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पोर्टफोलियो प्रबंधन

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गैर-स्टॉक मार्केट निवेश विकल्पों के बारे में जानें

3.5

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किसी जिम के बारे में सोचें, वहाँ क्या देखने को मिलता है? अलग-अलग तरह की चीजों के साथ कसरत करने वाले कई लोग नज़रों के सामने आते हैं, है कि नहीं? वहां ऐसे लोग भी है जो भारी वजन उठा रहे हैं। और वहीं, अन्य व्यक्ति है जो ट्रेडमिल पर पसीना बहा रहा है। आपने यह भी देखा कि जिम के एक तरफ बैडमिंटन खेलने वाले कुछ लोग हैं। और हां, वहां कई ऐसे लोग भी हैं जो महज़ नाम के लिए ही जिम आए हैं और दूर से ही सब देखकर मज़े ले रहे हैं। यही तस्वीर नज़र आई ना? 

जिस प्रकार जिम के अंदर कई तरह के उपकरण मौजूद होते हैं जो आपके फिट रखने और वर्कआउट करने में आपकी मदद करते हैं, ऐसे ही निवेश के लिए भी कई सारे विकल्प मौजूद हैं। हां, आपने एकदम सही पढ़ा है। अगर आप शेयर बाज़ार के बाहर निवेश करने पर विचार कर रहे हैं, तो आपके पास चुनने के लिए कई अन्य विकल्प हैं। इन शेयर बाज़ार से बाहर के निवेश विकल्पों में जोखिम, रिटर्न, तरलता और अस्थिरता के अलग-अलग स्तर होते हैं।

और जैसा कि हमने इस मॉड्यूल के पिछले अध्यायों में देखा है, पोर्टफोलियो बनाने का मतलब आपके रिटर्न को बढ़ाना ही नहीं है, यह आपकी निवेशक प्रोफाइल को सूट करने के लिए  जोखिम और अस्थिरता जैसे अन्य कारकों को बैलेंस कर आपके लक्ष्यों तक पहुँचने का साधन भी है।  

तो, आगे बढ़ने से पहले आइए शेयर बाज़ार के अलावा कुछ निवेश विकल्पों पर नज़र डालते हैं।

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट

नई पीढ़ी द्वारा पसंद किए जाने वाले कई निवेश विकल्पों में से एक, बैंक फिक्स्ड डिपाजिट स्थिर और सुरक्षित निवेश विकल्प है। यहां आप बैंक में एक निर्धारित समय के लिए एक राशि जमा करते हैं। बैंक में अपने फंड को जमा रखने के बदले में बैंक आपको निवेश की गई राशि पर एक निश्चित ब्याज देता है।

आप या तो नियमित रूप से उस ब्याज को निकाल सकते हैं, या आप इसे मूल राशि के साथ फिर से निवेश करते रह सकते हैं।

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

बहुत कम। एफडी को निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना जाता है।

  • रिटर्न:

निम्न से मध्यम। हर बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न का रेट अलग अलग होता है। यह आमतौर पर 4.5% से लेकर लगभग 8% प्रति वर्ष के बीच हो सकता है।

ट्रेजरी बिल (टी-बिल)

इसे ज़ीरो कूपन बांड के रूप में भी जाना जाता है और टी-बिल भारत सरकार द्वारा पेश किए गए ऋण साधन या डेट इंस्ट्रूमेंट हैं। ये छोटी अवधि में निवेश विकल्प के तीन अलग-अलग कार्यकालों के साथ आते हैं:

  • 91 दिन
  • 182 दिन
  • 364 दिन

अन्य निवेश विकल्पों से उलट, टी-बिल पर आपको एक निश्चित ब्याज दर का  नहीं मिलती। तो, आप टी-बिल में निवेश करने से कमाते कैसे हैं? खैर, टी-बिल एक छूट पर जारी किए जाते हैं और फिर कार्यकाल के अंत में उनके उचित मूल्य पर वापिस खरीद लिए जाते हैं। तो, आप इश्यू प्राइस और फाइनल प्राइस के बीच के अंतर से मुनाफा कमाते हैं।

आइए एक उदाहरण से समझते हैं: 

