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तकनीकी विश्लेषण का परिचय

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* टी एंड सी लागू

शुरुआती खिलाड़ियों के लिए तकनीकी विश्लेषण की शब्दावली

4.3

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1. टेक्निकल एनालिसिस

टेक्निकल एनालिसिस एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग किसी शेयर या सूचकांक के पुराने मूल्य का अध्ययन कर भविष्य के मूल्य का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। यह इस धारणा पर काम करता है कि इतिहास हमेशा खुद को दोहराता है।

2. शुरुआती मूल्य (ओपेनिंग प्राइस)

ओपेनिंग प्राइस वह पहला प्राइस है जिस पर एक ट्रेडिंग सेशन की शुरुआत में एक एसेट का कारोबार होता है।

3. उच्चतम मूल्य (हाईएयस्ट प्राइस)

किसी ट्रेडिंग सेशन में किसी एसेट के कारोबार की सबसे ज्यादा कीमत को उच्चतम मूल्य (हाईएयस्ट प्राइस) कहा जाता है।

4. निम्नतम मूल्य (लोएस्ट प्राइस)

सबसे कम कीमत (लोएस्ट प्राइस) जिस पर ट्रेडिंग सेशन में एसेट का कारोबार किया जाता है।

5. समापन मूल्य (क्लोज़िंग प्राइस)

समापन मूल्य वह अंतिम मूल्य है जिस पर ट्रेडिंग सेशन के अंत में एसेट का कारोबार होता है।

6. मात्रा/ वॉल्यूम

वॉल्यूम एक निश्चित समय अवधि के दौरान बाजार में कारोबार किए गए शेयरों की कुल संख्या है। एक उच्च मात्रा (हाइ वॉल्यूम) शेयरों में अधिक दिलचस्पी का संकेत देती है और इसका विपरीत भी हो सकता है।

7. लाइनचार्ट

एक लाइन चार्ट विभिन्न समय बिंदुओ पर एक एसेट के विभिन्न मूल्यों को चित्रित करता है। ये मूल्य बिंदु एक ही लाइन से जुड़े हुए हैं।

8. बार चार्ट

एक बार चार्ट में दो क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) एक्सिस के साथ एक पतली केंद्रीय ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल)लाइन होती है, एक बाईं ओर और एक दाईं ओर। बाईं ओर की क्षैतिज रेखा एसेट के शुरुआती मूल्य को दर्शाती है, दाईं ओर की क्षैतिज रेखा एसेट के समापन मूल्य को दर्शाती है। ऊर्ध्वाधर केंद्रीय लाइन पर सबसे निम्नतम पाइंट ट्रेडिंग सेशन की सबसे कम कीमत को दर्शाता है, जबकि ऊर्ध्वाधर केंद्रीय लाइन पर उच्चतम (हाईएस्ट) बिंदु में ट्रेडिंग सेशन की उच्चतम कीमत (हाईएस्ट प्राइस) को दिखाया जाता है।

9. कैंडलस्टिक चार्ट

बार चार्ट के समान ही, कैंडलस्टिक चार्ट में भी एक केंद्रीय ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) लाइन होती है। लेकिन यह एक एसेट के ओपनिंग और क्लोज़िंग मूल्यों को चित्रित करने के लिए एक रेक्टैंग्यूलर आकार का उपयोग करता है।

 जब कैंंडल चार्ट लाल रंग का होता है, वह यह दर्शाता करता है कि ओपनिंग प्राइस, क्लोज़िंग प्राइस से अधिक है। इसका यह मतलब निकाला जाता है कि ट्रेडिंग सत्र के दौरान एसेट की कीमत नकारात्मक रूप से बढ़ गई। जब कैंंडल चार्ट हरे रंग का होता है, वह यह दर्शाता करता है कि ओपनिंग प्राइस क्लोज़िंग प्राइस से कम है। इसका मतलब है कि ट्रेडिंग सत्र के दौरान एसेट की कीमत सकारात्मक रूप से बढ़ी है।

