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डेब्ट और सिक्योरिटीज

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शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म फंड्स

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शॉर्ट और मीडियम टर्म के फंड - डेब्ट फंडों की दो काटेगौरीस, जो ऑब्वियस्ली, उनके इन्वेस्टमेंट की ड्यूरेशन के बेस पर क्लास्सिफ़ाई की जाती हैं। लेकिन वे अक्लियर शब्द हैं, क्या वे नहीं हैं?

'शॉर्ट'

‘मीडियम'

आप कैसे डिफाइन करते हैं कि शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म क्या है?

ठीक है, आपको ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि सेबी आपके लिए पहले ही ऐसा कर चुका है। यह समझने के लिए, हमें सबसे पहले एक इम्पोर्टेन्ट कांसेप्ट पर ध्यान देने की जरुरत है - मैकाले ड्यूरेशन ।

मैकॉले ड्यूरेशन क्या है?

मान लीजिए कि चार अलग-अलग बॉन्ड हैं: बॉन्ड ए, बॉन्ड बी, बॉन्ड सी और बॉन्ड डी।

  • बॉन्ड A की कीमत रु 1,000 और टेन्योर 5 वर्ष है। 5 साल के अंत में, बांड आपको कोई इंटरेस्ट नहीं देता है। यह आपको रु 1,000  का शुरुआती इन्वेस्टमेंट वापस देता है। ।
  • बॉन्ड बी का फेस वैल्यू  रु 1,000 और सेम कॉस्ट है। यह 6% की कूपन रेट के साथ आता है, ब्याज को वार्षिक रूप से पे करता है, और इसकी मट्योरिटी ड्यूरेशन 5 साल होती है।
  • बॉन्ड सी, रु 1,000  के फेस वैल्यू के साथ रु 1,050 लागत है। इसके बाकी फीचर्स बॉन्ड बी जैसे ही हैं।
  • बॉन्ड डी, रुपये 1,000 के फेस वैल्यू के साथ भी रु 970 लागत है। इसकी बाकी फीचर्स बॉन्ड बी और बॉन्ड सी के जैसे हैं।

अब, ऊपर मेंशनएड चार केसेस में, आपको लगता है कि आपकी ओरिजिनल प्राइस रिकवर करने में कितना समय लगेगा? आइए इसे डिकोड करने की कोशिश करें।

  • बॉन्ड A - 5 साल। चूंकि बांड आपको रु1,000  5 साल के समय में , आप उस विंडो के बाद अपनी इनिशियल कॉस्ट रिकवर करेंगे।
  • बॉन्ड बी आपको रु1,000 देता है 5 वर्ष के अंत में।  लेकिन बीच में, आपको बीच में इंटरेस्ट पेआउट मिलता होता है। तो, आप जल्द ही अपनी इनिशियल कॉस्ट रिकवर करेंगे।
  • इंटरेस्ट पाय आउट के लिए बॉन्ड सी आपकी इनिशियल कॉस्ट को 5 साल से भी जल्द ठीक कर सकता है। लेकिन चूंकि यह बॉन्ड बी से ज्यादा है, इसलिए आपको ओरिजिनल प्राइस रिकवर में थोड़ा ज़्यादा समय लगेगा।
  • इसी तरह, बॉन्ड डी ओरिजिनल कॉस्ट रिकवर करने के लिए बॉन्ड सी और बॉन्ड बी से  कम समय ले सकता है।

सीधे शब्दों में कहें, तो इस ड्यूरेशन को मैकाले ड्यूरेशन कहा जाता है। टेक्नीकली कहें तो, यह उस समय का एक मेज़र है, जिसमें किसी बॉन्ड की कीमत के लिए कॅश फ्लो को रिपे करना पड़ता है। सीधे शब्दों में, यह समय-समय पर आपके द्वारा बांड में इन्वेस्ट किए गए सभी पैसे को पाने करने के लिए लिया जाता है जो पीरियाडिक इंटरेस्ट पेमेंट्स के साथ-साथ प्रिंसकीप्ले पेमेंट भी करते हैं।

शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म के फंड को डिफाइन करना

यहां बताया गया है कि कैसे SEBI इन दो काटेगोरीइस को डेब्ट फंडों में डिफाइन करता है। एसेंस यहाँ दिया गया है, इसे समझने में आसान बनाने के लिए थोड़ा पैराफ़्रेस्ड है।

शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स 

  • शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स एक ओपन-एंडेड, शॉर्ट-टर्म डेब्ट स्कीम है जो इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करती है, हर एक में 1 साल से 3 साल के बीच मैकाले ड्यूरेशन होती है।
  • शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में, डेब्ट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट इस तरह से किया जाता है कि ओवरआल पोर्टफोलियो की मैकाले ड्यूरेशन भी 1 साल से 3 साल के बीच हो।

मीडियम दरशन फंड्स

  • मीडियम पीरियड फंड एक ओपन एंडेड, मीडियम टर्म डेब्ट स्कीम है, जो इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करता है, हर एक में 4 साल से 7 साल के बीच मैकाले ड्यूरेशन होती है।
  • मीडियम ड्यूरेशन फंड में, डेब्ट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट इस तरह से किया जाता है कि ओवरआल पोर्टफोलियो की मैकाले ड्यूरेशन  भी 4 साल से 7 साल के बीच हो।

आपको शॉर्ट-टर्म और मीडियम टर्म फंड का चॉइस कब करना चाहिए?

