ट्रेडर्स के लिए मॉड्यूल

पेअर ट्रेडिंग

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* टी एंड सी लागू

पेअर ट्रेडिंग क्या है?

3.6

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इमेजिन करिये आपके पास एक एनर्जेटिक छोटा इंडी पप है। मान लीजिये उसे कोको के नाम से बुलाते हैं। । गर्मी की एक गर्म शाम, आप पड़ोस के पार्क में कोको को वॉक कराने का फैसला करते हैं। तो, आप उसे पट्टा पहनाते हैं, अपने वॉकिंग शूज पहनते हैं, और सूर्यास्त में बाहर निकलते हैं। पार्क आपके घर से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए आप गति को कम्फ़र्टेबल रखते हैं। अब, पार्क तक जाते समय, आप और कोको कम या ज्यादा एक ही दिशा में  जाते हैं - वह आपको स्ट्राइड टू स्ट्राइड मैच नहीं कर सकती है, लेकिन वह पार्क की ओर बढ़ रही है।

कोको रास्ते में थोड़ा भटक जाती है, और आप दोनों के बीच की दूरी बदलती रहती है क्योंकि पट्टा कभी खिचता है और कभी नहीं, लेकिन वह पट्टे की लंबाई से आगे नहीं जा पाती है।

जब आप पार्क में आ जाते हैं, तब आप कोको को फ्री कर देते हैं और  उसे पूरे पार्क में खेलते हुए, तितलियों का पीछा करते हुए और जमीन में रैंडम एरियाज में स्पॉट्स बनाता हुआ देखते हैं, इसी बीच आप झूलों के लिए एक बीलाइन बनाते हैं और अपने बचपन की कुछ यादों को फिर से जीते हैं । कुछ समय के लिए, टेम्पोररीली, आपकी और कोको की ट्रॉजेक्टरी अलग दिखने लगती है। आप झूलों पर बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं, जबकि कोको ने पूरे पार्क को अपने कब्जे में ले लिया है - कोई भी स्थान ऑफ-लिमिट नहीं है। पार्क के रास्ते की तरह, आप दोनों की डायरेक्शन एक नहीं है।

लेकिन बहुत जल्द, सूरज डूब जाता है और अंधेरा छा जाता है। आपको पता है की अब घर जाने का समय है , तो आप कोको को ढूंढते हैं, उसको फिरसे पट्टा पहनते हैं और एक वैल - प्रेक्टिसड रूटीन की तरह, आप दोनों घर की तरफ वापस जाते हैं । एक बार फिर, बैलेंस रिस्टोर होता है, और आप और आपका  इंडी पप एक ही दिशा में आगे बढ़ने लगते हैं - घर की ओर

आपको आश्चर्य हो रहा होगा की इसका पेअर ट्रेडिंग से क्या रिलेशन है? चलो देखते हैं। जैसे आप और कोको एनालोगी के अनयुसुअल मगर लॉजिकल पेअर हैं - काफी ज़्यादा समय के लिए एक ही दिशा में चलते हैं - कुछ स्टॉक्स भी एक पेअर बनाते हैं । पेयर ट्रेडिंग का एम, इन शेयरों की पहचान करना और उनके बिहेवियर में  टेम्पररी  डिवेर्जेंस  का लाभ उठाना है।

अभी भी क्लियर नहीं हुआ? चिंता न करें, हम इस चैप्टर के बाकी हिस्सों में और साथ ही इस मॉड्यूल के अपकमिंग चैप्टर्स में सभी डिटेल्स पर ध्यान देंगे।

तो, पेअर ट्रेडिंग क्या है ?

आइए पहले टेक्निकेलिटीज़ पर एक नज़र डालें।पेअर ट्रेडिंग एक मार्केट न्यूट्रल ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी है जो हिस्टोरिकल कोरिलेटेड स्टॉक्स के पेअर की परफॉरमेंस को मॉनिटर करता है। इसका मतलब यह है कि जब एक शेयर की कीमत बढ़ जाती है, तो दूसरे की कीमत भी बढ़ जाती है।

इस स्ट्रेटेजी के अनुसार, एक ट्रेड तब इनिशिएट होता है जब दो स्टॉक्स के बीच का कोरिलेशन टेम्पोररीली वीक हो जाता है।  उस समय , एक स्टॉक का प्राइस ऊपर जाता है ,  जबकि दुसरे स्टॉक का प्राइस या तो सेम रहता है या नीचे जाता है।  इस तरह के सिनेरियो में , पेअर ट्रेडर ट्रेड को इनिशिएट करता है सस्ते स्टॉक्स में लॉन्ग पोजीशन लेकर, और मेहेंगे स्टॉक्स में शॉर्ट पोजीशन लेकर।

पेअर ट्रेड के पीछे लॉजिकल एक्सपेक्टेशन यह रहती है की यह दो स्टॉक्स के बीच की टेम्पेरेरीली वीक कोरिलेशन को पहले की तरह रिस्टोर या उसकी ओरिजिनल स्ट्रेंथ केपास ला सके।  तो, पेअर ट्रेडर के पास एक ओप्पोरचुनिटी रहती है, दो ओप्पोसिंग पोसिशन्स से नेट गेन करने की।

पेअर ट्रेडिंग: एसेंशियल चेकलिस्ट 

ऊपर दी गयी पेअर ट्रेडिंग की एक्सप्लनेशन से, आप कुछ मुख्य एलिमेंट्स ले सकते हैं जिनका पेअर ट्रेडिंग की पॉसिबिलिटी के लिए एक्सिस्ट करना जरुरी है ।  यह है वह एसेंशियल चेकलिस्ट 

पेअर :