इसके अतिरिक्त, वर्टिकल सेंट्रल लाइन पर सबसे निम्नतम बिंदु, ट्रेडिंग सत्र की सबसे कम कीमत को दर्शाता है, जबकि वर्टिकल सेंट्रल लाइन में उच्चतम बिंदु ट्रेडिंग सत्र की उच्चतम कीमत को दर्शाता है।

10. सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न

जब एक एकल कैंडल द्वारा एक पैटर्न उत्पन्न किया जाता है, तो इसे सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न कहा जाता है। सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न आमतौर पर केवल एक ट्रेडिंग सत्र को ध्यान में रखता हैं।

 

11. मल्टिपल कैंडलस्टिक पैटर्न

कई कैंडलस्टिक्स द्वारा उत्पन्न पैटर्न को मल्टिपल कैंडलस्टिक पैटर्न कहा जाता है। ये पैटर्न कई व्यापारिक सत्रों को ध्यान में रखता हैं।

12. ट्रेंड

एक निश्चित समय अवधि में, एक निश्चित दिशा में, किसी एसेट की कीमत की चाल को ट्रेंड या रूझान कहते है।

13. बुलिश ट्रेंड

 इसे अपट्रेंड के रूप में भी जाना जाता है, जब एक एसेट की कीमत एक अवधि में ऊपर की ओर बढ़ती है, तो उसे बुलिश ट्रेंड कहते हैं।

14. बेयरिश ट्रेंड

इसे डाउनट्रेंड के रूप में भी जाना जाता है, जब किसी एसेट की कीमत एक अवधि में नीचे जाती है तो उसे बेयरिश ट्रेंड कहते हैं। 

15. साइडवे ट्रेंड

इसे हॉरिजॉन्टल ट्रेंड या रेंज-बाउंड ट्रेंड के रूप में भी जाना जाता है। साइडवे ट्रेंड तब होता है जब किसी एसेट की कीमत एक निश्चित रेंज के बीच कारोबार करती है, बिना किसी तेजी या मंदी के रूझान के स्पष्ट संकेत दिखाए।

16. ट्रेंड रिवर्सल

ट्रेंड रिवर्सल तब कहा जाता है जब किसी एसेट का मूल्य अपनी दिशा बदलकर विपरीत दिशा में बढ़ना शुरू करता है। उदाहरण के लिए, जब एक तेज़ी का रूझान मंदी में बदल जाता है, तो यह एक ट्रेंड रीवरसल होता है।

17. अस्थिरता/ वोलाटिलिटी

वोलाटिलिटी एक निश्चित समय की अवधि में किसी एसेट की कीमत में आए बदलाव की दर है। ज़्यादा वोलाटिलिटी दर्शाती है कि किसी एसेट की कीमत तेजी से बदल रही है, जबकि कम वोलाटिलिटी यह दर्शाती है कि मूल्य धीरे-धीरे बदल रहा है।

18. सपोर्ट लेवल

सपोर्ट लेवल एक एसेट का मूल्य बिंदु है जिसके नीचे उस एसेट की कीमत आसानी से नहीं गिरती। 

19. रेसिसटेंस लेवल

रेसिसटेंस लेवेल एक एसेट का मूल्य बिंदु है जिसके ऊपर उस एसेट की कीमत आसानी से नहीं बढ़ती।

20. डाउ सिद्धांत

चार्ल्स डॉउ द्वारा प्रस्तावित, डॉउ सिद्धांत 6 नियमों का एक सेट है जो बाजारों और कीमतों की चाल से जुड़ी कुछ अहम जानकारी देते हैं।इसके छह मूल नियम निम्नलिखित हैं:

  • बाज़ार सब जानता है।
  • बाज़ार के तीन ट्रेंड हैं।
  • बाजडार के ट्रेंड्स के तीन चरण होते हैं।
  • सूचकांकों को एक दूसरे की पुष्टि करनी चाहिए
  • ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्राइस ट्रेंड की पुष्टि करनी चाहिए।
  • स्पष्ट रिवर्सल होने तक ट्रेंड जारी रहता है।

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