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विकल्प और वायदा का परिचय

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ओह! हम आखिर इस मॉड्यूल के अंत तक पहुंच चुके हैं। यह एक बेहतरीन एक्शन से भरपूर यात्रा थी, है ना? हमने कई विषयों पर चर्चा की और वायदा और विकल्प के काम करने के तरीके पर गहराई से विचार किया। इतना ही नहीं, हमने यह भी देखा कि कैसे आप केवल वायदा कारोबार और विकल्प ट्रेडिंग कर छोटी अवधि में मुनाफ़ा कमा सकते हैं।

हालांकि यह सच है कि वायदा और विकल्पों का एक प्रमुख उपयोग तुरंत, शॉर्ट टर्म मुनाफ़ा कमाना है, लेकिन यह मात्र इतना ही फायदा नहीं देता, बल्कि डेरिवेटव में कारोबार करना आपको दो अन्य फायदे देता है - लेवरेज और हेजिंग।

तो फिर ये दो कॉन्सेप्ट क्या हैं? यह वही सवाल है जिसका जवाब हम इस अंतिम अध्याय में ढूंढेंगे। चलिए, शुरू करते हैं! 

लेवरेज क्या है?

हो सकता है कि आपको इसका एहसास नहीं हुआ होगा, लेकिन आप असल में इस पूरे मॉड्यूल के माध्यम से लेवरेज के बारे में पढ़ रहे हैं और इसका उपयोग कर रहे हैं। अब आप पूछेंगे, कैसे? डेरिवेटिव की दुनिया में लेवरेज को निश्चित रूप से निवेश की एक छोटी राशि का उपयोग करके एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट मूल्य को नियंत्रित करने की क्षमता के रूप में जाना जाता है। कुछ याद आया? हाँ, हम यहां मार्जिन और विकल्प प्रीमियम के बारे में बात कर रहे हैं। जैसा कि आप पहले से ही इसके बारे में बड़े पैमाने पर पढ़ चुके हैं, बस एक शुरुआती मार्जिन या प्रीमियम राशि जमा करके, आप बहुत अधिक कॉन्ट्रैक्ट मूल्य वाले फ्यूचर्स या ऑप्शन को खरीद या बेच सकते हैं।

उदाहरण के लिए आप ₹5,20,000 की फ्यूचर प्राइस वाले ICICIBANK JUL FUT कॉन्ट्रैक्ट को लगभग ₹1,70,000 का शुरुआती मार्जिन जमा करके खरीद सकते हैं। तो आपने देखा कि आप केवल एक छोटी-सी पूंजी के साथ बड़े कॉन्ट्रैक्ट मूल्य का मुनाफ़ा कैसे उठा सकते हैं? इसे ही लेवरेज कहा जाता है।

लेवरेज: एक दोधारी तलवार

खैर, अब जब आप औपचारिक रूप से लेवरेज को समझ रहे हैं, तो यह समय है कि हम इसे ज़रा गहराई से देखें। हालांकि ज़्यादा लेवरेज आपको एक बड़े मूल्य के कॉन्ट्रैक्ट को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन हमेशा इसका उपयोग करना एक अच्छा आइडिया नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज़्यादा लेवरेज जोखिम की अधिक मात्रा के साथ आता है। लेवरेज आपको अच्छे रिटर्न का आनंद लेने की सुविधा दे सकता है, लेकिन केवल तभी जब बाज़ार आपके पक्ष में बढ़ रहा हो। अगर बाज़ार की दिशा आपकी अपेक्षाओं के विपरीत है, तो ज्यादा लेवरेज आपकी पूंजी को नुकसान के साथ खत्म कर सकती है।

आइए, एक उदाहरण लें और देखें कि ये कैसे होता है। मानिए कि ICICIBANK JUL FUT कॉन्ट्रैक्ट वर्तमान में ₹378 पर कारोबार कर रहा है। लॉट साइज 1,375 शेयरों पर सेट है। तो, कॉन्ट्रैक्ट मूल्य ₹5,20,000 हो जाता है। ठीक? इस कॉन्ट्रैक्ट को खरीदने के लिए ज़रूरी शुरुआती  मार्जिन ₹1,70,000 है। अब,  इन दो परिस्थितियों को देखें: 

परिस्थिति 1: बाज़ार जब आपके पक्ष में कारोबार करता है

मानिए कि आपके खरीदने के बाद, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य बढ़कर ₹400 हो जाता है। अगर आप अपनी पोज़ीशन को स्क्वेयर ऑफ कर लेते हैं तो आपको ₹30,250 का मुनाफ़ा  होगा [1,375 शेयर x (₹400 - ₹378)]।