शॉर्ट-टर्म फंड्स में लिक्विड फंड्स की कम्पेरिज़न में थोड़ी लंबी ड्यूरेशन होती है, जबकि मीडियम-टर्म फंड्स में लंबी ड्यूरेशन का इन्वेस्टमेन्ट होता है। इसलिए, आपकी इंडिविजुअल रेक्विरेमेंटस और आपके गोल्स के बेस पर, आपको शॉर्ट या मीडियम टर्म फंड यूस्फुल हो सकते हैं।

आम तौर पर, शॉर्ट टर्म फंड आइडियल ऑप्शन हैं यदि आपके पास ऐसे गोल्स हैं जिन्हें 1 और 3 साल के अंदर पूरा करने की ज़रूरत है। एक्साम्पल के लिए:

  • यदि आप एक या दो साल में इंटरनेशनल वेकेशन लेना चाहते हैं
  • यदि आप एक मेजर होम रिपेयर को कुछ साल बाद देख रहे हैं
  • यदि आप अगले साल या तीन में अपने घर पर डाउन पेमेंट करना चाहते हैं

दूसरी ओर, मीडियम टर्म फंड, आपको अपनी कैपिटल प्रेज़रवे रखने और प्रोसेस में इंटरेस्ट अर्न करने में मदद कर सकते हैं, जबकि साथ-साथ गोल के लिए एक लॉन्ग टर्म के लिए यूस्फुल साबित हो सकते हैं, जैसे:

  • यदि आप 5 साल कारोबार शुरू करना चाहते हैं डाउन लाइन में 
  • यदि आप अपने बच्चे की कॉलेज एजुकेशन के लिए पे करना चाहते हैं
  • अगर आप दूसरा घर या हॉलिडे होम खरीदना चाहते हैं

शॉर्ट और मीडियम टर्म के टैक्स इम्प्लीकेशनस

लिक्विड फंडों की तरह ही, शॉर्ट और मीडियम टर्म फंड भी आपको मत्युरिटी पीरियड के अंत में कैपिटल गेन देते हैं। और टेन्योर की लेंथ के बेस  पर, ये गेन शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म हो सकते हैं।

शॉर्ट-टर्म फंडों के मामले में, चूंकि वे 1 और 3 साल के बीच मैकाले ड्यूरेशन के साथ आते हैं, इसलिए कैपिटल गेन आम तौर पर शॉर्ट टर्म होता है। और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन, जैसा कि आप याद करते हैं, आप पर उसी रेट से टैक्स लगाया जाता है जिस पर इनकम टैक्स स्लैब रेट लागू होती है। एक्साम्पल के लिए, यदि आप अपनी कुल इनकम के बेस पर 10% की रेट से इनकम टैक्स पे करते हैं, तो शॉर्ट टर्म डेब्ट फंड्स से आपका शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन भी 10% टैक्स के बराबर होगा।

दूसरी ओर, 4 से 7 साल के बीच के मीडियम ड्यूरेशन फंडों के साथ, इन इन्वेस्टमेंट्स से कैपिटल गेन लॉन्ग टर्म होगा, क्योंकि उन्हें 3 साल बाद रेअलाइज़ किया जाता है। और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स इंडेक्सेशन के साथ 20%, या इंडेक्सेशन के बिना 10% पर टैक्सेबल हैं।

इन फंडों से जुड़े रिस्क्स क्या हैं?

याद रखें कि कैसे लिक्विड फंड कुछ रिस्क्स के साथ आते हैं, जैसे इंटरेस्ट रेट रिस्क, इन्फ्लेशन रिस्क और क्रेडिट रिस्क। शॉर्ट और मीडियम टर्म के फंड भी इन रिस्क्स से ग्रस्त हैं। इन रिस्क्स की एक्सटेंट फंड से फंड में वैरी हो सकती है। डेटाइल्स में चलत्ते है ।