  • मानिए कि 91-दिवसीय टी-बिल है, जिसका इश्यू प्राइस या फेस वैल्यू ₹1,000 है।
  • आप इनमें से 10 बिलों को डिस्काउंट पर खरीदते हैं, जिसकी कीमत आपको ₹970 प्रति बिल पड़ती है। (प्रत्येक बिल पर ₹30 की छूट)।
  • 91-दिन की अवधि के अंत में टी-बिलों को ₹1,000 प्रति टी-बिल के हिसाब से कैश किया जाता है (आपसे वापस खरीद लिया जाता है) ।
  • इसलिए आपने निश्चित रूप से प्रत्येक टी-बिल पर ₹30 का मुनाफा कमाया है। 10 बिलों के लिए आपका कुल मुनाफा ₹300 हो जाता है।

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

कोई नहीं। चूंकि टी-बिल भारत सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए डिफ़ॉल्ट का कोई रिस्क नहीं है। 

  • रिटर्न:

कम। इस तरह की डेट सिक्योरिटीज़ का रिटर्न आम तौर पर 3% से 5% प्रति वर्ष के बीच होता है।

डेटेड गवर्मेंट सिक्योरिटीज़

टी-बिल की तरह ही दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियां या डेटेड गर्वमेंट सिक्योरिटीज़ एक तरह के डेट इंस्ट्रूमेंट हैं जो भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। हालांकि, ये लंबी अवधि के बॉन्ड हैं जो अलग- अलग निवेश अवधियों के विकल्प के साथ आते हैं, ये विकल्प लगभग 5 वर्षों से शुरू होकर लगभग 40 वर्षों के बीच हो सकते हैं।

दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियां एक निश्चित या अस्थायी ब्याज की दर के साथ आती हैं, जिसे कूपन रेट भी कहा जाता है। इनसे मिलने वाला ब्याज़ आपको छमाही आधार पर दिया जाता है।

आइए इन सिक्योरिटीज़  में अनिल के निवेश के उदाहरण से समझते हैं:

  • अनिल ने 10 साल की अवधि के लिए दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों में ₹50,000 का निवेश किया।
  • इन पर 8% का कूपन रेट मिला
  • तो, प्रत्येक वर्ष उसने ब्याज के रूप में ₹4,000 कमाए। (₹50,000 x 8%)
  • इस ब्याज का भुगतान अनिल को छमाही आधार पर किया जाता है, जो कि हर छह महीने ₹2,000 होता है।

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

● जोखिम:

कोई नहीं। टी-बिल के साथ ही दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों में भी डिफ़ॉल्ट का कोई जोखिम नहीं होता है।

● रिटर्न:

निम्न से मध्यम। दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों पर दिया जाने वाला रिटर्न लगभग 6% से लेकर लगभग 8% प्रति वर्ष तक होता है।

राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS)

भारत सरकार द्वारा समर्थित, राष्ट्रीय पेंशन योजना एक लंबी अवधि का निवेश विकल्प है। यह एक स्वैच्छिक बचत योजना है जिसका उद्देश्य अपने निवेशकों को रिटायमेंट सुविधाओं का लाभ प्रदान करना है। इसके अलावा, आप एनपीएस के तहत जो निवेश करते हैं, उस पर भी आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत ₹1,50,000 तक कर-छूट  मिलती है। 

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

बहुत कम। चूंकि यह एक सरकारी योजना है, इसलिए एनपीएस को कोई जोखिम नहीं है।

  • रिटर्न:

मध्यम से उच्च। एनपीएस  में रिटर्न आमतौर पर लगभग 8% से 12% प्रति वर्ष रहता है।

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड  (पीपीएफ)

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड  (पीपीएफ) सरकार द्वारा प्रायोजित एक और योजना है। पीपीएफ में निवेश करना बेहद आसान है। आपको बस एक बैंक या एक पोस्ट ऑफिस के साथ पीपीएफ खाता खोलने और अपने फंड जमा करने की ज़रूरत होती है। एनपीएस की तरह ही पीपीएफ के तहत ₹1,50,000 तक के निवेश पर टैक्स से छूट मिलती है। इसके अलावा, पीपीएफ में 15 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि होती है जो इसे एक आकर्षक लंबी अवधि का निवेश विकल्प बनाती है। 

इस निवेश ये जुड़ी प्रमुख बातें:

● जोखिम:

बहुत कम। PPF में निवेश की गारंटी भारत सरकार द्वारा दी जाती है।

● रिटर्न:

मध्यम। इस योजना में रिटर्न की दर 7% से लेकर लगभग 8% प्रति वर्ष के बीच है।

 

नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (NSC)

नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (राष्ट्रीय बचत पत्र), जो एक पोस्ट ऑफिस सेविंग बांड है, भारत सरकार की एक और पहल है। PPF की तरह ही NSC भी एक निश्चित आय निवेश योजना है। अंतर यह है कि इसमें केवल 5 वर्षों की लॉक-इन अवधि है। एनएससी योजना के तहत भी आपको ₹50,000 रुपये तक की निवेश राशि पर कर छूट मिलती है। 

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

बहुत कम। यह योजना आपके निवेश को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है।

  • रिटर्न:

मध्यम। ब्याज की दर 6% और 7% प्रति वर्ष के बीच होती है।

गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर/ नॉन- कनवर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी)

डिबेंचर एक डेट इंस्ट्रूमेंट है जो कंपनियां जनता से धन जुटाने के लिए जारी करती हैं। एनसीडी एक निश्चित कार्यकाल और निश्चित ब्याज दर के साथ आते हैं। आपके एनसीडी निवेशों से मिलने वाला ब्याज भुगतान तिमाही, छमाही या वार्षिक हो सकता है, जिसे आप या एनसीडी जारी करने वाली कंपनी तय करती है। इसके अलावा, एनसीडी के मामले में आप तय अवधि से पहले पैसे नहीं निकाल सकते। 

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

मध्यम से उच्च। जोखिम इस पर निर्भर करता है कि एनसीडी सुरक्षित है या असुरक्षित है।

  • रिटर्न:

मध्यम से उच्च। एनसीडी द्वारा दिए गए रिटर्न आमतौर पर 11% से 13% के बीच होते हैं।

बीमा

एक आकर्षक लंबी अवधि के निवेश विकल्प के रूप में बीमा न केवल आपको अपनी संपत्ति बढ़ाने का मौका देता है, बल्कि एक सुरक्षात्मक जीवन कवर का अतिरिक्त लाभ भी देता है। निवेश की अवधि आमतौर पर 10 से 30 वर्ष तक होती है। इस अवधि के दौरान आपको बीमाकर्ता को प्रीमियम शुल्क देना होगा। आपके द्वारा चुनी गई योजना के आधार पर आप प्रीमियम का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, अर्ध-वार्षिक या वार्षिक तौर पर कर सकते हैं। 

कार्यकाल के अंत में, आपको मैच्युरिटी लाभ के साथ बोनस और लॉयल्टी लाभ भी मिलते हैं। अगर आप बीमा पॉलिसी की अवधि के दौरान गुज़र जाते हैं, तो आपके नामांकित व्यक्ति को मृत्यु लाभ के रूप में एक निश्चित राशि मिलती है।

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

बहुत कम। इंश्योरेंस सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है जिसके डिफ़ॉल्ट की संभावना बेहद कम होती है।  

  • रिटर्न:

कम। बीमा उत्पादों के साथ मिलने वाला सुरक्षात्मक जीवन कवर कम रिटर्न की भरपाई करता है।

रियल एस्टेट

भारत में एक बेहद लोकप्रिय निवेश विकल्प ‘रियल एस्टेट निवेश’ है जो कि स्टॉक मार्केट के बाहर निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे लोगों के लिए एक बेहतरीन है। रियल एस्टेट में आपको शानदार रिटर्न देने की क्षमता हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करती है कि बाज़ार कैसा है। चूंकि रियल एस्टेट प्रॉपर्टियों का मूल्य समय के साथ बदलता रहता है, इसलिए मध्यम से लंबी अवधि में काफी अधिक रिटर्न का आनंद लेने की संभावना होती है। अचल संपत्ति निवेश आपको प्रॉपटी को किराए पर देकर एक स्थिर, आसान आय अर्जित करने का अवसर भी देती है।

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

मध्यम। हालांकि, डिफ़ॉल्ट का कोई जोखिम नहीं है, लेकिन इन निवेशों के साथ हमेशा लिक्विडिटी (तरलता) का जोखिम होता है।

  • रिटर्न:

मध्यम से उच्च। आपको प्रॉपर्टी से किराए के रूप में आय और बिक्री द्वारा आय दोनों का आनंद मिलता है।

सोना

यकीनन सोना, भारत में आम आदमी के लिए सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्प है। सोने में निवेश बहुमुखी होता है, क्योंकि आप उन्हें या तो छोटी या लंबी अवधि के लिए रख सकते हैं। चूंकि आमतौर पर सोने की मांग होती ही है, इसलिए सोना खरीदना और बेचना लगभग आसान है।  और अब डिजिटल गोल्ड के आ जाने से आप इसमें आसानी से निवेश कर सकते  हैं और इसे घर पर संभाल कर रखने की चिंता भी नहीं होती। 

इस निवेश से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • जोखिम:

बहुत कम। सोने के साथ आमतौर पर बहुत कम जोखिम होता है।

  • रिटर्न:

मध्यम से उच्च। रिटर्न आमतौर पर अलग-अलग होते हैं क्योंकि वे मौजूदा बाज़ार मूल्य और सोने की मांग पर आधारित होते हैं।

निष्कर्ष

हमने देखा कि शेयर बाज़ार के बाहर निवेश करने के कौन से आसान तरीके मौजूद हैं? लेकिन निश्चित रूप से, आपके जोखिम प्रोफ़ाइल के आधार पर, आपका पोर्टफोलियो कुछ इक्विटी निवेशों से भी फायदा उठा सकता है। और इक्विटी की बात करें तो इसे लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप में बाँटा जा सकता है। लेकिन ये होते क्या हैं? ये हम अगले अध्याय में समझेंगे। 

अब तक आपने पढ़ा 

  • बैंक फिक्स्ड डिपाजिट स्थिर और सुरक्षित विकल्प हैं जो स्टॉक मार्केट के बाहर, निवेश के लिए मौजूद हैं, इनमें जोखिम भी कम ही है और ये मध्यम से कम रिटर्न देते हैं।
  • टी-बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट हैं। ये तीन अलग-अलग कार्यकालों में उपलब्ध हैं, जैसे 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन। ये  बिना किसी जोखिम के आते हैं और कम रिटर्न देते हैं।
  • दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियां या डेटेड गवर्मेंट सिक्योरिटीज़ भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट हैं। ये अलग-अलग कार्यकाल के विकल्प के साथ आने वाले लंबी अवधि के बॉन्ड हैं, जो लगभग 5 वर्षों से शुरू होकर लगभग 40 वर्षों तक चलते हैं। वे बिना किसी जोखिम के आते हैं और मध्यम से कम रिटर्न देते हैं।
  • राष्ट्रीय पेंशन योजना एक स्वैच्छिक बचत योजना है जिसका उद्देश्य अपने निवेशकों को रिटायरमेंट लाभ प्रदान करना है। एनपीएस बहुत कम जोखिम के साथ आता है और मध्यम से उच्च रिटर्न देता है।
  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक अन्य सरकारी प्रायोजित योजना है जो 15 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि के साथ आती है। यह बहुत कम जोखिम के साथ आती है और मध्यम रिटर्न प्रदान करती है।
  • नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट एक निश्चित आय निवेश योजना है जिसमें केवल 5 वर्षों की लॉक-इन अवधि होती है। यह बहुत कम जोखिम के साथ आता है और मध्यम रिटर्न प्रदान करता है।
  • डिबेंचर  एक डेट इंस्ट्रूमेंट है जो कंपनियां जनता से धन जुटाने के लिए जारी करती हैं। एनसीडी एक निश्चित कार्यकाल और निश्चित ब्याज दर के साथ आते है। NCDs की रिस्क- रिटर्न प्रोफाइल मध्यम से अधिक होती है।
  • लो रिस्क- रिटर्न प्रोफ़ाइल के साथ, बीमा न केवल आपको अपनी संपत्ति बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि एक सुरक्षा कवर का अतिरिक्त लाभ भी प्रदान करता है।
  • रियल एस्टेट निवेश मध्यम जोखिम भरे हैं और मध्यम से उच्च रिटर्न देते हैं।
  • सोने में निवेश करने में जोखिम बहुत कम होता है, लेकिन इसमें मध्यम से उच्च रिटर्न देने की क्षमता होती है।
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