मोमेंटम को समझना

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कुछ ट्रेडर्स के अनुसार, मोमेंटम को बाजार में हो रही हलचल की गति के रूप में परिभाषित किया जाता है। हालांकि मोमेंटम इस परिभाषा से कहीं बढ़कर है, और हमें इससे जुड़ी हर टर्म या आयाम के बारे में पता होना चाहिए ।

यह शब्द एक वस्तु की गति को दर्शाता है। अगर हम इस परिभाषा को शेयर मार्केट के नज़रिए में समझते है, तो ‘वस्तु’ को स्टॉक या इंडेक्स से बदल दिया जाएगा ।

चलिए, इस अध्याय में मोमेंटम ट्रेडिंग के सभी पहलुओं के बारे में जानें और यह भी देखें कि यह आपके व्यापारिक प्रयासों को कैसे प्रभावित करता है।

मोमेंटम स्ट्रेटर्जी

इसे व्यापारियों के बीच सबसे लोकप्रिय रणनीतियों में से एक के रूप में गिना जाता है । ऐसे कई तरीके हैं जिनमें ट्रेडर्स अवसरों की तलाश में मोमेंटम को मापते हैं, पर सभी का मकसद एक ही रहता है, और वह यह होता है कि बिलकुल सटीक मोमेंटम की पहचान करना और जिस तरफ वह मोमेंटम जा रहा है उसमें अपने अवसरों के लिए फायदा या नुकसान देखना ।  

इन रणनीतियों को, आमतौर पर, बाजार में शेयरों में मोमेंटम को मापने के मूल विचार के साथ सिंगल-स्टॉक आधार पर विकसित किया जाता है । जिन शेयरों में सबसे ज्यादा मोमेंटम दिखता है, उनमें व्यापार किया जाना चाहिए। हालांकि, मोमेंटम, या तो लॉन्ग हो सकता है या शॉर्ट, और ऐसे ही ट्रेडिंग के अवसर भी हो सकते हैं।

ट्रेड को स्थापित करने के लिए मोमेंटम रणनीति भी विकसित की जाती है, विशेष रूप से क्षेत्रों के आधार पर। हमें उन क्षेत्रों की पहचान करनी होगी जो सेक्टर-विशिष्ट सूचकांकों में इसे ट्रेक करते हुए मजबूत गति प्राप्त करते हैं। एक बार यह हो जाने के बाद,  उस सेक्टर के अंदर अधिकतम मोमेंटम वाले शेयरों की पहचान करनी होगी ।

मोमेंटम को पोर्टफोलियो के आधार पर विकसित किया जाता है । इस अवधारणा में कई शेयरों के साथ एक पोर्टफोलियो बनाना शामिल है । इस पोर्टफोलियो के हर स्टॉक में मोमेंटम दिखाई देता है, और इसे विविधीकरण के संदर्भ में एक शानदार स्ट्रेटर्जी माना जाता है।

व्यापारी व्यापारिक रणनीतियों को कैसे लागू करते हैं?

यह स्ट्रेटर्जी एक विशिष्ट दिशा में ट्रेंड की ताकत को पहचानने के साथ शुरू होती है, इसके बाद व्यापारी एक ऐसी पोजीशन लेते हैं जिसमें उन्हें संपत्ति की कीमत में बदलाव से कुछ लाभ मिलने की उम्मीद होती है । एक बार ऐसा होने पर, वह पोजीशन को क्लोज कर देते हैं और उस समय ट्रेंड अपनी ताकत खोने लगता है । मोमेंटम ट्रेडर्स का उद्देश्य बाजार की भावना और झुंड मानसिकता (भेड़चाल) का फायदा उठाना है।

मोमेंटम इंडिकेटर का उपयोग

जब एक बार मोमेंटम एक निश्चित स्तर पर पहुँच जाता है तो व्यापारी इसे अनिश्चित मानते हैं । तब वह इसे प्राइस रिवर्सल संकेत के रूप में उपयोग करते हैं । व्यापारिक निर्णय लेने के लिए संकेतकों का कोई उपयोग नहीं होना चाहिए, भले ही इसे मूल्य परिवर्तन निकालने के लिए काम में लिया जाता है, 2-3 संकेतकों को स्थिति का अच्छे से जायजा लेने के लिए काम में लिया जाना चाहिए। 

चलिए, मानिए कि हम क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक संकेतक का उपयोग करते हैं । अब इस स्थिति में यह संकेतक एक सटीक परिणाम नहीं दे सकता है क्योंकि इस संपत्ति में बहुत ज्यादा उतार-चड़ाव आते हैं, आप मान लीजिए कि यह एक तरह का सट्टा है और इसलिए ही उनके मूल्यांकन के बारे में कई तरह की राय हैं । इस तरह की संपत्ति की वजह से अक्सर बहुत अनिश्चित व्यापारिक व्यवहार देखने को मिलता है। तो इसलिए भले ही मोमेंटम इसके सबसे उच्च स्तर पर पहुँच गया हो पर इसका मतलब यह नहीं है कि यह समय रहते नीचे आ जाएगा। व्यापारियों और निवेशकों के बीच मोमेंटम का उपयोग करने पर बहुत विरोधाभास हो सकता है।

