत पर बेच सकता था तो उसके कॉन्ट्रैक्ट की भी वैल्यू बढ़ गयी।

और यही होता है जब हम कहते हैं कि एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट अंडरलाइंग एसेट से अपना मूल्य प्राप्त करता है, जो इस मामले में, एक अनानास है।

ट्रेडिंग में विकल्प क्या हैं?

विकल्प या ऑपशंस भी काफी हद तक वायदा के समान हैं। इसमें भी अंडरलाइंग एसेट का खरीदार और विक्रेता, दोनों एक पूर्व निर्धारित भविष्य की तारीख में, पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति खरीदने और बेचने के लिए सहमत होते हैं।

हालाँकि, विकल्प और वायदा में थोड़ा अंतर है।

एक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, विक्रेता और खरीदार, दोनों को ही सौदा पूरा करने के लिए बाध्य करता है। इसे किसी भी परिस्थिति में बदला या इसे पूरा करने से मना नहीं किया जा सकता है। लेकिन एक विकल्प अनुबंध या ऑपशंस कॉन्ट्रैक्ट में, ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। यह सिर्फ किसी अंडरलाइंग एसेट को खरीदने या बेचने का अधिकार है।  

क्या ये समझने में थोड़ा-सा मुश्किल लगा? चिंता ना करें, इसे हम सुधीर और भीम के उदाहरण से समझते हैं।

भीम को दोगुना यकीन है कि अनानास की कीमत, जो आज ₹50 है उसमें बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर, सुधीर का मानना ​​है कि अनानास की कीमत गिर सकती है। इसलिए, उनके अनुमान के आधार पर, वे नीचे दिया गया कॉन्ट्रैक्ट करते हैं: 

  • भीम एक महीने बाद सुधीर से ₹60 में अनानास खरीदने के लिए राज़ी हो जाता है।
  • दूसरी ओर, सुधीर भी इस बात से सहमत है कि उस दिन वह भीम को फल बेचेगा।
  • दूसरे शब्दों में, सुधीर को उस तारीख पर अनानास बेचने (या ना बेचने) का अधिकार है। पर अगर वह बेचने के लिए तैयार हो जाता है, तो भीम खरीदने के लिए बाध्य है।
  • इसलिए, भीम ने सुधीर को बेचने का यह अधिकार (या यह विकल्प) दिया है। सुधीर को यह अधिकार देने के बदले में, भीम ने सुधीर से एक छोटी धनराशि ली।

यहाँ जो हुआ वह एक विकल्प अनुबंध या ऑपशंस कॉन्ट्रैक्ट है।

यहां, सुधीर के पास एक महीने बाद अपने अनानास को भीम को ₹60 में बेचने का विकल्प है।

बेचने का यह अधिकार वित्तीय दृष्टि से एक पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर, इसे पुट ऑप्शन कहा जाता है। और सुधीर ने बेचने के अधिकार के लिए भीम को जो पैसा दिया, उसे वित्तीय दृष्टि से प्रीमियम कहा जाता है।

 इस मामले में, यहाँ ये हुआ है

  • भीम ने एक पुट ऑप्शन (या बेचने का अधिकार) सुधीर को बेच दिया।
  • बदले में सुधीर ने भीम को प्रीमियम का भुगतान किया।
 

 ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का व्यापार

यह हमें एक और सवाल पर लाता है - क्या आप एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक का व्यापार कर सकते हैं? बेशक कर सकते हैं। वास्तव में, वायदा की तरह, विकल्प में भी छोटी अवधि में शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाने वाले ट्रेडर स्टॉक एक्सचेंज पर इनका कारोबार करते हैं।  

तो, आप एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के व्यापार से मुनाफा कैसे कमाते हैं? चलिए फिर सुधीर के पास चलते हैं।  

पिछली बार की तरह, मानिए, पुट ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट करने के तीन सप्ताह बाद, सुधीर को तत्काल कुछ नक़दी की ज़रूरत पड़ती है। इस बीच, फिर से, एक अनानास की कीमत ₹50 से गिरकर ₹40 हो जाती है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो सुधीर, जिसके पास अपना फल ₹60 में बेचने का विकल्प है, वह एक सप्ताह बाद बहुत मुनाफा कमा सकता है।

लेकिन उसे अब कुछ पैसे चाहिए। इसलिए, वह एक अन्य फल विक्रेता से संपर्क करता है, उसे कॉन्ट्रैक्ट दिखाता है और कुछ पैसे के लिए कॉन्ट्रैक्ट का व्यापार करने का प्रस्ताव रखता है। 