एक ट्रेड पर ₹30,250 का मुनाफ़ा बहुत अच्छा है, है ना? और वो भी सिर्फ ₹1,70,000 के निवेश पर (जो आपको अपनी पोज़ीशन स्क्वेयर ऑफ करने पर मुनाफ़े के साथ वापस मिल जाएगा) जबकि आपको बाज़ार से उतने ही शेयर ₹1,375 के भाव पर खरीदने पर  ₹5,20,000 चुकाने पड़ते ।

परिस्थिति 2: जब बाज़ार आपके पक्ष में नहीं है

मान लेते हैं कि फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कीमत ₹340 तक गिर गई है। अब आपको अपनी पोज़ीशन स्क्वेयर ऑफ करने पर ₹52,250 [1,375 शेयर x (₹340 - ₹378)] का घाटा उठाना पड़ेगा। यह एक ही ट्रेड पर ₹52,250 का घाटा है! एक बार जब आप पोज़ीशन स्क्वेयर ऑफ कर लेंगे, तो आपको अपनी जमा कराई ₹1,70,000 की मार्जिन के बजाय अब केवल  ₹1,17,750 ही मिलेंगे।

इस प्रकार आप देखते हैं कि ज्यादा लेवरेज आपके लिए कितना फायदेमंद और हानिकारक हो सकता है? सारांश में कहें तो लेवरेज जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक जोखिम होगा। यहाँ आपके लिए एक टिप है। चूंकि पूरा डेरिवेटिव बाज़ार लेवरेज पर काम करता है, तो आप इसका उपयोग करने से पहले, हमेशा सुनिश्चित करें कि आप बाज़ार का सही आकलन करते हैं। यहां  एक भी गलत कदम बहुत महंगा साबित हो सकता है।

आइए अब अपना ध्यान दूसरे कॉन्सेप्ट- हेजिंग पर केंद्रित करें। 

हेजिंग क्या है?

वित्तीय बाज़ारों में हेजिंग एक रणनीति है जो एक निवेश के जोखिम को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यह आपके निवेशों के नुकसान को सीमित करने, और कई मामलों में तो उनसे पूरी तरह बचने में मदद कर सकती है हालांकि हेजिंग भारी मुनाफ़ा कमाने की संभावना को भी कम करती है।

हेजिंग को एक ऐसी विधि के रूप में मानें जो आपके निवेश को एक निश्चित अवधि के लिए एक तरह से रोक देती है या जमा देती है जिससे कि उस पर बाज़ार के उतार-चढ़ाव के कारण किसी भी तरह का घाटा ना हो, और इसी प्रकिया में कोई मुनाफ़ा भी नहीं हो पाता।

हेजिंग: एक सुरक्षा कवच

हेजिंग की अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने के लिए हम एक छोटा-सा उदाहरण लेते हैं। मान लें कि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं जो बाज़ार से मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं। उस दृष्टिकोण से ₹6,000 प्रति शेयर के हिसाब से आप मारुति सुजुकी लिमिटेड के 100 शेयर खरीदते हैं। आप कुल ₹6,00,000 (₹6,000 x 100 शेयर) का निवेश करते हैं।

लेकिन, उस निवेश को करने के बाद आपको लगता है कि धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण शेयर बाज़ार को कठिन समय का सामना करना पड़ेगा। अब इस स्थिति में आप क्या कर सकते हैं? आप या तो -

  1. शेयर की कीमत को छोटी अवधि में गिरावट आने दें और आशा करें कि इनमें जल्दी या बाद में उछाल आ जाएगा। 
  2. या अब मारुति सुजुकी के सभी शेयरों को बेच दें और कीमत कम होने पर उन्हें एक बार फिर से खरीद लें।

अगर आप पहला विकल्प चुनते हैं तो यह एक बड़ा दाव हो सकता है। शेयर की कीमत आपकी खरीद की कीमत तक बढ़ भी सकती है और नहीं भी। अगर कीमतें नहीं बढ़ती , तो आपको भारी घाटा होगा। और, शेयर की चाल के हिसाब से देखें तो, इनमें गिरावट काफी तेज़ और उछाल काफी धीमा होता है। 

वहीं दूसरे विकल्प में आपको बाज़ार पर बेहद करीबी नज़र रखनी होगी ताकि आप सटीक अनुमान लगाकर सबसे कम कीमत पर शेयर को फिर से खरीद सकें। और बाज़ार में सटीक अनुमान लगाना एक मुश्किल काम है। 

तो फिर आपके पास और क्या विकल्प है? आप अपने निवेश पर घाटा होने से कैसे रोक सकते हैं? यहीं हेजिंग काम आती है। हेजिंग आपके निवेश को स्थिर कर सकती है और अप्रत्याशित और प्रतिकूल बाज़ार रुझानों से प्रभावित होने से रोक सकती है। यहां जानिए कैसे!

