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DCF पद्धति

4.7

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जैसा कि हमने पिछले अध्यायों में देखा था, फंडामेंटल एनालिसिस करने और कंपनी के प्रदर्शन को समझने का उद्देश्य केवल मूल्यांकन के लिए रास्ता बनाना है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आप किसी कंपनी के शेयर का मूल्यांकन कैसे करते हैं? क्या ऐसा करने के लिए कोई विशेष पद्धति है?

वास्तव में, किसी व्यवसाय का मूल्यांकन करने के कई तरीके हैं, जिसे हम आने वाले अध्यायों में शामिल करेंगे। अभी हम डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) पद्धति से शुरू करते हैं। DCF मॉडल में कई परतें हैं लेकिन यह किसी व्यवसाय मूल्यांकन करने के सबसे निरपेक्ष तरीकों में से एक है। निरपेक्ष? इसका क्या मतलब है? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो हम बताते हैं।

कुछ मूल्यांकन के तरीकों में बहुत सारे बाहरी, संबंधित कारकों को ध्यान में रखा जाता है जैसे किसी कंपनी की कीमत आकने के लिए समान या प्रतियोगी कंपनी का मूल्य आका जाता है। लेकिन DCF पद्धति में ऐसा नहीं है। यह कंपनी के खुद के डाटा का इस्तेमाल करके इसके मूल्य का पता लगाती है। जिससे ये मूल्यांकन कंपनी के लिए निरपेक्ष और अहम हो जाता है।

डिस्काउंटेड कैश फ्लो पद्धति क्या है?

इस पद्धति का मूल उद्देश्य एक व्यवसाय के लिए भविष्य के फ्री कैश फ्लो को अनुमानित करना है। यह कंपनी की टर्मिनल वैल्यू भी अनुमानित करता है। इसके बाद भविष्य के फ्री कैश फ्लो और टर्मिनल वैल्यू को  डिस्काउंट कर इनके वर्तमान मूल्य पर पहुंचा जाता है। सभी डिस्काउंटेड फ्यूचर कैशफ्लो  और डिस्काउंटेड टर्मिनल वैल्यू के वर्तमान मूल्यों को जोड़कर कंपनी का मूल्य मिलता है। इस पद्धति की बारीकियों को समझने के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका पर नजर डालते हैं:

लेकिन इससे पहले, आइए, तीन महत्वपूर्ण सवालों पर दोबारा गौर करते हैं:

  • फ्री कैश फ्लो क्या है?
  • किसी व्यवसाय की टर्मिनल वैल्यू क्या है?
  • और भविष्य के कैश फ्लो को डिस्काउंट क्यो किया जाता है?

फ्री कैश फ्लो क्या है?

फ्री कैश फ्लो वो कैश है जो कंपनी द्वारा अपने सभी पूंजीगत खर्चों और संचालन खर्चों का भुगतान करने के बाद बचता है। कंपनी तब इस नक़दी का उपयोग अपने व्यवसाय को बढ़ाने, नए उत्पादों और सेवाओं को विकसित करने या अपने शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान करने के लिए कर सकती है।

फ्री कैश फ्लो की गणना के लिए आप इस फ़ॉर्मूले का उपयोग कर सकते हैं:

शुरुआत करें:

EBIT x (1 – टैक्स दर)

जोड़ेंं:

गैर-नकद शुल्क जैसे विमूल्यनऔर परिशोधन

जोड़ें / घटाएँ:

वर्किंग कैपिटल में बदला

घटाएँ:

पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचरः

परिणाम:

उस अवधि के लिए फ्री कैश फ्लो

किसी व्यवसाय की टर्मिनल वैल्यू क्या है?