सुधीर दूसरे फल विक्रेता को बताता है कि “मेरे पास एक कॉन्ट्रैक्ट है जिससे आप अभी से एक सप्ताह बाद एक अनानास को ₹60 में बेच सकते है। और यह देखते हुए कि अनानास की कीमत कैसे तेजी से गिर रही है, आप बहुत अधिक मुनाफा कमाने के लिए इस अनुबंध का उपयोग कर सकते हैं, कम से कम ₹20 तो आपको प्रॉफ़िट होगा ही।

"लेकिन इतना ही नहीं है। अगर, किसी वजह से, कीमत ₹60 से कम होती है तो  आपको बिक्री करने की ज़रूरत नहीं है। आपके पास कॉन्ट्रैक्ट को छोड़ने का ऑप्शन भी है।”

कॉन्ट्रैक्ट के बदले में, सुधीर दूसरे फल विक्रेता से ₹20 लेता है जो उसे कुछ आपातकालीन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए चाहिए।

इस तरह से एक ऑपशंस कॉन्ट्रैक्स का वित्तीय बाज़ारों में कारोबार किया जाता है।

सिक्के का दूसरा पहलू: क्या होगा अगर भीम के पास इसे खरीदने का अधिकार होता?

हमने ऊपर दिए गए उदाहरण में देखा कि एक महीने बाद सुधीर को अपना अनानास बेचने का अधिकार था। लेकिन क्या होगा अगर हम उस स्थिति को उलट दें? अगर भीम के पास खरीदने (या नहीं खरीदने) का विकल्प होता तो क्या होता?  चलिए देखते हैं:

सुधीर ये मानता है कि अनानास की कीमत, जो आज ₹50 है, वह भविष्य में घटेगी। दूसरी ओर भीम का मानना ​​है कि अनानास की कीमत बढ़ सकती है। इसलिए, उनकी मान्यताओं के आधार पर, वे नीचे दिया गया कॉन्ट्रैक्ट करते हैं: 

  • सुधीर अब से एक महीने बाद भीम को एक अनानास ₹60 में बेचने के लिए सहमत हैं।
  • दूसरी ओर भीम इस बात से सहमत है कि वह उस दिन सुधीर से फल खरीद सकता है।
  • दूसरे शब्दों में, भीम को दी गई तारीख पर अनानास खरीदने या ना खरीदने का अधिकार है। लेकिन अगर वह इसे खरीदने के लिए सहमत हो जाता है, तो सुधीर बेचने के लिए बाध्य है।
  • यहाँ, सुधीर भीम को फल खरीदने का अधिकार (या विकल्प) देता है। भीम को यह अधिकार देने के बदले में, सुधीर उससे से कुछ पैसा वसूलता है।

यह भी एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट है।

यहाँ, भीम के पास सुधीर से एक महीने बाद ₹60 में एक अनानास खरीदने का विकल्प है।

वित्तीय दुनिया में खरीदने का यह अधिकार कॉल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर, इसे कॉल ऑप्शन कहते हैं। और भीम ने सुधीर को खरीदने के अधिकार के लिए जो पैसा दिया, उसे वित्तीय दृष्टि से प्रीमियम कहा जाता है।

इस मामले में, यहाँ यह हुआ है:

  • सुधीर ने भीम को कॉल ऑप्शन (या खरीदने का अधिकार) बेच दिया।
  • भीम ने बदले में सुधीर को एक प्रीमियम दिया।

आर्थिक रूप से, जब आप एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं तो क्या होता है?

जब आप एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तो यह होता है:

  • आपको ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के विक्रेता को शुल्क का भुगतान करना होगा।
  • जो भुगतान आप करते हैं वह ’प्रीमियम के रूप में जाना जाता है। '
  • अंडरलाइंग एसेट की डिलीवरी के समय, आप अपने विकल्प का उपयोग करने और पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति खरीदने (बेचने) का चयन कर सकते हैं।
  • अगर आप कॉन्ट्रैक्ट पूरा नहीं करना चाहते है और विकल्प (खरीदने या बेचने का) का प्रयोग नहीं करते हैं, तो आपके द्वारा कॉन्ट्रैक्ट के विक्रेता को दिया गया प्रीमियम जब्त हो जाता है।  

दो प्रकार के विकल्प

जैसा कि हमने ऊपर के उदाहरणों में देखा, दो प्रकार के ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए - कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन। हर प्रकार के ऑप्शन की अपनी शर्तें होती हैं। आइए इन दोनों कॉन्ट्रैक्ट पर एक नज़र डालें।

