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वित्तीय बाज़ार क्या हैं?

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वित्तीय बाज़ार - एक नज़र में

अपने किसी स्थानीय बाज़ार के बारे में सोचकर देखें, वहाँ कई तरह के सामान और उत्पाद बेचने वाले स्टॉल मौजूद होते हैं, है कि नहीं? और वहाँ लगातार कुछ ना कुछ गतिविधियाँ चलती रहती हैं। अगर हम आपसे पूछें कि आपके स्थानीय बाज़ार में क्या कुछ होता है, तो आप शायद यही कहेंगे कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ ख़रीदार और विक्रेता दोनों सामान खरीदने और बेचने के लिए आते हैं।

तो, वित्तीय बाज़ार क्या हैं? आपके स्थानीय बाज़ार की तरह ही, वित्तीय बाज़ार भी वर्चुअल  या वास्तविक स्थान होते हैं जो एक तरह का सामान यानी वित्तीय संपत्ति या फाइनेंशियल एसेट की खरीद और बिक्री से जुड़े होते हैं। ये वित्तीय संपत्ति शेयर और बॉन्ड से लेकर कमोडिटीज़ और मुद्रा तक, कुछ भी हो सकती हैं।

वित्तीय बाज़ारों को कभी-कभी कैपिटल मार्केट या पूँजी बाज़ार या केवल मार्केट के रूप में भी जाना जाता है। नाम जो भी हो, वित्तीय बाज़ारों की मूल प्रकृति हमेशा एक ही रहती है - वे ऐसे विशेष स्थान हैं जहाँ फाइनेंशियल एसेट्स का कारोबार होता है।

वित्तीय बाज़ारों के विकास पर एक नजर

अगर आप कस्बों या साप्ताहिक हाट-बाज़ारों में जाते हैं, तो आपको आज भी ऐसे दुकानदार मिल जाएंगे जो ग्राहकों को जोर-जोर से आवाज़ देकर बुलाते रहते हैं और अपना सामान बेचते हैं। बीते ज़माने में ज्यादातर लोग इसी तरह खरीद-बिक्री का काम किया करते थे। अब हालांकि हमारे पास वातानुकूलित सुपरमार्केट और बेहतरीन मॉल हैं जहाँ से हम सामान खरीद सकते हैं। और हाल के वर्षों में बढ़ते ऑनलाइन बाज़ारों ने भी इस क्षेत्र में अपनी जगह बना ली है।

जिस प्रकार हमारे पारंपरिक बाज़ार हर दिन विकसित हो रहे हैं, वित्तीय बाज़ार भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बदल गए हैं। कुछ दशक पहले वित्तीय बाज़ार के लिए भी कोई विशेष स्थान निर्धारित रहता था जहाँ खरीदार और विक्रेता वित्तीय लेन-देन का काम किया करते थे। ट्रेडिंग की इस प्रणाली को आमतौर पर 'ओपन आउटक्राइ सिस्टम' के रूप में जाना जाता है।

लेकिन टेक्नोलॉजी के आने से ये बाज़ार अब पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक हो गए हैं। तो, आप जैसे खरीदार और विक्रेता इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए दुनिया में कहीं से भी लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि, अभी भी कुछ वित्तीय बाज़ार हैं जहां फाइनेंशियल एसेट्स का व्यापार पारंपरिक 'ओपन आउटक्राई सिस्टम' के ज़रिए ही किया जाता है।

जब से टेक्नोलॉजी ने वित्तीय बाज़ारों में अपनी मौजूदगी दर्ज की है, इसकी लोकप्रियता आसमान छू रही है। लिहाज़ा वित्तीय बाज़ारों में अब हर सेकंड लाखों ट्रेड होते हैं, जिससे केवल एक ही दिन में खरबों डॉलर का कारोबार संभव होता है।  है ना ये आश्चर्यजनक? 

वित्तीय बाज़ारों का काम

वित्तीय बाज़ारों से क्या अभिप्राय है? उनका काम क्या है, अब इस पर नजर डालते हैं। आपकी सोच के उलट, वित्तीय बाज़ारों का काम सिर्फ खरीदारों और विक्रेताओं के लिए ट्रेडिंग स्थान होने तक ही सीमित नहीं हैं। आइए उन्हें अच्छी तरह समझने के लिए वित्तीय बाज़ारों के कुछ अन्य कार्यों को भी देख लेते हैं।

  • पैसे जुटाने में मदद करता है 

जरा सोचिए। जब आप अपनी आमदनी के एक हिस्से को बचाते हैं, तो ये पैसा तब तक बेकार पड़ा रहता है जब तक आप किसी चीज़ के लिए इसका इस्तेमाल करने का फैसला नहीं करते। लेकिन वित्तीय बाज़ार आपको निवेश का जरिया प्रदान करके अपनी बचत को बढ़ाने की सुविधा देता है। वित्तीय बाज़ार निवेश के मौके ढूँढ रहे व्यक्तियों को पूँजी जुटाने वाले व्यवसायों को जोड़ने में मदद करते हैं।

इसके माध्यम से बिना इस्तेमाल हुए पड़े पैसों को अर्थव्यवस्था में वापस लाने में मदद मिलती है और इसका सही कामों में उपयोग होता है। आखिरकार, एक देश की अर्थव्यवस्था तभी सफल हो पाती है जब वहाँ के पैसे अधिक से अधिक सर्कुलेशन में होते हैं।

