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निवेश विश्लेषण 101

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भारत में पब्लिक लिमिटेड कंपनियां क्या हैं?

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स्मार्ट मनी के मॉड्यूल 2 में आपका स्वागत है। इस मॉड्यूल में हम उद्योगों, व्यवसायों, सेबी और स्टॉकब्रोकर की गतिविधियों समेत विभिन्न रिपोर्ट्स को समझेंगे। तो अब आप सीट बेल्ट बांध कर इस सवारी का आनंद लें!

आगे बढ़ने से पहले यह समझने की कोशिश करें कि वास्तव में व्यवसाय क्या है। उदाहरण के लिए आप अपने स्थानीय किराना स्टोर के मालिक को ही ले लें। वह क्या करता है? किराना वाला निर्माता या डिस्ट्रिब्यूटर से कोई उत्पाद सीधे लेता है और उन्हें कुछ प्रॉफिट पर आपको बेचता है। इस गतिविधि को ही व्यवसाय कहते हैं।

व्यवसाय स्वामित्व के कितने प्रकार हैं?

किसी व्यवसाय का स्वामित्व या मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति या समान विचारधारा वाले लोगों के पास हो सकता है। आइए अब उन तीन मुख्य श्रेणियों पर एक नज़र डालते हैं, जहां व्यवसायों को उनके स्वामित्व के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। 

  • एकल स्वामित्व: जब किसी व्यवसाय का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति के पास होता है, तो उसे एकल स्वामित्व कहते हैं। जैसे ब्यूटी सप्लाई स्टोर, आइसक्रीम पार्लर, यहां तक कि आपका स्थानीय दवाखाना भी एकल स्वामित्व व्यवसाय के उदाहरण हैं।
  • साझेदारी: जब दो या दो से ज़्यादा लोग एक साथ मिलकर किसी व्यवसाय का संचालन करते हैं तो इसे साझेदारी कहते हैं। इस व्यवसाय के सबसे अच्छे उदाहरण अकाउंटेंसी और ऑडिट फर्म हैं।  
  • लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी: लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी एक पंजीकृत कार्पोरेट इकाई है। इसकी एक अलग कानूनी पहचान है। लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी का एक उदाहरण हिंदुस्तान यूनिलीवर है। लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी या तो एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो सकती है।

पब्लिक लिमिटेड कंपनियां क्या है?

इस सवाल का जवाब है पब्लिक लिमिटेड कंपनी की परिभाषा। पब्लिक लिमिटेड कंपनियां क्या हैं?  पब्लिक लिमिटेड कंपनियां कॉर्पोरेट इकाइयां हैं जो भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत होती हैं। इनकी भी अलग कानूनी पहचान है और इन्हें उनके मालिकों से अलग माना जाता है। 

इसका मतलब है कि एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी को कानूनी तौर पर अपने मालिकों से अलग इकाई के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह अपने नाम पर एग्रीमेंट बना सकती है।  हालांकि ये कंपनियां अपने मालिकों द्वारा संचालित की जाती हैं लेकिन  इनके अपने अलग नियम, दायित्व और कानूनी अधिकार होते हैं।   

एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के मालिकों को कंपनी के शेयरधारकों या हितधारकों के रूप में जाना जाता है। कंपनी के स्वामित्व को कई हिस्सों में बंटा जाता है, जिन्हें शेयर या इक्विटी शेयर कहते हैं। आमतौर पर स्वामित्व के ये हिस्से या शेयर व्यक्तियों या कॉर्पोरेशंस के पास होते हैं। 

पब्लिक लिमिटेड कंपनी के बारे में एक मज़ेदार तथ्य है कि  इसमें शेयरधारकों की न्यूनतम संख्या 7 होती है, यानी किसी भी समय पर कंपनी के  कम से कम 7 अलग-अलग मालिक होते  हैं। एक और दिलचस्प बात ये है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयरधारकों की अधिकतम संख्या की कोई सीमा नहीं होती।   

पब्लिक लिमिटेड कंपनियों की विशेषताएँ क्या है?

पब्लिक लिमिटेड कंपनियों की कुछ विशेषताएँ हैं जो उन्हें व्यवसाय के  दूसरे स्वामित्व के वर्गों से अलग बनाती हैं। आइए जानते हैं इन विशेषताओं को।

सीमित देयता/ लिमिटेड लायबिलिटी

सीमित देयता/ लिमिटेड लायबिलिटी क्या है? सीमित देयता का मतलब है कि एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के मालिकों को कंपनी द्वारा लिए गए किसी भी कर्ज़ के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। चलिए उदाहरण के ज़रिए इसे बेहतर तरीके से समझते हैं। 

अगर एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी का कर्ज़ बकाया होता है तो ऐसी स्थिति में कर्ज़दाता सिर्फ कंपनी को कर्ज़ चुकाने के लिए जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। किसी भी स्थिति में वे मालिकों को कंपनी द्वारा लिए गए कर्ज़ को चुकाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यहाँ मालिकों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराने से बचाव के लिए कानूनी सुरक्षा मिलती है। ऐसा एकमात्र स्वामित्व या भागीदारी व्यवसायों के मामले में नहीं होता।  

पारदर्शिता

पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में  लगभग सभी  कुछ पारदर्शी होता है और लगभग सभी जानकारी सार्वजनिक रूप से मौजूद होती है। उनके फाइनेंशियल स्टेटमेंट से लेकर मैनेजमेंट में हुए बदलाव तक,सारी जानकारी सार्वजनिक रूप से जनता के लिए मौजूद रहती है। 

