भारत के पसंदीदा वित्तीय साधन: FD और LIC

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यदि आप अपने माता-पिता से पूछते हैं कि उनके पसंदीदा निवेश क्या थे, तो निश्चित रूप से FD और LIC उनके टॉप 5 निवेशों में से होंगे। सही भी है, हम उन्हें ग़लत नहीं ठहरा सकते। आखिरकार, जब वे अपने करियर की ऊंचाइयों पर थे, तब FD को सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता था। और इसी तरह LIC भी बीमा क्षेत्र में सर्वश्रष्ठ थी।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि FD और LIC को पैसा निवेश करने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक माना जाता था। आज तक, भारत में कई अन्य निवेश योजनाओं के बावजूद, FD और LIC सबसे पसंदीदा बने हुए हैं। इस अध्याय में, हम इन निवेशों के बारे में दिलचस्प विवरणों पर एक नज़र डालेंगे।

 FD: एन ओवरव्यू 

1990 के दशक की शुरुआत में, FD ने ब्याज दरों को 13% तक बढ़ा दिया था। विश्वास करना मुश्किल है, है ना? और वो भी तब जबकि आजकल अधिकांश बैंकों की FD दरों में 5% से कम की सीमा में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

वर्ष 1985, 1992 और 1997 के दौरान भारत में FDs में तीन महत्वपूर्ण मोड़ आए। प्रत्येक वर्ष, FD के नए नियम लाए गए।

1985: जब FD दरों की सीमा हटाई गई

परंपरागत रूप से, 15 दिनों और एक वर्ष के बीच की अवधि वाली जमा राशियों के लिए, बैंक अपनी FD दरें निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र थे। बस एक शर्त थी। ऐसी जमा राशियों के लिए FD दरों की उच्चतम सीमा 8% प्रति वर्ष निर्धारित की गई थी। हालांकि, 1985 में, इस सीलिंग को हटा दिया गया था।

1992: FD का डीरेग्यूलेशन (विनियमन), और स्वर्णिम वर्षों की शुरुआत

 1992 में, FDs ने डीरेग्यूलेशन के अपने पहले दौर में प्रवेश किया। बैंकों को अब FD के पूरा होने के समय  के आधार पर ब्याज दरें तय करने की आवश्यकता नहीं थी। इतना ही नहीं, वे 46 दिनों से ऊपर की अवधि वाली FD के लिए 13% प्रति वर्ष तक की दरों पर ब्याज देने के लिए भी स्वतंत्र थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आपके माता-पिता को FD पसंद है।

1997: FDs का पूर्ण डीरेग्यूलेशन (विनियमन)

अक्टूबर 1997 में FD को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त कर दिया गया था।  यहीं से आरबीआई ने बैंक दरों को FD दरों से नहीं जोड़ने का फैसला किया। वाणिज्यिक बैंकों को अपनी ब्याज दरें तय करने और समय से पहले निकासी पर दंड निर्धारित करने की स्वतंत्रता दी गई थी। आज, काफी हद तक ऐसा ही है।

FD भारत के पसंदीदा वित्तीय साधनों में से क्यों हैं?

कभी आपने सोचा है कि FD भारत में निवेश के टॉप विकल्पों में से क्यों बनी हुई है? आइए कुछ ऐसे कारणों के बारे में जानते हैं जिनकी वजह से FD भारत में इतनी लोकप्रिय है।

कम जोखिम:

FD गारंटीड रिटर्न प्रदान करते हैं, और इससे निवेश से जुड़े जोखिम बहुत कम हो जाते हैं।

वरिष्ठों के लिए उच्च रिटर्न:

आजकल, ज्यादातर बैंक आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को FD पर उच्च ब्याज दर देते हैं। यह मात्र 0.5% का मामूली अंतर हो सकता है,  फिर भी यह एक अतिरिक्त लाभ है।

आसान निवेश प्रक्रिया:

FD में निवेश करना आसान है। इसमें निवेश करने के लिए रियल एस्टेट या इक्विटी जैसे कुछ अन्य निवेश विकल्पों की तरह बहुत अधिक शोध नहीं करना पड़ता।

उपयोगी सुविधाओं की एक श्रृंखला:

FD में निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार निवेश कर सकते हैं। जैसे कि वे अपनी जमा अवधि चुन सकते हैं और टैक्स सेविंग FD को छोड़कर, समय से पहले निकासी भी कर सकते हैं।

LIC: एन ओवरव्यू

जिस जीवन बीमा के बारे में हम जानते हैं, वह दरअसल एक अवधारणा थी जिसे भारत ने इंग्लैंड से उधार लिया था। 1818 में कलकत्ता में यूरोपीय लोगों द्वारा स्थापित ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी भारत की पहली जीवन बीमा कंपनी थी। लेकिन एक सदी से भी अधिक समय बाद, 1950 के दशक में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना की गई।

हालांकि, इसके बहुत समय बाद भारत में जीवन बीमा अचानक लोकप्रिय हुई। 1995 में, एलआईसी ने कंप्यूटर के माध्यम से पॉलिसीधारकों की सहायता करने और एजेंट्स को सशक्त बनाने के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया। और फिर, 2000 में, IRDA बिल की बदौलत बीमा क्षेत्र को उदार बनाया गया।

LIC नीतियां भारत के पसंदीदा वित्तीय साधनों में क्यों हैं?