टर्मिनल वैल्यू, मूल रूप से उस कंपनी का उस अवधि के लिए मूल्य है जो भविष्य के फ्री कैश फ्लो के पूर्वानुमान की अवधि के सालों बाद आएगी।  यह इस धारणा पर अपना काम करता है कि पूर्वानुमानित अवधि के बाद, कंपनी भविष्य में, एक निर्धारित दर पर निरंतर बढ़ती रहेगी । इसे हम टर्मिनल ग्रोथ रेट या इनफिनिटी ग्रोथ रेट कहते हैं। 

टर्मिनल वैल्यू  की गणना के लिए आप इस फ़ॉर्मूले का उपयोग कर सकते हैं:

टर्मिनल वैल्यू = [पूर्वानुमान अवधि के आखिरी वर्ष के लिए पूर्वानुमानित  फ्री कैश फ्लो x (1 + टर्मिनल ग्रोथ रेट)] ÷[डिस्काउंट रेट - टर्मिनल ग्रोथ रेट]

भविष्य के कैश फ्लो को डिस्काउंट क्यो किया जाता है?

मान लीजिए,किसी कंपनी का फ्री कैश फ्लो 6 फीसदी बढ़ता है और इस वर्ष  कैश फ्लो राशि ₹50,000 है। DCF मॉडल का उपयोग करके आप अनुमान लगाते हैं कि अगले साल फ्री कैश फ्लो ₹53,000 होगा। और उसके अगले साल में यह राशि ₹56,180 रुपए होगी। इस पद्धति के लिए आपको डिस्काउंट रेट का उपयोग करके भविष्य के सभी कैश फ्लो (यहां, ₹53,000 और ₹56,180) की ज़रूरत होगी। ऐसा क्यों है?

जैसा कि हमने पिछले अध्याय में देखा, यह इसलिए है क्योंकि पैसे के मूल्य में हर वक्त उतार-चढ़ाव होता रहता है। दूसरे शब्दों में  भविष्य में प्राप्य पैसे का मूल्य आज कम है। यही कारण है कि DCF पद्धति में आपको भविष्य के कैश फ्लो और टर्मिनल वैल्यू को डिस्काउंट करने की ज़रूरत होती है।

 

DCF पद्धति की परिभाषा

वित्तीय दुनिया में, डिस्काउंटेड कैश फ्लो पद्धति वह तकनीक है जो टाइम वैल्यू ऑफ मनी के सिद्धांत का इस्तेमाल कर किसी कंपनी का मूल्यांकन करती है।  भविष्य के सभी फ्री कैश फ्लो का अनुमान लगाकर और उन्हें डिस्काउंट कर, उनके वर्तमान मूल्यों पर पहुंचा जाता है। इसके बाद भविष्य के सभी कैश फ्लो को जोड़ उनका कुल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) निकाला जाता है। इसे कंपनी का मूल्य माना जाता है।

DCF मॉडल में शामिल चरण

आप चाहे जिस भी कंपनी का मूल्यांकन कर रहे हों, DCF पद्धति में कुछ तय चरण हैं, जिसे किसी भी कंपनी के मूल्यांकन में लागू किया जा सकता है, चाहे वह किसी भी इंडस्ट्री से जुड़ी हो। आइए, देखते हैं कि यह कैसे काम करता है।

  1. पूर्वानुमान अवधि निर्धारित करें।
  2. पूर्वानुमान अवधि के लिए कंपनी के फ्री कैश फ्लो की गणना करें।
  3. उस दर की गणना करें जिस पर आप भविष्य के कैश फ्लो को डिस्काउंट करेंगे।
  4. व्यवसाय की टर्मिनल वैल्यू निर्धारित करें।
  5. कंपनी के वर्तमान मूल्य पर आने के लिए भविष्य के कैश फ्लो और टर्मिनल वैल्यू को डिस्काउंट करें।

कुछ मामलों में कंपनी मूल्य पर पहुंचने के बाद,  इक्विटी के कुल वर्तमान मूल्य की गणना करने के लिए समायोजन किया जाता है। ये समायोजन क्या हैं। यह बहुत आसान है। मूल रूप से  इक्विटी के मूल्य पर पहुँचने के लिए कंपनी मूल्य से ऋण का मूल्य घटाया जाता है।

ये है फ़ॉर्मूला:

इक्विटी का मूल्य = कंपनी का मूल्य - ऋण का मूल्य

ऋण का मूल्य, मूल रूप से मूल्यांकन की तारीख पर कंपनी के नाम पर सभी उधारों का जोड़ है। आप जब कंपनी के मूल्य से इस ऋण का मूल्य घटाते हैं, तो आपको इक्विटी का वास्तविक मूल्य मिलता है। और कंपनी में निवेश करने पर आपको इसी मूल्य का फायदा मिलेगा।

DCF मॉडल के फायदे और नुकसान क्या हैं?

