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अमेरिकी डॉलर में निवेश करने से पहले आपको क्या पता होना चाहिए?

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आमतौर पर जब मुद्रा बाज़ार में काम करने की बात आती है तो नियमित व्यापारी स्पॉट मार्केट को अक्सर नज़रअंदाज कर देते हैं। मुद्रा स्पॉट मार्केट (जैसे USD-INR स्पॉट मार्केट) में भाग लेने वालों में बैंकिंग और वित्तीय संस्थान, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक, कॉर्पोरेट और अंतर्राष्ट्रीय यात्री शामिल होते हैं। दूसरी ओर, मुद्रा डेरीवेटिव खंड वह है, जहां आपके जैसे व्यापारी ऊपर बताए गए अन्य प्रतिभागियों के साथ बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। 

ठीक है, अब जब हमने नींव रख ली है तो, आइए पूरी दुनिया में सबसे प्रमुख मुद्रा - अमेरिकी डॉलर के बारे में बात करें। 

अमेरिकी डॉलर: एक नज़र में

जैसा कि आप पहले से ही जानते हैं, अमेरिकी डॉलर (USD) पूरी दुनिया में सबसे अधिक मांग वाली मुद्राओं में से एक है। इसे एक बेंचमार्क मुद्रा माना जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, USD निवेश करने वाली सबसे सुरक्षित मुद्राओं में से एक है। वास्तव में, भारतीय रिज़र्व बैंक सहित अधिकांश देशों के केंद्रीय बैंक इसे आरक्षित मुद्रा के तौर पर रखते हैं और इसके ज़रिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करते हैं।

यहां तक कि विदेशी मुद्रा बाज़ारों में, USD एकमात्र प्रभावी मुद्रा है। चाहे मुद्रा स्पॉट मार्केट (जैसे USD-INR स्पॉट) हो, मुद्रा वायदा बाज़ार हो या मुद्रा विकल्प बाज़ार, USD हर जगह है। अब जब आप जान चुके हैं कि USD कितना महत्वपूर्ण है, तो आइए कुछ चीजों पर एक नजर डालते हैं, जो आपको USD-INR ट्रेडिंग करने से पता होनी चाहिए :  

USD में निवेश करने से पहले आपको क्या पता होना चाहिए

USD में निवेश या व्यापार करने के कई माध्यमों में से एक है, USD-INR मुद्रा जोड़ी। इससे पहले कि हम इस बारे में बात करें कि आप USD में कैसे व्यापार कर सकते हैं, आपको डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के बारे में अच्छे से जानकारी होनी चाहिए।

USD-INR मुद्रा जोड़े के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का ब्यौरा

USD-INR डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का इस टेबल में दिया गया ब्यौरा देखकर आपको ये समझने में मदद मिल सकती है कि आखिर किस तरह से मुद्रा बाज़ार में USD का कारोबार होता है। इसलिए कुछ समय लेकर इसे पढ़ें।

विवरण

USD-INR

आधार मुद्रा 

USD

कोट मुद्रा 

INR

लॉट साइज़

$1,000

मूल्य का व्यक्त्वय

1 USD को INR में व्यक्त किया गया है

टिक साइज़

INR 0.0025

ट्रेड  का समय 

सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट

आपको 12 मासिक कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे

अंतिम डेररिवेटिव ट्रेड की तिथि और समय 

डेरिवेटिव ट्रेडिंग महीने के अंतिम कार्य दिवस से दो दिन पहले 12.30 बजे बंद हो जाता है

अंतिम निपटान दिवस

महीने का अंतिम कार्य दिवस

निपटान पर USD-INR मूल्य

अंतिम निपटान दिवस पर RBI रेफरेंस रेट

 

USD सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है

मुद्रा बाज़ार में डॉलर की मांग बड़े पैमाने पर है। इतने बड़े पैमाने पर कि अगर आप सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा जोड़े की लिस्ट बनाने जा रहे हैं, तो आप देखेंगे कि USD आपकी सूची में हर मुद्रा जोड़ी का एक हिस्सा है। उदाहरण के लिए, EUR-USD, GBP-USD, USD-CHF, USD-JPY और USD-CAD कुछ सबसे अधिक कारोबार वाले मुद्रा जोड़े हैं। आपने देखा कि कैसे USD हर एक जोड़ी का एक हिस्सा है?