इसमें दो स्टॉक्स होने चाहिए - आख़िरकार, जभी वह पेअर ट्रेडिंग कहलायेगा

कनेक्शन :

दो स्टॉक्स के बीच मैं स्ट्रांग रिलेशनशिप होना चाहिए - अगर किसी एक के प्राइसेस में कुछ मूवमेंट होती है तो दुसरे के प्राइसेस में भी सिमिलर मूवमेंट होनी चाहिए

कनेक्शन का टेम्पररी ब्रेक होना:

थोड़े समय के लिए, रिलेशनशिप वीक करना जरुरी होता है, इसलिए दो स्टॉक्स की प्राइस मूवमेंट्स नॉर्म्स के अकॉर्डिंग नहीं रहती है

पेअर ट्रेडिंग: एक एलिमेंट्री एक्साम्पल

इंडिया की आईटी सेक्टर की दो बड़ी कम्पनीज को देखते हैं - टी सी इस एंड इनफ़ोसिस । दोनों कम्पनीज में बोहुत कुछ कॉमन है। टी सी इस और इनफ़ोसिस के बीच में क्या सिमिलर है यह देखते हैं।  

दोनों कम्पनीज इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज में स्पेशिअलिज़ेड हैं  

दोनों प्राइवेट सेक्टर के जायंटस हैं।  

दोनों कम्पनीज के पास कैपेबल इंटरनेशनल क्लाइंट बेस है।  

यह सेम सेट ऑफ़ ऑपरेशनल, रेगुलेटरी एंड इंटरनल चैलेंजेस फेस करती हैं। 

इनकी स्ट्रेंथ सिमिलर हैं , और इनकी इंडिया और अब्रॉड की ओप्पोरचुनिटीज़ भी

चूंकि वे बहुत अच्छी तरह से अलाइंड हैं, यह मान लेना लॉजिकल है कि कोई भी नियम  या विकास जो किसी विशेष रूप में टीसीएस के स्टॉक प्राइस  को प्रभावित करता है, संभावना है कि इंफोसिस शेयर की प्राइस को भी प्रभावित करेगा

इस बार के लिए  चलिए मान लेते हैं कि ह्य्पोथेटिक्ली एक विशेष वर्ष के लिए बजट 10% की दर से अतिरिक्त कर लगाता है, जो टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्रोवाइड करती है।

फिर नैचुरली टीसीएस और इंफोसिस दोनों के शेयर की कीमतों में टेम्पररी डिप होगा। यह उनका कोरिलेशन है ।

अब , कुछ महीने बाद , टी सी इस ने अपना क्वार्टरली रिजल्ट अन्नोउंस किया।  मान लीजिये कंपनी ने पीरियड के एक्सपेक्टेड प्रॉफिट से ज़्यादा पोस्ट किया।  यह मार्किट सेंटीमेंट्स को टी सी इस की तरफ पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाएगा, जिसकी वजह से उसके शेयर प्राइस में टेम्पररी पीक देखने को मिलेगा।  जबकि, इनफ़ोसिस शेयर, जो हाइली कोरिलेटेड है, उसमे कोई प्राइस राइज नहीं होगा जैसाकी टीसीएस शेयर रिपोर्ट कर रहा है।

यहांपर इनके कोरिलेशन में एक टेम्पेरेरी वीकनिंग है। और तब पेअर ट्रेडिंग ओप्पोरचुनिटी सामने आती है।

कोरिलेटेड स्टॉक्स के बिहेवियर में टेम्पररी अनोमली कौन पैदा करता है?

ऊपर दिए गए एक्साम्पल में , कोरिलेशन टेम्पररी वीक तब होते हैं जब कोई एक कंपनी क्वार्टरली रिजल्ट डिक्लेअर करती है।  

इस तरह , बॉहौत सारे ऐसे रिसंस होते हैं जो दो स्टॉक्स के क्यूरेलशन को वीक करते है।  यह हैं कुछ पोटेंशियल कॉसेस :

  • डिमांड एंड सप्लाई फोर्सेज में टेम्पररी चेंज
  • दो स्टॉक्स की लेवल्स ऑफ़ स्पेकुलेशन का डिफरेंस 
  • दो कंपनियों में से किसी एक से संबंधित इम्पोर्टेन्ट समाचार

रैपिंग अप

तो, इसी के साथ हमारे पेअर ट्रेडिंग के मोस्ट फंडामेंटल कॉन्सेप्ट्स कवर होते हैं। जैसे की हम अगले चैप्टरस की तरफ बढ़ते जाएंगे, हम इस स्ट्रेटेजी की निट्टी - ग्रिटी डिटेल्स को और बारीकी से समझेंगे। अब हम पेअर ट्रेडिंग जारगन को अगले चैप्टर्स में डिकोड करते हैं।

एक क्विक रिकैप

  • पेअर ट्रेडिंग एक मार्किट न्यूट्रल ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी है।  
  • यह हिस्टोरिक्ली कोरिलेटेड स्टॉक्स में पेअर की परफॉरमेंस को मॉनिटर करती है ।  
  • एक ट्रेड तब इनिशिएट होता है जब दो स्टॉक्स के बीच का कोरिलेशन टेम्पररी वीक होने लगता है।  
  • पेअर ट्रेडर स्टॉक में एक लॉन्ग पोजीशन और दूसरे स्टॉक में एक शार्ट पोजीशन  लेकर ट्रेडिंग शुरू करता है।
  • जब दो स्टॉक्स के बीच टेम्पोररीली वीक कोरिलेशन रिस्टोर होकर अपनी ओरिजिनल स्ट्रेंथ तक पॅहुच जाता है, तब पेअर ट्रेडर के पास ओप्पोसिंग पोसिशन्स से नेट गेन करने का अवसर रहता है।
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