सभी मूल्यांकन पद्यतियों की तरह,  डिस्काउंटेड कैश फ्लो पद्धति की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं। आइए इनमें से कुछ को देखते हैं।

DCF मूल्यांकन पद्धति के फायदे

  • सबसे पहले यह DCF मॉडल एक जटिल और विस्तृत पद्धति है जो किसी कंपनी के बारे में सभी मात्रात्मक मैट्रिक्स पर विचार करता है।
  • DCF पद्धति कंपनी के भविष्य के व्यवसाय से जुड़ी अपेक्षाओं पर भी ध्यान देती है। 
  • यह किसी कंपनी के आंतरिक मूल्य को निर्धारित करने में मदद करती है। इसलिए आप आसानी से यह निर्धारित कर सकते हैं कि कंपनी के शेयर ओवरवैल्यूड हैं या अंडरवैल्यूड।

DCF मूल्यांकन पद्धति के नुकसान

  •  डिस्काउंटेड कैश फ्लो पद्धति में आपको कई अनुमान लगाने पड़ते हैं। वास्तविक आंकड़ों के इन अनुमानों के करीब होने की संभावना काफी कम हो सकती है।
  • DCF पद्धति  कुछ निवेशकों के लिए जटिल भी हो सकती है।

निष्कर्ष

यह DCF पद्धति की मूल संरचना है। आगे के अध्यायों में हम आपको DCF मूल्यांकन पद्धति का निर्माण करने के तरीके के बारे में जानकारी देंगे। लेकिन इससे पहले कि हम उस बिंदु पर पहुंचे,  हमें किसी कंपनी के मूल्य निर्धारण के अन्य तरीकों को देखना होगा। DCF पद्धति से परे. कई अन्य तकनीकें हैं जो आपको व्यवसाय के मूल्य का आकलन करने में मदद करती हैं –व्यक्तिपरक और निरपेक्ष, दोनों तरह से। अधिक जानकारी के लिए अगले अध्याय पर जाएँ। 

अब तक आपने पढ़ा

  • DCF पद्धति  कंपनी के खुद के डाटा का उपयोग इसके मूल्य का पता लगाने के लिए करती है, जिससे यह कंपनी के लिए  निरपेक्ष और अहम हो जाती है।
  • इस पद्धति का लक्ष्य भविष्य के फ्री कैश फ्लो का अनुमान लगाना है। इसमें टर्मिनल वैल्यू भी अनुमानित की जाती है।
  • इसके बाद  यहां भविष्य के फ्री कैश फ्लो और टर्मिनल मूल्य, सभी को उनके वर्तमान मूल्य पर आकने के लिए डिस्काउंट किया जाता है।
  • सभी भविष्य के डिस्काउंटेड कैश फ्लो और डिस्काउंटेड टर्मिनल वैल्यू  के वर्तमान मूल्यों का जोड़ कंपनी के मूल्य के रूप में निर्धारित किया जाता है।
  • फ्री कैश फ्लो वह नक़दी है जो कंपनी द्वारा अपने पूंजीगत व्यय और संचालन व्यय का भुगतान करने के बाद बचती है।
  • टर्मिनल वैल्यू उस अवधि के लिए कंपनी का मूल्य है  जो भविष्य के फ्री कैश फ्लो के पूर्वानुमान की अवधि के सालों बाद आएगी।
  • कुछ मामलों में  कंपनी मूल्य पर पहुंचने के बाद  इक्विटी के कुल वर्तमान मूल्य की गणना करने के लिए समायोजन किया जाता है।
  • इक्विटी के मूल्य पर पहुंचने के लिए कंपनी के मूल्य से ऋण का मूल्य घटाया जाता है।
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