इस मुद्रा की भारी मांग USD को तरलता की एक असाधारण क्षमता देती है। वास्तव में, यह दुनिया में सबसे ज़्यादा तरल संपत्तियों में से एक है। इसी वजह से इसे खरीदना और बेचना बहुत आसान होता है। इसके अलावा, USD का बिड-आस्क स्प्रेड आमतौर पर बहुत कम होता है।

USD बहुत स्थिर मुद्रा है

पाउंड स्टर्लिंग, भारतीय रुपया और जापानी येन जैसी अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में USD का मूल्य कम अस्थिर होता है। यह मुख्य रूप से मुद्रा की भारी मांग और मुद्रा के घरेलू देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता जैसे कारकों के मिश्रण के कारण है। कम अस्थिरता और USD की उच्च स्थिरता का मतलब है कि USD-INR की कीमत की चाल में कोई अप्रत्याशित फेर-बदल नहीं होता है। 

USD में उतार-चढ़ाव फेडरल फंड्स रेट से जुड़ा हुआ है

अमेरिका के फेडरल फंड्स रेट के साथ USD का बहुत करीबी लिंक है। फेडरल फंड्स दर, भारतीय रिज़र्व बैंक की रेपो दर की तरह है। इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन, चाहे सकारात्मक या नकारात्मक, का USD के मूल्य रुझान पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर फेडरल फंड्स की दर कम हो जाती है, तो USD के गिरने की संभावना है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था में अधिक डॉलर के प्रसार को दिखाता है, जिससे मांग कम होती है।   

शेयर बाज़ार और USD विपरीत रूप से जुड़े हुए हैं

USD को, व्यापक रूप से, कई लोग एक सुरक्षित एसेट मानते है। इसलिए, जब शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव होता है, तो व्यापारी स्वाभाविक रूप से मुद्रा बाज़ार में अधिक डॉलर खरीदने के लिए जुट जाते हैं, जिससे मांग और एसेट की कीमत बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि USD को शेयरों की तुलना में एक सुरक्षित वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जाता है। इसी तरह जब शेयर बाज़ार तेज़ी पर होते हैं, तो USD की मांग और कीमत थोड़ा कम हो जाती है। इसकी वजह है  इक्विटी मार्केट में रिटर्न की ऊंची दर।

निष्कर्ष

यह USD-INR ट्रेडिंग सेगमेंट का सैद्धांतिक पहलू था। इनको जानकर आप अपने मूल सिद्धांतों को मज़बूत कर सकते हैं और इसके साथ अपनी व्यवहारिक जानकारी को बढ़ा सकते हैं।  और ऐसी ही जानकारी हम आपको अगले अध्याय में देंगे।  वहां हम विशेष रूप से USD-INR जोड़ी पर ध्यान देंगे और मुद्रा जोड़ी के डेरिवेटिव सेगमेंट में व्यापार कैसे करें, इस पर गहराई से चर्चा करने वाले हैं। 

अब तक आपने पढ़ा

  • अमेरिकी डॉलर (USD) पूरी दुनिया में सबसे अधिक मांग वाली मुद्राओं में से एक है। इसे एक बेंचमार्क मुद्रा माना जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • विदेशी मुद्रा बाज़ारों में भी USD एकमात्र प्रभावी मुद्रा है। मुद्रा बाज़ार, मुद्रा वायदा बाज़ार, या मुद्रा विकल्प बाज़ार, USD हर जगह है।
  • USD में आप जिन तरीकों से निवेश या व्यापार कर सकते हैं उनमें से एक USD-INR मुद्रा जोड़ी है।
  • USD-INR डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के कुछ विनिर्देश हैं:
    • USD सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है। यह बहुत स्थिर मुद्रा भी है।
    • USD का मूवमेंट फेडरल फंड्स रेट से जुड़ा हुआ है।
    • लेकिन शेयर बाज़ार और USD विपरीत रूप से जुड़े हुए हैं।
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