  • इंटरेस्ट रेट रिस्क

बढ़ती इंटरेस्ट रेट बांड की कीमतों को कम करती हैं, जबकि गिरती रेट बांड की कीमतों को बढ़ाती हैं। अब, एक बॉन्ड या फंड का टेन्योर जितना लंबा होता है, उतनी लंबी ड्यूरेशन के लिए यह इंटरेस्ट रेट में बदलाव से होने वाले रिस्क्स के कांटेक्ट में आता है। लिहाजा, लिक्विड फंड्स में नेग्लिजिबल इंटरेस्ट रेट रिस्क उनके बेहद कम टेन्योर के कारण हो सकता है, शॉर्ट टर्म डेब्ट फंडों में इस संबंध में थोड़ा ज़्यदा रिस्क  होता है। और मीडियम टर्म फंडों में इंटरेस्ट रेट भी ज़्यादा होती है।

  • इन्फ्लेशन रिस्क

इन्फ्लेशन रिस्क, जैसा कि आप पिछले चैप्टर में पढ़ने के बारे में याद कर सकते हैं, रिस्क है कि इंटरेस्ट पेमेंट्स और फंड से मत्युरिटी रीपेमेंट  इन्फ्लेशन को बीट करने के लिए सुफ्फिसिएंट नहीं हो सकता है। यदि आपके डेब्ट फंड की ड्यूरेशन बहुत कम है, तो पॉसिबिलिटीज ज़्यादा हैं कि आप एस्टीमेट लगा सकते हैं कि उस दौरान इन्फ्लेशन की रेट किस तरह से बढ़ सकती है। इसलिए, उन फंडों में इन्वेस्ट करना आसान है जो शॉर्ट टर्म इन्फ्लेशन को बीट सकते हैं।

लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए डेब्ट फंडों के लिए, इन्फ्लेशन की प्रेडिक्शन करना मुश्किल हो जाता है, जैसा कि इसे बीट करना है। इसलिए, इसे एक साथ रखने के लिए, इन्वेस्ट का टेन्योर जितना लंबा होगा, इन्फ्लेशन रिस्क उतना ज़्यादा होगा। और इस लॉजिक से, शॉर्ट टर्म डेब्ट फंडों में लिक्विड फंडों के मुक़ाबले में इन्फ्लेशन रिस्क अधिक होते हैं, जबकि मीडियम टर्म के डेट फंडों में, इन्फ्लेशन रिस्क और भी ज़्यादा होता है।

  • क्रेडिट रिस्क 

अब, यह रिस्क पूरी तरह से उन डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स पर डिपेंड करता है जो एक फंड में इन्वेस्ट करता है। यदि शॉर्ट टर्म या मीडियम टर्म का डेब्ट फंड प्रिमरिली से गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करता है, तो क्रेडिट रिस्क नेग्लिजिबल हो सकता है। हाई क्रेडिट रेटिंग वाले डेब्ट इंस्ट्रूमेंट के साथ, रिस्क नेग्लिजिबल नहीं है, लेकिन सर्टेनली बहुत कम है।

रैपिंग उप

तो, यह सम है कि शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म डेब्ट फंड क्या हैं। अब जब आप डेब्ट फंडों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, तो यह एक इंटरेस्टिंग कांसेप्ट का पता लगाने का समय है - म्यूचुअल फंड रूट के मीडियम से डेब्ट और इक्विटी में इन्वेस्ट करना। यही हाइब्रिड फंड आपकी मदद करते हैं। ज़्यादा जानने के लिए अगले चैप्टर पर जाएँ।

एक क्विक्ल रिकैप

  • मैकाले ड्यूरेशन उस समय का एक मेज़र है जो एक बांड की कीमत के लिए कॅश फ्लो से रिपे किया जाता है।
  • आसान शब्दों में, यह समय-समय पर आपके द्वारा बांड में इन्वेस्ट किए गए सभी पैसे को पाने के लिए लिया जाता है जो पीरियाडिक इंटरेस्ट पेमेंट्स के साथ-साथ प्रिंसिपल रीपेमेंट भी करते हैं।
  • शॉर्ट ड्यूरेशन फण्ड एक ओपन-एंडेड, शॉर्ट टर्म डेब्ट योजना है जो इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करती है, हर एक में 1 वर्ष से 3 वर्ष के बीच मैकाले ड्यूरेशन होती है।
  • शॉर्ट टर्म फंड में, डेब्ट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्टमेन्ट इस तरह से किया जाता है कि ओवरआल पोर्टफोलियो की मैकाले ड्यूरेशन भी 1 वर्ष से 3 वर्ष के बीच हो।
  • मीडियम पीरियड फंड एक ओपन एंडेड, मीडियम टर्म डेब्ट स्कीम है, जो इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट करता है, हर एक में 4 साल से 7 साल के बीच मैकाले ड्यूरेशन होती है।
  • मीडियम ड्यूरेशन के फंड में, डेब्ट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट इस तरह से किया जाता है की ओवरआल पोर्टफोलियो की मैकाले अवधि भी 4 साल से 7 साल के बीच है।
  • ये डेब्ट फंड इन्फ्लेशन रिस्क , इंटरेस्ट रेट रिस्क और क्रेडिट रिस्क भी ले जाते हैं।
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