जहां एक तरफ विकास जारी रहा, वहीं साधारण भारतीय के लिए LIC को आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहतरीन माना गया। यहां कुछ कारण दिए गए हैं जिनसे पता चलता है कि LIC की जीवन बीमा पॉलिसियां ​​भारत में क्यों पसंदीदा रही हैं।

 

  • कम प्रीमियम:

 

          LIC के टर्म प्लान, कम और किफायती प्रीमियम पर हाई लाइफ कवर प्रदान करते हैं।

 

  • बीमा के साथ बचत:

 

यह इस तथ्य पर आधारित हैं कि सभी जीवन बीमा योजनाएं (FD को छोड़कर) बीमा        और बचत/निवेश दोनों प्रदान करती हैं।

 

  • चुनने के लिए विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला:

 

पहले, जीवन बीमा में ज्यादातर सिर्फ टर्म प्लान और एंडोमेंट प्लान होते थे। परंतु अब,      इसमें रिटायरमेंट प्लांस, चाइल्ड प्लांस, यूलिप और अन्य योजनाओं को भी शामिल किया गया है।

रैपिंग अप: FD बनाम LIC

क्या आपके दिमाग में FD बनाम LIC की दुविधा है? क्यों न इन दोनों विकल्पों के लिए अपनी आय का एक हिस्सा अलग रखा जाए?  आखिरकार, वे एक दूसरे से काफी अलग हैं।  यदि आपको नियमित भुगतान की आवश्यकता है तो FD आपको गारंटीड आय प्रदान करती है, जबकि LIC का जीवन बीमा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में आपके परिवार की सुरक्षा करता है। और यह न केवल आपके FD बनाम LIC प्रश्न का समाधान करता है, बल्कि यह एक फायदे की स्थिति भी है।

ए क्विक रीकैप

  • पिछले कुछ वर्षों में, भारत में FD के लिए तीन महत्वपूर्ण मोड़ आए हैं।
  • 1985 से पहले, 15 दिनों से 1 वर्ष तक की अवधि वाली जमा राशियों के लिए FD दरों की अधिकतम सीमा 8% प्रति वर्ष निर्धारित की गई थी। 1985 में, उस सीलिंग को हटा दिया गया था।
  • 1992 में, एक डीरेग्यूलेशन के बाद, बैंक 46 दिनों से अधिक अवधि के FD के लिए 13% प्रति वर्ष तक की दरों पर ब्याज देने के लिए स्वतंत्र हो गए।
  • 1997 में, बैंक दरों और FD दरों को अलग कर दिया गया था, और वाणिज्यिक बैंकों को अपनी ब्याज दरें तय करने और समय से पहले निकासी पर दंड निर्धारित करने की स्वतंत्रता दी गई थी।
  • आपके माता-पिता को FD कई कारणों से पसंद आ सकती है जैसे कि, कम जोखिम वाला प्रोफाइल, वरिष्ठों के लिए उच्च रिटर्न की संभावना, आसान निवेश प्रक्रिया और तरलता।
  • LIC भारत में एक और पसंदीदा निवेश है।
  • इसके लाभों में कम प्रीमियम, बीमा के साथ बचत और योजनाओं का विकल्प शामिल हैं।

प्रश्नोत्तरी

1. क्या FD कराने से मुझे टैक्स बचाने में मदद मिल सकती है?

 हां, FD टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकती है।  इसके लिए, एक विशेष प्रकार की FD है, जिसे टैक्स-सेवर FD के रूप में जाना जाता है, जिसमें आपको निवेश करना होगा। ये FD, 5 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आती हैं, और ये आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स लाभ प्रदान करती है।

2. मुझे किस प्रकार की बीमा योजना खरीदनी चाहिए?

 यह पूरी तरह से आपके जीवन के लक्ष्यों और आपकी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।  यदि आप केवल जीवन बीमा कवरेज चाहते हैं, तो टर्म प्लान सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। यदि आप लंबी अवधि के लिए बचत करना चाहते हैं, तो एंडोमेंट प्लान ले सकते हैं।  दूसरी ओर, यूलिप आपको निवेश करने और आपके भविष्य का बीमा करने में मदद करते हैं।

3. क्या FD की निवेश राशि की कोई अधिकतम सीमा है?

 नहीं, आप FD में कितनी राशि निवेश कर सकते हैं, इसकी कोई विशेष अधिकतम सीमा नहीं है। हालांकि बैंक, जमा की गई राशि और उसकी अवधि के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर तय करते हैं।  इसलिए, सुनिश्चित करें कि आप निवेश करने से पहले दरों की जांच कर लें, ताकि आप एक रिटर्न प्राप्त कर सकें।

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