इसलिए जब हम मोमेंटम ट्रेडिंग के बारे में  बात करते है तो यहाँ, ट्रेंड सभी व्यापारियों की भावनाओं के अनुसार बाजार की चाल का फायदा उठाने के बारे में है । मोमेंटम ट्रेडिंग की पद्धति "उच्च कीमत पर खरीदना और और उससे अधिक पर बेचना है" या "कम पर बेचना और उससे भी कम में खरीदना" है। 

 

मोमेंटम निवेश के लाभ –

मोमेंटम निवेश बहुत बड़ा लाभ प्रदान करता है, पर तभी जब व्यापारी को क्यों और कैसे जैसे सवालों का जवाब पता हो। वह व्यक्ति जो जोखिमों को संभालना जानता है वह इस पद्धति के साथ आगे बढ़ सकता है।

1 – कम समय में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता : तो अगर आप ₹500 का शेयर खरीदने के साथ शुरुआत करते है और वह शेयर ₹750 तक बढ़ता है । और फिर आप इस शेयर के मूल्य में बदलाव आने से पहले इसे 50% के प्रॉफ़िट मार्जिन पर बेचने का निर्णय लेते है; आपने कुछ हफ़्ते या महीनों में ही 50% तक का रिटर्न बनाया। समय के साथ,  मोमेंटम का उपयोग करने से लाभ की क्षमता में वृद्धि होगी।

2 - अपने लाभ के लिए बाजार की अस्थिरता का लाभ उठाएं: मोमेंटम निवेश सभी अस्थिर बाजार के रुझान को भुनाने के बारे में है। इसमें उन सभी शेयरों की तलाश शामिल है जो अभी ऊंची कीमत पर हैं और उन्हें हम उनकी कीमत गिरने से पहले ही बेच देना चाहते हैं ।

3 - अन्य निवेशकों के भावनात्मक निर्णय का इस्तेमाल करना : बेन कार्लसन द्वारा ए वेल्थ ऑफ कॉमन सेंस नामक ब्लॉग में, मोमेंटम ट्रेडिंग को प्रदर्शन का पीछा करने के तौर पर समझाया गया है। हालांकि, मोमेंटम निवेशक एक व्यवस्थित विधि में काम करते हैं जिसमें एक विशिष्ट खरीद और बिक्री पॉइंट शामिल होता है। वे कई निवेशकों की तरह शेयर की कीमतों के लिए भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से नियंत्रित नहीं होते हैं, बल्कि वे भावनात्मक निवेशकों की वजह से स्टॉक की कीमतों में बदलाव का अतिरिक्त लाभ लेना चाहते हैं।

मोमेंटम निवेश के नुकसान -

सभी चीजें कुछ लाभ और हानी के साथ आती हैं । जैसा कहा जाता है, हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं, मोमेंटम निवेश में कुछ कमियाँ भी शामिल हैं - 

अगर आप एक मोमेंटम निवेशक हैं तो आपके निवेश में हमेशा ही कुछ रिस्क तो शामिल होता ही है । ज़्यादातर निवेशकों को पता होता है कि इसमें रिस्क शामिल है पर वह फिर भी आगे बढ़ते है क्योंकि वह उनसे मिलने वाले रिटर्न से उम्मीद लगाए रखते हैं।  

  1. हाई टर्नओवर: यह काफी महंगा हो सकता है क्योंकि इसमे उच्च शुल्क शामिल  होता है। कम लागत वाले ब्रोकर उच्च शुल्क की समस्या को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह एक बड़ी चिंता का विषय है।
  2. समय-गहन: मोमेंटम निवेशकों को बाजार ट्रेक का भी नियमित रूप से ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि कीमत दिन में कई बार बढ़ सकती है, इसलिए हर घंटा ना सही तो भी, रोजाना के आधार पर अपडेट लेना जरूरी है। इसका मतलब है निवेशकों को डराने वाली किसी भी नकारात्मक खबर के बारे में जानकारी रखना।
  3. मार्केट सेंसिटिव: मोमेंटम निवेश को बुल मार्केट में सबसे अच्छा काम करने वाली सट्रैटर्जी माना जाता है क्योंकि निवेशकों में भीड़ मानसिकता मजबूत होती है। एक बेयर या मंदी के मार्केट में, निवेशक की सतर्कता बढ़ने से निवेश पर मुनाफे का मार्जिन कम हो जाता है।
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