स्पॉट मार्केट में अपने निवेश को हेज करने के दो प्राथमिक तरीके हैं - फ्यूचर्स के साथ और ऑप्शंस के साथ। 

चलिए, वायदा कारोबार का उपयोग करते हुए हेजिंग करने पर एक नज़र डालते हैं:

 

फ्यूचर्स के साथ हेजिंग

आइए, हमारे मारुति सुजुकी लिमिटेड में निवेश के उदाहरण पर वापस चलते हैं। मानिए कि आपने ₹6,000 प्रति शेयर के हिसाब से 100 शेयर खरीदे हैं तो कुल निवेश ₹6,00,000 होता है, ठीक? फ्यूचर्स के साथ इस पोज़ीशन को हेज करने के लिए आपको केवल मारुति सुजुकी लिमिटेड के फ्यूचर्स को शॉर्ट-सेल करना होगा, यानी इसे बेचना होगा। यहां बताया गया है कि आप ऐसा कैसे करते हैं:

आप MARUTI JUL FUT कॉन्ट्रैक्ट बेचते हैं, जो वर्तमान में वायदा बाज़ार में ₹6,005 पर कारोबार कर रहा है। कॉन्ट्रैक्ट का लॉट साइज़ 100 शेयरों पर सेट किया गया है, जो आपके स्पॉट बाज़ार निवेश के समान है। कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य ₹600,500 (₹6,005 x 100 शेयर) होता है। इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए, मानिए कि आप कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य के  30% का मार्जिन देते हैं, जो ₹180,150 होता है।

अब, जब आप वायदा के साथ अपनी पोज़ीशन को हेज करते हैं तो आपका कुल मुनाफ़ा या घाटा क्या है, इस पर एक नज़र डालते हैं। मान लें कि आप एक्सपायरी तक वायदा होल्ड करते हैं। इस गणना के लिए, हम मारुति सुजुकी के विभिन्न प्राइस पॉइंट्स को देखेंगे।  

A

B

C

D

हेजिंग के बाद शेयर की कीमत

मारुति सुजुकी में स्पॉट मार्केट निवेश से होने वाला मुनाफ़ा या घाटा (प्रति शेयर)

मारुति सुजुकी के फ्यूचर्स को शॉर्ट सेल करने से होने वाला मुनाफ़ा या घाटा (प्रति शेयर)

नेट मुनाफ़ा या घाटा

(प्रति शेयर)

₹5,800 

-₹200 (घाटा)

(₹5,800  - ₹6,000 )

+₹205 (मुनाफ़ा) 

(₹6,005  - ₹5,800 )

+ ₹5 (मुनाफ़ा)

(- ₹200  + ₹205 )

₹6,010 

+₹10 (मुनाफ़ा)

(₹ 6,010  - ₹6,000 )

-₹5 (घाटा)

( ₹6,005  - ₹6,010 )

+₹5 (मुनाफ़ा)

(₹10  – ₹5 )

₹6,200 

+ ₹200 (मुनाफ़ा)

( ₹6,200  - ₹6,000 )

-₹195 (घाटा)

(₹6,005  - ₹6,200 )

+₹5 (मुनाफ़ा)

(₹200  – ₹195 )

जैसा कि आप इस टेबल से देख सकते हैं, वायदा का उपयोग करके हेजिंग से आप अपने निवेश को जमाकर उसे कीमत के उतार-चढ़ाव से होने वाले घाटे से बचा लेते हैं। हेजिंग के ऊपर दिए गए उदाहरण की तरह ही उपयोगी साबित होने के लिए, आपको अपनी खरीदारी सही समय पर करने की आवश्यकता होगी। इसका मतलब यह है कि आपको ठीक उसी समय पर मारुति सुजुकी का वायदा कॉन्ट्रैक्ट खरीदना होगा, जब आप स्पॉट मार्केट से कंपनी के शेयर खरीदते हैं। इससे स्प्रेड (स्पॉट प्राइस और फ्यूचर प्राइस के बीच का अंतर) को कम से कम रखने में मदद मिलेगी।  

ऑप्शंस के साथ हेजिंग

जब निवेश को हेज करने की बात आती है तो अधिकांश व्यापारी वायदा कारोबार को चुनते हैं। हालांकि आप अपनी पोज़ीशन को हेज करने के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग का उपयोग भी कर सकते हैं। इसे समझने के लिए हम मारुति सुजुकी का वही उदाहरण लेंगे। मानिए कि आपने ₹6,000 प्रति शेयर के हिसाब से 100 शेयर में कुल ₹6,00,000  का निवेश किया है, ठीक? आप ऑप्शन ट्रेडिंग के साथ अपने निवेश को हेज करने के लिए यह कर सकते हैं:

आप MARUTI JUL 6000 PE ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदें, जो वर्तमान में ऑप्शन मार्केट में ₹20  (प्रति शेयर) के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। कॉन्ट्रैक्ट का लॉट साइज़ 100 शेयरों  पर सेट किया गया है, जो आपके स्पॉट  बाज़ार निवेश के समान है। क्योंकि आप पुट ऑप्शन खरीद रहे हैं, तो आपको ₹2,000  (₹20  x 100 शेयर) का प्रीमियम चुकाना होगा। 

अब, एक पुट ऑप्शन खरीदकर अपनी पोज़ीशन को हेज करने पर आपका नेट मुनाफ़ा / घाटा क्या है, इस पर एक नज़र डालते हैं। मान लें कि आप एक्सपायरी तक ऑप्शन को होल्ड करते हैं। इसकी गणना के लिए हम मारुति सुजुकी के विभिन्न प्राइस पॉइंट्स को लेंगे।   

A

B

C

D

E

हेजिंग के बाद शेयर की कीमत

मारुति सुजुकी में स्पॉट मार्केट निवेश से मुनाफ़ा या घाटा (प्रति शेयर)

MARUTI JUL 6000 PE खरीदने पर मुनाफ़ा या घाटा 

(प्रति शेयर) 

पुट ऑप्शन खरीदने के लिए प्रीमियम का भुगतान

नेट मुनाफ़ा या घाटा

(प्रति शेयर)

₹5,800 

-₹200 (घाटा)

(₹5,800  - ₹6,000 )

+₹200 (मुनाफ़ा)

(₹6,000  - ₹5,800 )

-₹20  

-₹20 (घाटा)

(- ₹200  +₹ 200  -  ₹20 )

₹6,010 

+10 (मुनाफ़ा)

(₹6,010  - ₹6,000 )

-

-₹20 

-10 (घाटा)

(₹10  – ₹20 )

₹6,200 

+₹200 (मुनाफ़ा)

(6,200  - 6,000 )

- 

-₹20 

+₹180 (मुनाफ़ा)

(₹200  – ₹20 )

यहां, दो चीजें हैं जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए:

  • पुट ऑप्शन ट्रेडिंग के साथ हेजिंग करने पर आपको जो अधिकतम घाटा होता है, वह पुट ऑप्शन खरीदने के लिए दी गई प्रीमियम की राशि है तक ही सीमित है। चाहे शेयर की कीमत कितनी भी कम हो जाए, आपका अधिकतम घाटा सिर्फ ₹20  प्रति शेयर तक सीमित है।
  • जब शेयर की कीमत पुट ऑप्शन की स्ट्राइक प्राइस से ऊपर जाती है, तो आप ऑप्शन का प्रयोग नहीं करेंगे और ऑप्शन खरीदने के लिए दिया गया प्रीमियम ही आपका नुकसान होगा। 

निष्कर्ष

इसके साथ, हम इस मॉड्यूल को समाप्त करेंगे। अब तक सीखने का अनुभव काफी दिलचस्प रहा है, है ना? यात्रा यहाँ नहीं रुकती। अगले मॉड्यूल में, हम दो अन्य वित्तीय एसेट - मुद्राओं और कमोडिटी पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हमेशा की तरह अधिक जानने के लिए हमसे जुड़े रहें। 

अब तक आपने पढ़ा

  • लेवरेज  निवेश की एक छोटी राशि का उपयोग करके एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट मूल्य को नियंत्रित करने की क्षमता है।
  • केवल एक शुरुआती मार्जिन या प्रीमियम राशि जमा करके, आप बहुत अधिक कॉन्ट्रैक्ट मूल्य वाले फ्यूचर्स या ऑप्शन को खरीद या बेच सकते हैं।
  • हालांकि ज़्यादा लेवरेज आपको एक बड़े मूल्य के कॉन्ट्रैक्ट को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन हमेशा इसका उपयोग करना अच्छा आइडिया नहीं है।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि ज़्यादा लेवरेज जोखिम की अधिक मात्रा के साथ आता है।
  • लेवरेज आपको अच्छे रिटर्न का आनंद लेने का मौका देती है, लेकिन केवल तभी जब बाज़ार आपके पक्ष में चल रहा हो।
  • अगर बाज़ार की दिशा आपकी अपेक्षाओं के विपरीत है, तो ज्यादा लेवरेज आपकी पूंजी को नुकसान के साथ खत्म कर सकती है।
  • वित्तीय बाज़ारों में, हेजिंग एक रणनीति है जो निवेश के जोखिम को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
  • हेजिंग आपके निवेश को एक निश्चित अवधि के लिए एक तरह से रोक देती है या जमा देती है जिससे उस पर बाज़ार के उतार-चढ़ाव के कारण किसी भी तरह का घाटा ना हो, और इसी प्रकिया में कोई मुनाफ़ा भी नहीं हो पाता।
  • आप अपने निवेश को हेज करने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस, दोनों का उपयोग कर सकते हैं।
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