शेयर ट्रांसफर की क्षमता

पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में, शेयरधारक किसी को भी शेयर खरीदने और बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। इसलिए अगर आप किसी सार्वजनिक कंपनी में अपना शेयर रखते हैं  तो आप उन्हें शेयर बाज़ार के किसी स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड कर सकते हैं, बशर्ते पब्लिक लिमिटेड कंपनी उस पर सूचीबद्ध हो। इसके अलावा,  आप किसी भी व्यक्ति या बाज़ार के बाहर की इकाई को अपना शेयर बेच सकते हैं, भले ही वह कंपनी सूचीबद्ध हो या ना हो।

 

जब आप एक सूचीबद्ध पब्लिक लिमिटेड कंपनी में निवेश करते हैं, तो एक निवेशक के रूप में आपके लिए इसका क्या मतलब है?

आप जब स्टॉक एक्सजेंस पर लिस्टेड किसी पब्लिक लिमिटेड कंपनी में निवेश करते हैं, तो आप अपने आप उस कंपनी के शेयरधारक बन जाते हैं। एक शेयरधारक होने के नाते आपका कंपनी के मुनाफ़े पर दावा होता है, जो समय-समय पर सभी शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में बाँटा जा सकता है। इसके अलावा जब कंपनी अंत बंद हो जाती है तो आपको कंपनी द्वारा अपनी सभी देनदारियों का भुगतान करने के बाद बची हुई कुल संपत्ति पर रेसिडुअल क्लेम भी मिलता है। 

आप एक पब्लिक कंपनी के बिज़नेस मॉडल में निवेश कैसे कर सकते हैं

आप एक प्राइमरी या सेकेंड्री मार्केट के माध्यम से एक पब्लिक कंपनी में निवेश कर सकते हैं। आपको याद होगा कि हमने विभिन्न प्रकार के वित्तीय बाज़ारों के बारे में मॉड्यूल 1 में चर्चा की थी।

प्राइमरी मार्केट के माध्यम से निवेश

प्राइमरी बाज़ार वह जगह है जहां पब्लिक कंपनियां पहली बार अपनी सिक्योरिटीज को लिस्ट करती हैं। इसे आईपीओ या एफपीओ के रूप में लिस्ट किया जा सकता है। 

  • इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) वह प्रक्रिया जिसके माध्यम से कोई कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध होने के बाद पहली बार अपने शेयर की बिक्री जनता के लिए शुरू है।
  • फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) एक ऐसी प्रक्रिया जिसके माध्यम से एक एक्सचेंज पर पहले से सूचीबद्ध कंपनी अतिरिक्त पूँजी जुटाने के लिए नई सिक्योरिटीज़ जारी करती है।

आईपीओ और एफपीओ दोनों में आपके जैसे संभावित शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से सीधे कंपनी से शेयर खरीदते हैं।

सेकेंड्री मार्केट के माध्यम से निवेश

सेकेंड्री मार्केट में पहले से जारी सिक्योरिटीज़ का कारोबार होता है। शेयरधारक उन व्यापारियों और निवेशकों को शेयर बेच सकते हैं जो उन्हें खरीदने के इच्छुक हैं। कई फाइनेंशियल एसेट्स जैसे डिबेंचर, बॉन्ड, ऑपशंस, कमर्शियल पेपर और ट्रेज़री बिल का कारोबार भी सेकेंड्री मार्केट में हो सकता हैं। यहां  लेन-देन दो अलग-अलग निवेशकों के बीच होता है, न कि निवेशक और कंपनी के बीच।

निष्कर्ष

जब आप किसी भी पब्लिक कंपनी में निवेश करते हैं, तो आप उस निवेश से कमाते कैसे हैं? इसे सीधे शब्दों में कहा जाए तो किसी व्यवसाय में निवेश कर पैसे कमाने के कई तरीके हैं। और यही हम इस मॉड्यूल के अगले अध्याय में देखेंगे।  

अब तक आपने पढ़ा

  • व्यवसाय के स्वामित्व के विभिन्न रूप हैं: एकल स्वामित्व, साझेदारी और लिमिटेड लायबिलिटी कंपनियां।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनियां जो भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कॉर्पोरेट इकाइयां हैं, उनकी अपनी अलग ही कानूनी पहचान होती है और उन्हें उनके मालिकों से अलग माना जाता है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के मालिकों को कंपनी के शेयरधारकों या हितधारकों के रूप में जाना जाता है। 
  • कंपनी का स्वामित्व हित कई हिस्सों में विभाजित है जिन्हें शेयर या इक्विटी शेयर कहते हैं। 
  • इन कंपनियों के पास लिमिटेड लायबिलिटी होती है, जिसका मतलब है कि एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के मालिकों को कंपनी द्वारा लिए गए किसी कर्ज़ के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में लगभग सारी जानकारी जनता के लिए पारदर्शी और सार्वजनिक तौर पर मौजूद होती है।
  • पब्लिक कंपनियों के शेयरधारक किसी को भी शेयर खरीदने और बेचने के लिए स्वतंत्र हैं।   
  • किसी भी पब्लिक कंपनी में आप प्राइमरी और सेकेंड्री मार्केट के माध्यम से निवेश कर सकते हैं।
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