पुट ऑप्शन

पुट ऑप्शन, एक कॉन्ट्रैक्ट है जो आपको पूर्व निर्धारित तारीख पर एक पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति बेचने का अधिकार देता है। आप वित्तीय बाज़ारों में पुट ऑप्शन खरीद या बेच सकते हैं।

  • पुट ऑप्शन खरीदना - जब आप पुट ऑप्शन खरीदते हैं, तो आपको एसेट बेचने का अधिकार मिल जाता है।
  • पुट ऑप्शन बेचना - जब आप पुट ऑप्शन बेचते हैं, तो आप एसेट बेचने का अधिकार देते हैं।

कॉल ऑप्शन

कॉल ऑप्शन एक कॉन्ट्रैक्ट है जो आपको पूर्व निर्धारित तारीख पर एक पूर्व निर्धारित कीमत पर संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है। पुट ऑप्शंस के साथ, आप कॉल ऑप्शन भी खरीद या बेच सकते हैं।

  • कॉल ऑप्शन खरीदना - जब आप कॉल ऑप्शन खरीदते हैं, तो आपको संपत्ति खरीदने का अधिकार मिलता है।
  • कॉल ऑप्शन बेचना - जब आप कॉल ऑप्शन बेचते हैं, तो आप संपत्ति खरीदने का अधिकार देते हैं।

रिस्क- रिटर्न के स्केल पर, विकल्प और वायदा इक्विटी से ऊपर आते हैं। वे अधिक जोखिम के साथ आते हैं, लेकिन वे ज़्यादा रिटर्न की क्षमता भी रखते हैं।

निष्कर्ष

इसके साथ, हम इस अध्याय के निष्कर्ष पर पहुँच गए हैं। इसका उद्देश्य आपको वायदा और विकल्प का सिर्फ परिचय देना था, डेरिवेटिव की दुनिया सीखने के लिए बहुत बड़ी है। हमारा आने वाले मॉड्यूल में आपको फ्यूचर्स और ऑप्शंस के बारे में और भी गहराई से जानने को मिलेगा। 

अब तक आपने पढ़ा

  • डेरिवेटिव एक अनुबंध है जिसका मूल्य किसी एसेट के प्रदर्शन से प्राप्त होता है, जिसे अंडरलाइंग एसेट के रूप में जाना जाता है।
  • एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में एक अंडरलाइंग एसेट इक्विटी शेयर, बॉन्ड से लेकर वस्तु या मुद्रा तक कुछ भी हो सकती है।
  • दो सबसे लोकप्रिय प्रकार के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट वायदा और विकल्प हैं।
  • एक वायदा अनुबंध या फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट एक सौदा है जहां एक खरीदार और एक विक्रेता भविष्य में एक पूर्व निर्धारित तारीख पर, एक पूर्व निर्धारित कीमत पर, एक संपत्ति का व्यापार करने के लिए सहमत होते हैं। खरीदार और विक्रेता दोनों अनुबंध अंत में उसे पूरा करने के लिए बाध्य हैं।
  • विकल्प या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट भी काफी हद तक वायदा के समान हैं। इसमें भी अंडरलाइंग एसेट के खरीदार और विक्रेता, दोनों एक पूर्व निर्धारित भविष्य की तारीख में पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति खरीदने और बेचने के लिए सहमत होते हैं।
  • एक पुट ऑप्शन, एक कॉन्ट्रैक्ट है जो आपको पूर्व निर्धारित तारीख पर एक पूर्व निर्धारित मूल्य पर संपत्ति बेचने का अधिकार देता है। आप वित्तीय बाज़ारों में पुट ऑप्शन खरीद या बेच सकते हैं।
  • जब आप पुट ऑप्शन खरीदते हैं, तो आपको संपत्ति बेचने का अधिकार मिलता है। जब आप पुट ऑप्शन बेचते हैं, तो आप उस संपत्ति को बेचने का अधिकार देते हैं।
  • कॉल ऑप्शन एक कॉन्ट्रैक्ट है जो आपको पूर्व निर्धारित तारीख पर, एक पूर्व निर्धारित कीमत पर, संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है। पुट ऑप्शंस के साथ, आप कॉल ऑप्शन भी खरीद या बेच सकते हैं।
  • जब आप कॉल ऑप्शन खरीदते हैं, तो आपको संपत्ति खरीदने का अधिकार मिलता है। जब आप कॉल ऑप्शन  बेचते हैं, तो आप संपत्ति खरीदने का अधिकार  देते हैं।
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टिप्पणियाँ (2)

VISHAL KUMAR

03 Aug 2021, 08:46 PM

Thora tough hai

VISHAL KUMAR

03 Aug 2021, 08:33 PM

Lovely

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