 
  • एसेट्स की कीमत निर्धारित करने में सहायक 

मांग और आपूर्ति यानी सप्लाई और डिमांड को देखते हुए किसी भी एसेट की कीमत घटती-बढ़ती रहती है। ग्रेड स्कूल इकोनॉमिक्स याद है? जब डिमांज सप्लाई से ज़्यादा होती है, तो माल की कीमत बढ़ जाती है। और जब सप्लाई डिमांड से ज़्यादा होती है, तो कीमत गिर जाती है। इस तरह सप्लाई और डिमांड माल की कीमत तय करने में मदद करता है। और यह सिद्धांत वित्तीय बाज़ारों पर भी लागू होता है।

जाहिर है, मांग और आपूर्ति दो सबसे महत्वपूर्ण ताक़तें हैं, जो वैश्विक आर्थिक प्रणालियों को निर्बाध रूप से लगातार चलाती हैं। मांग या आपूर्ति के बिना एक अर्थव्यवस्था में संतुलन संभव नहीं है। और चूंकि वित्तीय बाज़ार पूरी तरह से इन दोनों बलों द्वारा संचालित होते हैं, इसलिए वे फाइनेंशियल एसेट्स की कीमत निर्धारित करने में मदद करते हैं। इन बाज़ारों के बिना, फाइनेंशियल एसेट्स की कीमतें अनियमित हो जाएंगी और इसे बेहतरीन तरीके से निर्धारित करना लगभग असंभव होगा।

  • एसेट्स की तरलता / नकद मूल्य सुनिश्चित करते हैं

लिक्विडिटी यानी तरलता या  नकद मूल्य से एक तरह का मीटर है जो एसेट की खरीद, बिक्री या नक़दी में बदलने की क्षमता मापता है। चलिए एक उदाहरण के ज़रिए इसे और भी आसान तरीके से समझते हैं।

सोने को सबसे ज्यादा  तरल निवेश विकल्प माना जाता है क्योंकि इसे आसानी से बेचकर जल्द ही नकद या कैश प्राप्त किया जा सकता है। साफ है कि इसे अच्छी कीमत पर तुरंत बेचा जा सकता है। यही कारण है कि इसकी मांग बहुत ही ज्यादा है। वहीं, एक अचल संपत्ति (जैसे ज़मीन) आमतौर पर बहुत कम तरल मानी जाती है क्योंकि इसे जल्दी से बेचा नहीं जा सकता है।

वित्तीय बाज़ार एसेट्स की बिक्री और खरीद के लिए उचित प्लेटफार्मों के रूप में कार्य करते हैं। आपको एसेट्स को सुचारु रूप से खरीदने और बेचने की सुविधा देकर, वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि ये फाइनेंशियल एसेट्स लिक्विड हों। दूसरे शब्दों में, इन बाज़ारों में खरीदार या विक्रेता खोजने के लिए आपको कहीं और नहीं जाना पड़ेगा।

  • समय और धन दोनों की बचत  

लिक्विडिटी या तरलता को कायम रखते हुए और इस बात से निश्चिंत कि आपको  इस मार्केट में लगभग तुरंत एक खरीदार या विक्रेता मिल जाएगा, वित्तीय बाज़ार में शामिल सभी लोगों का बहुत समय बच जाता है। इतना ही नहीं, इसमें आपको कोई ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती क्योंकि आपको आसानी से संभावित खरीदार या विक्रेता मिल जाते हैं।

इसके अलावा, पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक होने की वजह से वित्तीय बाज़ारों में  लेन-देन से जुड़े कई खर्च और शुल्क में भी काफी कमी आई है। इससे आपके बहुत सारे पैसे यूं ही बच जाते हैं।    

निष्कर्ष

तो, अब हमने देखा कि ये बाज़ार क्या हैं। लेकिन इस क्षेत्र की समझ और बढ़ाने के लिए आपको यह जानने की ज़रूरत है कि वित्तीय बाज़ार और उनके प्रकार क्या-क्या हैं। इस बातों पर हम अगले अध्याय में चर्चा करेंगे। 

अब तक आपने पढ़ा 

  • वित्तीय बाज़ार वर्चुअल या वास्तविक स्थान हैं जो वित्तीय एसेट्स की खरीद और बिक्री से जुड़े होते हैं।
  • पहले ‘ओपन आउटक्राई सिस्टम’ का इस्तेमाल वास्तविक वित्तीय बाज़ारों में फाइनेंशियल एसेट्स का व्यापार करने के लिए किया जाता था। टेक्नोलॉजी के आने से अधिकांश वित्तीय बाज़ार अब वर्चुअल हो गए हैं जहां एसेट्स का इलेक्ट्रॉनिक रूप से कारोबार किया जाता है।
  • वित्तीय बाज़ार पैसे जुटाने में सक्षम बनाते हैं।
  • वे फाइनेंशियल एसेट्स की कीमत निर्धारित करने में भी मदद करते हैं।
  • पूँजी बाज़ार यह सुनिश्चित करते हैं कि वित्तीय संपत्ति लिक्विड (तरल) हो।
  • वे ट्रेडिंग को आसान बनाकर समय, पैसा और मेहनत बचाते हैं।
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